Al ways r ef r esh t he pages f or vi ewi ng new i ssue of VI DEHA

िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं १५ िसत र २०१० (वष र् ३ मास ३३ अक
ं ६६)
'िवदेह' ६६ म अक
िव दे ह िवदेह Vi deha িবেদহ ht t p://wwwvi
. deha.co.i n िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई
पि का Vi deha I st Mai t hi l i For t ni ght l y e Magazi ne िवदेह थम मैिथली पािक्षक
ं देखबाक लेल प ृ सभकेँ िर श कए देख।
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ई पि का नव अक
Al ways r ef r esh t he pages
f or vi ewi ng new i ssue of VI DEHA. Read i n your own
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al ayal am Hi ndi
ं
एिह अकमे
अिछ:१. स ंपादकीय स ंदेश
२. ग
श ु कुमार िस ंह-“मैिथलीक
२.१.
य.ू पी. एस. सी. परीक्षाथीर्क हेतु उपयोगी
२.२.१.
1
मुख उपभाषाक
साकेतान -कथा-आछे िदन पाछे गए २.
आ ओकर
मुख िवशेषता”
ो. वीणा ठाकुर-कथा- पिरणीता
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
२.३.१.
ीमती शेफािलका वमा-र् आखर-आखर
अपमान-
२.५.१.
२.
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ननद् िवलास राय-कथा- बाबाधाम
अनमोल झा-कथा- अबकी बेर फतं ग २.
२.४.१.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
ीत (प ा क आ कथा)
२.नाटक- बेटीक
बेचन ठाकुर
िशव कुमार झा‘‘िट ू‘‘- १.१.कु
डा. शेफािलका वमा र् -
म ् अनतमनक-(समीक्षा)१.२.
र् ्
समीक्षा (अिचस)
र्
ीित ठाकुर क मैिथली िच कथा ३.
कु
ं ४.
् नक
म अनतम
र्
लेल प -शेष अश
धीरेन ्
कुमार एक नजिर
धीरेन ्
कुमार-
राजदेव म ंडल,
ीित ठाकुरक दनु ू िच कथापर
ु
नवे ु कुमार झा १. राहलक
िमशन िबहारस ँ बढल स ा आ िवपक्षक
२.६.
ु ावी श ंखनाद २. द ू वष र् परा
ू कएलक मैिथली
परेशानी:िमिथला ंचलक भूिमस ँ का ं सक युवराज कएलिन चन
दैिनक िमिथला समाद
2
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
् यत दरू भगाउ २.
िशव कुमार झा‘‘िट ू”- हा -कथा- कबिज
२.७.१.
ू कथा- १. श शास् म ् आ २. िस
दटा
महावीर
२.८.१.
जगदीश
ु गर
्
साद म ंडलक एकटा दीध र् कथा-मइटग
२.
केर स ंरक्षण केकर उ रदािय
? ३.
बस ंत झा-उगना
३. प
३.१.
३.२.
३.३.
3
कालीका ंत झा "बचु "1934-2009-आगा ँ
राजदेव म ंडलक ४ टा किवता
ोित सुनीत चौधरी-िविच
ा
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
गजे
ठाकुरक
िबिपन कुमार झा- िवरासत
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
३.४.१.
जगदीश
३.५.१.
ु
म ृदला
३.६.
३.७.१.
३.८.
गजे
इ
गणतं
चन ्
शेखर कामित, भात छै नाम-नाम
-िदवस २.
अरिव
ठाकुर- चािरटा गजल
ु
ठाकुर- घ ृणाक तरहिरमे बिढया
डाही स ंग अिछ
भूषण-हम की क ? २.
राजेश मोहन झा-“साओन कुमार”
िकशन कारीग़र- नबकिनया ँ
४. िमिथला कला-स ंगीत-१.
4
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू किवता २.
साद म ंडलक दटा
धान- कतय गेल
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
ेता झा चौधरी- किरया झ ु िर
ोित सुनीत चौधरी
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
५. ग -प
भारती:
ु
लघकथा
स ं ह “ल ी”स ँ मैिथली
६. बालाना ं कृते-१.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु गोट लघकथाु
डा. िमिथलेश कुमारी िम क दइ
पा र:
डा. योगान
ु
ुटी कुमारी- राहलजी
एक
२.िव ान-१ (दादीस ँ सुनल कथाक पुनले र्खन) ३.
लेिखकाक स ं त
ृ
झा
नजिरमे २.
डा. शेफािलका
अचना
र् कुमर
वमा-र्
१.आस,
ृित-शेष
७. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैिथली], [िवदेहक मैिथली-अ ं जी आ अ ं जी मैिथली कोष
ं
(इटर
टपर पिहल बेर सच-िड
र्
नरी) एम.एस. एस. .ू एल. सवरर् आधािरत -Based on ms -sql
ser ver Mai t hi l i -Engl i sh and Engl i sh-Mai t hi l i Di ct i onar y .]
8.VI DEHA FOR NON RESI DENTS
8.1.NAAGPHAANS-PART_XV-Mai t hi l i novel wr i t t en by
Ver ma-Tr ansl at ed by
Dr .Raj i v Kumar Ver ma and
Associ at e Pr of essor s , Del hi Uni ver si t y , Del hi
5
Dr .Shef al i ka
Dr .Jaya Ver ma,
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
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िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
8 .2 . 1 .
Swe t a J h a - Hi s t o r y o f
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Mi t h i l a Pa i n t i n g : An
I n t r o d u c t i o n 2. Or i gi nal Poem i n Mai t hi l i by
Tr ansl at ed i nt o Engl i sh by
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
Gaj endr a Thakur
Jyot i Jha Chaudhar y
9. VI DEHA MAI THI LI SAMSKRI T EDUCATI ON (cont d.)
ं (
ु
िवदेह ई-पि काक सभटा पुरान अक
ल, ितरहता
आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल
नीचा ँक िल ंकपर उपल अिछ। Al l t he ol d i ssues of Vi deha e j our nal ( i n
Br ai l l e, Ti r hut a and Devanagar i ver si ons ) ar e avai l abl e f or pdf
downl oad at t he f ol l owi ng l i nk .
ं
िवदेह ई-पि काक सभटा पुरान अक
ु
ल, ितरहता
आ देवनागरी
पमे Vi deha e j our nal 's
al l ol d i ssues i n Br ai l l e Ti r hut a and Devanagar i ver si ons
ं
िवदेह ई-पि काक पिहल ५० अक
ं
िवदेह ई-पि काक ५०म स ँ आगा ँक अक
िवदेह आर.एस.एस.फीड।
"िवदेह" ई-पि का ई-प स ँ
ा
क ।
ू
अपन िम केँ िवदेहक िवषयमे सिचत
क ।
↑ िवदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ।
6
िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
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कए "फीड य.आर.एल."
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गगल
रीडरमे पढबा लेल ht t p://r eader .googl e.com/ पर जा कऽ Add a
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क
आ Add बटन दबाऊ।
मैिथली देवनागरी वा िमिथलाक्षरमे निह देिख/ िलिख पािब रहल छी, (cannot see/wr i t e
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at ggaj endr [email protected] deha.com) तँ एिह हेतु नीचा ँक िल ंक सभ पर जाऊ। स ंगिह िवदेहक भ
ं
ं पढ़◌ू।
मैिथली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अक
ht t p://devanaagar i i .net /
ht t p://kaul onl i ne.com/uni nagar i / (एतए बॉ मे ऑनलाइन देवनागरी टाइप क , बॉ स ँ
कापी क
आ वडर् डा मे
ु टमे पे
कए वडर् फाइलकेँ सेव क । िवशेष जानकारीक लेल
ggaj endr [email protected] deha.com पर स कर् क ।)(Use Fi r ef ox 3.0 (f r om
WWWM
. OZI LLA.COM )/ Oper a/ Saf ar i / I nt er net Expl or er 8.0/ Fl ock 2 .0 /
Googl e Chr ome f or best vi ew of 'Vi deha' Mai t hi l i e-j our nal at
ht t p://wwwvi
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ं आ ऑिडयो/ वीिडयो/ पोथी/ िच कला/ फोटो सभक फाइल
phot o f i l es . िवदेहक पुरान अक
ू क्षत
सभ (उ ारण, बड सुख सार आ दवा
र्
मं
सिहत) डाउनलोड करबाक हेतु नीचा ँक िल ंक पर जाऊ।
VI DEHA ARCHI VE िवदेह आकाइव
र्
भारतीय डाक िवभाग ारा जारी किव, नाटककार आ धमशास्
र्
ी िव ापितक
ा । भारत
आ
पालक मािटमे पसरल िमिथलाक धरती ाचीन कालिहस ँ महान पु ष ओ मिहला लोकिनक कमभ
र् ूिम
ू
रहल अिछ। िमिथलाक महान पु ष ओ मिहला लोकिनक िच 'िमिथला र ' मे देख।
ं
गौरी-श ंकरक पालव ंश कालक मिू ,र् एिहमे िमिथलाक्षरमे (१२०० वष र् पवू क)
र्
अिभलेख अिकत
7
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
अिछ। िमिथलाक भारत आ
पालक मािटमे पसरल एिह तरहक अ ा
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ाचीन आ नव
ाप , िच ,
अिभलेख आ मिू र्कलाक़ हेतु देख ू 'िमिथलाक खोज'
ं
ू
िमिथला, मैिथल आ मैिथलीस ँ स ि त सचना,
स कर्, अ ेषण स ंगिह िवदेहक सच-इ
र् जन
आ ूज सिवसर् आ
ू
िमिथला, मैिथल आ मैिथलीस ँ स ि त वेबसाइट सभक सम स ंकलनक लेल देख ू "िवदेह सचना
स ंपकर्
अ ष
े ण"
िवदेह जालव ृ क िडसकसन फोरमपर जाऊ।
"मैिथल आर िमिथला" (मैिथलीक सभस ँ लोकि य जालव ृ ) पर जाऊ।
१. स ंपादकीय
डा. जयम
िम क िनधन दरभं गामे ७ िसत र २०१०केँ भऽ गेलि ।
डा. जयम
िम
१९२५-२०१०
ज १५-१०-१९२५ म ृ ु ०७-०९-२०१०, गाम-ढं गा-हिरपुर-मजरही। १९९५- जयम
कुसुमा ंजिल, प ) लेल सािह अकादेमी पुर ार- मैिथली।
िम
(किवता
सगर राित दीप जरय क ७१म आयोजन- िदना ंक ०२-१०-२०१० केँ स ं ा ६ बजेस ँ म
िव ालय,
ु
ु
बिढयागाछी,
बेरमा (मधबनी)मे
ी जगदीश साद म ंडल जीक स ंयोजक मे सम
बेरमा ामवासी
आयोिजत अिछ। एिह अवसरपर मौिलक मैिथली कथाकार आ कथा मी ोताक उपि ित ािथत
र्
ु
ु
अिछ। एिह ल पहँ चबाक
लेल- ई ल तमुिरया (मधबनी
िजला रगत) रेलवे
श
े नस ँ ३ िक.मी.
ू
उ र-पि म आ च रागंज बस अ ास ँ ३ िक.मी. दिक्षण पबमे
ि त अिछ।
ारा
िवशेष: िवदेह आकाइवक
र्
आधारपर बाल िच कथा आ कािम मिहला व मे िवशेष लोकि य भेल
ू
अिछ। मिहलाव
ारा कीनब ओिह पोथीक ब ा सभक हाथमे जएबाक सचक
अिछ। हमरा सभक
सफलता अहीमे अिछ जे ई बाल-सािह
सभक स ंग सेहो अिछ।
िवदेह आकाइवक
र्
आधारपर
ु
“टारगेट ऑिडये ” लग पहँ चल
अिछ। यएह ि ित आन पोथी
कािशत मैिथली पोथी एिह सभ ठाम उपल
पटना: १. ी िशव कुमार ठाकुर: ०९३३४३११४५६
२. ी शरिद ु चौधरी: ०९३३४१०२३०५
रा ँची:
ी िसयाराम झा सरस: ०९९३१३४६३३४
भागलपुर:
ी के र ठाकुर: ०९४३०४५७२०४
जमशेदपुर: १. ी िशव कुमार झा: ०९२०४०५८४०३
8
अिछ:
िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
२. ी अशोक अिवचल: ०९००६०५६३२४
कोलकाता:
सहरसा:
ी रामलोचन ठाकुर: ०९४३३३०३७१६
ी आशीष झा: ०९८३५४७८८५८
दरभं गा:
ी भीमनाथ झा: ०९४३०८२७९३६
सम ीपुर:
ी रमाका
राय रमा: ०९४३०४४१७०६
सुपौल: ी आशीष चमन:०७६५४३४४२२७
झ ंझारपुर:
िनमली:
र्
ी आन
कुमार झा: ०९९३९०४१८८१
ी उमेश म ंडल: ०९९३१६५४७४२
जनकपुर:
ी राजे
जयनगर:
ी कमलका
िद ी: १. ीमती
कुशवाहा: ००९७७४१५२१७३७
झा: ०९९३४०९८८४४
ीित ठाकुर: ०९९११३८२०७८
२. ी मुकेश कण:र् ०९०१५४५३६३७
ु
मधबनी:
१. ी सतीश च
झा:०९७०८७१५५३०
२.िम ा मैगजीन से टर ( ो.
िकछु आर
ी अमरे
ु
कुमार िम ), श ंकर चौक, मधबनी
०९७०९४०३१८८
ल शी ...
ु
(िवदेह ई पि काकेँ ५ जलाइ
२००४ स ँ एखन धिर १०५ देशक १,५०५ ठामस ँ ४८,६६० गोटे
ू
िविभ आइ.एस.पी. स ँ २,६३,०१८ बेर देखल गेल अिछ; ध वाद पाठकगण। - गगल
ए लेिट
गजे
9
ठाकुर
ारा
डेटा।)
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ggaj endr [email protected] deha.com
२. ग
श ु कुमार िस ंह-“मैिथलीक
२.१.
य.ू पी. एस. सी. परीक्षाथीर्क हेतु उपयोगी
मुख उपभाषाक
२.२.१.
साकेतान -कथा-आछे िदन पाछे गए २.
२.३.१.
अनमोल झा-कथा- अबकी बेर फतं ग २.
२.४.१.
अपमान-
10
ीमती शेफािलका वमा-र् आखर-आखर
बेचन ठाकुर
आ ओकर
मुख िवशेषता”
ो. वीणा ठाकुर-कथा- पिरणीता
ननद् िवलास राय-कथा- बाबाधाम
ीत (प ा क आ कथा)
२.नाटक- बेटीक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
२.५.१.
२.
िशव कुमार झा‘‘िट ू‘‘- १.१.कु
डा. शेफािलका वमा र् -
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
म ् अनतमनक-(समीक्षा)१.२.
र् ्
समीक्षा (अिचस)
र्
ीित ठाकुर क मैिथली िच कथा ३.
कु
ं ४.
् नक
म अनतम
र्
लेल प -शेष अश
धीरेन ्
कुमार एक नजिर
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
धीरेन ्
कुमार-
राजदेव म ंडल,
ीित ठाकुरक दनु ू िच कथापर
ु
नवे ु कुमार झा १. राहलक
िमशन िबहारस ँ बढल स ा आ िवपक्षक
२.६.
ु ावी श ंखनाद २. द ू वष र् परा
ू कएलक मैिथली
परेशानी:िमिथला ंचलक भूिमस ँ का ं सक युवराज कएलिन चन
दैिनक िमिथला समाद
् यत दरू भगाउ २.
िशव कुमार झा‘‘िट ू”- हा -कथा- कबिज
२.७.१.
ू कथा- १. श शास् म ् आ २. िस
दटा
महावीर
11
गजे
ठाकुरक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
२.८.१.
जगदीश
ु गर
्
साद म ंडलक एकटा दीध र् कथा-मइटग
२.
केर स ंरक्षण केकर उ रदािय
? ३.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िबिपन कुमार झा- िवरासत
बस ंत झा-उगना
श ु कुमार िस ंह
ज : 18 अ ील 1965 सहरसा िजलाक मिहषी
ु
खंडक लहआर
गाममे। आर ंिभक िशक्षा, गामिहस ँ,
आइ.ए., बी.ए. (मैिथली स ान) एम.ए. मैिथली ( णपदक
र्
ा ) ितलका मा ँझी भागलपुर िव िव ालय,
ा ाता हेतु उ ीण,र् 1995]
भागलपुर, िबहार स ँ। BET [िबहार पा ता परीक्षा (NET क समतु )
“मैिथली नाटकक सामािजक िवव र्न” िवषय पर पी-एच.डी. वष र् 2008, ितलका मा ँ. भा.िव िव ालय,
भागलपुर, िबहार स ँ। मैिथलीक कतोक िति त प -पि का सभमे किवता, कथा, िनब ंध आिद समयसमय पर कािशत। वतर्मानमे श ैिक्षक सलाहकार (मैिथली) राष् ीय अ वाद िमशन, के ीय भारतीय
ू
्
भाषा स ं ान, मैसर-6
मे कायरत।—सम
र्
पादक
िनब ंध : “मैिथलीक
मुख उपभाषाक
आ ओकर
मुख िवशेषता”
(य.ू पी. एस. सी. परीक्षाथीर्क हेतु उपयोगी)
िनब ंधकार :
12
डा. श ंभु कुमार िस ंह
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मैिथलीक
मुख उपभाषाक
आ ओकर
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
मुख िवशेषता
मैिथली भारोपीय भाषा पिरवारक, भारतीय आयभाषास
र्
ँ उ
एिह भाषाक उ व ओ िवकासक जेहन ाचीन सािहि क मा ता उपल
आय र् आ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
एक मह पणू र् आयभाषा
र्
िथक।
ु
अिछ ओहन भारतक को
आधिनक
िवड़ भाषाक निह अिछ।
को
सश
भाषाक अ
त ओकर अ क बोली अथवा उपभाषाक िनमाणर् काल मस ँ
ा सार
अव होइत रहै त अिछ। तकर कारण अ क अिछ।
क
े भाषा अपन चा कातक भाषा स ँ
भािवत होइत अिछ। एिह
ममे इहो कहल जाइत अिछ जे
ेक कोस पर बोली बदलैत अिछ
आ
क
े जाित वा समाजक भाषा िभ होइत अिछ। डा. सुभ झा एव ं ि यसनर् सन िव ान लोकिन
ई पिहनिह
क’ दे
छिथ जे मैिथली एक तं
का सश
भाषा िथक। एिह भाषाक चा कात
ू
चािर गोट भाषा अिछ। एकर पबमे
ब ंगला भाषा, पि ममे भोजपुरी, उ रमे
पाली आ दिक्षणमे
मगही भाषा अिछ। इहो तः िस
अिछ जे को
भाषा अपन िनकटवतीर् भाषा सभस ँ भािवत
होइत रहै त अिछ।
उपयु र्
कारणस ँ मैिथली भाषामे अ क बोली अथवा उपभाषाक ज
भ’ गेल अिछ।
उपभाषाक पिरचय डा. ि यसनर् अपन “Li ngui st i c Sur vey of
I ndi a” क दोसर भागमे
ुत कए
छिथ। िहनका अ सारेँ मैिथलीक छः गोट उपभाषा अिछ:ू मैिथली (5) पि मी
(1) मानक मैिथली (2) दिक्षणी मानक मैिथली (3) िछका-िछकी बोली (4) पवीर्
मैिथली (6) जोलहा बोली।
सव र् थम मैिथली भाषाक िविभ
ि यसनक
र्
उपयु र् उपभाषा वा बोलीक वणनस
र् ँ प ं. गोिव
झा सहमत निह छिथ। िहनक कहब
ू मैिथली (2)
छिन जे मैिथलीक िविभ बोलीकेँ
ा सार पा ँच उपभाषामे बा ँटल जा सकैछ: (1) पवीर्
दिक्षणी मैिथली (3) पि मी मैिथली (4) उ री मैिथली (5) के ीय मैिथली वा उपभाषा।
उपयु र्
िववेचना स ँ लगैत अिछ जे गोिव
झा सेहो ि यसनक
र्
मता सार मैिथलीक उपभाषाक
ु
ु िविभ उपभाषाक
वणनर् के
छिथ। ओना ओ कतह-कतह
आिदमे क क अ र क’ दे
छिथ,
अ ु मैिथलीक वतर्मान
पकेँ देखल जाय तँ ज्ञात होइत अिछ जे ि यसनक
र्
समयमे जे मैिथलीक
िविभ उपभाषाक
आ
प छल ओिहमे पिरवतर्न भ’ गेल अिछ। एकर अितिर
पालक
तराईमे जे मैिथली बाजल जाइत अिछ ओकरो एकटा फराक
प छैक। एहना ि ितमे मैिथलीक
उपभाषाक वा बोलीक आठ गोट भेद कएल जा सकैत अिछ:
1.
ु
मानक मैिथली:-- एकर
के ीय ओ उ रीय पुरना दरभं गा िजला (मधबनी,
दरभं गा आ
सम ीपुर) िथक। ओना तँ डा. ि यसनक
र्
अ सारेँ मानक मैिथली दरभं गा आ भागलपुर िजलाक उ री
क आ पुिणया
र् ँ िजलाक पि मी
क
ा ण लोकिन बजैत छिथ। िहनका लोकिनक अपन
सािह आ पर ंपरा छि
जे एिह भाषाक िवकृत वाहकेँ म
कए
अिछ। वतर्मान मे ई
भ’
गेल अिछ जे मानक मैिथली
ा
टाक बोली निह छि , िकएक तँ मैिथली भाषाक पठन-पाठनक
व ृित
ा ण सँ आ
जाितक म
पणू र् पस ँ जागल अिछ। एिह हेतु मानक मैिथली िमिथलाक सभ
जाितक बोली कहल जा सकैत अिछ।
2.
दिक्षणी मैिथली:-- डा. ि यसनत
र्
दिक्षणी मानक मैिथलीकेँ दिक्षणी मैिथलीमे राखल जा सकैत
अिछ। एकर
मुं गेर, मधेपुरा, सहरसा ओ सम ीपुर धिर मानल जा सकैत अिछ।
13
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानक मैिथली आ दिक्षणी मैिथलीमे िन
रहै त अिछ ओतए दिक्षणी मैिथलीमे दीघ र्
अिछ आ दिक्षणी मैिथलीमे, ‘जा
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
अ र अिछ—(I ) मानक मैिथली मे जतए धातु
भ’ जाइत अिछ। जेना-मानक मैिथलीमे, ‘ज
र
छी’ होइत
छी’।
र्
पमे मानक मैिथलीमे हमर, तोहर, अहा ँ, अप , आिद
(I I ) सवनामक
दिक्षणी मैिथलीमे मोर, तोर, तोहे सवनामक
र्
योग होइत अिछ।
(I I I ) ि यापदमे सेहो िभ ता देखल जाइत अिछ, उदाहरण
यु
होइत अिछ।
प मानक मैिथली ‘अिछ’
दिक्षणी मैिथलीमे ‘अछ’ भ’ जाइत अिछ।
3.
ू मैिथली:-- ि यसनर् एकरा गँवारी मैिथलीक स ंज्ञा दे
ू या
पवीर्
छिथ। एकर
पिण
र् ँ िजलाक
ू भाग, साहेबगंज आ देवघर धिर अिछ। ि यसनर् कहै त
के ीय आ पि मी भाग, स ंथाल परगनाक पवीर्
छिथ जे, ई भाषा अिशिक्षत व
ारा बाजल जाइत अिछ।
ू मैिथली, दिक्षणी मैिथली आ दिक्षणी मानक मैिथलीस ँ सा
पवीर्
देखना जाइत अिछ—(I ) दिक्षणी मैिथलीमे स
मैिथलीमे ‘केर’ िच क
कारकमे ‘के’
ू
योग होइत अिछ, मुदा पवीर्
योग होइत अिछ। (I I ) दिक्षणी मैिथलीमे ‘िछक’ ि याक
ू मैिथलीमे ओकर बदलामे ‘िछकई’ ि याक
अिछ, मुदा पवीर्
4.
रखैत अिछ। ओना क क अ र सेहो
योग होइत
योग होहत अिछ।
िछका-िछकी बोली:-- ई गंगाक दिक्षणी मुं गेरक पुबारी भागमे, दिक्षणी भागलपुर ओ
स ंथालपरगनाक उ री ओ पि मी भागमे बाजल जाइत अिछ। ई दिक्षणी मानक मधेपुराक बोलीस ँ
अ िधक सा
रखैत अिछ। एिहमे श क अ मे ‘की’ वा ‘हो’ क उ ारण कएल जाइत अिछ, जेना—
अप , खएबहो, कहबहो, सुनलहो आिद।
5.
पि मी मैिथली:-- एकर
मुजफ्फरपुर ओ च ारण िजलाक पुबिरया भाग िथक जािहपर
भोजपुरीक
ापक भाव अिछ। ि यसनक
र्
अ सारेँ एिह
क कितपय लोक जे बजैत छिथ तकरा
भोजपुरी कहल जाय अथवा मैिथली ई कहब क
किठन। ओना मुजफ्फरपुरस ँ अलग भेल वैशाली
िजलाक
क भाषाक नाम ‘बि का’ भाषा देल गेल अिछ। एिह भाषाक नामकरण िल वी व ंशक
इितहासक आधार पर कएल गेल अिछ।
6.
उ री बोली:-- एकर
पालक तराई आ वतर्मान सीतामढ़◌ी िजलाक उ री भाग धिर
ु
मानल जा सकैत अिछ। एिह भाषा पर
पली भाषाक भाव बझना
जाइत अिछ।
7.
जोलहा बोली:-- पुरना दरभं गा िजलाक मुसलमानक बोलीकेँ डा. ि यसनर् जोलहा बोली मा त
छिथ। ओना िहनक कहब छिन जे िमिथलाक मुसलमान मैिथली निह बजैत छिथ। मुजफ्फरपुर आ
च ारण िजलाक मुसलमान जे बोली बजैत छिथ ओिह पर अविध भाषाक भाव अिछ। एकर अितिर
वतर्मान कालक मुसलमानक बोली पर उद ू र् आ िह ीक भाव सेहो पिरलिक्षत होइत अिछ।
8.
ु
के ीय मैिथली:-- म
िमिथलाक (दरभं गा, मधबनी,
प ंचकोशी) स ूण र्
क भाषा जकर िनकट
को
आन भाषा निह अिछ, तकरा के ीय मैिथलीक नामस ँ जानल जाइत अिछ। के ीय मैिथली
ु
सािह क भाषाक अ
नजदीक कहल जा सकैत अिछ। मानक मैिथली आ के ीय मैिथलीमे बहत
सामी
देखल जाइत अिछ।
14
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं
वतर्मानमे मैिथलीक द ू टा उपभाषाक नवीन नामकरण भेटैत अिछ—अिगका
ओ बि का। िछका-िछकी,
ं
ू बोलीकेँ अिगका
अथात्र् पवीर्
कहल जाइत अिछ जकर के
ल िथक भागलपुर। ायः भागलपुर
ं रा क राजधानी छल तै ँ एिह
ं
महाभारत कालीन अग
क भाषाकेँ अिगका
कहल जाइत अिछ।
ु ल अिछ।
बि काक स
मे िववेचना कएल जा चक
एतावता ज्ञात होइत अिछ जे मैिथली भाषाक
ा सार अ क उपभाषा अिछ। एखनहँ ु धिर
एकर पणू र् पेण सवे र्क्षण निह कएल गेल अिछ निह तँ िकछु आओर उपभाषाक स
मे ज्ञात होइत, तै ँ
एिह िब ु पर भाषावैज्ञािनक द ृि एँ सवे र्क्षण होएब अ ंत आव क अिछ।
१.
साकेतान -कथा-आछे िदन पाछे गए २.
ो. वीणा ठाकुर-कथा- पिरणीता
१
साकेतान
(1) लेखकीय नाम : साकेतान . (2)प कािरताक नाम : ब ृह ित. (2) असली नाम : साकेतान
िस ंह
िस ंह. माता: . ीमती राधारमा जी. (4) ज : 27 फरवरी
(एस.एन.िस ंह).(3) िपता : . ी िवजयान
1940 क’ कुमार गंगान िस ंहक त ालीन आवास “सिचव_सदन” 5, िगरी
मोहन रोड, दरभं गा.
ु
मशः राज
ूल दरभं गा/ बिनयादी
ूल ीनगर,
( माण प मे_26 जनवरी 41 ). (5) िशक्षा:
ू या
पिण
र् ँ/ िविलय
मल्टीलेटरल
ूल,सुपौल/ प ात पटना एव ं मगध िव िव ालय स’ अ ं जी औनस र् आ
वसाय: आजीवन आकाशवाणीक चाकरी । आठ रा क
के मे िविभ
मैिथलीमे ा ो र । (6)
पद पर काज । लटे_पटे 40 वषक
र् कायकाल
र्
। पटना, दरभं गा एव ं भागलपुरमे बीसो साल तक
मैिथली काय र् मक आयोजन,
ुितकरणमे लागल । ओतबे िदन
मशः आकाशवाणी पटनाक ामीण
काय र् म ‘चौपाल’ आ
दरभं गाक ‘गामघर’ काय र् मके मु
र”जीवछभाइ’क
पमे
ात। आकाशवाणी दरभं गाक
स ं ापक_ ाफ । (7) सािहि क गितिविध: मैिथली कथा सािह मे 1962 स’ सि य । गोडेक
चािलस_पचास टा कथा, िरपोताज.
र्
स ं रण, या ा_िववरण मैिथलीमे कािशत अिधका ंश प _पि कामे
छपल । पिहल मैिथली कथा “ ेिसयर” 1962मे ‘िमिथलािमिहर’मे
कथा आिद
कािशत । िहि योमे द ू दजर्न
कािशत । सन 99मे छपल पिहल कथा_स ं ह “गणनायक’ के ओही वष र् ‘सािह
अकादमी
पुर ार। पैघ बा ’ स’ अबैबला िवपि के रेखा ंिकत करैत, पयावरण
र्
के कथा व ु बना क’ राजकमल
काशन स’
15
कािशत एव ं अ त
ं
चिचत
र् उप ास (‘डौकूमें ी िफ
न’) “सव र् ा ंत”
कािशत।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
आकाशवाणीक िविभ
के
सािरत द ू टा उ ख
े नीय व ृ
“जं गल बोलता है ” एव ं झारखंड के
सम ा पर आधािरत व ृ
पक “
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु रास।
ुत कैल नाटक, डौकुमें ी स ं ा बहत
लए िलखल आ
आकाशवाणीक राष् ीय काय र् ममे
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
ामीण
क
पक_ ‘महान ा अभयार ’ पर आधािरत
ल ंत डाइनक
ना जोगन “ चिचत
र् एव ं
िस
यथा डा.रामदेव झा िवरिचत द ू टा नाटक ‘िव ापित’ आ ‘हिरशच
। स ेस, दीनाभ ी, िवदापत आिद लोक गाथा, लोक_न ृ
। मैिथली नाटकक कैकटा ‘लैडमाकर्
ं
’
ु ड म क मोछ’
’ ; डा. मिणप क ‘चह
सब के लोक_गायकक म
जा क’, मलू
व ुक
ंकन एव ं ओकर स ंपादन आ सारण “गणनायक” कथास ं ह के राज ानी अ वाद, राज ानी
सािह क जानल_ची ल नाम ी श ंकरिस ंह राज पुरोिहत एव ं िह ी अ वाद, मैिथलीक
ातनामा अ वािदका
ीमती
ितमा पा ंडॆ केलिन अिछ; आ दनु ू के सािह
2001मे आकाशवाणी हज़◌ारीबाग स’ के
अकादिमये
कािशत केलक । (8) स ं ित: सन
_िनदेशक के पद स’ अवकाश ा केलाक बाद पणू र् पेण
क सम ा सब पर व ृ __िच ब बाक, मैिथलीक िकछु नीक
िमटः
पेण मैिथली लेखन, िमिथला
कथा सब
ु
के िफ
पा ंतरणक गुनान__धनानमे
लागल ।
आछे िदन पाछे गए
आइ िद
खराब छिन,
भोर न ंइ
जािन ककर मुं ह देख
रहिथ मोन
न ंइ
छिन। जे
तेना
ु अभगला के नीक न ंइ हेतै । डेरा स’ िनकलले छला िक बगलबला छौडा
ो रहल हए,
ं
िछक
रहिन जे लगलै जेना नाके दे
भर...
वैह िमड्ल।
ं ं -भोंतडी िनकिल जेतै । बडा अब ंड सब छैक चा
अतडी
ास मानिसकता बला लोक। अ रे एक दोसरा के िजनगी मे ताक-झा ंक करैत रहत
ु
िम ा जीक छोटका बेटा सुनाइये क’ न ंइ किह देलकिन जे “ ई हमरा सीधे
ास-वन न ंइ बझाइ
छिथ,
ास-वन क ौ अिहना रहै छै...हौ खाली िहं दी अखबार पढैत देखलहक है को
एस.पी. कल र
के ?” िहनका िहं िदये स’ काज चिल जाइत रहिन। भिर िदन त’ टीभी देिखते छिथ, सब त’
वैह खबिर
रहै छैक, तखन गाम-घरक खबिर जेहन ई अखबार मे रहै छै….फेर अपन एकटा गौआ
ं ँ छिन अिह
अखबारमे।
आइ अठारहम िदन िछयिन....िरटायर भ’ गेला अिछ से िदन भिर मे कैक
मोन पडै छिन...एखन ओ बस िक टै ी-
बेर की कही पग-पग पर
ैंड िदस लपकलो जाइ छिथ आ सोिचयो रहल छिथ जे
कथी स’ जािथ ? जं ’ टे ो िरजव र् करता त’ एकटा न री त’ खाइये जेतिन...एह!औिफस के तीन
टा
16
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
गाडी रहै । जं ’ को
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
खराब भेल त’ शहर मे टै ी छलै । साम
स’ एकटा औटो सर र् स’ िनकिल
गेलिन। ई जाबे हाथक इशारा िक जोर स’ िचकिड क’ ओकरा रोिकतिथन---ओ गोली जेका ं िनकिल
गेल
रहै । ताबे िसटी बस बगल स’ पास केलकिन । न ंइ जािन कोन रौ मे ओ लपकल रहिथ आ पौ-दान
पर पैर रोिपते
एना
ु
जेना बस चलल छल, जे आइ न ंइ मिरतिथ त’ घायल ज रे होइतिथ । हनका
स’ ठाढ द ू टा छौडा
ं िहनका िदस कनडेिरये देखैत िकछु
लपिक क’ चढित देिख बस मे पिह
बाजल...
की बाजल है त ? चलैत बस मे
ू
िहनके जेका ँ मचकी झलैत
चढैत देिख ओकरा अपन
ू
ठाढे—ठाढ मचकी झलैत
ओ
यैह सोिच रहला अिछ जे आगा ं मे
ु
दनु ू कौलेिजया की ग
के
है त.. कहीं हनका
एना उचिक क’ चलती बस
ु
ु
मे अित मण बझायल
होइ....जे से !आइ हनका
येन-केन- कारेण
अपन चेक--अप करेबाक छिन,बाइ-पास भेल छिन । तै ं अइमे त’ को
आसकितक बाते न ंइ
ु
ू
छैक; डा.मेहरो ा नामी हट-र्
ेशिल
छिथ...ई बिझते
जे हम पनाक
िडफें स कारखानाक नामी हेड
मा
एम.डी छी...जकरा युिनट के अ क बेर कमा ंडर-इन-चीफ मा
माननीय राष् पित महोदय
ु ल छिथन; ओ अित
स ािनत क’ चक
स
भेला। ओ सेल्फ-िडफें स लेल हिथयार खरीद’ चाहै त रहिथ
ु
। तै ं ओइ ठाम प ंहचैक
देरी छै...डा.मेहरो ा स’ की ए ाय ंटमेंट लेता....पा ंच िमनटक त’ काज !
बाब ू , भले िहनका सनक लोक सब सीमा पर न ंइ लडैत अिछ, मुदा िक िहनका लोकिन सन लोक ज
राित-िदन न ंइ खटै, न ंइ पसेना बहबे, त’ की सीमा पर फौज लडत...?
िक ह ु
। कारिगल युध्धक समय....कैक महीना तक
चलैत रहलइ। समय-समय के बात...” बाबा ! क
छोडबैक िक
कहा ं
ो औफ लेलक...अहिनशर् कारखाना
आगा ँ बिढयौ । हमरा सब लए जगह
न ंइ ?” ओ धडफडा गेला । धडफडा क’ ओ दनु ू छौडा
ं स’ क
यैह, अही
बेिसये दरू चल गेल छला ।
ु
सब ठा ँ अपन सवारीक कमी खलै छै...की ओ स े एहन भ’ गेला अिछ जे ई दनु ू छौडा
ं हनका
स’
काकु करिन ? मा
ू
एहन बढ...न
ंइ-न ंइ एखन त’ िरटायरे केलिन अिछ….एख
छिथन त’ की कहै छैक...बाइसे
— ाइसे
टी-शट र् धारण करै
बा ंिह मे उछिल जाइ छिन । अपन समयक नीक टेिनसक
खेलाडी, एक समय मे िहनका स ंगे ए ो सेट खेलाइ लए
बक सब(पढल जाय सुंदरी सब)लालाइत
रहै त छल। से धिर ठीके ; जे केलिखन तािह मे हरदम औ िल...हरदम अलग...सब स’ नीक ।
से आइ ओ एना िकयैक सोिच रहला अिछ ? ओ ‘िरटायडर् ’ भेला अिछ ‘टायडर् ’ न ंइ ?आइकाि
17
सािठ
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
को
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
वयस भेलै ? मुदा एकटा बात ! ओ सेवा समा
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
भेला स’ पिहन ंहे ई िरटायरमेंटक समय
ु
रहिथ । ए े तक जे बढारी
मे बेटा सबहक आगा ँ हाथ
कोना कटता तकर सब बेव ा क’ ले
ु पिहनहें क’ ले
पसार’ पडिन तकर नीक इ त्जाम ओ बहत
रहिथ...इहो सोच
रहिथ जे ओ को
बेटाक आ म मे ताबे तक न ंइ रहता,जाबे शरीर की समय सकप ंज न ंइ क’ दिन । ताबे कथी लए
ककरो पर भार बनिथन.........
ं
ु ! कत’ जैब ? आब त’ अितम
“औ बढा
ौप आब’ बला छै ?”
मोन त’ िपतेलिन। मोन भेलिन जे ठा ंइ-पठा ंइ िकछु किह िदयिन तेहन, जे फेर अनटोटल बजबे
िबसिर
जािथ ई तेज ी नवयुवक ! मुदा बात बढेबा स’ की फैदा ? एखन काि
तक एहन-एहन मथद ु ा
ु
करी जाइ स’ बेसी आिह-- हनका
सब स’ बा ंचल रहै छला...गाडी रहै छलिन । न ंइ जािन िकयैक,
सर
-कारी गाडीक सुिवधा खतम भ’ जेबाक अबै छलिन ।
डा. मेहरो ा िहनका िच त
ै
रहिथन, मुदा सब त’ न ंइ िच त
ै
रहिन। बस स’ उतिर क’ अ
ु
प ंह-
ताल
ु
-चैत-प ंहचैत
पसीना स’ भीज गेल रहिथ। पैर पटिक क’ गदा र् झािडते छला---‘ए ’ एना ज ु ा
झाडै छी,से क
बाहरे बिढ क’ झािडतं ह ु से न ंइ ?” बजै बला कं पाउंडर सनक लगलिन ।
सपरतीव केहन
!िहनका िशक्षा द’ रहल छिन ।
“डा. साहेब कखन एिथन ?” ओ बात के न ंइ सु त बजला ।
“समय भ’ गेलिन अिछ, अिबते हेता । से िकयैक देखेबै ?”
“हं , हमरा पेसमेकर लागल अिछ....”
“से त’ बड बेस, मुदा न ंबर लगे
छी
?”
“डा. साहेब अपेिक्षत छिथ....तै ं !
“तखन त’ न ंइ देखायल भेल आइ “
“से िकयैक ?”
“केह
अपेिक्षत
ो िकयैक
होिथ---डा
र साहेब िब
न ंबरे न ंइ देखै छिथन ।“
ताबे डा.साहेब के गाडी पोिटको
र्
मे आिब क’ लागल।
क’ आगा ँ
18
ई लपिक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
बढला जे कहीं बाटिह मे काज बिन जािन । मुदा डा
तकबो
केलिखन त’ िहनका बड आ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
र एको बेर नजिरओ उठा क’ िहनका िदस
ु
य र् लगलिन। मर, ओना घठ्ठी-सोहार
छलिन, ि
की भ’ गेलिन, एक बेर तािकयो िलतिथन
त’ क
सा ं ना भेिटतिन । मुदा डा
िनक मे अिबते
र त’ घाड
ु
िनहरे
तेना गेलिखन जेना िक किहयो देखन ंह ु
होिथन। बेस, हािर क’ ओ बडा याचनाक र मे
कं पाउंडर के कहलिथन जे ओ सेनाक कारखाना मे एम.डी.क पद पर स’ हाले िरटायर भेला अिछ...िब े
मे ओ कं पाउंडरबा बात के लोकित कहकिन--“ अप
एम.डी. रिहयै
, आब न ंइ
िछयै....अइ
ू लेबै...ल ंबर
पुजा र् पर अपन नाम आ पता िलख िदयौ बाब ू साहेब ! चौथा िदन फोन किर क पिछ
आिब जायत।“
….ताबे बाहर को
गाडी के
रहलिन जे बाहर को
कब आ चपरासी आ िस
ु
ोिरटी के दौडित देख बझबा
मे भा ंगठ न ंइ
भी.आइ.पी.क गाडी लगलै ।
ू मे जे
भी.आइ.पी. के रहिथ से ई की जान’ गेलिथ ं। ई त’ साढे चौबीसे वषक
र् वयस मे पना
ु
करी धेलिन से आब यैह िरटायर भेलाक बाद घरला
अिछ । अइ ठामक सब व ु तै ं
अनिच ार
ु
लगै छिन ।फेर भी.आइ,पी. आ हनका
स ंगे अ का क
डा
चमचाज़ ए ड लगुआ-भगुआ के सड-सडायल
ु ित देखलिखन-- मोन ख ा भ’ गेलिन । बगल मे ठाढ लोक स’ पुछलिखन
रक चे र मे ढक
त’ पता लगलिन जे ई अइ ठामक मेयर स ैहेब छिथ; आइ.ए.एस. ! िहनका पुजा र् कटेबाक िक लाइन
मे लगबाक को
ज रित न ंइ ? िकयैक त’ ई आइ.ए.एस. अिह ठामक मेयर साहेब छिथ ।िकयै;
अप
जखन एम.डी. रहिथ त’ अप
ई सुख न ंइ भोग
रहिथ की ? अप
ओ ! चा
कात िहयासलिखन....सबतिर िनि त
ं ता पसरल छलै ।
हष र् आ
पर सहिम गेला
िव य । पेशे ंट
ु
सब पैर मोिड क’ कुसीर् पर बैसल, गिपयाित िकछु गोटे हिफयाित आ िकछू झकित
। अजीब लगलिन
ु
हनका।
जेना समय
हएु ।
ग —गु
ु
िक गेल हएु । जेना ए ु ा सब गोटे िमिल क’ समय के ठठु आ
देखा रहल
अपन-अपन दिहना हाथ साम
ु
तन , औँठा के बामा-दिहना घमबित
। ड
रक चे र स’
आ ठहाका । ए े लोक इ र मा ंछी मारैत अिछ त’ मारौ । आगंतुक मेयर िछयै, भ’
सकैत छै डा
रक दो
हएु । एतबा त’ सब दो
एक दोसरा लए करै छै।
ं गुडािर क’ देखलक---“ िकछु
“की गुन-धनु मे लागल छी यौ बाबा ?” कं पाउंडर िहनका िदस आिख
करब ‘डाक स ैहेब, िब
न ंबरे िक
ु न ंइ देखता ।“
ु
हनका
मोन मे एलिन िक आइ स’ िकछुए िदन पिह
अइ तरहक लोक के अइ तरहे बजबाक साध ंस
होइतै ?से छोड ू
! ड
किहयो िकछु रहबे
केलिन
करी...हमरा स’ त’ ओकरा किहयो भें टो न ंइ....आिद इ ािद बात सोचैत ओ तय
19
रबेक ई िह ित होइते जे एना भावे ताि ल करैत...जेना हम त
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
जे आब फेर किहयो एकरा ि
िनक पर पैर
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
देता । हनका
लगलिन जे डा
ु
देखेबाक हएु त’ दिखत
पडै स’ तीन मास पवू िहं
र् न ंबर लगा िलय’, न ंइ त’ जाबे डा
ओइ स’ पिह
भगवानक घरक न ंबर आिब जेतै कारनीक ।
र मे ो ा स’
रक न ंबर आओत
ु िदन आ आजक
ु
ई सब सोचैत, आजक
जमाना के मोन भिर गिरयबैत आ
ाप दैत ओ फैसला केलिन जे मौगी छैक त’ की हेतै ?
अपन अ
ु
र छिथ। हनके
स’ अपन
तालक डा.या ीन नीक डा
छिथ, मुदा शरीर त’ अबल भैये गेलिन। जख
न ंिह
रिह जाइ छै ?से त’ पचप
िटन चेकप करेता । ओना ओ
देहके काट—खोंट भेल, िक फेर पिह
बला बात
मे सीिवयर न ंिह त’ माइल्ड धिर हट र् एटैक रहबे करिन;
तीन घ ंटा पर होश आयल रहिन। फेर मोन पडलिन आइ-का क
ु र ंग—ताल । आब को
पुजा र् ल’ क’ क ौ दबाइ न ंइ खरीदल जा सकैत अिछ। जै मोह ाक डा
डा
रक
र ओही मुह ाक दबाइक
ु
दोकान मे हनकर
िलखल दबाइ भेटत । तै ं सोचलिन जे दबाइ खिरिदये क’ जािथ । मुदा
ु
ओ ु ा भीड....बापरे! क े लोक दखीत
पडैत छैक ? काि
तक ई फामे र्िशयोक मुं ह
देख
रहिथन । आब लाइन मे लाग’ पडतिन। अइमे त’ सा ंझ भ’ जेतिन ? से जे भ’ जाउन !
आइ आब र न िस ंघ की रामगुलाम लाल “बाडाबाब”ू न ंइ छिथन-- जे सब काज ‘साम दाम दंड भेद”
,मा
जे को
को
कारे कैये या करवाइये लैत रहिथ...आब ओ ंय छिथ, सब मोचा र् पर
पुन
असकर, िनता ंत एकसर ।
ु
ु
मुदा ई काज हनका
कर’ पडतिन । स ंभवतः तीस-चािलस वषक
र् बाद फेर स’ हनका
लाइन मे लाग’
पड
--तिन ? अ त
ं
कट ु स
न ंइ ?”
ु
यैह िछयै---“ एना कछ-मछ िकयै क’ रहल छी बढा...कलमच
रहब से
ो िहनका नसीहत देलकिन। पा ंच बािज गेलै जखन िहनकर हाथ मे मास िद का दबाइ
एलिन।रौद एखन ंह ु मुं ह पर थापड जेका ँ लािग रहल रहै । घर मुं हा जैं भेला िक साम
स’ खाली
औटो जाइत देखिखन । हाथ देलिखन, बैसला आ पा ंचो डेग
औटो गेल हेत जे द ू टा बिल
कसरितया जवान िहनका रौद िदस ठेलैत बैस’ लगलिन त’ ई ‘हा ं-हा ं’ कर’ लगला।मुदा िहनकर ;हा ँ-
हा ँ’ के ओ दनु ू पर को
क
भाव न ंइ पड्लै ।ओइ मे स’ जकरा गरा मे ताबीज रहै से िहनका
ु लिन आ कहलकिन---“बहत
ु िदन छाहिरक सुख भोगलें बबा ! आबे
आर रौद मे ठेलित िबहं स
ु
हमरा िसनी जआन-जहान
के न र छै ।“ आ दनु ू ठठा क’ हं िस देलकिन।
२.
ो. वीणा ठाकुर 1954-
कथा
20
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
पिरणीता
् क एयर पोट र् िदललीमे
्
्
् । शयामा
्
आइ डोमेसिट
शयामाक
भेँ ट नीलस ँ भेल छलनिह
थोड़◌ेक काल धिर
हत भ रिह गेल छलीह। नील-नील किह मोनक को
एतेक वष र् बीत गेल। नील एखनहँ ु ओह
छिथ, को
कोनमे हहाकारक लहिर उिठ गेल छल।
् । आकषक
पिरव र्न निह भेल छनिह
र् नील,
्
हँ समुख नील, पुण र् पु ष नील, उच्च पदसथ् नील, नील-नील। शयामा
किहयो नीलकेँ िबसिर निह सकल
छलीह। सभटा
्
्
यासशयामाक
िवफल भऽ गेल छल। नील सिदखन छाया सद ृशय् शयामाक
स ंग लागले
्
्
रहलिथ। नील कतेक दरू भऽ गेल छिथ, शयामा
आब चािहयो कऽ नीलकेँ सपश
र् निह कऽ सकैत छिथ,
्
्
् त् व तँ
ओिहना जेना छाया स ंग रिहतहँ ु सपश
र् निह कएल जा सकैत अिछ, म षयक
स ंग छायाक असित
्
्
सिदखन रहै त छैक, मुदा ओकर आकार तँ सिदखन निह रहै त छैक। शयामाक
िजनगी नील, शयामाक
्
्
सोच नील, शयामाक
सभ ि◌कछु नील। शयामाक
तन ् ा भं ग भऽ गेल छल, नीलक िचर पिरिचत हँ िस
् चिक
सुिन, नील आशचय
र् त होइत
स
भऽ कह
्
छलाह- “शयामा,
माइ िडयर
्
ं ड हमरा िवशवास
ु
्
्
् फल
होइत अिछ, अहा ँ फेर भेँ ट हएत। शयामा
अहा ँ एखनहँ ु ओिहना सुनदर
छी, यु आर ट ु मच बयुिट
यार, आइ कैन नॉट िविलभ।”
्
छलाह। नील स ंगक युवतीस ँ शयामाक
पिरचए करबैत कह
और पुन: ठहाका मािर हँ स
ू नील ू माइ वेसट्
्
“शयामा,
मीट माइ वाइफ नीिलमा, ओना हमर नीलु शालीनतास ँ शयामाक
्
नील ू बहत
अिभवादन करैत कह
छलाह-
्
ं ड शयामा।”
छलीह- “गुड मॉिनंग मैम।” और नील हँ सेत
्
बािज गेल छलाह- “देख ू हम आइयो अहा ँक पसनदक
बल् ू पैटं शट र् पिहर
छी।” िकछु आॅपचािरक
्
गपप् भेल छल। एयरपोटपर
र्
एनाउनसमें
ट भऽ रहल छल, स ंभवत: नीलक
ाइटक समए भऽ गेल
्
्
्
छल। शयामा
पाछास ँ नील और शयामाक
जोड़◌ी िनहारैत रिह गेल छलीह। कतेक सुनदर
जोड़◌ी
्
्
अिछ- राधा-कृषण् सद ृशय।
नीिलमा कतेक सुनदर
छिथ, एकदमस ँ नील जोगड़क। लगैत अिछ जेना
ु तमे
ा फस
र्
नीिलमाकेँ गढ़
्
्
्
्
्
होएिथनह।
सुनदर,
सुडाल शरीर, शवेत
वण,र् सुनदर
लमबाइ,
उम ंग और
उत्साहस ँ पणू र् नीिलमा। नीिलमाक
्
्
त्येक हाव-भाव सुस ंसकृत
होएवाक पिरचायक अिछ। शयामा
ँ स ँ ओझल निह भऽ गेल
्
अपलक देखैत रिह गेल छलीह। तावत धिर जावत दनु ू शयामाक
आिख
छलिथ।
्
घर अएलाक पशचात्
िब
िकछु सोच
आएना लग आिब अपनाकेँ देखय लागल छलीह। केशक
ु
्
्
् र् भेल छलनिह
् जे एखन धिर हनक
एकटा लटमे िकछु शवेत
केश देिख शयामाके
ँ आशचय
नजिर एिहपर
्
् जे अबैत देरी आिखर अएनामे की देख
निह पड़ल छल। फेर जेना शयामाके
ँ स ंकोच भेल छलनिह
रहल छिथ। भिरसक नीलक
पिह
होइत छल। आब तँ
्
श ंसा एखनहँ ु शयामाके
ँ ओिहना आ ािदत कऽ गेल छल। ई तँ िकछु वष र्
्
ाय: शयामा
नीलकेँ, नीलक स ंग िबतायल क्षणकेँ िबसरवाक
यास कऽ
्
् षकपर
्
्
रहल छिथ। आिखर नील एखन धिर शयामाक
मसित
ओिहना आच्छािदत छिथ। समएक अनतराल
ु
्
्
्
िकछु िमटा निह सकल। िमटा देलक तँ शयामाक
िजनगी, शयामाक
खशी।
शयामाक
िजनगी भगन्
ु
्
्
खणडहर
बिन कऽ रिह गेल, जािहमे नील आइ हलकी
दऽ गेल छलाह। की नील एखन धिर शयामाके
ँ
िबसर
्
् ? शयामाक
्
निह छिथ? शयामाक
पसनद् एखनहँ ु मोन छनिह
महत्व एखनहँ ु बॉ◌ंचल अिछ? निह
तँ नील एना निह बिजतिथ।
चा -कात देखलिन, ओछाओनस ँ लऽ कऽ टेबलु धिर िकताब िछड़ि◌याएल छल। मोन थोड़◌ेक
् , एहन असत-व
्
् त
् घरक हालत देिख। तथािप िकताब एक कात कऽ शयामा
्
खौ ंझा गेल छलनिह
यस
21
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
अशोथिकत भऽ ओछाओनपर पड़ि◌ रहल छलीह। मोन एकदम थािक गेल छल, मुदा िदमाग सोचनाइ
्
निह छोिड रहल छल। शयामा
अपन आदत अ सार डायरी िलखैले बैिस गेल छलीह।
ु प ा-नीलक नामआजक
ु प ा अहा ँक नाम अिछ। हमरा बझल
ु
नील, आजक
अिछ, आब निह तँ हमर डायरी किहयो
्
जबरदसती
पढ़ब, निह हमरा पढ़ब। नील पा ँच वष र् अहा ँक स ंग िबताएल अविध हमर जीवनक स ंिचत
पजी
ँू
िथक, एिह पजीके
ँू
ँ बड़
का कऽ मोनक कोनमे राख
ु
छलहँ ।
कतह ु एिह अमलू य् िनिधकेँ बॉटवाक
्
्
इच्छा निह छल, कागजक प ोपर निह। मुदा आइ एतेक पैघ अनतरालक
पशचात,
अहा ँकेँ देिख
ु या ँ
मोन अपना वशमे निह रहल। मोन की हमरा वशमे अिछ। अहा ँक स ंग रिह हम तँ िदन-दिन
ु
िबसिर गेल छलहँ ,ु किहयो िकछु कहबाक इच्छा होएबो कएल तँ अहा ँ सुनए लेल तैयार निह भेलहँ ।
ु “हमरा अहा ँक मधय् निह किहयो तेसर म ष आएत और निह को
अहा ँ सतत् कहै त रहलहँ ् बस मा
गपप,
हम और अहा ँ, और िकछु निह।” हम मन ्
् क
वयथ
र्
मुगध् भऽ अहा ँक गपप् सु त सभ िकछु
ु
िबसिर गेल छलहँ ।
मुदा आइ सभ िकछु बदिल गेल। आइ जँ सभ िकछु िलख अहा ँकेँ समिपत
र् निह
कऽ देब तँ मोन और बेचैन भऽ जाएत। अहा ँ हमरास ँ दरू भऽ गेल छी, तथािप आइ सभ िकछु,
जे निह किह सकल छलहँ ,ु हम डायरीमे िलख रहल छी। जखन हम अपनाकेँ अहा ँकेँ समिपत
र् कऽ
देलहँ ,ु तखन िकछु बचा कऽ राखब उिचत निह।
् प ं. िदवाकर झा। हम द ु बिहन एक
हमर िपता उच्च िव ालयमे िशक्षक छलाह, नाम छलनिह
्
भाए छी, हम सभस ँ पैघ, बिहन शवेता
और भाए िवकास। हमर वण र् िकछु कम छल, तािह कार
ू
ू
् शयामा।
्
बाबजी
आवेशमे हमर नाम रखलनिह
बाबजी
हरदम कहै त छलाह- “ई हमर बेटी निह बेटा
्
्
्
छिथ, हमर जीवनक गौरव छिथ शयामा।”
छोट बिहनक नाम शवेता
अिछ, शवेता
गौर वणक
र् छिथ, तेँ
्
माए शवेता
नाम राख
ू
्
छलिथनह।
मैि कमे हमरा फसर्ट् िडिवजन भेल तँ बाबजी
कतेक
छलाह। महावीर जीकेँ ल ु चढ़◌ौ
् अपनिहस ँ
छलाह। सौसे
ं महलला
सादक ल ु बॉ◌ंट
हमरा िज स ँ कालेजमे हमर नाम िलखओल गेल छल। माए तँ िवरोध कए
स
भेल
छलाह।
छलीह। जखन हम बी.ए.
्
् । एकठाम िवयाह ठीक भेल
पास कऽ गेलहँ ,ु तँ हमर िवयाहक िचनता
बाब ू जीकेँ होमए लागल छलनिह
्
तँ बड़क माए-बिहन हमरा देखय लेल आएल छलिथ, मुदा शवेताके
ँ पिस
करैत अपन िनणएर् सुना दे
ू
ु धामे पड़ि◌ गेल छलाह। पैघ
्
छलिथनह् जे अपन बेटाक िवआह शवेतास
ँ करब। बाबजी
कतेक दिव
बिहनस ँ पिह
ू
ु
छोटक िवआह कोना स ंभव अिछ। मुदा माए बाबजीके
ँ बझाबैत
कह
्
छलिथनह-“जे
काज भऽ जाइत छैक से भऽ जाइत छैक। िवआह तँ िलखलाहा होइत छैक।” नील शास ् क
कथन अिछ-माए बापक अिसरवाद फिलत होइत छैक। जँ अिसरवाद फिलत होइत छैक तँ माए
्
्
बापक िनणएर् सनतानक
भागयक
िनधारण
र्
सेहो करैत हेतैक। भिरसक माएक िनणएर् हमर भिवषय् भऽ
्
गेल। शवेताक
िवआह ओिह वरस ँ भऽ गेलिन।
मश:
१.
22
अनमोल झा-कथा- अबकी बेर फतं ग २.
ननद् िवलास राय-कथा- बाबाधाम
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
अनमोल झा 1970- गाम न आर, िजला मधबनी।
एक दजर्नस ँ बेशी कथा,
ु
लगभग सए लघकथा,
तीन दजर्नस ँ बेशी किवता, िकछु गीत, बाल गीत आ िरपोताज
र् आिद िविभ
पि का,
ािरका आ िविभ
स ं ह यथा- “कथा-िदशा”-महािवशेषा ंक, “ ेतप ”, आ “ए ैसम शता ीक
ं २ (िवराटनगरस ँ
घोषणाप ” (दनु ू स ं ह कथागो ीमे पिठत कथाक स ं ह), “ भात”-अक
िवशेषा ंक) आिदमे स ं िहत।
कािशत कथा
अबकी बेर फतं ग
बात से निञ छलइ, बात छलइ जे किहयो गाम-घर छोिड बाहर निञ रहलइ, द ू मास आ दस पा ँच
िदन। सभ िदन तँ सभहक बीचेमे रिहक पढ़◌ाइयो-िलखाइ गामेपर केलक, हाइ
ू मे गेल तँ
ल
झ ंझारपुर सेहो कतेक दरू साइिकल उठाउ तँ प ह िमनट आ पायरे जाऊँ बीच धके तँ पाउन घ ंटा
निञ ओ छहरपर स ँ नीचा खिस जाऊँ तँ ओिह बाधे-बाधे आधा घ ंटा आ राख ू ओहूस ँ कम समयमे चिल
जाऊँ
ूल आ कालेज आ चली आब ू फेर गामपर।
ओना अिनल सभ िदन गामेपर रिह पढलक से बात निञ छलै, ओकरा ओिहना मोन छलै जखन
ओ आइ
काम फ
इयरमे लिलत नारायण जनता कालेज झ ंझारपुरमे रहए तँ पढ़◌ुआ क ाक स ंगे क े टी.सी.
ु
ू
लऽ कए गेल रहए आर.के.कालेज मधबनीमे
नाम िलखाबय आ नाम िलखा दनु ू बेटा आ िपित घमल
रहए
ु
मधबनीक
लॉज सभमे एकटा डेरा लेल, डेरा ओिह िदन तँ झट दऽ निञ भेट गेल रहै , तथािप
गामेपर आबी जोगार पाती बैिस गेल रहए, एकर गामक छोटका बौआस ँ गामपर ग -स
भेलै आ
ओ कह
रहै जे हमरा डेरामे एकटा सीट खाली छैक िबचार हो तँ रही सकैत छी, स िर
पया
भाड़◌ा छैक मिहना, सेफरेट
म कए पैइतीस कके लागत, हँ एकटा चौकी लेमए पडत, भानस-भात
कए जेना जे िबचार हो अलग-अलग भानस करब तँ सभ ब र्न बासन सभ लेमए पडत
एके ठाम
करी तँ मोटा-मोटी सभ समान अिछये, आ जे
अिछ से लऽ लेब तइयो चलत आ
लेब
ु
तइयो चलत। अिनलकेँ लगलै जे िकयो एकरा लेल पिहलेस ँ व ा के
हो तिहना सन बझेलै
ु
ओकरा। ओ झट दऽ कहलकै हँ हमरा िवचार अिछ, चल ू मधबनी
आ एके ठाम रहब आ एके ठाम
ु
भानसो-भात करब, जे जेना खचा र् वचा र् होएत आधा-आधा सएह
? आ गेल अिनल मधबनी
ओिह
लाजमे जाके पिहले अपन पोथी-पतरा सथलक छोटका बौआ, अप
आ लहटन ित गोटा जा चौकी
कीन आनल, ताही िदनमे बीरासी आ ितरासी टाकामे चौकी दे
छलै, चौकी को
साउख, सीसमके जै
ू
ू एकजिनये टाइप। आ रहए लागल मोन
छलै, आमेक पाइस पउआ आ आमेक तखता, उलके-फल
क
लगाक ओतए।
23
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
मोन लगाक तँ रहए लागल अिनल मुदा मोन लागब एकरा कहबै की? जिहयास ँ मधबनीमे
रहनाइ शु
केलक तिहयास ँ तीला स ा ंितक सात िदन छलै, मा
एक ह ाह, मोनमे िबचार
रहए, गाम
जाएत
लोके की कहतै देखलक हौ पढ़◌ूआकेँ दस िदन
भेलै आ हािजर जबाब? आ अप
नीक
ु
बझेलै।
ओना काि
हेतै ितलास ं ाित तँ स ंगी जे छोटका बौआ आ लहटन छलै पाविन करए गाम चल
गेलै
। एक िदन पिह
सेहो भोरे भोर, सा ँझ तक अिनलोक मोन कछमछा सन गेलै, मोन
केनादिन रीब-रीब करए लागल रहै , असगर मे खबु कानय कऽ मोन होबए लगलै आ उठेलक एक आध
ु बसा ँ गाम आबी गेल रहए पाबिन करए। माएक मोन जड़◌ा
ु
टा पोथी आ एकटा झोड़◌ा आ सा ँझका
गेल छै माए कहलकै-नीक केलै बौआ, चल एले, तोरा िबना हमारा सब कोना पाबिन करीतउ? अिनल
ु
िकछु बाजल जै रहए कारण जखन मधबनी
जाए लागल रहए तऽ माए पाबिनमे आबए कह
रहै , मुदा
अिनल कह
रहै माएक-माए मे एह
एनाइ होइछै, मुदा आइ अप
अिनल आबी गेलास ँ माएक छाती
ू सन भऽ गेलै। फेर पाबिन कऽ ाते फेर मधबनी
ु
ु
सप
आएल। पढ़◌ाइ िलखाइ कऽ
ममे मधबनी
ु कतेक प ीस आ तीस िकलोमीटर छलै गामस ँ मधबनी
ु
आ गाम अिनलक पायरे तरमे रहै । दरे
आ
ु
मधबनीस ँ गाम।
ू तीन भाइक भैयारी छलाह सब स ँ पैघ िपित पढ़◌ूआ क ा गामेक
अिनलक बाबक
ूलमे मा र साहेब
ू
छलाह, दोसर भाइ िबचला अिनलक बाबजी छलिख
जे गामेपर रही खेती बारी करैत छलाह आ सबस ँ
छोटका िपित कलक ामे को
पारभीट फाममे
र् को
करी करैत छलाह। गामपर तीन ू भाइक
ु
सा ँझी आ म खब हेम-छेमस ँ चलैत छलाह। सभ भैयारीमे आ सभ िदयादनी सभमे सेहो ककरो
कतउ िदयाद बादमे झगड़◌ा होइ तँ अिनलक बाप िपितक उपमा देल जाइ छलै गामपर लोककेँ,
भाबे तेहन नीक जका ँ सभकेँ थथमािरक घर आ म चलै छलैसे।
ओना पािरवािरक आिथक
र् ि ित नीक
छलै, तथािप ओतेक खरापो
कहक चाही, “लुटी आनए आ कुटी
खाए वला बात छलै, तथािप ओिहमे बड दीब जका ँ िदन कटल जा रह;ल छलै। एखन तँ भगवानक
दयास ँ द ू कर भोजन आ द ू हाथ वस् तँ भेटीते आ आ जखन अिनलक बाप-िपित ब ा रहए तँ
ु
ु
हनका
सभकेँ ओहपर
आफद भऽ जाइत छलिन। ग े ग मे माए एक िदन कह
रहए अिनलकेँ
ु
बझले
बौआ की जखन तोहर बाप
ूलस ँ पिढकेँ आबथनु तँ तोहर भैया हमरा कहै थ बौआक खेनाइ
दऽ अिबयौ आ हमारा लाजे
जाइये खेनाइ दबए, कारण खेसारीक रोटी आ मसुरीक उसना कतउ
ु
खेनाइ देल जाइ, हमरा लाज हआ
खेनाइ दैत तँ स ैह पिरि ित छलउ तोरा बाप-िपितक घरक।
ू
राितक मसुरीक उसना खाके सभ सित
रहै छलउ, आइ भगवतीक दयास ँ से बात तँ
छउ। उसना
आ फूटहा बाला बात।
ू अिनलक माथा सुनाओ जका ँ लागए लगैक, मुदा से के
ई सभ सिन
को
लाभ छलै की, िचंता के
मोन आर खराप सन लागए लगै आ अप
मो -मोन मोन कऽ सा ंत ना दैह-जे बीत गेल से बात
गेल”
खैर...................।
अिनल मै ीक, आइ. काम आ बी. काम. कऽ परीक्षा जाहा की समा होइ, िटकट कटा फटाकस ँ कलक ा
ु जाए छल छोटका िपित लग, कलक ा घमए।
ु
पहँ च
कलक ा ओकरा बड नीक लगलै आ कलक ाक लोक
ँ फाटए लगलै, एहन उद
सभ आ ताहीमे मौगी आ छौडी सभकेँ देिखक ओकर आिख
आ एहन उघार
आ िनघार, ओ मो -मोन सोचए लागल एकरा सभकेँ जतेक उघार ततेक फैसन लगै छैक की?
अिनल जता बेर आबए परीक्षा दके गामस ँ कलक ामे सभ ठाम जाए छल जतए गेलो छल ततयोु
मा
िचिडयाखाना, िव ोिरया मेमोरीयल, ताराम ल, जादघर,
िबडला मि र, िबडला
ू म,
ह
ू मठ आ आर कतए कतए
ु
िचल् न
ू म कालीघाट, दिक्ष
र काली, बेलड
घमए
जाइत छल
अिनल। आ लेख गाडर् न आ ए र ओ रका पाकर् आ मैदान सभ तँ धागल छलै ओकरा जाही बेर आबए
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू
खबु घमए
आ भिर िदन डेरापर असगर पडल राजा बनल रहै छल। िपित आिफस चल जाइत छलै आ
डेराक आर लोक सभक
ूटी। एतुका लोककेँ एतेक
ूटीक ित सतकर् ता देिख अिनल के आ य र्
लगैत छलै, चारी बजे भोरे िपित उठी, शोचािदस ँ िनव ृत भऽ नहा सोना भानस भात कके। छः
बजे फीट, आठ बजैत-बजैत बासन खाली, माजल-धोल आ चकमक करैत रहै त छलै आ सभ लक
लके पड़◌ाइत छलै
ूटी आ फेर मु ारी सा ँझमे अबैत छलै सभ फेर खेनाइ-िपनाइ बना सुित रहै
छलै आ ातः भे
फेर ओहा रामा ओहा खटोलबा वाला बात होइत छलै। से एकरा आ य र् लगैत
छलै बढु िपितक ई फू ीर् देिख। अिनल के मो -मोन होइ काश एिहना आ एतहे जका ँ फूि र् आ
काजक ित एतेक सजगता गाममे लोककेँ रिहतै तँ िन य को
गाम गाम
रिहते, सभ गाम
अपन नाम शहरमे गनब लिगता। जे-से..............।
अिनल तँ को
ख ु ा गाडी कऽ रहै लेल कलक ा
जाइ छल, ओ तँ परीक्षा-तरीक्षा को
भऽ
ु
ु आबए छल िपित लगस ँ से बेचाराक मो
जाइ मधबनीमे
तँ दस िदन मास िदन घमी
खबु लगैत छलै
कलक ामे। मुदा जखन गाम आबए
बरदा
स ँ फािजल भऽ जाइत छलै
ु
बझैत
छलिख
ई आए गाम जाइत
िपितये की किरतिथ , छोट-छीन
कालमे िपित गाडीपर चढबए हावड़◌ा अबै छलिख
तखन अिनलक
ू
आ िहचकी-िहचकी कानए लगैत छल, धीया-पता
जका ँ। िपित
अिछ, एतए एकटा नीक लगैत छलै ताए क त अिछ। मुदा
करी, कलक ा देख ू आ गामपर घर- आ म सेहो देखए पडैत
छलैन आ नयहे देखए पिडतैन तँ की सभ िदन अिनल अपन पढ़◌ाइये िलखाइ छोडीक एतए पडल
रिहतै स ैह की नीक बात छीयै? आ बोल भरोस दके भाितजकेँ गाम िबदा करिथ। ओना बेटा आ
ं
भाितजमे को
अतर
छैक? बेटे जका ँ मािनतो छलैहे िपित आ देख-भाल सेहो करैत छलैन हे
अिनलकेँ।
ु
ए र गाम आ मधबनी
एलापर एक राित मोन
लगैत छलैन हे बाउ केँ। होइन जे िकछु हरा
गेल हो कलक ामे, आ हरेतैन की लगैन अप
या मो
हरा गेल हो। एक मोन इहो होइ
नाम-ताम कटा ओतहे चिल जाइ पढ़◌ाइ-िलखाइ करए, से फेर मोन अछताए-पछताए सेहो लगैत
ु
ु
छलै, मधबनीक
पढ़◌ाइ आ कलक ाक पढ़◌ाइ, आ मधबनीक
खचा-बचा
र्
र् आ कलक ाक खचा-बचा
र्
मे
र् आकाश
ं
पातालक अतर
छलै। सेहो दम सकरब बाला बात छलैनहे, आ अपन बाप िकछु छलै तँ गामपर ग ृह े
छलै
, िपितयेपर कते कुदता, िपितक फेर अप
बाल ब ा छैक
, को
इयाहटा
छिथन जे
चल बाबा या को
बडका हािकम मुखतारो
छिन िपित, फेर तँ छोटे छीन क नीमे काज करैत
छैक
। जे से बात धीरे-धीरे सरा जाइत छलैहे आ फेर अप
आप मोन लागए लगैत छलै
ु
मधबनी
आ गाममे।
समय कऽ िबतैत देरी होइ छै, ओ तँ हबाइ जहाजोस ँ तेज गितस ँ चलैत छैक आ देिखते-देिखते
ु
कतएस ँ कतए भािग जाइत छैक ई समय। मधबनी
कऽ पढ़◌ाइ समा भेलै आ
करी-चाकरी लेल
ु
ु
खबू
यास आ दौड बडहा केलक अिनल, गाम घर, पटना, दरभं गा-मधबनी
आिद-आिद ठाम। एखनका
युगमे भगवानक भेटब आ
करी भेटब एके दजाकर् बात भेलै। औनाकऽ रिह गेला अिनल, कतौ
गोटी
बैसलिन। मो -मोन अप -आपपर खझ
ँ ु ाइत रहिथ, एिह पढ़◌ाइक कोन काज? एिह
ु
मधबनीक
ओगरनाइक कोन काज? एिह पढ़◌ाइक पाछा ँ पाइ बहाबैक कोन काज? जखन ईएह
ू
बेरोजगारीक िजनगी तखन एतेक तप े कथीक? होइ अपन मडी
अप
पािनमे गोइत ली। आब
आर िकछु
नीक लगैत छैक अिनलकेँ। मोन अ न-िबस न सन लगैत छैक ओकरा, अपरतीब सन
सेहो।
िप ी छोटका को
काज उ ममे गाम आएल छलिख , अिनल को
काज ताजक बारेमे ग
केलक
िप ीस ँ। िप ी आबै काल कलक ा ले
एलिख । अपना सेठकेँ कहलिख - हमर भाितज छी आ
ु
भाितज की हमर बेटे बिझ
को
काज एकरा दहक। िप ीक पैरबी काज केलकै आ भऽ गेलै
को
25
केर् क पो
पर अिनलकेँ िपि ये ऑिफसमे काज।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िन ंग भेलै आ तकरा बाद अ ाइ टमे ट आ क रमेशन सेहो। आब लगभग चािर-पा ँच बरखस ँ
काज करैत अिछ कलक ामे अिनल। िप ी भाितज एके नगरी आ एके डेरामे सेहो रहै त छिथ।
मोन
लगबाक को
बाते
। मुदा अिनलकेँ मोन
लगैत छैक आब कलक ामे। बात क
भटमेराह सन सभकेँ ज र लगैत छैक जे जािह अिनलकेँ कलक ाक ित एतेक ेह आ उ ार छलै
जे हावड़◌ामे
न पकडै काल आ गाम जाइत काल कानय लगैत छल, छ मिसया िच ा जका ँ तकरा
आइ एतए नीक िकएक
लगैत छैक? ओकरा
करी छोिड देबाक इ ा होइत छैक। मुदा
िप ीक मुँ ह आ गामक ओ
करी लेल बौऐनी आ िछिछऐनी मोन पिड जाइत छैक। िपतीक मुँ ह एिह
लऽ कऽ मोन पडैत छैक जे अिनलक साम मे दनु ू हाथ जोिड थडथर कपैत सेठस ँ अिनलक लेल
करीक भीख म ँग
छलै, से जँ आइ
करी छोिड देतै तँ िप ीक कतेक मान रहतै। ओना आइ
कतौ सरकारी काज आिक नीक पो बला काज कतौ होइतै आ तखन जे छोिडये देतै तँ िप ीक
ू सन होइतै आ कहै यो लेल होइतै
अपमान
छाती सप
सरकारी काम आिक उ पो बला काम
ु
हआ
इसिलए छोड िदया, मुदा सेहो बात
छलैहेँ ।
अिनल करत की तँ ए काज करैत छल, मुदा ओकर मोन िमिसया भिर
लगैत छलै। ओकरा गामक
लोकसभ गामक चौक-चौराहा, कोठीयर कलम, पुबारी बाडी, बढमोतर आ खोइटक खेत, कुमरी
पोखरो, उसराहा आ बौअन झा पोखिर सभ मोन पिड जाइत छलै। ओकरा गाम, झ ंझारपुर आ
ँ
ु
मधबनी
सभ सभटा आिखक
समक्ष नाचए लगैत छलै। ओकरा ई बा ल िजनगी एकदम
नीक लगैत
छलै। ई आठ-दस घ ा
ूटी आ एतेक
ता सोफाइत
छलै। ओकरा मोन होइत छलै
गाम-घरमे रहबाक, क ा गोटा कहै , अहा ँकेँ
ालिजया भऽ गेलहेँ , िबछुडल लोक, िबछुडल समए आ
िबतल बात सभ जे एतेक मोन पडैत अिछ से िकछु
ेलिजयाक बात छी।
ु
ओकरा मोन पडैत छलैक गामक ना ंङट-उघार ब ा सभ, गामक जगे
र, बाले र, फतुिरया, उ मा जे
तीन सेर बोइन लेल सारा िदन ओही रौद आ पािनमे िततैत लोकक ओतए काज करैत छलै। ओकरा
मोन पडैत छलैक गामक सभ व ुक िद त, सडलाहा राजनीित, लोकक कुिच ामे लोक लीन रहै त
छैक। भिर पेट लोक भोज
करतै तैयो हँ सतै आ जँ भुखले रहतै तैयो हँ सतै। मुदा
ु
एतेक बात बिझतो
आ सुिझतो आ गिमतो अिनल अऑिफसमे िरजाइन दऽ दैत छैक आ चल अबैत
अिछ गाम। आ गाममे रहए लगैत छैक।
िप ीक सभ ित ा आ बातकेँ अिनल पएरक ठोकरस ँ घैला जका ँ गुडका देलकै। घैला गुडिक कऽ
फूिट गेल छलै आ पािन सौसे
ँ बिह गेल छलै। अिनलक िप ी मो
मोन सोचैत छैक, कलक ाक
ओही डेरामे आिखर एना िकएक भेलै, जकरा कलक ामे एतेक नीक लगैत छलै तकरा एक बैगएना
ँ
िकएक मोन भऽ गेलै। आ अनायास मोनमे आ आिखक
सोझा ँ अिनलक िप ीकेँ अपन भैयारीक ओ
ब ाबला समए मोन पडैत छैक आ देखाइत छैक खेसारीक रोटी, मसुरीक स ा आ पेटकटारी लागल
पेट आ अभावे अभाव सगरे...!
२.
ननद् िवलास राय-
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ननद् िवलास राय-कथा
बाबाधाम
बोल-बम बोल-बम। बोलबम-बोलबम ई आवाज कमलीक कानमे पड़ल तँ ओ घास काटव छोिड सड़क
िदिस तकलक। एकटा बसमे पीयर-लाल कपड़◌ा पिहिर
लोक सभकेँ देखलक। बसक भीतर आ
छतपर लोक सभ बैस कऽ बोलबम-बोलबमक नारा लगवैत छल। बस तेजीस ँ सड़क पर दौड़ रहल
छल।
कमलीक खेत सड़कक कातेमे छल। ओ खेतक आिरपर घास कािट रहल छिल। कमली सोचए लगलीकतेक लोक बाबा धाम जाइत अिछ मुदा हमर तँ भागे खराप अिछ। कतेक िदनस ँ िवकलाक बापकेँ
कहै त छी मुदा ओ अिछ जे िधया
दैत अिछ।
कमली आ लखन द ू परानी। एकटा बेटा ि◌वकला। िवकला सातमे पढ़◌ैत। लखनक माए-बापक
ू । लखनकेँ पा ँच िबघा खेत। एक जोड़◌ा बड़द आ एकटा महीसो। लखनकेँ
् बखक
स र अससी
र् बढ़
ू माए आ अससी
् बखक
कतौ जइक लेल सोचए पड़ए। िकएक तँ स र बखक
र् बढ़
र् अथवल बापकेँ छोिड
कतए जाएत। तइ परस ँ एक जोड़◌ा बरद आ महीसोकेँ देख-रेख। पा ँच िबघा खेतमे लागल
फसलक ओगरवाही। असगरे कमलीस ँ कोना पार लागत। तै ं कमलीक बाबाधामबला बातपर लखन िधयान
दइत छल। लखन सोचए कमलीकेँ गामक ला◌ेक स ंगे बाबा धाम भेज देव तँ भानस के करत?
् ू लस ँ छु ी होइत
धास के आनत। असगरे हम की सभ करब। बेटा िवकला पढ़ते अिछ। ओकरा सक
अिछ तँ ओ टीशन पढ़◌ै लए चिल जाइत अिछ। िबना टीशन पढ़
कोना परीक्षा पास करत। सरकारी
् ू लमे की आव पढ़◌ाइ होइत अिछ। मासटर
्
सक
सभ बैिस कऽ गप लड़बैत रहै त अिछ। चिटया सभ
्
कोठरीमे बैिस कऽ गप करैए अथवा लड़◌ाइ-झगड़◌ा। मासटर
सभक लेल धिन सन। लखन अपन
्
खेती ग ृहसथीक
स ंगे माए-बापकेँ सेवा नीकस ँ करैत अिछ। माए तँ थोड़◌े थेहगरो छिथन मुदा
ु
बापकेँ उठवो-बैसवोमे िदक् कते छिन। हनका
पैखाना-पैशाव लख केँ कराबए पड़◌ैत अिछ।
पौरका ँसाल फगुनमे लखनक िपताजीकेँ लकबा मािर देलकिन। म ा पॉली क् िलनीक दरभं गामे इलाज
ु
करेलास ँ जान तँ बिच गेलिन मुदा अथवल भऽ गेलाह। भगवान लखन जकाॅ◌ँ बेटा सभकेँ देथन।
ओ
तन मन आ धनस ँ माए-बापकेँ सेवा करैत अिछ।
ू बेटा अिछ
लखनक एकटा स ंगी अिछ। नाम छी सुकन। सुकन लखनस ँ वसी धनीक अिछ। दटा
सुकनकेँ। दनु ू बेटा सातवा ँ तक पढ़ि◌ िद ीमे
भेजलाहा ढौआ सुकनकेँ भेट जाइत अिछ। सुक
ु
देखैत छिथन। हनका
राितकेँ सुझवे
करी करैत अिछ। मासे-मासे बेटा सबहक
क माए-बाब ू जीवते छिथन। सुकनक माए कम
करैत छिन। एक िदन सुकनक माए राितकेँ ओसारपर स ँ
ु
् । लखनकेँ पता चलल ते ओ सुकनक माएक िजज्ञासा
िगर गेलिखन हनका
पएरमे मोच पड़ि◌ गेलनिह
करै लए गेल। सुकनक माए लखनकेँ अप
बेटा जािहत मा त छेलिखन।
लखन सुकनक माएस ँ पुछलक- “माए कोना कऽ ओसारपर स ँ िगर गेले।”
सुकनक माए बाजिल- “बौआ, आव हमरा सुझै नइ अिछ। राितकेँ तँ साफे निह देखैत छी। बेचू
ू छोटका कनटीरबा दरभं गामे डाकडरी पढ़◌ैत अिछ ओ फगुआमे गाम आएल छल हनाक
ु
बाबक
कहिलऐ तँ
27
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ँ देखलक आ कहलक जे दनु ू आिख
ँ मे मोितयािवन भऽ गेलौहेँ । कहलक जे
ओ हमर दनु ू आिख
ऑपरेशन करेलास ँ ठीक भऽ जाएत आ नीक जहाित सुझए लगत।”
मश:
१.
अपमान-
१.
ीमती शेफािलका वमा-र् आखर-आखर
ीत (प ा क आ कथा)
२.नाटक- बेटीक
बेचन ठाकुर
ीमती शेफािलका वमा-र् आखर-आखर
ीत (प ा क आ कथा)
ज :९ अग , १९४३, ज
ान : ब ंगाली टोला, भागलपुर । िशक्षा: एम., पी-एच.डी. (पटना
िव िव ालय),ए. एन. कालेज, पटनामे िह ीक ा ािपका, अवकाश ा । नारी मनक ि केँ खोिल क ण
ु
रसस ँ भरल अिधकतर रचना। कािशत रचना: झहरैत
र, िबजकैत
ठोर, िव ल ा किवता स ं ह,
ृित रेखा स ं रण स ं ह, एकटा आकाश कथा स ं ह, यायावरी या ाव ृ ा , भावा िल का
गीत, िक िक
जीवन (आ कथा)। ठहरे हएु पल िह ीस ं ह। २००४ई. मे या ी-चेतना पुर ार।
शेफािलकाजी प ाचारकेँ स ंजोिग कऽ "आखर-आखर ीत" ब
एिह स ंकलनकेँ धारावािहक पे ँ कािशत कऽ। - स ादक
आखर-आखर
ु
छिथ। िवदेह गौरवाि त अिछ हनकर
ीत (प ा क आ कथा)
तेसर खेप
शेफािलका जी
ँ
ँ
आपकी आ कथा मै ं पढी। िजं दगी बीत गई-जी
की तैयारी में। आचल
मे> दधू
आखों
मे
पानी और िज ा पर बतरस का शहद िलए िमिथला ंचल की यह स् ी िकश्तो ं मे जीवन जीती है और जो
ू होती है ।भूम लीकरण किहए
कथा कहते चलती है , जीवन की- वह भी िकश्तो ं में ही परी
भू$म ी$करण के बाद के इन धडफिडया िद ं का बीज-श
है - िकश्त! ऋणं कृ ा ध ृतं पीवेत- चावाकर् का यह दशनर् घर घर मे चिरताथ र् है ।
मचंद और
यशपाल के समय की िकश्तें शखम गी और ासदी का उ
थी। अब िकश्तें फ
का िवषय है !
28
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं
लोग फ
से कहते हैं -इतनी िकश्तें गई!
.. िकश्तो ं और पािलयो ं में िजया जा
वाला
म वगीर्य स् ी-जीवन इतना आसान नहीं होता! हँ सी नए जमा
का घघट
ँू
है - हर मु ान के पीछे
लजाई बैठी इतनी ढेर-सी छोटी-बडी तकलीफ होती हैं िक उनका
ोरा िलख
मे धरती सब कागद
ू धरती को कागज बना लें सम
कारौ/लेखनी
ं
सब बनराई की ि ित िघर आती है ! परी
व ं की
ू
लकडी से कलम गढ़◌े◌ं तो भी हिर-गुन की तरह अगाध और अन ंत स् ा◌ी जीवन अपनी परी
माखमकता मे िलखा नहीं जा सकता।
शेफािलकाजी को अप
कमठर्
राजीव की िम ी मुखी मा ँ के
ज्ञावान सहयोगी और िह ू कालेज के िद ं के अप
ि य साथी
प मे तो वषो र्ं से पहचानती थी िक ु एक लेिखका के
प मे
उनकी भा र पहचान कराई मशहूर अमरीकी भाषािवद ् और अ वादक
आलीर्न ज़◌ाइद
ं
ू
सीरीज ऑपफ इिडयन
िवमे पोए ी के दसरे
ख
के अ वाद के िसलिसले मे वे
मेरे घर अचानक ही आई ं उस समय मेरे भ ार मे उ ें िखला -लायक कुछ और
ग ृह ी मे सहज स ंकोच से मै ं उनके िलए ताल-मखाना भूना जो िपछले हफ्ते ही
मुजफ्फरपुर से भेजे थे। मखा
देखते ही उनके मन मे शेफािलकाजी की याद
उ ों
कहा- िदस इज़ वॉट िफगस र् इन शेफािलकाज़ पोएम। िफर उ ों
। पे ंि न
भारत आई थीं ।
था नहीं
म वगीर्य
मा ँ
ताजा हो गई।
उस किवता का अ ं ज़◌ी
अ वाद सुनाया जो उ ा ं िकया था और मेरे मन मे ल ू और मखा
एक साथ ही लगे फूट
लगे
ू
ू
िक इतनी बिढया किवता की इस रचियता का
ितक भगोल मेरा अपना
ितक भगोल है मेरी
ितवेिशनी होगी यह मेरे घर मे पास ही कहीं इसका घर होगा!
वषो र्ं बाद जब ब ई
ैरो के त ावधान मे िविभन भाषाओं के स् ा◌ी-लेखको ं को
ु
ब ु ई बलाया
और कािशद के िरसोट र् मे हम साथ ठहरे तब जाकर पता चला िक यह शेफािलकाजी तो
और कोई नहीं
अप
राजीव की मा ँ है । चिकत रह गई!
और अभी जब
िक -िक
जीवन पढकर ख़
िकया-तब से यही सोचती बैठी हूँ िक
यिद राजीव के िपता की तरह िन ल धीरोदा ता सब पु षों मे होती
सब पु ष इसी तरह के
ं
मी होते तब तो स् ा◌ीवाद का भ ा ही बैठ जाता! स् ा◌ी आदोलन
की ज़ रत ही कहा ँ होती।
ु र् का िवषय है िक हमारे
सबसे दभा
ादातर पु ष अितवादी अिधनायक
जाता ंि क स क् द ृि
का
ु ीले स ंवादों से
उनमे िवकास ही नहीं हो पाया। छोटी-छोटी मािमक
र् घटनाओं और चट
ृितयो ं का जो
ितस ंसार शेफािलकाजी
का तादा
गहरा बना
इस सहज-सरस आ कथा मे गढ़◌ा है - उससे गा ँवो ं-कस्बो ं की नई औरत
है । इसी तदा
की ज़ रत हमे है - बहनापे
तं ाता और भाईचारे की बात की थी। स् ा◌ी
है । स् ा◌ी- द ृि
मोनािलसा नहीं। व -वण-न
र्
सम ाएँ तो साझा हैं िजसके आधार पर िव भर
के िवकास का स ू ा
ं
आदोलन
भाईचारे
-सम् दाय-सापेक्ष
की िस् या ँ बह
हैं
है । िवषम पिरि ितयो ं मे भी अपनी राह बढ़◌े जा
उसका अ त
ु
उदाहरण है -िक -िक
जीवन!
डा
अनािमका
अ ं ज़◌ी िवभाग
29
यही है ।
सी
ा ंित
बराबरी
का िवकास बहनापे में देखता
कई सम ाएँ िविश
है लेिकन कुछ
और उनकी भाषा का छ
ही अलग
की जो मल ंग िवनय स् ा◌ी-भाषा के साक्षी है
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
स वती महा.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
(सा ं )
िद ी िव िव ालय
बहन के नाम भाई का
ह
े -प -
ु
बहन की एक तीक्षा देख कादि नी मे भाई का मन उ िसत सा हआ
ु
उठी कोलाहल और कुछ शोर सा हआ
।
ियत
दय
भोली सी बहन बना
मन के को
से एक गज
ंू
सी
का
ु
भाई का मन आकुल और तरस सा हआ
इस अभा
का जीवन हो सफल तुझ जैसी बहन को पाकर मुझे सौभा
कहा ँ हमजोली बहन का
ू
ु
जो कुछ भी है बा ँट लेंगे एक दजे
का
ार सुख-दःख
तुझ जैसी बहन का पा
ु ते हैं खरे वही पाते जो पारखी हैं । शोकाकुल तो मक
ू
मोती तो खबू चन
बिु जीिव तो शोकाकुल हो
का समय ही कहा ँ पाते उ वासी
ों कोई हो
गीत और किवता की ..।इस भाई का नाम तापस कुमार दास है
ु एक भाई तु
की एक झलक तक ही पहँ चा
अजनबी बहन के
दीन ही होते
जो ब ंगला भाषी है । िह ी सािह
जवाब की अपेक्षा मे
Ther e i s a si l ver shi p, t her e i s a gol den shi p, t her e i s no shi p l i ke
Fr i end shi p.
I am Tapas Kumar Das of 20t h st udent of B.Sc . (j oi ni ng year ) My
hobbi es ar e gr eat
hobbi es i n my own sens . These ar e as f ol l owi ng :- Phot ogr aphy , Soci al
r ef or mi ng Readi ng
Hi ndi , Engl i sh and Bengal i l i t er at ur e, Dr i vi ng Car Mot or cycl e) f ast ,
I am a Hi ndi depar t ment al
member of Radi o Japan. So many pr ogr amme has been br oadcast t hr ough
r adi o Japan.
I t 's my best and wi t h best compl i ment s t o you my si st er .
Cor di al br ot her
Tapas Kumar Das
Das Est at e
30
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Lakanpur , Bhagal pur .
प ू ा दीदी
इत
िद ं बाद जब थक गया तीक्षा मे िक अब आयेगा प आपका िक अब आयेगा तब
िलख
लगा हूँ आपको तं ग कर
के बहा
वैसे एक छोटा भाई तं ग
ा कर सकता है - हा ँ
अबोध ेह का
श र् ही दे सकता है ।
ा कर रही हैं ा िलख रही हैं
ा सोच रही हैं - इन
सब ि ितयो ं को ज दीिजये कम से कम हमारे बगल मे बैठे रिवका ंत नीरज को बताइये न!
तभी न आपकी
रणाओं पर चल सकँ ू गा अिवराम लेखनीय दािय को िलए सािहय-भू पर। मुझे िव ास
है िक आप प अव दें गी।
शुभकामनाओं के साथू
सनलता
ंत
भागलपुर
ेहमयी दीदी!
सादर चरण- श।
र्
अहा ँक भगलपुर वास जेना हमर सभक दय कें एका
कर लेल भेल छल।
कतेक िदन धिर हम सभ िव िव ालय पिरसर मे िमलैत रहलौ-ं कतेक गो ी मे एक दोसरा के
ु
बझैत
रहलौ।
ं
िक ु दीदी हम निह देिख सकैत छी अहा ँक उदास चेहरा। अपन हँ सीक पाछा का
लैत छलौ ं अपन उदासी दीदी िक ु हमर द ृि
स ँ निह का पबैत छलौ।
ं
अहा ँक अ ता सेहो निह
सहन क पबैत छी। दनू ू चीज हमरा मोन पडैत अिछ तँ हम
ाकुल भ जाइत छी कोना हमर
ु ैत रहतीह। को
दीदी फूल जका ँ सिदखन िवहँ स
बीमारी हमर दीदी के
श र् निह करैक। सभ स ँ
ु
पिह
दीदी अहा ँ अपन ा क
ाल राख।
मैिथली सािह अहा ँ िदिस टकटकी लगौ
अिछ
अहींक भाई
रिवका
नीरज
भागलपुर
भागलपुर स ँ एम ए क परीक्षा देवाक कारण हम रिवका ंत
सनू
ुव नारायण इितहासकार राधाकृ
चौधरी सभक दय मे िनवास कर लागल छलौ।
ं
सनू लता ंत आ रिवका ंत नीरजक कतेको प
हमरा भेटैत रहै त छलआदरणीया मामी जी
णाम।प और रचना िमली स कां ◌ेर् को आप
बडी तेजी से िरश्ते का
प दे िदया।
सािहि कब ंध◌ु्
के अलावा मामी का यह ेह िमल गया जो अबतक मुझे मािमयो ं से िमलता रहा
31
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
है ।आपकी दो
ं रचनायें
र की है
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ीित की कामाियनी और च े के पानी पर उतर आयी बीमार
ध◌ू् प का योग बड़◌ा अ ा लगा। अ ी रचनाओं के िलये पि का के स ादक के है िसयत से ध वाद
दे रहा हँ ◌ू। हम रचनाओं के स ंकलन मे
हैं तीन माह की साम ी होते ही काशन ार ंभ कर
ु
दें गे जैसे िक आपके पैड से मालमू हआ
इतना
जीवन जीतें हएु भी आप
हमारे िलये
समय िनकाला इसके िलए हमारा िवभव पिरवार आभारी है । छपरे की एक और स ं ा नवयुवक पिरषद
है जो अप
मे युवा शि यो ं को समािहत िकये हएु समािजक चेतना को जाग क कर
मे सि य
है । उसी के त ावधन मे हम एक िवशाल आयोजन कर
जा रहे है उसम ं◌े एक काय र् म किव
स ेलन का भी है यह स ंभवतः अ ूबर मे आयोिजत होगा। इसे आप पवू र् िनम ं ण समझे समय
पर हम आपको सादर िनम ंि त करेंगे आशा है आप अव आयेगी।
आपका
ओम
काश, भगवान बाज़◌ार, छपरा
ू शीतल
जड
शेफािलका जी
िमिथला नववषक
र् शुभकामना
िमिथला जन िवकास पिरषद
नवे ु कु . झा
पटना
शि
मोद
मैिथली महाकविय ा◌ी का
िव िदनी डा र शेफािलका वमा र् जीक कोमल कर कमल मे सादर-किलत
ू
का
िव िदनी डा र सुद ृढ शेपफािलके/ मैिथली सर महादेवी सुभ ा सुमरािलके/म रम मुदमखत
ु
मानसरोवरक म ृदभािषके/क
ण रस स ँ िस
शीतल भावनाक वािहके/किवत कानन कोिकले ¯ककर किवक
ु
कलकि के/मधरहा
िवलािसनी तहािरणी मनमोिदके।
बलदेवलाल कुलिकं कर
झिझहट
जनकपुर रोड
22.1.79
हमर छोट भाई शरदक दो
छिथ दीप िस ा जे एखन आइपीएस आफीसर छिथ। शरदक कारण ओ
हमरा अपन सहोदर बहीन स ँ बिढ कें मा त छल। ओकर सम
पिरवार हमरा लेल बेहाल रहै त छलु
दीप अ ण नीलम आ हनक मा ँ िजनका हम चाची कहै त छलौ-ं
दयक अटूट िर ा बि
गेल छल
ु
ओिह पिरवार स ँ- तँ हनकर
सभक िस ह-िस
पाती
मेरी
ारी रजनी
तु ें अस ं
32
आशीवादर्
तथा मध◌ु् र
ेह !
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
तु ारी िकतनी ही िचिटृया ँ िमलती रही पर ु मै ं तु ें उ र नहीं दे सकी इसका मतलब तु ें भूल जाना
ु
कदािप नहीं हआ।
अपनी पिरशानी भी मै ं तु ें िलखकर बोर करना नहीं चाहती। फोन पर भी तुम
ु खराब हो गई
से दो बातें नहीं कर पायी िक राजन
झट फोन ले िलया। तु ारी तबीयत बहत
ु
थी यह जानकर दय िकतना दःखी
और िचि त हो गया मै ं तु ें श ों मे िलख कभी समझा नहीं
सकती। अपना
ाल करो रजनी अभी भी समय है व
है समय खो जा
पर तुम य ं को भी
ु आती है । नारी जीवन की गाथा कथा मै ं तुमसे अिध्क जान
खो बैठोगी। तु ारी याद मुझे बहत
ं
ँ
सकँ ◌ूगी नारी तेरी यही कहानी अचल
मे है दधू ् आखों
मे पानी िकसकी िलखी किवता है याद
ु
है न राज ू शरत से िमल
गया था। उस
आकर बताया िक शरत की तबीयत बहत
अब ठीक है । मै ं भी उसे देख
जाऊँगी। राज ू
यह भी बताया िक रजनी दीदी
ु हई
ु पर ु िफर फोन पर बात कर
रही है यह जानकर मुझे भी बडी खशी
के बाद
तुम नहीं आ रही हो। रजनी मेरी अ ी रजनी मेरी िच ी तु ें कभी समय से शायद
ु पापी हैं बदिक त है कभी उ ें चैन की रोटी नहीं िमली
सकेगी। तु ारी चाची बहत
खराब थी
12 को आ
पता चला िक
नही िमल
पता नही
िकत ं का कजर् मै ं ही उठाना पड़◌ा है । गमीर् सीमा पर है
ाण तो नहीं िनकलता पर ु सुबह से
बारह बजे राि इस घर मे रहना पडता है । मै ं तु ें भूल न सकी रजनी तु ारा
ार भरा
ु भा गया न जा
दय मुझे बहत
ों िजसके दय मे
ार नहीं है वह म
म
कहला
यो
नहींतु ारी
चाची
िस ा भवन
एक्जीबीशन रोड
पटना
चाचीक म ृ ु असमय भ
गेल मुदा
ु
हनक
प
सभ समय असमय हमरा झकझोिर जाइत
अिछप ू नीया दीदी
णाम।
आपके जा
ू
के दसरे
िदन सुबह मै ं आपको ये प
भेज रहा हूँ । दीदी आपके जा
के बाद
ँ
ु
ु
मेरी आखों
से भी दो बद
ंू आसँ ू िनकल पड़◌े। मुझे बड़◌ा दःख
हआ।
िमथलेश को भी बड़◌ा
ु
ु
ू
दःख हआ।अपना एक फोटो भेज िदजीयेगा। भिलयेगा मत दीदी। आप अपनी तबीयत का
ु
रखीयेगा। फोटो ज
भेज िदजीयेगा। नीलम ठीक है । उसे भी आपके जा
का बड़◌ा दख
ु
पहँ चा।
ब े को
ार तथा जीजा जी को मेरा णाम कह िदजीएगा। प ोतर शी दें गी।
आपका
अ ण
33
ाल
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
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पटना
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
16 8 74
ि य दीदी
णाम
आप उधर जा रही थी इधर हम ठगे से खड़◌े रह गए वह लौह उपकरण हमारी दीदी
को हमसे दरू कर िवजेता दै
ँ
की भा ँित लेकर भाग रहा था और हम िववश आखों
मे आसँ ू िलए
खड़◌े देखते रह गए दीदी
ा र
का स ंब ंध ही सब कुछ होता है हम
भगवान के वरदान की तरह अपनाया है
तो अपनी दीदी को
आपका ही भाई
दीप
17 08 74
आदरणीया दीदी
सादर चरण -
श।
र्
आपको तो न जा
सहरसा मे जाते ही
ा हो जाता है िक नीलम िस ा िदमाग से
िनकल जाती है । िच ी िलखना और पफोटो भेज
की बात ही दरू है । जीजा जी कैसे हैं मै ं
समझती हूँ वो पहले से अ े ही होंगे। आप कैसी है ◌े आप अप
िदये गये वचन को िनभाना
ु
सीिखए देवी जी हा ँ! भेज दें गे - ज र। सहरसा पहँ चते ही सारे वचन हवा हो गया है ना मा ँ
को आपसे िशकायत है िक आप ना वहा ँ हाल देती है और न यहा ँ का लेती हैं । अतः आपसे
िनवेदन है महारानी जी िक अब चार लाइन भी खत िलखकर डाल िदया करें ले िलया करें। समझी
ु त
ु त
फस
र् यिद न हो तो फस
र् िनकाल कर आइयें।
आपकी बहन
नीलम
एिहना बीरपुर डारमे ी स ँ हमरा बड
म छल। जखन वमाजी
र्
लोक अिभयोजक
सहरसा
ू बनाओल ओ
सुपौल मधेपुरा िजला छलैथ। तँ कोट र् मे बराबर बीरपुर जाइत छलाह। लिलत बाबक
डारमे ी बड कला क छल- हमरा ओिह डारमे ी स ँ
ार भ गेल छल। ओकर आकषणर् मे हम
िहनक स ंग लािग जाइत छलौ-तँ
ं
डारमे ी ल क सभ हमरा िकचारइत छल। तख क िडिस्
जज- शरण साहबक बेटा अपन प ों मे एिह बातक चच र् करैत छल ।
ु ही
हा ँ तो चाची आपकी तबीयत कैसी है एक बार मन कर रहा है िक आपसे कहूँ िक बीरपुर बहत
थडर्
ास जगह है आपको िचढ़◌ा
मे भी परमान
की अ भूित महससू करती थी।
प से आप बोर हो रही हैं
ा ठीक है मै ं ब
कर रहा हूँ ।
34
ों चाची मेरे
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
आपका
अिखलेश शरण
मुं गेर
सु ी वमा र् जी
चमचे की
न
े लैस
ील भरा णाम ।आशा है
।आपकी एक रचना माह मई 78 कादि नी के
ु । आप
हािदक
र्
स ता हई
िजस पिर
मे कोई अ रचनायें कािशत हों तो अव
सपिरवार सान
सकुशल लडड ू सी लुढक रहीं होगी
ं मे कािशत हई
ु । पढ
अक
का अवसर िमला
मे रचना िलखी है वा व मे ही सराहनीय है ।भिव
ू
सिचत
करें ।
लोकतं ा मे म ँहगाई के कदम सदा आगे चलते।
उ ुओं के प े ही फूल रहे फलतेफूलते।।मर
को भी िम ी का अब तेल नहीं िजस शासन मे।
तन के दीप जलाते लेिकन मन के दीप नहीं जलते।।
वैसे मुझे नहीं िलखना चािहये पर ु मै ं भी अवगत करा द ँ ू िक मै ं भी अिखल भारतीय
र के
हा - ंग किव स ेल ं का म ंचीय किव हँ ◌ू । िद ी ब ई उ॰ ॰ म॰ ॰ राज ान िबहार प ंजाब
ु ा हँ ◌ू । आकाशवाणी के
ा ों के
ों मे का
पाठ करके अबतक लोगो ं की चमचागीरी कर चक
िविभ कें ों से भी रचनायें सािरत होती रहती है । प -पि काओं मे भी रचनायें कािशत होती
रहती है । शेष शुभ सदैव कृपा प
ारा स ाव बनाय रहें । आशा है आप भी लोकतं ा का बोझा
ढो रहे होंगे। हमारी आ ा को शाि
दान कर
के िलए अप
दयो ार भरा एटमबम प
ारा हमारे पास तक अव धमकायेंगे।
चमचा हाथरसी
िव
द िसपफ र् अपका ही
हाथरस
उ
26 5 78
शेफािलका जी
नम ार ।
ु ा हँ ◌ू
आपका प िमला कल ही । ध् वाद िमिथल िमिहर मे कािशत आपकी सभी कहािनया ँ पढ चक
ु ा हँ ◌ू । सोना मािट वैदेही आखर िमिथला दत
ू अि प एव ं चा ंगुर मुझे
। उप ास भी पढ चक
कहीं नहीं उपल ् हो रहा है ।एक बात । मै ं आपके पास कुछ
भेज रहा हँ ◌ू जो अलग कागज
पर स ंल है । कृ ा इसका उ र भेज दें । इसे एक भेट वा ा र् ही समझ सकती हैं । इसका
उ ेख मुझे शोध ् मे कहानी का पिरचय के समय देना पड़◌े◌ग
ं ा । हा ँ! मै ं भागलपुर जा रहा हँ ◌ू
.. पी॰एच॰डी॰ हेतु मै ं भागलपुर िव॰िव॰ मे प ंजीकृत हँ ◌ू । गाईड भी वहीं रहते है और मेरे अ ज
भी अतः अ ज के पास जा रहा
हँ ◌ू तो देरी तो लौट
35
मे होगी ही । अतः कृ ा मेरे
ों का उ र भागलपुर ही भेजें ।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
शेखर
डा
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
साद
सी एस लाल
फोरेनिसक मेडीकल कालेज
भागलपुर
20 9 74
ई प
हमरा एकटा मानिसक उलझन मे द
दे
छल। एिह प क स ंग स ंल
प
मे
एकटा
छल- आपकी तुलना लोग महादेवी वमा र् से करते हैं । महादेवी वमा र् के जीवन से हम
सभी पिरिचत हैं ! िपफर आप
ा कहती हैं किहयो काल हम अपन बाल ब ा पिरवारक स ंग स ंगत
निह वैसा पाबैत छी। कहबा लेल चाहै त छी िकछ किह दैत छी िकछ-हमर कथनक श
ि या होभ
ँ
लगैत अिछ। आ ई तँ को
अनची ार शेखर साद छलाह। हमर आिख
रा गेल छल उ र
सोचैत खोजैत। हमरा असहज देिख
ु
वमा र् जी सहज क देलिन- एकर उ र तँ
छैक- अहा ँ िलिख िदऔक जे हम बझैत
छी लोग
ं
हमर रचनाक तुलना महादेवी स ँ करैत छिथ निह िक हमर जीवनक सहरसा िजला मे जे पी आदोलन
ु
मे हम बड सि य छलौ।
ं
घर मे घसल
पदाशीन
र्
िस् ायो ं
के हम बाहर जलु सू मे अन
रहीं-
आदरणीया शेफािलका वमा र् जी
सादर
णाम मै ं सहरसा आया था । आप नहीं थी । िद॰ 05 नव र की अ॰ भा॰ मिहला
स ंगठन की ा ंतीय स ंयोजक म ंदािकनी दानी सहरसा आ
1 मिहला काय र् म 2 कायकर् ा र् कायकती
र् र् बैठक 3
िवचार िवमश र् के िलय ा ंतीय स ंयोिजका िद. 25 अ
रही है । उसी िदन रात को लौटेगी - कायक
र् ा र् की
बेगुसराय को कायक
र् ा र् स ेलन मे आपकी तीक्षा क
रही है । तीन तरह के काय र् म अपेिक्षत है ।
सावजिनक
र्
काय र् म! इसी स ंब ंध ् मे िवशेष
ूबर रिववार ातः जानकी ए
स से सहरसा आ
बैठक हो । िदना ंक 3 8 नव र के
ग
ँ ा।
इस बीच नागपुर मे आयोिजत एक बैठक को लेकर कुछ गलतफहमी सी हो गई ऐसा कुछ भी
सु
भारती से और कायालय
र्
म ं ा◌ी ी प ंचनदीकर से बातो ं से और कुछ आपके प को पढ
ु
ु
से अ भव हआ।
ोंिक अभी िकसी भी देश मे िविधवत मिहला िवभाग का तं ा काय र् नहीं हआ
ु
हआ
था कें
से मिहलाओं के स ंब ंध के प क जो म ंदािकनीदाणी मिहला काय र् की मुख
भेजा
देश स ंगठन म ं ा◌ी के नाम भेजा जो 1999 का िलखा था।
ोंिक उ ों
कथा था िक कोई 5
ु कर काय र् समझ लें हम
मिहलाएँ नागपरू पहँ च
अप
िवभाग स ंगठन म ंि यो ं को 912 नाम पछू कर
उ ें भेज
की द ृि
से बातें कर
को कहा था। ी सु
म भारती जी
हमे यह
बताया था िक सहरसा िजला का मिहला स ंगठन का काय र् आप करेंगी और सहरसा नगर का काय र् ीमती
िनमला
र् वमा र् करेंगी।
ों◌ंि◌क एक मिहला से दो जाना वहा ँ से ठीक रहेगा ऐसा भारती जी
सोचा
होगा और आप दो ं को जा
का आ ह िकया होगा। प देकर उधर के
ा की काय र् गित
का िववरण देती रहें गी। मैिथली महास ेलन के मिहला िवभाग की अ क्षता आप सफलतापवू क
र् कर
लौटे ंगी। आपके मैिथली लेिखका मे सव र्
ान ा कर
की बात तो हमे प पढकर ही ज्ञात
36
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
हई।
िकस भाई को अपनी बहन के इस कार के गौरव से अिभमान न होगा हम देश सिमित
की ओर से भी आपको इस उपल
मे बधाई देते हैं । िदन पर िदन मेरी यह ितभास Â◌ा
बहन ऐसी ही गित पथ पर अ सर हों यही भगवती से ाथना
र् है ।
नाना भागवत
िव
िह ु पिरषद
नाला रोड
पटना
ं मे....
(अिगला अक
िव िह ू पिरषदक एिह लेटरपैड मे अ क्षक जगह पर प ं
जयका ंत िम छलिथ किहयो िजज्ञासा निह रहल-.....)
२
नाटक- बेटीक अपमान
नाटककार- बेचन ठाकुरजी
ु
रागंज (मधबनी)
च
मश:
बेटीक अपमान-
बेचन ठाकुर
द ृशय् पा ँिचम-
37
जयका ंत िम
पटना छल कोन
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
्
(सथान
बलवीर चौधरीक आवास। िबयाहक तैयारी पणू र् भए गेल अिछ। जयमालाक म ंच तैयार आ
्
सजल अिछ। मचक आग ू बालटीनमे
लोटा आ पािन अिछ। कुसीर्पर गंगा राम चौधरी बैिस कऽ आ◌ेङहा
रहल छिथ।)
गंगाराम-
(नीनमे) हमहँ ु बेटाक िवयाह करब। दहेजमे एगो उजरा आ एगो किरया ब ु लेब।
ु
ठा ँठ बकरी लेब सेहो जरसी। किनया लेल कानमे बलकी
लेब। अपना लेल एगो फाटलो-िचटलो
किनया लेब। बाआ लेले एगो गदहा लेब। अपना किनया लेल ठोरर ंगा लेब। एगो मोचना लेब।
ओिहस ँ अपन किनयाकेँ सौसे
ं देहक केश उखािर देबैन। आओर नगद एगारह लाख एगारह सए टाका,
डालीमे एक लाख मच्छर आ समधी िमलानमे एक हजार एक उड़◌ीश लेब। आओर पुतौह लेल.....।
्
्
(चनदेश
वर
चौधरीक
्
्
चनदेश
वर-
वेश)
गंगा राम, गंगा राम, रओ गंगा राम।
ु फर
ु ा कऽ उिठ खस ैत-पड़◌ैत)
(गंगाराम फर
गंगाराम्
्
चनदेश
वरगंगाराम्
्
चनदेश
वर-
्
जी भैया, जी भैया, केमहर
गेलीह भौजी?
सपनाइत छेँ की?
निह भैया, अपन बेटाक छेकामे गेल रही।
नीन तोड़◌ू मुँ ह-हाथ धोउ।
ु
्
(अनदरस
ँ दइ-चािर
टा बमक आवाज होइत अिछ।)
गंगाराम लगैत अछथ ् बरयाती आिब रहल अिछ।
गंगाराम-
्
आबए िदयौन। कटहर-चूड़◌ा खेताह। एतेक अबेर आएल बरयातीकेँ की सवागत
होएत? अपन ठरल-ठरल खाएत आ िसरिसराइत भागत।
(बरयातीक
वेश। दीपक चौधरी, मोहन चौधरी, सोहन चौधरी, गोपाल चौधरी,
ु
कुमार ठाकुरक आ चािर-पा ँच हनक
समाजक लोक बरायातीमे आएल छिथ। सभ िकयो म ंचपर
िवराजमान छिथ। पाछू काल सुरेश कामत
दीपकसुरेशदीपक-
38
ु
पहँ चलाह।)
गोर लगैत छी मामी ी।
नीके रहू भािगन।
बरयाती अएवाक मोन पड़ि◌ गेल?
दीप
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
सुरेश-
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
की करबैक भािगन, असग आ छी। छेका िदन समएपर महीसकेँ निह
ु
ु
दहलह
ँ।
तेकर फल यएह भेल, महीस िनछए गेल।
(सरयातीक
्
्
वेश। हरे राम िसंह, बरवीर चौधरी, गंगाराम चौधरी, चनदेश
वर
चौधरी आ
िहनक अपन समाजक लोक छिथ)
हरेराम-
(बरयातीस ँ) सरकार सब, चरण पखारल जाउ। बड राित भए गेल। हमर समाजक
्
् चरण पखारल जाउ, सरकार सभ।
कतेको लोक चिल गेलाह। नशतो
पािन हरेएतैक। जलदी
(सभ िकयो चरण पखािर कऽ बैस ैत छिथ।
्
्
अनदरस
ँ गंगाराम शरबत, नशता,
चाह, पान, बीड़◌ी सुपारी इत्यािद आ त छिथ।
ं
्
नशता-पािन
आरामस ँ भए रहल अिछ। चाय-पानक बाद सरयाती सभ अदर
तहन जनानी सभ जयमाला करेवाक लेल अएलीह। ओ सभ
कए रहलीह फेर लड़ि◌काक पिर मा करए
पिरछिनक गीत गािब पिरछन
जयमाला कराबैत छिथ। तहन लड़ि◌की लड़ि◌काक
ं
आशीवादर् लय सभ जनानीक स ंग अदर
जाइत छिथ।
आरती उतािर आ णाम कऽ
कुमार ठाकुरक वेश)
ू
(बरयातीस ँ) सरकार सभ भोजनमे चलै चल।
दीपहरेरामू
चल।
पिह
जाइत छिथ।
ू बरयाती सभ। भोर होमए जा रहल अिछ। चल,ू चलै
चलै चल,(
(सबहक
्
सथान)
पटाक्षैप
१.
१.१.कु
िशव कुमार झा‘‘िट ू‘‘् र्
म ् अनतमनक-(समीक्षा)१.२.
समीक्षा (अिचस)
र्
२.
39
डा. शेफािलका वमा र् -
ीित ठाकुर क मैिथली िच कथा
दीप
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
३.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
ं ४.
् नक
म अनतम
र्
लेल प -शेष अश
राजदेव म ंडल, कु
ठाकुरक दनु ू िच कथापर धीरेन ्
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
धीरेन ्
कुमार-
ीित
कुमार एक नजिर
१.
िशव कुमार झा‘‘िट ू‘‘,
नाम : िशव कुमार झा, िपताक नाम:
ितिथ : 11-12-1973, िशक्षा :
0 काली का
ू
झा ‘‘बच‘‘,
माताक नाम:
ातक ( ित ा), ज
. च
कला देवी, ज
ान ◌ः मा क ◌ः मालीपुर मोडतर, िज0 -
ू
बेगसराय,म
लू ाम ◌ः
ाम + प ालय - किरयन,िजला - सम ीपुर, िपन: 848101, स ं ित :
स ं हण, जे. एम. ए.
ोस र् िल., मेन रोड, िब
ुपुर, जमशेदपुर - 831 001, अ
गितिविध : वष र्
1996 सॅ वष र् 2002 धिर िव ापित पिरषद सम ीपुरक सा ं ृितक गितविध एव ं मैिथलीक
हेतु डा. नरेश कुमार िवकल आ
स ंल ।
१.१.कु
ी उदय नारायण चौधरी (राष् पित पुर ार
ा
ब ंधक,
चार-
सार
िशक्षक) क
मे
म ् अनतमनकर् ्
(समीक्षा)
िकछु लोकक ई
व ृित होइत अिछ जे सिदखन अपन चल जीवनमे नव-नव
रहै त अिछ। एिह नव
कारक
योग करैत
योगक कारण जहानमे अपव क िवहान देखएमे अबैत अिछ।
् ितक इच्छास ँ निह जनम् लऽ सकैछ, ई तँ
वयक्
सि क
योग धिमता
र्
ितभाक पिरणाम िथक। मैिथली सािहत्यमे
्
योग धमीर् सरसवती
पु क अभाव निह पर ंच वतर्मान कालमे एकटा एहेन
िमिथले अपन ऑचरमे सि य कएलिन, जे तत्कािलक मैिथलीक दशा वदलवाक
योगधमीर् िमिथला पु केँ मॉ
यास कऽ रहल छिथ।
्
्
् ित केओ अनिचनहार
्
ा ंितवादी आ समयक
िवचार धाराक समपोषक
ओ वयक्
निह- मैिथली सािहत् यक
ं
्
अतजा
लर् पािक्षक पि का िवदेहक समपादक्
लोक मैिथली सािहत् यकेँ अनतजा
लस
र् ँ जोड़वाक
थम
ी गजेन ्
ठाकुर छिथ। भऽ सकैत अिछ जे िकछु
यास कए रहल हएताह पर ंच एकटा म ू र्
प दऽ 64
ं धिर पहँ चेवाक
ु
् । सािहत् यक नव-नव िवधा आ समाजक वेमा
अक
काय र् गजेन ् े जी कएलनिह
व केँ
्
कऽ सामयवाद
आ समाजवादकेँ वैदेहीक मािटपर आिन हमरा सबहक माथपर
ं
लागल अनसोहा ंत कल ंककेँ धो देलिन। मा 64 अकमे
जे काय र् भेल अिछ ओ कतऽ-कतऽ पिह
मैिथलीक आिलंगनमे आव
्
भेल छल, आत् म अवलोकन करवाक पशचात्
जानल जा सकैत अिछ। समाजक फूजल, बेछपप् आ
40
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु सकैत
उदासीन व केँ अपन वयनाक मानस पटलपर आच्छािदत करवाक लेल साहस सभ केओ निह जटा
अिछ। मा
भॉज पुरयवाक लेल मानस पु
एहेन काय र् निह कएलिन, ओिह उपेिक्षत व क रचना कारक
्
रचनामे िवषए-वसतुक
गितशीलता आ तादात्मय् वोध ककरोस ँ कम निह अिछ।
योगधमीर् गजेन ्
जीक कमक
र् दोसर आमुख िथक िहनक लेखनीक धारस ँ िनकलल इन ् ध षक सतर ंगी गुलालस ँ भरल भावक
् नक”
म अनतम
र्
आत्मउदवोधन- “कु
्
् बाल सािहत् य, समालोचना,
एिह पोथीकेँ की कहल जाए उपनयास,
गलप,
्
व ंध वा कावय?
सािहत्यक
सभ िवधाक अिमर रसकेँ घोिर व ंगोपखाड़◌ी वना देलिन जतए ई कहव अस ंभव अिछ जे गंगा, कोशी,
ु
यमुना वा हगली
ककर नीर कतए अिछ?
शीषक
र् देिख अकचका गेल छलहँ ,ु ई महाभारत मचौता की! मुदा अपन
मानवक
ू
दएक दटा
दएस ँ सोचल जाए
त्येक
् नर् सिदखन सत् य बजैत अिछ ओिहठॉ िमथयाक
्
्
प होइत अिछ, मुदा अनतम
सथान
निह।
कु
रणभूिम अवशय् छल पर ंच ओिहठॉ सत्यक िवजयक लेल यु
्
िवनाश लीला मचल छल। हमरा सभकेँ अपन अनतआर्
त्मामे कु
िनदेर्शन कऽ रहल छिथ गजेन ्
्
भेल। ओिहठॉ धमसर् ंसथापनाथ
र्
क दशनर् करएवाक लेल िदशा
जी।
मैिथली सािहत् यक कोन असत् यकेँ त्याग करवाक चाही? िकअए सुमधरु वयनाक एहेन दशा भेल? नव
ु
् कोणस ँ हएत। हमरा बझ
पथक िनमाणर् नवल द ृषिट
् कोणकेँ
एिह पोथीमे सािहत् य समागमक लेल द ृषिट
ाथिमकता देल गेल अिछ। एहेन िवलक्षण सािहत् यपर आलेख िलखव हमरा लेल आसान निह अिछु
मुदा द:साहस
कऽ रहल छी-
भऽ रहल वण-वण
र्
र् िन:शेष
् ँ
शबदस
कटल निह उधेशय्
मोनमे रहल मनक सभ वात
्
अिछंजलस ँ सध: सनात
्
् णू र् पिरवारक लेल स श किह सकैत छी।
सात खणडमे
िवभक् त एिह पोथीकेँ समप
्
व ंध-िनव ंध-समालोचना:- एिह खणडक
आिद लोकगाथापर आधािरत कथा सीत-वस ंतस ँ कएल गेल अिछ।
्
्
उ र मधयकालीन
इितहासमे अलहा-ऊदल,
शीत वस ंत सन कतेक कथा
चिलत छल, जकर म ंचन प क
्
पमे वतर्मानकालमे िवहारक गाम-गाममे भऽ रहल अिछ। एक राज पिरवारक िवषय-वसतुक
िच ण
करैत लेखक सतमाएक ि◌स हपर
शन् िचनह् लगैवाक
यास कएलिन अिछ? कथाक आर ंभस ँ इित
ं
् क
धिर ममसर् पश
र् अ भव होइत अिछ। कथाक अतमे
िवमाताकेँ ओिह पु क छाया भेटलिन जकर
पराभव ओ कऽ दे
छलीह।
41
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
मैिथली सािहत् यक सभ िवधाक मा ंजल सािहत् य कार मानल जाइत छिथ। हनक
ी मायाननद् िम
इितहास वोधक चा
्
सतुत
कऽ गजेन ्
् भ
मुख सतं
्
थम ं श ैलपु ी च, म ं पु , पुरोिहत आ स ् ीधनपर समयक
आलेख
जी पवू मे
र् िलखल गेल
्
ब ंधक द ृषटकोणके
ँ चु
मायाननद् जीक
कालीन इितहासपर आधािरत म ं पु
्
ती दऽ रहल छिथ। ऋृगवैिद
क
मुख कृित मानल जाइत अिछ। एिह पोथीक लेल
्
माया जीकेँ सािहत् य अकादेमी पुरसकार
भेटल अिछ। म ं पु
्
पाशचात्
य इितहासस ँ
भािवत अिछ।
्
्
म ं पु क स ंग-स ंग पुरोिहतमे सेहो पाशचात्
य स ंसकृि◌
तक झलिक देखए अबैत अिछ। अपन
समालोचनाकेँ गजेन ्
जी अक्षरश:
मािणत कऽ दे
शन् िचनह् निह ठाढ़ कएलिन। समीक्षाक
प एह
ू रचना स ंसारपर को
छिथ, मुदा मायाबावक
तरह
होएवाक चाही। समीक्षककेँ प◌ू् वा र् ह रिहत
रहलास ँ सािहत् ियक कृितक मयादा
र् भं ग निह होइत अिछ।
ु
्
केदारनाथ चौधरी जीक द ू गोट उपनयास
‘चमेली रानी’ आ ‘माहर’पर
गजेन ्
जीक समीक्षा पणू त:
र्
ु रास रचनाक िव ी समप
् णू र् मैिथल समाजमे
सत्य मानल जा सकैत अिछ। मैिथली सािहत् यमे बहत
जतेक निह भऽ सकल, ‘चमेली रानी’क ओतेक िव ी मा
जनकपुरमे भेल। एिहस ँ एिह सािहत् यक
ु मैिथली सािहत् यक लेल
ाकेँ देखल जा सकैत अिछ। ‘माहर’
ित पाठकक
्
ा ंितकारी उपनयास
्
िथक। अरिवनद् अिडगक कृितक चिर स ँ एिह उपनयासक
एक पा क तुलना लेखकक भाषायी सम ृ ताकेँ
दिशत
र् करैत िअछ।
् ँ
िवदेह-सदेहक सौजनयस
ुित
काशन
ारा निचकेता जीक एकटा नाटक ‘
कािशत भेल अिछ। एिह नाटकक लेखनपर निचकेता जीकेँ कीितर् नारायण िम
अिछ। नाटकक चा
्
्
कललोलक
तकर् पणू र् िवशलेषण
कऽ गजेन ्
जी समीक्षाक
एण ् ी मा
िवश’
्
सममान
देल गेल
प बदलवाक
यास
ु कताक िवषय वसतु
् िनषठताके
्
कएलिन अिछ। एिह नाटकमे तािकर् कता आ आधिन
ँ ठाम-ठाम नकारल गेल
अिछ।
रचना िलखवास ँ पिह
्
अधयायमे
गजेन ्
्
्
जी मैिथली सािहत् यमे भाषा समपादनपर
िवशेष धयान
देवाक
्
ुिटपर पणू र् पस ँ धयान
निह देल जा रहल अिछ।
यास कएलिन। अपन सािहत् यमे भाषायी
्
्
्
्
्
किवशेखर जयोित
रीशवर,
िव ापित शबदावली,
रसमय किव चतुर्भूज शबदावली
आ ब ीनाथ शबदावली
्
ारा िमिथला-मैिथलीक सवकालीन
र्
शबद् िवनयासक
आ शबद् भं डारक िवस ् त वणनर् कएल गेल अिछ।
्
्
एिहस ँ िनशचय
भाषा समपादनमे
सहायता भेटल। कतेक रास एहेन शबद् अिछ जकर िवषयमे हम की
सािहत् यक पैघ-पैघ वे ा पिह
् त
निह ज त होएताह। िनशिच
सािहत् यकार आ अस ैिनक सेवाक ओिह
पे
्
पस ँ ई अधयाय
पाठकक स ंग-स ंग
् िवषयक
ितयोगीक लेल उपयोगी हएत जे मैिथलीकेँ मुखय
् िलत होएवाक लेल
ितयोिगतामे समिम
यत्नशील छिथ। समीक्षक हमरा सबहक मधय् एकटा नव
िवधाक चच र् कऽ रहल छिथ- हाइकू। एिह िवधापर मैिथलीमे पिहनहँ ु रचना होइत छल जेना- “ई
प
अरदराक मेघ निह मानता रहत बरिसकेँ। मुदा एिह िवधाकेँ क्षिणका नाअ◌ोस ँ जानल जाइत छल।
जापानी सािहत् यक
ारा स ृिजत एिह प
् क िच ण मैिथली सािहत् यमे गजेन ्
पक वासतिव
जी आ
्
जयोित
झा चौधरी कएलिन अिछ।
िमिथलाक लेल
लय कहल जाए वा िवभीिषका- ‘बाढ़ि◌’ ई शबद् सुिनतिह कोशी, कमला, बलान, गंडकी,
ं ँ ओझराएल लोक सभ कािप जाइत छिथ। एिह समसयाक
्
् ित, सरकारी
बागमती आ करेहक आतस
सिथ
ु
् कोण नीक बझना
यासक गित आ िदशाक स ंग-स ंग बचवाक उपाएपर लेखकक द ृषिट
जाइत अिछ।
42
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
को
ठाम आ को
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
आन धाममे जौ ं हमरा लोकिनक िवषयमे पता चलए-की मैिथल छिथ, लोकक
्
् ट् भऽ जाइत अिछ- हम सभ मछिग ा छी। एकर कारण जे धारक कातमे रहिनहार
द ृषटकोण
सपष
जीवक जीवन जलचरे जका ँ होइत अिछ।
् ित करैत छिथ। तेँ
जलीय जीवक भक्षण अिधका ंश वयक्
्
जाइत अिछ, आ वासतवमे
हम सभ मॉछक
ा
हमरा सभकेँ मॉछ आ मखानक
मी छी। अिधका ंश मैिथल
ु
मी बझल
ा ण पिरवारमे सोइरीस ँ
धिर माॅछक भक्षण अिनवाय र् अिछ। अ◌ान जाितमे अिनवाय र् तँ निह अिछ, मुदा ओह ु व क अिधका ंश
्
्
मी छिथ। लेखक एिह लोकक भक्षण धारकेँ धयान
धरैत कृिष मत्सय् शबदावली
लोक मॉछक
् अिछ।
िलखलनिह
एिहमे सभ
कार मॉछक आकार, र ंग,
्
पक िवशलेषण
कएल गेल अिछ। कृिषकायक
र् लेल जोड़◌ा
्
् वयवस
्
्
वरदक स ंग हर पालो इत्यािदक जवलन
त
थापर
लेखकक िवचार नीक मानल जा सकैत अिछ।
ू आ खीराक िविवध
करैल, तारवज
्
कारक नाओ सुिन गामक िजनगी समरण
आिव जाइत अिछ।
्
् नके
एिह खणडक
सभस ँ नीक िवषय जे हमरा अनतम
र् ँ िहलकोिर देलक ओ िअछ िवसम् ृित किव- प ंिडत
राम जी चौधरीक रचना स ंसारपर
वाहमय आ िवस ् त
्
सतुित
।
हमरा सबहक भाखाक स ंग ि◌कछु िवषमता रहल जे एिहमे कतेक रास एहेन रचनाकार भेल छिथ जे
अप
स ंग अपन रचनाकेँ गेंठ बनह्
िवदा भऽ गेलाह। एकर कारण एिहमे स ँ िकछु रचनाकारक
ु
रचनाक स ंकलन निह भऽ सकल वा भेवो कएल तँ पाठक धिर निह पहँ चल।
एिह लेल ककरा दोष देल
जाए रचनाकारकेँ आ हमरा सबहक भाषाक तत्कालीन रक्षक लोकिनकेँ? एिह भीड़मे राम जी चौधरीक
ू रचना सेहो अिछ।
नाओ सेहो अिछ। मैिथली सािहत् यमे रागपर िलखल रचनामे राम जी बावक
ु
ु
भक् ितमय राग िवनय िवहाग, महेशवाणी, ठमरी
ितरहता,
ुपद, चैती आ समदाओनक
ु
पमे हनक
लेखनीस ँ िनकलैत गीत सभ अलमय् अिछ। शास ् ीय श ैलीक मैिथली गायनमे वतर्मान िपरहीक लेल
् उपयोगी रचना सभकेँ
अत्यनत
काशमे आिन गजेन ्
्
कएलिन अिछ। सत्यकेँ सवीकार
करवाक सामथय
र् ् मा
जी िमिथला, मैिथली आ मैिथलपर पैघ उपकार
िकछुए लोकमे होइत अिछ। गजेन ्
जी ओिह
् ित छिथ पिरणामत: मैिथली सािहत् य भोजपुरीस ँ आगा ँ मानल जाइत अिछ
लोकक पातिरमे ठाढ़ एक वयक्
् ए भोजपुरी रास पिरमािजर्त अिछ। भोजपुरी सािहत्यक काल पु ष िभखारी
मुदा गुणवताक द ृषिट
्
ठाकुरक मम र् सपशीर्
िवदेिशया एिह भाषाक अलग पिहचान भेटल। मैिथली भाषामे िवदेिशयाक कमीक
् कारण रहल- वासक
मुखय
िवदेिशया प
्
ित उदासीनता। जौ ं िलखलो गेल तँ महाकावयक
प दऽ देल गेल।
्
्
आ िवधापितक िलखल? हमरो िवशवास
निह भेल छल। िव ापितकेँ मुखयत:
गािर
ैं
क
ु
किव मानल जाइत अिछ। ओना हनक
रचनाकेँ भक् ित रसस ँ सेहो जोड़ल जाइत अिछ। कु
म
् नक
अनतम
र्
पोथी पढ़लास ँ नव सोच मोनमे आिव गेल। जकरा भोजपुरी सािहत् यमे िवदेिशया कहल
्
्
गेल वासतवमे
मैिथलीमे ओ अिछ- िपया देशानतर।
िव ापितक
पाल पदावलीमे एिह
कार रचना सभ स ंकिलत अिछ, मुदा किहयो एिह
् ट् अिछ िपया देशानतरक
्
निह कएल गेल। कारण सपष
नाटय
पे मिहमा म ंिडत
प िमिथलाक िपछड़ल जाितक मधय्
ू रहव उिचत बझैत
ु
दिशत
र् कएल जाइत अिछ। तेँ अ सोची लोकिन एकरास ँ दरे
छिथ। एिहस ँ
्
मैिथलीक दशा-िदशाकेँ नव गित कोना भेिट सकैत अिछ। मैिथली लोकभाषा अिछ, लोक स ंसकृित
केँ
बढ़यवाक
43
यास करवाक चाही। गजेन ्
् कोणकेँ िवमिव
् त करवाक चाही।
जीक सोझ द ृषिट
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
् ” – गािर
्
्
“एतिह जािनअ सिख ि यतम वयथा
ैं
क-िवरह वयथाक
वणनर् मुदा अिछ तँ िपया देशानतर।
ी सुभाष चन ्
अिछ।
यादव जीक कथा स ं ह ‘ब त-िवगड़◌ैत’पर गजेन ्
ु
वेिशकामे हनक
कथा ‘काठक बनल लोक’ पढ़
जीक समीक्षा अपवू र्
ु
छलहँ ।
काठक बनल लोकक नायक वदिरयाक
्
्
मम र् देिख पाथरो िपघिल जा सकैत अिछ। वासतवमे
सुभाष जी मैिथली सािहत् यक फनीशवर
नाथ रे
छिथ। मिहमा म ंडनक कालमे मा
भा ँज पुरएवाक लेल िहनक कथा पा
ममे दऽ देल जाइत अिछ।
ं क रचनाकेँ किहया धिर उपहासक पिथयामे झाॅिप कऽ राखल जाएत? एक निह एक िदन छीप
आचिल
ू
उिधया जएत आ सत्यक सामना करए पड़त। लोक धमीर् सािहत् यकार चाहे ओ धमकेतु,
कुमार पवन
कमला चौधरी, सुभाष चन ्
यादव, जगदीश
साद म ंडल वा को
ु हनका
ु
आन होथसबहक रचनाक
् क समीक्षा
उपेक्षा निह होएवाक चाही। सुभाष जीक कथा किनया-पुतरा, ब त-िवगड़◌ैत आ द ृषिट
देिख समए-कालक दशाक अिवरल
न्
् त भऽ जाइत अिछ। ऋृणी छी जे गजेन ्
उपसिथ
ं
् । इटर
्
पोथीपर समीक्षा िलखलनिह
टक लेल अनतजा
लर्
तकनीकस ँ गजेन ्
बाव ू एिह
योग, नीक लागल। वेवसाइट बनएवाक
ु
ु
जीक उ ोधन आ िनयमन निह बिझ
सकलहँ ।
तीन वेिर पढ़लहँ ु मुदा जेठक तेज
िवहािर जका ँ मॉथपरस ँ उड़ि◌ गेल। नव-नव
ु
ना भुटका बिझ
जएताह। तकनीकी युगक
नाक
ु
ु
्
्
समरण
शक् ितक आॅगन पैघ होइत छिथ तेँ हनके
सबहक लेल एिह अधयायके
ँ छोिड देलहँ ।
्
लोिरक गाथा समाजक उपेिक्षत व क स ंसकृित
पर आधािरत अिछ। सहरसा-सुपौलक वीर आिद पु ष
्
लोिककक पिरचए-पातमे पौरािणक मैिथल स ंसकृित
क दशनर् होइत अिछ।
् ध षा सन
िमिथलाक खोजमे जनकपुर, सुगगा
ु
्
पालक सथलस
ँ लऽ कऽ मधबनी
िजलाक कतेको उ र
ू
ू
ू या
मैिथल गामस ँ दिक्षणमे जयम ंगलागढ़ (वेगसराय)क
चच र् कएल गेल अिछ। पवमे
पिण
र् िकशन गंजक
ु कर् म ंिदरक चच र् कएल गेल अिछ।
्
् ममे चामुणडा
्
कतेक सथलस
ँ लऽ पशिच
(मुजफ्फरपुर)क मॉ दगा
्
्
िमिथलाक ि◌कछु सथानक
वणनर् एिह सुचीमे निह भेटल जेना- सती सथान
(गाम-शासन
खंड-हसनपुर
्
्
्
िजला- समसतीपुर)
आ उदयनाचायक
र् जनम् सथली
(गाम-किरयन िजला- समसतीपुर)।
एिह लेल
लेखककेँ दोष निह देल जा सकैत अिछ, िकएक तँ िमिथलाक खोज- िवदेहस ँ लेल गेल अिछ, जािहमे
गजेन ्
जी अवाहन कए
छिथ, जे िजनका लग को
िस
ु
्
सथलक
िवषएमे जानकारी हअए
जे
ू
ू
् िलत निह अिछ तँ ओकर सचना
एिहमे समिम
देल जाए जािहस ँ ओतए जा कऽ छाया िच क स ंग सचना
्
सि िलत कएल जा सकए। िकछु सथल
आर छूटल भऽ सकैत अिछ,
कऽ सकैत छी।
मश:
१.२.
िशव कुमार झा ‘िटलल् ’,ू जमशेदपुर।
समीक्षा (अिचस)
र्
44
वु
पाठक एिह िवषएपर काय र्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
वतर्मान मैिथलीक किवताकेँ त ण किव आ कविय ीक पदापणस
र् ँ नव गित भेिट रहल अिछ। एिह
्
् कोणस ँ सजल रचना सबहक रचनाकारक व मे एकटा
नवतुिरया मुदा िवषए-वसतुक
द ृषिट
कविय ी छिथ-
वासी मैिथलीक
्
ीमती जयोित
सुनीत चौधरी।
्
“अिचसर् ” जयोित
जीक
थम स ंकिलत किवता स ं ह िथक। एिह पोथीमे ३७ गोट किवता स ं िहत
ु
्
अिछ। जयोित
जी कतेक िदनस ँ रचना करैत छिथ, ई तँ निह बझल
अिछ मुदा िवदेहक पदापणक
र्
ं ँ िहनक रचना
िकछुए अकस
ु
कािशत हअए
लगल।
् आ त वमे आग, अनल आिद मानल जाइत अिछ मुदा मैिथलीमे आिग,
अिचसक
र्
अथ र् तत्सममे अगिन
ं
अगोर
आ लु ी सेहो कहल जा सकैछ। एिह पोथीक शीषक
र् मा
स ंब ंध निह। पिहल किवता “हाइकू”
किवताक भावस ँ एिह शीषकक
र्
को
आ िवरहक िमि त िच ा ंकन करैछ। हाइकू पिह
्
् क
जयोित
जी एकर वासतिव
कविय ीक भावनापर आधािरत अिछ,
कृित वणन,
र्
मैिथलीमे क्षिणका नाओस ँ िलखल जाइत छल, मुदा
् णू र् किवतामे अनत
पक िच ण कएलिन अिछ। समप
र् ् न ्
ं ंग
्
भीड़क मधय् वयथा-टीशक
अतर
दयक
ृ ंगार, िवचार मलू
वाहमयी
्
सतुित
..... म
आ
स ताक
रम लागल।
एकटा हेराएल सखीमे कविय ी किवताक नाियकाकेँ अपन सखी माि◌न ओकरा िस हीस ँ भेटल पीड़◌ाक
उ ोधन कऽ रहल छिथ। नारी मोनमे अ ुउच्छवासक स ंग-स ंग समपणर् सेहो रहै त अिछ। ओना तँ आय र्
्
् ् देवो न जानाित कुतो म षय:”
्
नथमे
“ि या चिर : पु षसय् भागयम
िलखल गेल अिछ, मुदा एकरा
ु होइत अिछ तेँ भावनात्मक छलक
हम उिचत निह मा त छी। आयावतर्
र् क नारीक मोन िव लआ भावक
िशकार शी
भऽ जएवाक स ंभावना देखल जा सकैछ। पु ष
धान समाजमे दोस नारीपर देल जाइत
अिछ मुदा पु षक चिर हीनताक नाओ की देल जाए? जीवन भिर एक पु षक
ित समपणके
र् ँ केन ्
ु त छिथ अपन सखीक िनशछल
्
्
िवनद् ु बना कऽ कविय ी दिख
समपणस
र् ँ। ई किवता सदेह ३ मे कलपना
शरणक रचनाक
पमे
किहया धिर चलत। छ
्
कािशत भेल अिछ। निह जािन बेिर-बेि◌र नाओ बदिल कऽ िलखवाक परमपरा
नाअ◌ोक िनणक
र् एकवेिरमे कऽ लेवाक चाही, निह तँ रचनाकारक िवलिगत
मानिसकताक बोध होइत अिछ।
वतर्मान मिहला व मे
करी करवाक इच्छा शक् ित
् क
दोसर पिहया तँ नारी छिथ। स ृजन आ स ृषिट
युवा मिहला व क
्
वल भऽ रहल अिछ। सवभािव
के अिछ जीवनक
पमे पिहल पिहया सेहो किह सकैत छी। पर ंच
व ृित चंचल होइत अिछ। एिह अ ड़पनमे अपन कमगित
र्
केँ सेहो चंचल बनएवाक
यास कऽ रहल छिथ कविय ी अपन किवता “एकरा
करी चाही”मे। कायालयक
र्
सभटा काज िहनके
्
मोनक होएवाक चाही। काज कम मुदा कैंचा वेसी चाहै त छिथ। बॉसकेँ आनहर
आ विहर होएवाक
्
् कोण मा
कामनामे हासयक
दशनर् होइत अिछ। भऽ सकैत अिछ िहनक एहेन द ृषिट
ु
हअए।
“पिनभरनी” किवता पढ़ि◌ हमर मॉथ सु
किवतेटा मे
ु
भऽ गेल, अकचका गेलहँ ।
जािह नारीक बाल काल
ु
ु
्
जमशेदपुरमे बीतल हअए,
आब ल ंदनमे रहै त छिथ हनकास
ँ एहेन शबदक
आश कोना कएल जा सकैत
अिछ? गामोमे आब घैल आ इनारक
ित आसक् ितस ँ किवता ओत
जाितक
् आ द ृषिट
् कोण सम ंजन खबू नीक लागल। अपन
ोत अिछ। िवषय वसतु
्
ित िस हक ममसर् पशीर्
िच ण भऽ सकैत िअछ जे एिह
ू -पुरानस ँ जयोित
्
बढ़
जी सुन
45
प म ृतपाय भऽ गेल िअछ। एकटा गरीव अवला पिनभरनीक
हेती।
् थाक
्
कारक वयस
वणनर् अपन पिरवारक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
्
्
्
दीपमे जयोित
पसरवाक शक् ित होइत अिछ मुदा तरमे तँ अनहार
रहै छ। सवाभािव
क अिछ जे
् त भऽ जाइत अिछ। एिह
जहानमे आन ंद देवामे सक्षम होइछ ओकर अपन जीवन वयिथ
कारक
्
दशनर् भेल “शीतल बसात” किवतामे। व ृक्ष दोसरकेँ शीतलता दैत अिछ पर ंच ओकर पात भूखणडपर
् त् व िवहीन भऽ जाइत अिछ। पतझड़ि◌क बाद वसनत,
्
खिसते असित
फेिर पतझड़ स ंगिह रौद
ू पुरानक स ंग-स ंग बाल
्
कृितक लीला अिछ। िमिथलाक भूखणडमे
आमक गाछी बढ़
क्षणिहमे छॉह ई तँ
बोधक लेल गरमीक िपकिनक केन ्
्
छपपन
होइत अिछ। भोज को
् पदाथक
कारक भोजय
र् निह,
ु
्
वासक जयोित
जीक अ भव नीक बझना
जाइत
िटकुला आ झक् काक भोज। गरमी छु ीमे गामक
अिछ।
् सािहत् यक महान लेिखका महादेवी वमा र् जीक िलखल “िगलल् ”ू
“एकटा भीजल बगरा” किवता पढ़ि◌ िहनदी
कथा मोन पड़ि◌ गेल। ओिह कथामे वमाजी
र्
एकटा लुक् खीक पीड़◌ाक वणनर् करैत ओकरा आत्मसात
्
कऽ लैत छिथ, तिहना जयोित
जी एकटा िचड़◌ैक
् सुिखत:” िस ानतक
्
भवनतु
आधािरत किवता अिछ। वाल म
एिह किवतामे
ित िस हक जे भाव देखा रहल छिथ ओ “सवे र्
ु
ोतक बझना
गेल। “हम एकटा मधय् व क वालक” वाल सािहत् यपर
िवज्ञानक स ंग एकरा वाल ग ृहिवज्ञान सेहो मानल जा सकैत अिछ, मुदा
् ँ तुका ंत वनएवाक
वाहक अभाव देखए मे आएल। शबदके
ममे मलू भावक
ित
् कोण आ पाशचात्
्
अनाकषक
र् देखए मे आिब रहल अिछ। “टाइम मशीन” किवतामे आय र् भूिमक द ृषिट
य
्
् ँ तुलना नीक लागल। िवलािसताक
देशक वयवस
थास
ित हमरा सबहक समपणर् परतं ताक
पमे
पिरणित भेल आ हम सभ सगरो
ु
ु ार आ वरसातक
मे प ंगु भऽ गेलहँ ।
िमठगर रौद, पिहल फह
द ृशय् किवतामे
पस ँ कएल गेल अिछ। एिह
कृित वणनर् सामानय्
ओत- ोत अिछ। एिह
गितक छ ंदस ँ भरल
स ंगमे िकछु नव निह देखए मे अ◌ाएल। जीवन सोपानमे जीवनक
िमक
्
सतुित
सेहं ितत अिछ। “ तीक्षास ँ पिरणाम धिर” जीवन-दशनपर
र्
आधािरत
ु
्
जयोित
जीक सोहनगरक किवता अिछ। हमरा बझ
िथक।
कारक किवतास ँ हमर सािहत् य
्
किवता एिह पोथीक सभस ँ िवलक्षण अधयाय
ई
् मानल
ीम गवतगीता आ शेष महाभारतक आधारपर कृषण् चिरतक वणनस
र् ँ कविय ीकेँ िस हसत
जा सकैछ।
ापरस ँ किलमे
् त
वेश िनशिच
्
पे ँ कविय ीक िवस ् त अधययन
आ अ शीलनक छाया
देखा रहल अिछ।
्
“इनटर
् ंवर” िवयाहक नव
ट सवय
पक िच ण कऽ रहल अिछ। वैिदक कालमे आठ
ं
्
् छल। वतर्मान समएमे इटर
पािण हण वयवस
था
ट चैिटंगस ँ िवयाह करवाक
तेँ कविय ी जकरा िव
साक्षात दशनमे
र्
कारक
्
् अिछ
णालीमे ठक वयवस
था
म करवाक नाटक कएलिन ओ पु ष निह स ् ी अिछ। िक्षितजक
देख
्
वाहक पयोिध गितशील अिछ मुदा रचनामे तारतमयक
अभाव देिख रहल छी। िहम
आविरत आ मेघाच्छािदत सन शबद् तँ िनयोिजत अिछ मुदा जखन हमरा सबहक भाषामे शबद्
्
िवनयासक
अभाव निह तखन एहेन त वक चयन करव नीक निह लािग रहल अिछ। जौ ं एिह किवतामे
्
देिसल वयनाक मलू शबदक
योग किरतिथ तँ किवताक
महावतक हाथी, िव ा धन, वफ र् ओढ़
िवमव् को
ू सर् त
् किवता तँ नीक अिछ मुदा एकर
वातावरण आ गामक सया
नव निह सभटा वएह पुरना किवक रचना सबहक
िहनक अपन अिछ, ककरो रचनाक नकल निह कए
ास ंिगक
प वेसी नीक जएवाक भऽ स ंभावना छल।
् कोण
प देखए मे आएल मुदा द ृषिट
छिथ। िवशाल समु मे जलोिधक छोट मुदा
ु क जीवन दशनर् किवताक िवमव् तँ नीक लागल मुदा िववेचन पक्ष
्
सतुि◌
त नीक लागल। आधिन
दवु लर् भुझना गेल। म षय् आ ओकर भावनामे जीवनक वतर्मान
्
् णू र् अिछ।
पक अनवेषण
उ श
े यप
्
हममर
गाम किवतामे गामक िजनगीक जीत दशनीय
र्
अिछ। िवकासमे मलू
् स ँ पिरवतर्नक
द ृषिट
46
कृितक
पकेँ वैज्ञािनक
्
यासस ँ िनकलैत पिरणामक वणनर् कएल गेल अिछ। वाल म वतर्मान समाजमे कुषटक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
प लऽ ले
अिछ। साधनक अभावमे हम सभ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
नाक श ैशव कालकेँ िवसिर अवोधपर मानिसक आ
शारीिरक अत्याचार करैत छी। िमिथलामे बाढ़ि◌क पिरणाम आ
लयक
प मेघक उत्पात आ वरखा
तँ ू किहया जेवै ं किवतामे देिख रहल छी। “ईशक अराधना” शीषक
र् किवतामे कम र् शक् ितक अवाहन
कएल गेल अिछ। एिह किवताक िवमव् नीक,
वाह कलकल आ भाषा सरल अिछ। एिह
कारक शबद्
्
्
्
िवनयासक
मैिथलीमे आवशयकता
अिछ। “खरहाक भोज” शीषक
र् किवतामे आन जीवस ँ म षयक
तुलना
नीक लागल। वौि क
्
पस ँ िवकिसत मानवकेँ कम र् आ धैयपर
र्
िवशवास
रखवाक चाही, आन जीवक
जीवन-उ ेशय् भोजन मा
्
होइत अिछ। कलपना
तख
् कोण कलपना
्
कार द ृषिट
लोककेँ सम ृि
िवकास हएत, एिह
साकार भऽ सकैत अिछ जखन िशक्षाक
दऽ सकैत अिछ। कोशीक
कोप किवताक
्
िवमव् वतर्मान कालक एकटा पैघ समसयाके
ँ उ त
ृ
कऽ रहल अिछ। “असल राज आ पतझड़क आगमन”
् सामानय् मुदा नीक लागल। व ृ क अिभलाषामे
किवताक िवषय वसतु
नव िपरहीक लेल स ृजनशीलताक
“टेमस् धारमे
्
ाकृितक स ंतुलनकेँ धयानमे
रािख
ममे व ृक्षारोपनपर वल देल गेल अिछ।
् क जीवन रेखाक िवनद् ु ल ंदनस ँ अपन ठामक तुलनापर
का िवहार” कविय ीक वासतिव
्
आधािरत अिछ। टेमसक
धारमे
का िवहार करऽ वालीकेँ अपन चनहा कोना मोन पड़ि◌ गेलिन,
ु
्
्
् देिख हमरा सभकेँ अपन िपछड़ल दशापर मम र् होइत अिछ। कतहिनशचय
आन ठामक नीक वयवस
था
कतह ु िकछु दवु लर् िवनद् ु रहलाक वादो एिह स ं हकेँ खबू नीक मानल जा सकैत अिछ। कविय ी कख
ापर युगमे चिल जाइत छिथ तँ कख
ु क युगमे। सम
चैिटंग िवयाहक अ स ंधानक आधिन
किवता
्
् चयन नीक लागल। वतर्मान युगक नवतुिरया िपरहीस ँ एतेक
स ं हमे िकछु सथानके
ँ छोिड िवषय वसतु
्
्
्
आश निह छल। िनशचय
जयोित
जी धनयवादक
पा
छिथ।
शेष...अशेष
पोथीक नाम- अिचसर्
रचियता-
्
ीमती जयोित
सुनीत चौधरी
दाम- १५० टका
काशक-
ुित
काशन
काशन वष-र् २००९
२.
डा. शेफािलका वमा र् -
47
ीित ठाकुर क मैिथली िच कथा
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
े भाषा में िकछ एहेन रचनाकार होयत छिथ, मिहला वािक पु ष-व , अपन िवलक्षण ितभा के
क
ु
कारन सब से फराक बझा
पडैत छैथ . ई दोसर बात थीक की आलोचक व
मिहला लेखन के
इितहासक प ा के एकटा कोन द दैत छैथ . िकछ भा शाली लेिखका के िकछ ा ं भेिट जायत
छैक ,मुदा ,सम ता में
. लेखन में मिहला पु ष
होयत छैक, जे िवषय पर लेखक िलखैत
छैथ , ओिह पर लेिखका सेहो िलखैत छैथ, कख
बेसी नीक,.बस, आब एकेटा तीक्षा ऐछ जे को
ू र् ह से रिहत नीक आलोचना
सश
मिहला आलोचक के देखी, जे मिहला
भै मा आलोचक रहै थ,पवा
के ज दैत. मैिथली सािह क इितहास में चािर चान लगावैथ, हम ज त छी एहेन िव ान लेिखकाक
कमी
ऐछ......
आय ीित ठाकुर क मैिथली िच कथा, गो झा पर पोथी देखी चम ृत भ गेलों . पिह
ते हम
ु
ू ी गेलों. गागर में
मैिथलीक
ना भुटका लेल कोिम बझ्लों
, मुदा पढे लगलों ते एकरा में डब
ू जका ं कोना समेटी ले
सागर===अ द
ु ..मैिथली लोकगाथा क िवपुल स ंसार के िशव क जटाजट
ु
छैथ,ई पढला उ ानते बझा
पडत. कतेक कथा क खाली नाम सुन
छलों , ओ सब एिह पोथी में
ु समाज अकबर बीरबल के िबसिर रहल अछ ,ओिहना गोन ू झा के.
साकार छल. जिहना आजक
ुत पोिथक मा म स पाठक अपन समाज क सब व
के आदश र् के ची ी सकैत छैथ
ीित जी के अशेष शुभकामना एतेक सु र पोथी लेल , ीित जी आ गजे
जी से हम एकटा
आ ह करवैक जे कोसी नदी लेल बड िख ा कथा समाज में पसरल छैक, ओकरो िच कला में समेटी
लैथ. कोसी नदीक रह मय चिर , िस ंघे र बाबा से िववाह आिद, आिद िख ा सब.....जिहना समाज क
ु
ेक
में नारी आय िनर ंतर आग ू बढी रहल छिथ , ओिहना मैिथली िमिथलाक िवकास में आजक
ु
नारी अपन अपन
र से अम ू योगदान द रहल छिथ. अशेष साधवाद,
ीित जी ,अस ं
शुभाश ंसा
.........
३.
राजदेव म ंडल
ु
मुसहरिनया ँ, मधबनी।
कु
् नक
म अनतम
र्
लेल प ं
शेष अश
कथा गुच्छ- (कथा स ं ह) कथा सभकेँ पढ़लहँ ु जे ग
्
गुच्छमे स ं िहत अिछ। पढ़◌ैत काल समरण
्
्
भेल- एनसाइक् लोपीिडया ि टेिनका िकछु शबदकथा सवतं
अत्यिधक स ंगिठत तथा पणू र् कथा
्
िवधा अिछ। एिहमे स ंिक्षपताक
स ंगिह
प हेबाक चाही।
्
ओना िजनगी कथा अिछ आ कथा जीनगी अिछ। आ जीनगी जे िनरनतर
नवीनताकेँ
रहल अिछ।
48
् कऽ
ापत
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
गपल् गुच्छ पढ़◌ैत काल जे कथा वा पा ँित बेसी
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
भािवत कएलक ओिह सबहक िवषयमे कहब
ु
्
आवशयक
बझाइत
अिछ। नीक-अधलाह कहबाक अिधकार तँ पाठककेँ होइते अिछ।
्
्
् सामनती
्
नव सामनतआब सामनतबादी
युग निह रहल। िकनतु
हँ , ओकरा
पमे पिरवनर् भऽ गेल अिछ। आ ओ िभ -िभ
्
गेल अिछ। एिह कथामे एकटा नव सामनतक
नवीन
व ृित एख
जीअते अिछ।
् गोचर भऽ
पे समाजमे आइयो द ृषिट
प लिक्षत भऽ रहल अिछ।
्
सविश
र् क्षा अिभयान- कथाक माधयमस
ँ दिलत आ गरीबक धीया-पुताकेँ पढ़◌ेबाक लेल उदासीनताक भावना
् त भेल अिछ। सरकार
वयक्
ारा मुफ्तमे देल गेल पोथी अदहरमे बेिच लैत अिछ। कथाक पा ँित-
ु
“आ दसाधटोली,
चमरटोली आ धोिवयाटोलीस ँ सभटा िकताव सहिट कऽ िनकिल गेल।”
् ट् होइत अिछ जे म क् खक पणू र् अ :पतन भऽ गेल अिछ। एतेक
थेथर म क् ख- एिह कथास ँ सपष
ु मुनी, परबा पौरकी धिरस ँ नीचा उतिर थेथर भऽ गेल अिछ।
जे म क् ख िचड़ई-चन
् ित-पिरसिथ
् ित
स ् ी-बेटा- एिहमे समाजमे स ् ीगणक महत्वहीनता आ स ंगिह करवट लैत सामािजक सिथ
िच ण भेल अिछ।
िवआह आ गोरलागइ- झण-झणमे म क् खक बदलैत र ँग िगरिगटा जका ँ...... आ दहेजक लोभी बेकती
् ं लजिज
् त होइत छिथ। आइयो कोन कोन
स ंतोषी सन बेवहार देखा कऽ सवय
दबकल अिछ समाजमे आ कोन-कोन
पे ँ दहेज लोभी
ु
प ंची चािल चिल रहल अिछ। से एिह कथास ँ बझाइत
अिछ।
नीक िच ण भेल अिछ।
ितभा- चालाकी आ
ितभा दनु ू अलग-अलग बात छैक।
ू
् क लेल दनु मे
ापित
स ँ कोन महत्वपणू र्
सएह देखेबाक यत्न भेल अिछ।
िमिथला उ ोग- िकछु कथाक को
गपप् पाठककेँ दीघकाल
र्
तक झ ंकृत कए
रहै त अिछ। एिह कथामे
ु िदन धिर पाठककेँ समरणमे
्
गदहापर लादल जे स ंदेश भेिट रहल िअछ से बहत
रहत।
् ध् आ छल- प ंच अप -आपकेँ
रकटल छलहँ ु कोहबर लय- स ् ी-पु षक बीच ब त-िबगड़◌ैत समबन
्
्
ठकइ आ ठकाइबला गपपक
मािमक
र् िवशलेषण
एिह कथा
हम निह जाएव िवदेश- कोन बेकतीकेँ
ारा भेल।
ु भरल अिछ।
्
दयमे कतेक कषट-पीड़
◌ा आ हँ सी-खशी
्
ओकरा पणू तया
र्
उत्खनन करनाइ समभवो
निह अिछ तथािप कथाकार तँ
यास करबे करता। एिह
्
कथामे ि जेन ् क मोनक वयथाके
ँ कथा पणू र् पेण उजागर भेल अिछ।
एकटा पा ँित- “कोन सरोकार माएस ँ पैघ छल यौ लाल। जे अहा ँ कहै त छी जे हम ककरोस ँ सरोकार
निह रख
छी।”
राग बैदेही भेरवी- एिह कथामे एकटा कलाकारक जीनगीपर रोशनी देल गेल अिछ। कोना एकटा
ु
साधारण गामक गबैया सुख-दख,
सफलता आ िवफलतास ँ लड़◌ैत उच्चताकेँ
वणनर् भेटैत अिछ।
49
् कएलक तकर िवशद
ापत
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
बाढ़ि◌ भूख आ
ु रास
्
् ँ पणू र् कथा अिछ। लघ ु आकारक रिहतहँ ु ई कथा बहत
वास- हासय-व
य् ंगयस
् ँ समेट
गपपके
अिछ। भूख आ भूखक कार
कतए
उठैत मनक तर ंग आ ओिह कार
बेकती कतऽ स ँ
्
वास करैले जाइत अिछ। आ ओहो सथानपर
कोना आशापर तुषारपात होइत अिछ। एिह
्
् त भऽ जाइत अिछ। “सरकार हम तँ
पा ँितकेँ पढ़लास ँ सवत:
हासय् उपसिथ
नस ँ आएल छी मुदा
ु
अहा ँ कोन सवारीस ँ अएलहँ ु जे हमरास ँ पिहनिहस ँ िवराजमान छी।”- बैिदक जी अलह् आस
ँ हाथ जोड़ि◌
कहै त अिछ।
ू
ु क िमिडया कोन तरहेँ चिल रहल िअछ। से उजागर भेल अिछ।
नतन
िमिडया- आधिन
जाित-पाित- एिह कथाकेँ पढ़लाक बाद पा ँित याद अबैत अिछ- “देखनमे छोटन लागै जाित पाितक
दंश”
ु नी िवयाह आ िहजड़◌ा- एिह कथामे एकस ँ अिधक पत्नी कएलास ँ जे समाजमे सड़◌ा◌ंध पैदा भऽ
बहपत्
रहल अिछ। कोन-कोन
पे ँ ओकर िबकार िनकलैत अिछ तकर वणनर् भेल अिछ। िकछु पा ँित-
् ।”
“...भाितज सभकेँ निह मा त िछऐक तै ं भगवान बच्चा निह देलनिह
बाणवीर- एिह कथामे बाणवीरक म
ू ँ कटल बाणवीर कतेक
्
ि◌वशलेषण
नीक जका ँ भेल अिछ। समहस
् ट् भऽ जाइत
अथाह पीड़◌ामे स ंघष र् करैत जीनगीक एक-एक पल कटैत रहै त अिछ से कथास ँ सपष
ू
ु
अिछ। बाणवीरक एिह कथनमे कतेक मम र् िछपल अिछ- “माए बाब!
हमरा बझल
अिछ जे हमर िबयाह
ु हम गाममे भिरए लैत छी। गुजर तँ कइए लैत
दान निह होएत। मुदा अपन पेट तँ कोहना
छी। लोक सभ कहै त रहए जे तोहर माए-बाप तोरा बेिच देलकउ। से ठीके अिछ
की?”....क ारोहट उिठ गेल।
्
अ कपपाक
करी- लोककेँ बाप मरलापर
ु
् ।
करी भेटैत छैक। हनका
भाएक मरलापर भेटलनिह
एिह कथाक सार अिछ।
म ृत्युदंड- कथाक
को
ारा देखाओल गेल अिछ जे कोना बािलका आयाके
र् ँ म ृत्युदंड िमल जाइत अिछ जेकर
्
दोष निह छल। बेगुनाहकेँ दणड।
सेहो म ृत्युदंड। एहेन अिछ एिहठामक समाज। जेकरा
्
सहजताक स ंग सवीकारो
कऽ लेल जाइत अिछ। एख क समाजक दरपन जका ँ कथा लगैत अिछ।
ु
् गुच्छक कथा सभकेँ बाद बझाइत
्
एिह तरहेँ गलप
अिछ जे वतर्मान समसयाके
ँ यथाथर्
्
गट भेल अिछ। छोट-छोट द ृशय् खंड कावयात्
मक
्
पस ँ सोझा आएल अिछ। कथावसतुमे
िमिथलाक
् लघ ु तथािप उदेशय्
माट-पािनक गंध अिछ। िकछु कथा अत् यनत
देशक यथाथनाके
र् ँ समेट
्
सहस ् बाढ़िन (उपनयास)-
् णू र्
कट भऽ गेल अिछ जे समप
अिछ।
ाचीनकालिहस ँ सहस ् बाढ़िनक िवषयमे उत् सुकताक स ंगिह अ मान कएल जाइत
् या
् आ समीक्षा होइत रहल अिछ। िवज्ञान
रहल अिछ। अ मािनत वयाख
्
तथा अधयात्
म
50
प
्
ारा अलग-अलग ढं गस ँ। अहा ँक उपनयासक
पा
ारा अलग ढं गस ँ आ सािहत् य
् धमे
्
एिह समबन
कहै त अिछ-
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
“खस ैत लहास, क त हनकर
सबहक पिरवार। सपनामे अबैत रहल ई सभ सहस ् बाढ़िनक
बिन कए। हमरे सन को
गेल होएत आ आब
प
् ू छोिड मिर
शािपत आत्मा अिछ ओ सहस ् बाढ़िन जे अपन स ंघष र् अधिखजज
ु या रहल अिछ। आब देख ू तीन ू बच्चाक परीक्षा पिरणाम सभिदन
्
हमाणडमे
घिर
् । हम जे स ंघष र् बीचमे छोडलहँ ु तकर छी ई
थम करैत अबैत रहिथ, आब की भऽ गेलनिह
पिरणाम।” ननद् हबोढ़कार भऽ कानए लगलाह।
्
एिह पा ँितकेँ जँ गमभीरतास
ँ आत्मसात करए लगलहँ ु तँ मा
्
एव ं उदेशयो
्
गट भऽ गेल। ननदक
चिर
ु
आर हनका
्
नामेटा निह स ंगिह उपनयासक
सारतत् व
ारा कएल गेल स ंघषक
र्
प तथा मनक
् ट् भऽ जाइत अिछ।
िवज्ञान सपष
म
्
् भेल अिछ। भाषामे
उपनयासक
भाषा श ैली नवीन ढं गक अिछ। वणात्र् मक श ैलीमे आरमभ
ु या ँ दैत आग ू जा रहल छिथ।
िच ात्मकताक एकटा उदाहरण- “एकिदन किलतकेँ देखलहँ ु जे ठेहिन
ं
ँ
् ततए ठेहनु उठा कऽ मा
आगनस
ँ बाहर भेलापर जतए आकर-पाथर
देखलनिह
हाथ आ पाएरपर आग ू
बढ़ए लगलाह।”
्
िकछु एिह तरहक शबदक
्
्
योगस ँ भाषामे आकषणर् आिब गेल अिछ। जेना थामह-थोम
ह,
ू -पुरान, घमब-िफ
ु
कानब-खीजब, काज-उ म, जान-पहचान, बढ़
रब, टोका-टोकी, स ंगी-साथी, झगड़◌ा्
झा ँटी, तं -म ं , पढ़◌ाइ-िलखाइ इत्यािद। उपनयासक
भाषा मैिथली पाठककेँ अ कूल अिछ जिहना
लोक बजैत छिथ तिहना सहज ढं गस ँ विणत
र् अिछ।
ु
्
िझंगरू बाब,ू ननद् आ ननदक
भैया, भाितज, बेटा, नवल जी झा, आ िण आ हनक
माए-बाब,ू
ु
ु या इत् यािद पा क माधयमस
् भौजी, शौभा बाब ू बिच
्
बिहन, किलत आ हनक
पत् नी, शशा ंक, मणीनद,
ँ
् स ंगिह चिर क िवकास भेल अिछ। जािहमे मौिलकताक स ंगिह सवाभािव
्
कथावसतु
कता अिछ। नव
् कोणस ँ सहजताक स ंग चिर
द ृषिट
्
सबहक िवकास भेल अिछ। जे उपनयासक
अ कूल अिछ।
िमिथलाक नदी-कमला, कोशी, बलान अ◌ािदक वणनर् भेल अिछ। स ंगिह एिहठामक गाम घरझ ंझारपुर, मेहथ, गढ़ि◌या, कनकुआर, कछवी आिद वणनस
र् ँ सहजिह कथामे िमिथलाक मािट-पािनक गंध
आिब गेल अिछ।
ं देखल जा सकैत
्
कथोपकथनमे स ंिक्षपता
आ सहजता अिछ। उदाहरण सव् प िकछु अश
अिछ।
ू
ु
्
आ िण द-तीन
कौर खा कऽ उिठ गेलहा। हनकर
स ंगी करण पुछलिखनह“पता निह। घबराहिट भऽ रहल अिछ।”
“काि
िनंगपर जएबाक अिछ
। तािह
ारे।”
“पता निह।”
ताबत भीतरस ँ अबाज आएल। सभ क् यो दौगलाह।
51
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
कथोपकथन जीनगी आ पा ा कूल अिछ।
्
“की बजलहँ ु बेटा”- माए पुछलिखनह।
“निह। ई कालोनी देिख कऽ िकछु मोन पड़ि◌ गेल।”
“निह देख ू ई पिपयाह कालोनीकेँ।”
्
उपनयास
म
्
िवशलेषणक
स ंगिह दशनस
र् ँ सेहो पुषट् अिछ।
् िवशाल अिछ आ काल िनससीम,
्
्
“प ृथवी
अन ंत। एिह हेतु िवशवास
अिछ जे आइ निह तँ काि
न क् यो हमर
क् यो
यासकेँ साथक
र् बनाएत।”
्
आशाक स ंचार करएबला ई वाक् य बारमवार
मनमे उठैत अिछ। जीनगीक स ंचािलत करबाक लेल
्
् निह होइ तँ
तँ आवशयक
अिछ जीनगीक रस। वएह रस िथक- आशा। जँ जीनगीमे आशा, अभीपसा
जीवन िनरथक।
र्
् जे ओ झोंटाबला सहस ् बाढ़िन झमािर कए एिह िवशवमे
्
्
“आ िणकेँ लगलनिह
फेक दैत छनिह
ु
हनक।
”
कथीले िकछु िकएक से
शन् उठैत अिछ मनमे। यएह
ु रास गपप।
्
मजबरू करैत अिछ- बहत
आ एक
शन् पाठककेँ बेर-बेर सोचैले
ु
् ँ जनमैत
्
शनस
अिछ बहत
शन् जे पाठककेँ एकटा
अलग स ंसारमे लऽ जाइत अिछ।
्
म षयक
् धमे
्
्
व ृितकेँ समबन
ई पा ँित देखल जा सकैत अिछ- “म षयक
व ृितये होइछ,
्
समानता आ तुलना करबाक सामय् आ वैषमयक
समालोचना आ िववेचनामे कतेक गोटे अपन जीनगी
्
िबता दैत छिथ। आ िण आ ननदक
बीच सेहो अनायासिहं सामय् देखल जा सकैत अिछ।”
उपरस ँ मानव िभ -िभ
ू
् मलमे
्
व ृितकेँ होइत अिछ। िकनतु
गहराइस ँ अनवेषण
कएल जाए
्
तँ िकछु तलप सभ म षय् लगभग सामय् होइत अिछ। अनत:मे
वएह रस िन:स ृत होइत रहै त
् ओतेक शानत
् भाव आ ओतेक गमभीरतास
्
अिछ। िकनतु
ँ सव् ंयकेँ देखनाइ सहज गपप् तँ निह िथक।
्
्
उपनयासक
आकार लघ ु रिहतहँ ु कथा वसतुक
पणू र् िवकास भेल अिछ। कथाक अ कूल अिछ
भाषाक स ंतुिलत ढं गस ँ
्
् कोणस ँ अिभवयक्
् ित भेल अिछ।
योग भेल अिछ। नव वसतुक
नवीन द ृषिट
मौिलकतास ँ पणू र् अिछ।
वतर्मानमे मैिथली सािहत् यक
्
गितक लेल अहा ँ सन बेकतीकेँ आवशयकता
अिछ। जे एकभगाह
् ं तँ अ सर होएबे करताह दोसरोकेँ आग ू बढ़बाक
होइत मैिथलीकेँ स ं◌ंतुिलत करता आ स ंगिह सवय
् कोणस ँ अहा ँक
सुअवसर देताह। एिह द ृषिट
्
एकटा पा ँित समरण
भऽ गेल-
52
यास अवणय
र् ् अिछ।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
अहीं सन मैि◌थली सेवकपर
अिछ हमरा सबहक आस
्
भरब भणडार
मैिथलीक
्
अिछ पणू र् िवशवास।
४.
धीरेन ्
ीित ठाकुरक दनु ू िच कथापर धीरेन ्
मैिथली सािहत् यमे पिहल बेर
भेटल। सािहत् य पणू र् तख
ुित
कुमार
कुमार एक नजिर् ँ
काशन, नई िदललीस
्
कािशत ि◌च कथा उमेश जीक माधयमस
ँ
होइत अिछ जखन सािहत् य सभ िवधामे िलखल जाए आ रचना
् मे िच कथामे
होइ। हमर द ृषिट
ीित ठाकुरक रचना मैिथली लोक-कथा आ गो
ौढ़
झा आन मैिथली
ि◌च कथा, सफल रचना थीक।
्
लेिखका धनयवादक
पा
छिथ, एिह कार
ु
् गेलिन। दोसर कारण
जे मैिथली िदिस हनक
द ृषिट
ई जे मैिथलीक िवरासतमे जे कथा लोकमुखमे सुरिक्षत अिछ तकरा ओ लेखिनक
मैिथलीक िच कथा िवधा जे नगणय् सन िअछ- तािहकेँ सम ृ
करक
प
दान कऽ
यास केलिन अिछ।
ु गोढ़ि◌न नटआ
ु
् बहरा
मैिथली िच कथामे ‘मोती दाइ, राजा सजहेस, बोिध-कायसथ,
दयाल,
अमता घरेन, दीना भदरी, जािलम िसंह,
झा आ आन मैिथली िच कथामे
चोर, गो
झा आ िवलाड़ि◌, गो
कर अिधकारीक दाढ़◌ी, गो
ु मरड़, िव ापितक आयु अवसान आ गो
का बिनजारा, रघनी
कािशत अिछ ‘गो
ु ,र् गो
झा आ मा ँ दगा
ू बरद, गो
झाक दटा
झाक माए, रेशमा चूहड़मल,
झाक महीस, गो
आ सव् , गो
् र्
आ सवण
झाक अशफीर् , गो
झा आ
्
का बिनजारा, भगता जयोित
पिजयार,
ु
महआ
घटबािरन, राजा सलहेस, छेछन महराज, राजा सलहेस आ कािलदास।
सभटा कथा िमिथलाक धरतीस ँ समब्
पिरवतर्न स ंगे लोक
अिछ आ एखन धिर लोक मुखमे सुरिक्षत अिछ। समैएक
्
िच आ लोक स ंसकारमे
पिरव र्न सेहो होइत अिछ। अपन देशक गपप्
ू
िलअऽ। आइ पोथीमे सुरिक्षत अिछ आयुवे र्द िव ा, यनानी
िव ा, होमयोपैथी आ कतेक रास ज्ञानस ँ
समिपत
र् िव ा। जँ पोथीमे सुरिक्षत निह रहत तखन अिगला पीढ़◌ी एिह िव ास ँ अनिभज्ञ रिह
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िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
जाएत। तेँ हमर िमिथलामे जे कथा पसरल अिछ ओकरा पोथी सव् पमे
दान कऽ
ीित ठाकुर जी
श ंसनीय काज केलिन अिछ। वीरवलक कथा भऽ सकै छल जे लोक िवसिर जाइत मुदा पोथी
्
सव् पमे रहलास ँ आइ धिर ओ लोक-मानसक र ंजनक माधयम
बनल अिछ।
िच कथाक अपन महत् व होइत अिछ। वा -स ँ
सँ
िषत होइत अिछ िच स ँ। नाटकमे अिभनयस ँ जे स ँ
्
र ंग, धविन
आ
षणस ँ जे
भाव व ंिचत रिह जाइत अिछ ओ
िषत निह होइत अिछ ओ स ँ
काशस ँ तिहना िच कथामे सेहो होइत अिछ।
िषत अिछ
सुत आलोच्य पोथीक िच
सशकृ
अिछ।
वाल सािहत् य लेल ई काज
् । चािर वखक
ित जीक सराहनीय छनिह
र्
ना जेकरा अक्षर बोध
्
निहयो छै सेहो कथाकेँ परेख सकैए। िच क माधयमस
ँ। वाल सािहत् यक जे अभाव अपना मैिथलीमे
्
अिछ तािहपर बड़का-बड़का िव ानक अछैत थोड़◌ेकवो धयान
निह देल गेल छल आ खास कऽ एिह
तरहक।
पोथी आकषक,
र्
ीमती
िचकर आ बालमनकेँ
भािवत करैत अिछ। एिह लेल हम फेर एक वेर
्
ीित ठाकुरकेँ धनयवाद
दैत िछएिन। स ंगे आशा करब जे आगा ँ सेहो एिह तरहक काज
करिथ।
धीरेन ्
कुमार
िनमली,
र्
सुपौल, िवहार।
ु
नवे ु कुमार झा १. राहलक
िमशन िबहारस ँ बढल स ा आ िवपक्षक
ू
ु ावी श ंखनाद २. द ू वष र् परा
ू कएलक मैिथली
परेशानी:िमिथला ंचलक भिमस ँ का ं सक युवराज कएलिन चन
दैिनक िमिथला समाद
१.
ु
राहलक
िमशन िबहारस ँ बढल स ा आ िवपक्षक परेशानी:िमिथला ंचलक भूिमस ँ का ं सक युवराज कएलिन
ु
चनावी श ंखनाद
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु गा ँधी िमिथला ंचलस ँ का ं सक चन
ु ावी अिभयान ार
अिखल भारतीय का ं स किमटीक महासिचव राहल
कऽ
स ा ढ राष् ीय जनता ंि क गठब नक घटक भाजपा आ जद य ू तथा िवपक्षी राजद-लोजपा गठब ंधनक
बेचैनीकेँ बढ़◌ा देलिन अिछ। पिछला द ू दशकस ँ देशक राजनीितमे कितआएल का ं सक युवराज ी
गा ँधी िमशन िबहारक अ
त पाटी र्क
ता सभकेँ सि य कए
छिथ। एिहस ँ पिहनह ु ी गा ँधी िबहारक
दौरापर आएल छलाह तँ िमिथला ंचलक दय ली दरभं गाक दौराक िबहार राजनीितक हबा-बयार
ु
छलाह। हनक
ओिह दौराक बाद देशमे का ं सक ित आकषणर् बढल अिछ। स ंगिह युवा का ं सक
ु ाव जे करौलिन एिहस ँ ख
पदािधकारीक म नयनक जे पर रा छल ओकरा समा कऽ सीधा चन
रस ँ
देश
र धिर युवा
ताक नव समहू ठाढ भेल अिछ आ ई का ं सक भिव क
पमे अिछ।
ु ाबी अिभयान ार
ी गा ंधीक िबहार दौराक स ंगिह देशमे चन
भऽ गेल। ओ अपन एक िदवसीय
दौराक
ममे कोसी
क सहरसा आ सम ीपुरमे जनसभाकेँ स ंबोिधत कएलिन। ी गा ंधी एिह
ू तरहे यु क लेल तैयार बिझ
ु
ु
दरिमयान परा
पडलाह। ओ एक िदस मु म ं ी नीतीश कुमार आ हनक
ु ावमे मह पणू र् भूिमकाक िनवाहर् करबाक लेल
सरकारपर हमला कएलिन तँ दोसर िदस एिह बेरक चन
तैयार युवा पीढीकेँ स ंग जोडबाक यास सेहो कएलिन। ओ ीकार कएलिन जे िबहारमे एखन का ं स
कमजोर अिछ। मुदा एिह लेल बेसी िच ा निह करबाक अिछ। ओ कहलिन जे उ र देशमे सेहो
हम जखन यास ार
कए
छलहँ ु तँ लोक हँ सी उड़◌ौ
छल। ओ जनताकेँ िव ास देऔलिन जे
ु
िकछु समए तँ ज र लागत मुदा जमीनी
रक सम ा आ गाम घरक बात पटना धिर ज र पहँ चत।
ओ युवा िदस स ंकेत करैत कहलिन जे िबहारमे जे पिछला बीस वषसर् ँ पिरि ित बनल अिछ ओकरा
बदलबाक लेल आगा ँ आबिथ आ एकटा युवा सरकार बनाबिथ। एिह लेल युवाकेँ आगा ँ आनल जाएत आ
थकल लोककेँ कितयाकऽ एकटा िवकिसत िबहार बनाओल जाएत।
का ं स महासिचव एिह दौराक बाद राजनीितक बजार गम र् होएब ाभािवक अिछ। दरअसल एिह बेर
ू भऽ रहल अिछ। ओना मु म ं ी नीतीश कुमार िवकासक मु ापर
राजनीितक गठजोड आर मजगत
ु ाव लडबाक बात किह रहल छिथ मुदा ओ भीतरे-भीतर महादिलत आ अित िपछड़◌ाक
चन
पमे एकटा
ु
नव वोट बैक
ं तैयार कऽ राजद आ लोजपा गठब ंधनकेँ च ती दऽ रहल छिथ तँ दोसर िदस राजद
आ लोजपाक पी एम आर वाइ समीकरणक मा मस ँ जद य ू आ भाजपाक मोकाबला करबाक ि ितमे
अिछ। एिह राजनीितक समीकरणक म
जे सभस ँ मह पणू र् भऽ गेल अिछ ओ अिछ सवण र् मतदाता,
ू अिछ आ का ं सक एिह व मे भऽ रहल घसपैठ
ु
जािहपर भाजपा-जद य ू आ राजद-लोजपा दनु क
दनु ू
गठब ंधनक लेल खतराक घ ंटी बिन गेल अिछ।
ु गा ँधीक िकछु मास पिह
राहल
भेल िबहार दौराक के मे युवा शि
छल आ ओ सभ ठाम युवा सभस ँ
सीधा स ंवाद कएलिन। एकर पिरणाम सेहो सोझा ँ आएल अिछ। िबहारमे पिछला बीस वषसर् ँ घेराएल
प ंजा छापबला झ ा एखन गामे-गाम देखल जा रहल अिछ। एकर अथ र् ई निह जे का ं स सरकार
ब बाक ि ितमे आिब गेल अिछ। मुदा वतर्मान राजनीितक हवा जे चिल रहल अिछ आ ई चलैत
ु ावमे का ं स स ा स ुलन करबाक ि ितमे अव रहत। पाटी र्क स ू स ँ
रहल तँ अिगला िवधान सभाक चन
जे जनतब भेिट रहल अिछ ओ स ंकेत करैत अिछ जे पाटी र् आलाकमान एिह बेर गोटेक १३० सीटपर
ु ाव लडत आ बाकी बा ँचल ११३ सीटपर ओ अपन शि
ु ाव लडत।
ग ीर
पस ँ चन
बढ़◌ेबाक लेल चन
का ं सक ई रणनीित राजग आ राजद-=लोजपाक लेल खतरा बिन सकैत अिछ। ओना बेसी खतरा
भाजपा आ जद य ू गठब नकेँ अिछ। एकर पिरणाम सेहो सोझा ँ आिब गेल अिछ। लोकसभा
ु ावमे का ं स कितया गेल छल मुदा ओकर बाद भेल िवधानसभाक उप चन
ु ावमे अठारह सीटपर एसगर
चन
ू सीटपर िवजय ा कऽ भाजपा-जद य ू केँ कितया देलक जकर लाभ राजद आ लोजपाकेँ
लिड दटा
भेल।
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु गा ँधीपर भरोसा अिछ तँ राहलक
ु
िबहार देश का ं सक राहल
नजिर िबहारक युवापर अिछ। जाितक
ू राजनीितबला एिह देशमे का ं सक रणनीितक अ प जातीय हवा चलल तँ एिह बेरक िवधान
मजगत
ु ावमे िबहारक युवा राहलक
ु
सभा चन
लेल आगा ँक र ा तैयार कऽ सकैत छिथ।
२
ू कएलक मैिथली दैिनक िमिथला समाद:
द ू वष र् परा
द ू वष र् पिह
कोसी
मे कुसहाक टूटल तटब स ँ भेल
लयक बाद एिह
क दशा-िदशा बदिल
गेल छल तँ एिह ददु शाक
र्
अबाज बिन कऽ देशक पिहल मैिथली दैिनक “िमिथला समाद” सोझा ँ आएल।
३१ अग
२००८ केँ
वासी िमिथला समाजक यासक बाद एिह दैिनकक काशन मैिथली प कािरताक
एकटा नव अ ाय ार
कएलक। एिह दैिनककेँ मैिथलीभाषीक भेटल ेहक बदौलित िनबाधर्
पे ँ
ू करएमे सफलता भेटल। मैिथली प कािरताक श ू ताकेँ तोिड िमिथला ंचल
कािशत होइत द ू वष र् परा
आ वासी िमिथला समाजक जन सम ाकेँ सोझा ँ अनबाक लेल सतत य शील अिछ। पवू र् धानम ं ी
ू
अटल िबहारी वाजपेयी मैिथलीकेँ स ंिवधानक अ म सचीमे
सि िलत कऽ स ान देलिन तँ प कािरतास ँ
ु
जडल
कोलकाताक राजे
नारायण वाजपेयी मैिथली भाषामे ताराका
झाक स ादकीय दािय िमिथला
समादक
काशन कऽ एिह भाषाक मान बढ़◌ौलिन अिछ।
मैिथलीमे दैिनक समाचार प क काशन हो एिह लेल िबहारक राजधानी पटना आ िमिथला ंचलमे कतेको
बेर म ंथन भेल मुदा ओकर को
साथक
र् पिरणाम एखन धिर सोझा ँ निह आएल अिछ। आिखरकार वासी
िमिथला समाजक यास सफल भेल आ िमिथला समाद डेगा-डेगी दैत द ू वषक
र् भऽ गेल। ओना
को
भाषामे दैिनक प क काशन किठन काज अिछ ओहूमे मैिथली भाषामे प -पि काक काशन
क ना मा कएल जा सकैत अिछ तथािप वासी मैिथल िह त देखौलिन अिछ। वासी मैिथलक
यासस ँ कोलकातास ँ कािशत दैिनक िमिथला समाद आ नव िद ीस ँ गजे
ठाकुरक स ादनमे उपल
ई-पि का “िवदेह” मैिथली प कािरताकेँ आ ीजन दऽ जीिवत रख
अिछ।
अ
स ंसाधन आ सीिमत पाठक व
होएबाक बादो मैिथली भाषी ब ु पाठकक बले ठाढ भेल अिछ।
मैिथल समाजक सुिध पाठकक ेहक पिरणाम अिछ जे एकटा गएर मैिथल एिह दैिनकक लेल स ंसाधन
उपल करा मैिथली प कािरताक भोथ भेल धारकेँ तेज कएलिन अिछ आ ई िमिथला ंचल आ वासी
मैिथल समाजक सश
अबाज बनबाक यास कऽ रहल अिछ।
ोँ एिहना पाठकक ेह आ सहयोग
ू
भेटैत रहल तँ लोकतं क चािरम ख ा मजगत होएत आ िमिथला ंचलक चतुिदक
र् िवकासक र ा
िनकलत। स ंगिह मैिथली प कािरताक
मे एकटा नव युग ार
होएत।
् यत दरू भगाउ २.
१.
िशव कुमार झा‘‘िट ू”- हा -कथा- कबिज
कथा- १. श शास् म ् आ २. िस
महावीर
56
गजे
ू
ठाकुरक दटा
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
१
िशव कुमार झा‘‘िट ू‘‘,
नाम : िशव कुमार झा, िपताक नाम:
ितिथ : 11-12-1973, िशक्षा :
0 काली का
ातक ( ित ा), ज
ू
झा ‘‘बच‘‘,
माताक नाम:
. च
कला देवी, ज
ान ◌ः मा क ◌ः मालीपुर मोडतर, िज0 -
ू
बेगसराय,म
लू ाम ◌ः
ाम + प ालय - किरयन,िजला - सम ीपुर, िपन: 848101, स ं ित :
स ं हण, जे. एम. ए.
ोस र् िल., मेन रोड, िब
ुपुर, जमशेदपुर - 831 001, अ
गितिविध : वष र्
1996 सॅ वष र् 2002 धिर िव ापित पिरषद सम ीपुरक सा ं ृितक गितविध एव ं मैिथलीक
हेतु डा. नरेश कुमार िवकल आ
स ंल ।
ी उदय नारायण चौधरी (राष् पित पुर ार
ा
ब ंधक,
चार-
सार
िशक्षक) क
मे
् यत दरू भगाउ
कबिज
(शीषक
र्
ी उमेश म ंडलजीक सौज स ँ)
ु
बड़की भौजी भोरेस ँ आन ंदक क्षीर-सागरमे गोता लगा रहल छलीह िकएक निह, हनक
बावा जे आिब
ु
् । दरागमनक
्
रहल छथनिह
वाद पिहल बेर बावाक अवाहनक आशमे र ंग-िवर ंगक पकमानक स ंग सवागत
ू
्
करवाक लेल ओ आतुर....। हमरा समसतीपुर
जएवाक छल, मुदा बावजी
रोिक लेलाह। “परम ि य
्
समिध आिव रहल छिथ, चौरासी बखक
र् भऽ गेलाह, निह जािन फेिर आिव सकताह वा......। अहा ँ कालिह
भिर
िक जाऊ।” िप
आदेश िसरोधाय,र् आ ा र् नक्ष क बरखास ँ दलानक पिरसर बज-बज कऽ रहल
ु
छल तेँ पुनीतकेँ सुरखी िछटवाक लेल कहल गेल। हम कोदािरस ँ िच न कऽ रहल छलहँ ।
एतवामे
गुंजन िवहािर जका ँ दोड़ल आिब कऽ कहलक- “सरप ंच सहाएब आिव गेलाह, िनसहर भुइया ँ थान लग
ु ”
हम देखलहँ ।
“हम पिह
कह
्
छलहँ ु समिध भो क बसस ँ औताह मुदा, हमर के सुनए, भोज कालमे कुमहर
रोप ू आव बाट साफ करवाक को
ु
योजन निह, दौड़ कऽ जाउ आ हनका
लए अिवयौ।” गुंजन
ु
िखिसआइत बाजल- “हनका
के आनत, बाए.... बाबा तँ आिव गेलाह।”
ू
ु
्
्
समिध िमलान भेल, तत्पशचात
बावजी
हनक
चरण सपश
र् कएलिन। बावा अशोकजर् देखएवाक
् ।
यास करए लगलाह मुदा, वयथ
र्
अप
्
हमर समिधक िपता छी तेँ हमरो लेल िप तुलय।
बाव ू जीक
ू
ु
्
तकर् क आगा ँ सरप ंच सहाएव मक....।
झट-झट सभ गोटे चरण सपश
र् करए लगलहँ ।
असलानी चौकी,
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
्
् नीक एिह
खराम, जल..... पणू र् िमिथलाक स ंसकृित
स ँ अिभन ंदन। बावा गदगद होइत बजलाह- “कादमिब
घर िवयाह करबाक िनणएर् हमर जीवनक सभस ँ सोझ िनणएर्
मािणत भेल अिछ। म क् खकेँ अपन
्
स ंसकार
निह छोड़वाक चाही।”
कुड़◌ा-अछमिनक पछाित जलपान, चाह.....ओकरा वाद
िस
पतैलीक
िस
पान िचबवैत गुंजनकेँ
बजौलिन- “बौआ, कोन िकलासमे पढ़◌ैत छी?”
गुंजन बाजल- “छठामे.....।” गुंजनक जबाव पणू र् भेल निह की िबचिहमे हमरा मुँ हस ँ िनकलल“मुदा, िव ास ँ िहनक को
स ंब ंध निह, एखन धिर िवचाराधीन होइत कक्षा पार कऽ रहल छिथ।”
ँ गुरिड़ कऽ िवद-िवदेलाह- “देिख लेब चा
बात सुिनते बाव ू जी हमरा िदिश आिख
ई
भा ँइमे छोटका
सभस ँ आगा ँ जएत।”
ं
ू मक
ू समथन।
सरप ंच बावक
र्
हँ सी-ठ्ठाकक बाद बावाक आगन
वेश भाव आ ममक
र् अ भूितक साक्षात
् मुदा गुंजन
दशन।
र्
भौजी बावाकेँ गोर लािग अ ुधारस ँ नहा गेली। हमरा मुँ हपर म ंद मुसकी
ं
ू
् ित बिझ
दहोवहो। भौजी अपन भावनापर अकुश
लगा कऽ गुंजनकेँ पुचकारए लगलीह। सभ वयक्
रहल छल, मुदा सबहक ठोर ज नाथकक फाटक जका ँ ब ंद......। मा
ँ पर
आिख
सुखस ँ व ंिचत
◌ेना ककरो
र निह देिख सकैछ। सरप ंच सहाएव बजलाह- “निह हह , भौजीकेँ माएक
ू
पमे देख।”
ु “कहव अ◌ासान मुदा, एना भऽ सकैत अिछ। केओ कतवो मानए पर ंच मा
हम मो -मन बजलहँ मक आगा ँ सभ अ◌ोछ।”
भौजीक िस हमे को
ू
कमी निह, ई गपप् हम बझव
गुंजन अवोध, माएक स ंग िपिठया जका ँ
्
लड़◌ैत छल ओिह क्षणकेँ िवसरव अस ंभव तँ निह, क् िलषट् अवशय् अिछ। मिझनीक पशचात
बावा
ू
दलानपर आिब िदवस िव ाम करए लगलाह। बावजी
शिन पेिठया मा ँछ िकनवाक लेल ि◌वदा भऽ
गेलिन।
एक म क् खक कतेक
प भऽ सकैत अिछ। अप
आनव। पाहनु की? हमरो सबहक लेल ओ अप
मॉछ अ त छिथ। अपन स ंतित लेल लोक की की
्
निह करैत अिछ, मािटक ढेपकेँ कुमहार
बिन कऽ घैलक
अपन सकल म
ु
शाकाहारी पर ंच पाहनक
लेल मॉछ अप
प दैत अिछ। सुधा कोष बनाएवाक लेल
रथकेँ झा ँिप लैत अिछ। सुधाकोष आगा ँ कोन
पक हएत ककरो वशमे निह। ऑगन
ु “आइ भिर हमरा छोड िदअ अप
आिब हम भौजीस ँ चाह बनएबाक आ ह कएलहँ -
्
सटोप
जड़◌ा कऽ
बना िलअ।”
हमरो खराव निह लागल, अपन िप क
्
बबबेटा
निह खएताह, हमहँ ु खाएव। ‘गह-ग
्
ित िस ह सवाभािव
क अिछ, मॉछ तड़◌ैत छलीह। मा
रौ, गहग
ु
रौ......सुिनते भागल दलान िदिश अएलहँ ।
दलानपर दसौत गामक भाट क् यो टाटक कए रहल छलाह। भाटक नाओ मोन निह मुदा सभ िकयो
ु
हनका
मुकेश कहै त छिथ। ओ निकया कऽ गीत सुनावए लगलाह- “िस िहया िवसिर बैसल अिछ गाम....”
ू
बावजी
भाटक स ंग समिधक साक्षात्कार करौलिन। हमर बड़का बालकक अिजया ससुर छिथ, अपन
गामक िनिवरोध
र्
सरप ंच छलाह। सरप ंच सहाएवक िवशु
“रैनी-भैनी ओ रौितिनया
58
मैिथली सुिन भाट महाशय गावए लगलिन-
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
दीप गोधनपुर कैिथिनया
पा ँच गाम पचही परग ा
उ म गाम न
र
ू ◌ी बसए मधेपुर
तेली-सड़
ल ंठक ठ
लख
र”
ु
ू
“सरप ंच सहाएव, हम दस-दआिर
छी तेँ नीक अधलाह बझैत
छी। अप
अपन पोतीक िवयाह
ु
किरयन कएलहँ ....
इहो नीक गाम मुदा अिछ तँ दक् िखन। लेिकन अप क समिध मलू
पस ँ कैिथिनया
गामक वासी छिथ.... झ ंझारपुर टीशनक सटल गाम- ‘कैिथिनया’। िहनका दिछनाहा निह कहल जा सकैत
अिछ ई सुिनते सरप ंच सहाएवकेँ जेना िवरनी कािट लेलक....। क्षमा क
मुदा हम तँ शु
दिछनाहा
छी। हसनपुर चीनी िमलक पॉजिर लागल गाम शासन हमर जनम् आ कमभ
र् ूिम।”
ू भऽ गेलाह। मुदा छिथ तँ िस हसत
् मैिथल, क्षणिहमे भरवा
द ू क्षणक लेल मुकेश जी मक
् अप
बदिल गेल। अहोभागय
् ितक दशनर् भेल। शासन गाम िमिथलाक चिचत
सन महान वयक्
र् गाम
अिछ। ओिह ठॉक सती माताक मिहमा के निह ज त अिछ? िबड़ला पिरवारक
माताक सम ृित सव् प तोड़ण
दक् िखन भरक रिहतहँ ु अप
ारा अप
गाममे सती
ू
ु
ारक िनमाणर् कएल गेल अिछ। एकटा बात पछवाक
द:साहस
कऽ रहल छी
पिरमािजर्त मैिथली बजैत छी..... से कोना? अवशय् अप क मा क
प ंचगामक पिरिधमे हएत।
“निह मा क दिक्ष
अिछ आर सासुर तँ िवशु
ू
् त अिछ।”
दिक्षण म ंझौल गाम, बेगसरायमे
अवसिथ
ू
्
्
बाबाक वयथा
सुि◌न बावजी
अकचका गेलिथ, मुकेश बाव ू दीधसर् ू ी जका ँ िकएक धमिगजजिर
के
ु भलमा षकेँ िवसिर जाएव। एिह सबहक लेल अहॉ◌ंक को
छी। जौ ं औतुका मैिथली सुनवै तँ बहत
दोष निह िकछु लोक एिह
कारक भेद पैदा कऽ मा भाषाकेँ हिथयावए चाहै त छिथ ई निह चलऽ
देव। या ीक गामस ँ उतरो को
ु
गाम अिछ तँ हनको
दिछनाहा मानल जाए।
ो. सुमन जी,
वासी
जी, आरसी बाव,ू बिु नाथ िम , लाभ जी, हिरमोहन झा, हासमी जी, शेफािलका वमा र् इहो सभ दिछनाहा
छिथ तेँ िहनका सभकेँ बािर िदयौ। जािह महाकिव िव ापितक नाओपर कूदैत छी ओ अपन महापिर
ु
िनमाणर् दक् िख मे कएलिन। पाप करैत छी ितरहतमे
आ पितया कटएवाक लेल गंगाकात िसमिरया
दिक्ष
अबैत छी। जा.... मुकेश जी क्षमा क , अप केँ हम ई सभ िकएक किह रहल छी, अहूँ तँ
्
दिछनाहे छी..... समसतीपुर
िजलाक दसौत
ाम वासी।”
ु
ु
् ट् दशनर् कऽ रहल छलहँ ।
सरप ंच सहाएवकेँ स ंतोखक अ भूित भेलिन, मुदा हम हनक
छोभक सपष
ू
बावजी
स ँ मुकेश जी क्षमा याचना करैत बजलाह- “हमर दोख निह एहेन मानिसकताक मधय् पैघ
ु
भेलहँ ।”
्
सरप ंच सहाएव दीघ र् शवास
लैत बजलाह- “मैिथलीक मधय् एकटा िवडंबना अिछ अपनाकेँ
मािणत करवाक लेल दोसरकेँ मरोड़ि◌ देवाक। हमरा सबहक
59
ण समाजमे पिह
षठ्
बेसी छल, आव
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
सुधिर रहल अिछ। सुरग
केँ सुगरग
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
कहल गेल अड़िरयेक मॉथपर तँ पैघ कल ंक-हनका
ु
ु
अ ड़ि◌ये कहल जाइत अिछ। आन जाइतक कोन कथा हनका
सभकेँ मैिथल बझले
निह गेल।”
ु
एिह दशापर कानी वा हँ सी िनणएर् निह कऽ सकलहँ ।
ऑगनस ँ भोजनक िनम ं ण आएल। मुकेश जी
भात निह खएवाक इच्छा
् यतक िशकार छिथ। बाव ू जी अपन किवता
कट कएलिन िकएक तँ कबिज
्
्
पॉती जका ँ िचिकत् सा आयाम देखौलिन- “दसत-दस
तावर
ं खाितर भक्
त अम ृतं फल ं। (पेट साफ
करबाक लेल लताम खाक)।”
् निह होतं तँ कूिथसरप ंच सहाएव तत्क्षण बजलाह- “यिद अहूस ँ निह ठीक हो तँ ताहूस ँ दसत
कूिथ मरीयते।”
ु
् ” हमर मोनमे जीिवत छल। आव ओ
दोसर िदन बाबा चिल गेलाह मुदा हनक
“दिछनाहा वयथा
ु
स ंसारमे निह छिथ पर ंच िदशा मोन पड़ि◌ते हनक
ममक
र् अ भूित
ास ंिगक अिछ।
२
गजे
ू कथा- १. श शास् म ् आ २. िस
ठाकुरक दटा
गजे
महावीर
ठाकुर
गजे
ठाकुर, िपता- गीर्य कृपान
ठाकुर, माता- ीमती ल
ू
ु
१९७१ ई., मल-गाम-में
हथ, भाया-झ ंझारपुर,िजला-मधबनी।
लेखन: कु
म ् अ मनक
र्
सात ख - ख -१
ी ठाकुर, ज - ान-भागलपुर ३० माच र्
ब -िनब -समालोचना, ख -२ उप ास-(सह बाढ़िन),
ख -३ प -स ं ह-(सहस् ा ीक चौपड़पर), ख -४ कथा-ग
स ं ह (ग
गु ), ख -५ नाटक(स ंकषण),
र्
ख -६ महाका - (१.
ाह
आ २. अस ाित मन ), ख -७ बालम ंडली िकशोर-जगत
ं नक
कु
म ् अतम
र्
नामस ँ।
मैिथली-अ ं जी आ अ ं जी-मैिथली श कोशक ऑन लाइन आ ि ंट स ं रणक सि िलत
प ी- ब क सि िलत
पे ँ लेखन-शोध-स ादन आ िमिथलाक्षरस ँ देवनागरी िल
(४५० ए.डी. स ँ २००९ ए.डी.)-िमिथलाक प ी ब " नामस ँ।
पे ँ िनमाण।
र्
ंतरण "जी म मैिप ंग
मैिथलीस ँ अ ं जीमे कएक टा कथा-किवताक अ वाद आ क ड, तेलुगु, गुजराती आ ओिडयास ँ अ ं जीक
मा मस ँ कएक टा कथा-किवताक मैिथलीमे अ वाद।
उप ास (सह बाढिन) क अ वाद १.अ ं जी ( द कामेट नामस ँ), २.को ंकणी, ३.क ड आ ४.स ं ृतमे कएल
गेल अिछ; आ एिह उप ासक अ वाद ५.मराठी आ ६.तुलुमे कएल जा रहल अिछ, स ंगिह एिह उप ास
सह बाढिनक मलू मैिथलीक
ल स ं रण (मैिथलीक पिहल
ल पु क) सेहो उपल अिछ।
60
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
कथा-स ं ह(ग
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
-गु ) क अ वाद स ं ृतमे।
ं
ं
ु
ू
अतजा
लर् लेल ितरहता
आ कैथी यनीकोडक
िवकासमे योगदान आ मैिथलीभाषामे अतजा
लर् आ स ंगणकक
श ावलीक िवकास।
का रचना सभ:-१.कु
म ् अ मनक
र्
सात ख क बाद गजे
ठाकुरक कु
म ् अ मनकर्
ठाकुरक दोसर उप ास
२ ख -८ ( ब -िनब -समालोचना-२) क स ंग, २.सह बाढिन क बाद गजे
स॒ह ॑ शीषा॒ र् , ३.सह ा ीक चौपडपर क बाद गजे
ठाकुरक दोसर प -स ं ह स॑ह िजत् ,४.ग
गु
क बाद गजे
ठाकुरक दोसर कथा-ग
स ं ह श शास् म ् ,५.स ंकषणर् क बाद गजे
ठाकुरक दोसर
नाटक उ ामुख ,६.
ाह
आ अस ाित मन क बाद गजे
ठाकुरक तेसर गीत- ब
नाराशं॒सी , ७.
ना-भुटका आ िकशोरक लेल गजे
ठाकुरक तीनटा नाटक- जलोदीप, ८. ना-भुटका आ िकशोरक
लेल गजे
ठाकुरक प स ं ह- बाङक बङौरा , ९. ना-भुटका आ िकशोरक लेल गजे
ठाकुरक
िख ा-िपहानी स ं ह- अक्षरमुि का ।
शी
र्
िवदेह ई-पि का “िवदेह” ई-पि का ht t p://wwwvi
. deha.co.i n/ क
स ादन: अ जालपर
ु
स ादक जे आब ि ंटमे (देवनागरी आ ितरहतामे)
सेहो मैिथली सािह आ ोलनक ार
कए
ु
अिछ- िवदेह: सदेह:१:२:३:४ (देवनागरी आ ितरहता)।
ई-प
स ंकेत- ggaj endr [email protected] l .com
२.१
श शास् म ्
िस ंह रािशमे सयू ,र् मोटा-मोटी सोलह अग
स ँ सोलह िसत र धिर। िकछु सुखेबाक होअए तँ सभस ँ
ू िपताक तालप सभ पसरल रहै त छल, वािषक
कड़◌ा रौद। िस ंह रािशमे िमलक
र् पिररक्षण योजना,
ु त छल। आन ा िमलक
ू िपताजीक एिह तालप सभक पिररक्षण
जे एिह तालप सभमे जान फकै
ू ँ ओिहना मोन छि । िमल ू
म योगस ँ करैत रहिथ। कडगर रौदमे तालप पसारैत आन ा, िमलके
स ंग िजनगी बीित गेलि
आन ाक। मुदा एिह बरखक िस ंहरािश अएलास ँ पवू िह
र् आन ा चिल गेलीह...
ू आ ओिह तालप सभक
आ आब जखन ओ निह छिथ तखन जीवनक पिररक्षण कोना होएत। िमलक
जीवनक..
म। श क
म। श क अथ र् हम सभ गिढ लैत छी। आ फेर
ँ ना चानन घन गिछया
लुकेसरी अग
तिह तर कोइली घऽमचान हे
ँ नमा
कटबै चनन गाछ, बेढबै अग
61
म शु
भऽ जाइत अिछ।
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
छुिट जेतऽ कोइली घऽमचान हे
कानऽ लगली खीजऽ लागल, बोन के कोइिलया
टिू ट गेलऽ कोइली घऽमचान हे
जान ू कान ू जान ू की, जोबोन के कोइिलया
अिह जेतऽ कोइली घऽमचान हे
जिह बोन जेबऽ कोइली
रिह जेत तऽ िनशनमा
जन ू झ
सो
नयना से लोर हे
से मेढ़◌ायेब कोइली तोरो दनु ू प ँिखया
पे से मेरायेब दनु ू ठोर हे
जाहे बोन जेबऽ कोइली
नझ ु बालम
रिह जेतऽ रकतमाला के िनशान हे
को
ु
युवतीक अबाज चमकार
र्
टोलस ँ अबैत बझना
गेल..आन ाक अबाज।
मुदा आन ा
किह डोमासी
आन ाक।
पर। श क
ू
ू ँ समाचार
तँ चिल गेली, किनये काल पिह
ओकर लहाश देिख आएल छिथ बचल।
िमलके
ु गेल छिथ। आ आन ा, ओ तँ बढ
ू भऽ मरलीहेँ । तखन ई अबाज, युवती
घिर
ू िपता ीधर मीमा ंसक मारते रास गप श शास् म ्
म। श क
म। कहै त रहिथ िमलक
अथ र् हम सभ गिढ लैत छी। आ फेर
म शु
भऽ जाइत अिछ।
I
श शास् म ्
गदमर् गोल भेल छल।
अनघोल मिच गेल छलै। बलान धारमे को
लागल छल।
62
लहाश बहल चिल जा रहल छल। धोिबयाघाट लग कात
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू ँ आएल छल से निह जािन। को
कतेक दरस
बएसगर मिहलाक लहाश छल। धोिबन लहाशकेँ चीि
ँ ँ किह दै छिथ ओकर नाम आ पता। गौआ ँ के, वैह गामक डोमासीक बचलके
ू ँ।
गेल रहिथ। गौआके
ु
ू
म ृतकक घरमे खबिर भऽ गेल छलै। एसकरे एकटा बढ़◌ा
रहै ए ओिह घरमे...िमल।
ू टोलबैया गौआ
िमलक
ँ सभ लहाशकेँ डीहपर आिन ले
रहिथ।
छल आ फेर िमल ू ओकर दाह-स ं ार कऽ दे
ु
ु
गाममे अही गपक चचा र् रहै । बचल ू बढ़◌ाके
ँ बझल
छि
िकछु आर गप। िच ै छिथ ओ ओिह लहाशक
ु रास गप
ु
म
केँ। नवका लोककेँ बहत
बझल
छै।
आन ाक लहाश..
ु क। ओकर बिचया सभ सभटा सुिखतगर घरमे छै..बेटा सेहो िव ान।
-आन ा ब नीक रहै । बझ
िमल,ू आन ाक वर सेहो उ ट.. ीकर मीमा ंसकक पु ..। मुदा किहयो िमल ू आिक आन ा को
खगतामे ककरो आगा ँ हाथ निह पसार
छिथ।
ू भऽ गेल छिथ, झनकुट
ु
ू
बचल ू सेहो आब बढ
बढ।
िहनकास ँ पैघ मा
िमल ू छिथ । लोक सभ दनु ू
ु
गोटेकेँ बढ़◌ा
किह बजबै छि ।
ु
ु
आ एिह बचल ू बढ़◌ाके
ँ बझल
छि
ढेर रास गप।
.....
िमल ू आ
ु
ीधरक वातालाप।
र्
िकछु बिझऐ
आ िकछु निह।
ू
-िमल।
भामतीमे वाच ित कहै छिथ जे अिव ा जीवपर आि त अिछ आ िवषय बिन गेल अिछ।
ू कारण कोना भऽ सकत? को
आ साक्षा ार लेल कोन िविध ीकार करब? अस कथक
बौ ुक
स ा ओकरा स कोना बना देत, ि कालमे ओकर उपि ित कोना िस
कऽ सकत? जे बौ ु निह तँ
ू यु
स अिछ आ निहये अस आ निह अिछ एिह दनु क
प; स ैह अिछ अिनवा र् । िबना को
व ु आ
ू
ू
ओकर ज्ञान रखिनहारक श क अवधारणा कोना बझऽमे आओत?
ू
-िमल।
कुमािरल कहै छिथ आ ा चैत
ू
जड अिछ, जागलमे बोध आ सतलमे
बोधरिहत।
ू
-िमल।
भामतीमे वाच ित कहै छिथ जे आ साक्षा ारस ँ रिहत शास् मे कुशल
ि
सर-समाजस ँ
पशुवत
वहार करैत छिथ, लाठी लैत अबैत
ि केँ देिख भािग जाइ छिथ, घास लैत अबैत
ि केँ
देिख लग जाइत छिथ। मा
डरस ँ घबड़◌ाइ छिथ।
“आ साक्षा ारस ँ रिहत शास् मे कुशल
ि
सर-समाजस ँ पशुवत
वहार करैत छिथ, लाठी लैत अबैत
ि केँ देिख भािग जाइ छिथ, घास लैत अबैत
ि केँ देिख लग जाइत छिथ। मा
डरस ँ
ू
घबड़◌ाइ छिथ।” ई गप मुदा सिरया कऽ बझबामे
आएल रहए हमरा।
....
63
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
आमक मास रहै ।
बानर आ बनगदहा खेत सभकेँ धा ंग
अिछ आ पारा बारीकेँ।
ू
“सभटा नाश कऽ देलकै बचल।
राितमे तँ निञ सुझै छै। भोरे-भोर कलम जा कऽ देखै छी।
बनगदहा सभटा फिसल खा लेलक आब ई बानर आमक पाछा ँ लागल अिछ।”
ु
हमरा बझल
अिछ जे आमक मासमे बानर आ बनगदहा ओिह बरख ए े स ंग आएल छलै।
आमेक मास रहै । से िमल ू ओगरबाहीमे लागत आब। आमक िटकुला पैघ भऽ रहल छै। मचान
ू ँ । हमहूँ स ंगमे रिहयै। बा ँस कािट कऽ अबैत रही।
बा बाक रहै िमलके
ु
डबरा कात दऽ कऽ अिब रहल छलहँ ।
भोरहरबा छल। अकास म
ु
बझना
गेल छल।
लाल रेख क क िपरौछँ भेल
ू
-लीख दऽ कऽ चल ू बचल।
खेतक बीचमे लीख दे
तख
ु
आगा ँ बढऽ लागलहँ ।
ु
हम शोिणत देखलहँ ।
हमर देह शोिनत देिख सद र् भऽ गेल।
ु
मुदा िनशा ँस छोडलहँ ।
बा ँसक ती ण पात एकटा बािलकाक हाथ आ मुँ हकेँ
बा ँसक
छाड ओकरा लागल रहै ।
ू
छडैत गेल रहै । िमलक
िमल ू हाथस ँ बा ँस फेिक कऽ ओिह बािलका लग चिल गेल छल।
ँ
राएल आिखक
ओिह बािलकाक शोिणत पोिछ िमल ू ओकर
-की कऽ रहल छी।
-शोिनत ब
भऽ जाएत।
बािलका लीखपर आगा ँ दौिग गेल छलीह।
-की नाम छी अहा ँक।
-आन ा।
-कोन गामक छी।
-अही गामक।
-अही गामक?
हम दनु ू गोटे स ंगे बाजल रही।
64
छारपर मािट रगिड दे
रहै ।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू पिहल भेँ ट वैह रहै ।
हँ , आन ा नाम रहै ओकर। आ िमलक
...
मचा
ब ा गेल रहए। मुदा आन ा फेर निह भेटल रहए।
िमल ू पुछैत रहए।
-कोन टोलक छी ओ। निहये िमसरटोलीक अिछ, निहये पिछमाटोलीक आ निहये ठकुरटोलीक।
-डोमासीक रिहतए तँ हम िचि ते रिहितऐ।
-तखन कोना अिछ ओ अपन गामक। आ अपन गामक अिछ तँ आइ धिर भेँ ट िकए निह भेल रहए
ओकरास ँ।
ू टोलमे फदे
ु
मुदा िब ेमे स ंयोग भेल छल। िमलक
भाइक बेटाक उपनयन रहै । ब ँसक ी िदन
िपपहीबलाकेँ बजबैले हम गामक बाहर चमकार
र्
टोल गेल रही।
-िह
भाइ, िह आ भाइ।
-आबै छिथ।
को
बािलकाक अबाज आएल रहए। अबाज िच ल सन।
-अहा ँ के छी।
-हम िह क बेटी। की काज अिछ?
ु
-िपपही लऽ कऽ एखन धिर अहा ँक बाब ू निह पहँ चल
छिथ। बजबैले आएल िछयि ।
-तही ओिरयानमे लागल छिथ।
-अहा ँक नाम की छी?
तख
टाट परक ल ीकेँ हँ टबैत वैह बािलका सोझा ँ आिब गेिल।
-हम आन ा। हम अहा ँकेँ चीि
गेल रही। अहा ँक की नाम छी?
हम तँ सद र् भेल जाइत रही। मुदा उ र देबाके छल।
ू
-बचल।
-आ अहा ँक स ंगीक।
-िमल,ू प ंिडत
65
ीधरक बेटा।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू िपताक नाम सेहो हम आन ाकेँ बता देिलऐ। पुछ
िमलक
िकएक..किह देिलऐ।
तख
िह आ िपपही ले
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
तँ निह छिल ओ, मुदा निह जािन
ु
ु
आिब गेल रहिथ। हनका
स ंगे हम अपन टोल आिब गेलहँ ।
र ामे िह आकेँ पुछिलयि - आन ा अहा ँक बेटी छिथ। मुदा किहयो देखिलयि
निह।
-मामागाममे बेशी िदन रहै छलै। मुदा आब चेतनगर भऽ गेल छै। से गाम लऽ अन
िछऐ।
-फेर मामागाम किहया जएतीह।
-निञ, आब ओ चेतनगर भऽ गेल अिछ। आब स ंगे रहत।
प ंिडतजीक बेटा िमल,ू हमर स ंगी िमल,ू ई गप सुिन की होएतैक ओकरा मोनपर। कैक िदनस ँ ओकर
ू
पुछारी कऽ रहल छल। हम सोच
रही जे भ
मामागाम चिल जाए आन ा आ क क िदनमे िमलक
पुछारीस ँ हम बा ँिच जाएब।
मुदा आब तँ आन ा गामेमे रहत आ प ंिडत
ीधरक बेटा िमल..ू
ु
ू
धर..हमही
ं उनटा-पुनटा सोिच ले
छी। ओिहना द-चािर
बेर िमल ू आन ाक िवषयमे पुछारी के
अिछ। तकर मा
ई थोडबेक भेलै जे..
मुदा जे स ैह भेलै तखन ?..
प ंिडतक बेटा आ चमकारक
र्
बेटी..
प ंिडत
ीधर मानताह?..गौआ ँ घ आ मानत?
ु
धर।
फेर हम उनटा-पुनटा सोिच रहल छी। िपपही बाजए लागल रहए आ लीखपर दे
ु गेल रही। र ामे ओिह लकेँ अकान
भिर टोलक स् ीगण-पु षक स ंगे ब ँसिब ी पहँ िच
आ आन ाक पिहल िमलनक लकेँ- को
अबाज लागल अबैत..मा स ंगीत.. र निह।
हम आ िमल,ू
रही। िमल ू
ब आ बा ँस सभपर थ ा दऽ दे
रहै आ सभ बा ँस कटनाइ शु
कऽ दे
रहिथ। मडबठ ी आइये
छै। घामे-पसी
भे
क क मोन तोिषत भेल। क ापर बा ँस ले
हम आ िमल ू ओही र े िबदा
भेल रही..ओही लीख दे ।
…
मुदा िमल ू हमरा सिदखन टोकारा देमए लागल। कारण को
रिहऐ। ओ हमर राम रहए आ हम ओकर ह मान।
काज हम एतेक देरीस ँ निञ के
ू ँ किह देिलऐमचानपर एिहना एक िदन हम िमलके
-िमल,ू िबसिर जो ओकरा। कथी लेल बदनामी करिबहीं ओकर। िह आक बेटी िछऐ आन ा। ओना
तोहर नाम हमरास ँ ओ पुछलक तँ हम तोहर नाम आ तोहर िपताजीक नाम सेहो किह देिलऐ।
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
-हमर िपताजीक नाम ओ पुछ
-निह पुछ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
रहौ?
रहए। मुदा..
-तखन िकए कहलहीं?
-आइ
काि
तँ पता लागबे करतै..
-जिहया लिगतै तिहया लिगतै..आब ओ हमरास ँ कटत..हमर मेहनित तँ ू बढ़◌ा देलेँ..
-कोन मेहनित। तँ ू प ंिडत
ओकर।
ीधरक बेटा आ ओ िह आ चमकारक
र्
बेटी। कथीले बदनामी करिबहीं
-िबयाह करबै रौ। बदनामी िकए करबै।
-ककरा ठकै िछहीं ?
-ककरो
रौ।
ू
एिहना अनचो ेमे िनणयर् लैत छल िमल।
ीधर मीमा ंसकक बेटा िमल ू
सभ पसरल रहै त देख
छिलऐ। से भरोस
भऽ रहल छल।
-गाममे किहयो देखिलऐ
ाियक। ओकरा घरमे तालप
ओकरा।
-तँ ू गाममे रहलेँ किहया। गु जीक पाठशालास ँ पौ केँ तँ आएल छेँ।
-मुदा तँ ू हीं कोन देख
रहीं।
-मामा गाम रहै छल ओ।
ु कऽ तँ निह चिल जाएत।
-फेर मामा गाम घिर
- , से पुिछ लेिलऐ। आब गामेमे रहत।
ू माएक देहा
पौ का ँ गामेमे िमलक
भऽ गेल छलि ।
ु
ीधर मीमा ंसक सेहो खटबताह सन भऽ गेल छिथ- ई गप हनकर
टोलबै ा सभ करैत छल।
तालप सभक पिररक्षण कोना हएत एिह िस ंह रािशमे? यैह िच ा रहि
ीधरक, आ तेँ ओ
ु
खटबताह सन करए लागल रहिथ.. ईहो गप हनकर
टोलबै ा सभ करैत छल।
...
िहर..िहर
र्
…िहर
र्
....
र्
67
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू
ु जाइ छी। आन ा मुदा
डोमासीस ँ सगरक
पाछू हम आ िमल ू िहर-िहर
र्
र् करैत चमकार
र्
टोल पहँ िच
ु छी तँ आन ा आ िमलक
ू गप
सोझा ँमे भेिट गेलीह। सु र स ंगे हम आगा ँ बिढ जाइ छी। घमै
सु ले कान पाथै छी।
िहर..िहर
र्
र्
ू
एिह बेर आन ा िहर र् कहै त अिछ आ हम मु ी दैत सगरक
आगा ँ बिढ जाइ छी।
ई घटना कैक बेर भेल आ ई गप सगरे पसिर गेल। िह
ही
उ िे लत रहए लागल रहिथ। ही क प ी बेटीक भा क लेल गोहािर करए लगलीह।
कए कोस मा ँ मि लबा
कए कोस लुकेसरी मि लबा
कए कोस पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
कए कोस पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
ु कोस मि लबा
दइ
चािर कोस लुकेसरी मि लबा
पा ँचे कोस पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
पा ँचे कोस पडल दोहाइ
कोन फूल मा ँ मि लबा
कोन फूल ब ी मि लबा
कोन फूल पर पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
कोन फूल पर पडल दोहाइ
68
कताक बेर हमरा लग आएल रहिथ।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
कनी तकबै हे माइ
ऐली फूल मा ँ मि लबा
बेली फूल लुकेसरी मि लबा
गे े फूल पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
गे े फूल पडल दोहाइ
कनी तकबै हे माइ
.........
िह
डोमासी आबए लागल रहिथ।
-की हेतै, कोना हेतै।
-झ ु े..
हम गछिलयि
जे हम िह
स ंगे
ीधर प ंिडत लग जाएब।
आ हम िह केँ
ीधर मीमा ंसक लग लऽ गेल रिहयि । ीधरक प ीक म ृ ु गत बरखक िस ंह रािशक
बाद भऽ गेल छलि । आ तकर बाद िह
मीमा ंसक खटबताह भऽ गेल छिथ- लोक कहै त छलि ।
लोक के? वैह टोलबै ा सभ। गामक लोक, परोप ाक िव ान लोक सभ तँ ब इ त दै छलि
ँ
ु
हनका।
आिखक
देखल गप कहै छी..
ू
ू
“आउ बचल।
िह , आउ बैस..।
”- गु
भऽ जाइत छिथ
रहिथ, रहै त रहिथ आिक गु
भऽ जाइत रहिथ।
ँ
“क ा, आगन
सु
ू िबयाह िकए
रहै त अिछ। कतेक िदन एना रहत। िमलक
“िमल ू तँ िबयाह ठीक कऽ ले
“आन ास ँ, समिध ही
हमरा िदस िनि
भावस ँ देखै छिथ।
तँ अहा ँक स ंग आएल छिथये।”
ीधर प ंिडत।
ू
आ बाह रे िमल।
पिहनिहये बापकेँ पिटया ले
एिह गपकेँ अकािन ले
छल।
69
करा दै िछयि ”?
छिथ”।
“क ऽ?” -हम घबड़◌ाइत पुछै िछयि । िह
हाय रे
ीधर। प ीक म ृ ुक बाद एिहना, रहै त
छल। मुदा बा पर जाइत को
टोलबै ाक कान
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु गेल छल।
हम सभ बैसले रही आिक ओ िकछु आर गोटेकेँ लऽ कऽ दलानपर जिम
ु
हनकर
सभक शास् ाथ र् शु
भेल। श क काट श स ँ।
ीधर मीमा ंसकस ँ
“ ीधर, अहा ँ कोन कोिटक अधम काज कऽ रहल छी”।
“कोन अधम काज”।
“छोट-पैघक को
िवचार निह रहल अहा ँकेँ मीमा ंसक?”
“िव ान ् जन। ई छोट-पैघ की िछऐ? मा
श । एिह श केँ सुनलाक प
माथमे एक वा दोसर तरहेँ ढिु क गेल अिछ। पद बना कऽ ओिहमे अपन
“मा
ात् ओकर श ाथ र् अहा ँक
ाथ र् िम
र कऽ...”।
छोट-पैघ अिछ श ाथ र् मा । आ तकर िव ेषण जे पद बना कऽ केलहँ ु से भऽ गेल
ाथपरक”।
र्
“िव ास निह होए तँ ओिह पदमे स ँ
“मा
ू
ाथक
र् समपणर् कऽ कए देख।
सभ
म भािग जाएत”।
अहा ँ िमल ू आ आन ाक िबयाह करेबाले अिडग छी”।
ु
ू प ृथक अि
“िव ान ् जन। र ीकेँ सा ँप हम अही ारे बझै
छी जे दनु क
ू च मा देखै छी तँ तख
ू वा िवक भागमे च माकेँ
दटा
अकाशक दटा
कारण िवषय निह स ंस
छै, ओना उ े आ िवधेय दनु ू स छै। आ एतए
आ ाक ज्ञान निह दऽ सकैए। आ ाक िवचारस ँ अहं व ृि - अपन एिह त क
ज्ञानक कता र् आ कम र् दनु ू अिछ। पदाथक
र् अथ र् स ंस स ँ भेटैत अिछ। श
ँ घोकचा कऽ
छै। आिख
ारोिपत करै छी।
मक
सभ िवषयक ज्ञान सेहो
बोध होइत अिछ। आ ा
सुनलाक बाद ओकर अथ र्
अ मानस ँ लग होइत अिछ”।
“अहा ँ श क
म उ
कऽ रहल छी। हम सभ एिहमे िमल ू आ आन ाक िबयाहक अहा ँक इ ा देखै
छी”।
“स ंक
ू
भेल इ ा आ तकर पितर्
निह हो से भेल
“तँ ई हम सभ
ेष”।
ष
े वश किह रहल छी। अहा ँक नजिरमे जाितक को
“देख,ू आन ा सवगुणस
र्
मह
निह?”
ु
छिथ आ हनकर
आ हमर एक जाित अिछ आ से अिछ अ व ृ
आ सवलोक
र्
क्ष। ओ हमर धरोहरक रक्षण कऽ सकतीह, से हमर िव ास अिछ। आ ई हमर िनणयर् अिछ”।
“आ ई हमर िनणयर् अिछ।”- ई श हमर आ िह क कानमे ए े बेर
पैसल रहए। हम तँ िह
ू ँ िच ैत रिहयि , एिहना अनचो े िनणयर् सुनबाक अ ासी भऽ गेल रही। मुदा िह
आ िमलके
क क
ु
ु गेल
कालक बाद एिह श सभक ित िन सुनलि
जेना। हनकर
अचि त नजिर हमरा िदस घिम
छलि ।
फेर
70
ीधर मीमा ंसक ओिह शास् ाथीर् सभमेस ँ एक
ं
ोितषी िदस आगुर
देखबै छिथ-
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
“
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ोितषीजी, अहा ँ एकटा नीक िदन ताकू। अही शु मे ई पावन िववाह स
आबैबला छै, ओिहस ँ पवू ।
र्
िकनको को
ु ठाढ भऽ जाइ छिथ।
सभ माथ झका
भऽ जाए। िस ंह रािश
आपि ?”
ीधर मीमा ंसकक िवरोधमे के ठाढ होएत?
ु
ु
“हम सभ तँ अहा ँकेँ बझबए
लेल आएल छलहँ ।
मुदा जखन अहा ँ िनणयर् लैये ले
मीमा ंसकजीक हाथ उठै छि
हम आ ही
ही
आ सभ फेर शा
छी तखन...।”
भऽ जाइ छिथ।
सेहो ओतएस ँ िबदा भऽ जाइ छी।
िनसा ँस ले
रहिथ, से हम अ भव के
रही।
...
ई निह जे को
आर बाधा निह आएल।
ु
ु
मुदा ओ खटबताह िव ान तँ छले। से आन ा हनकर
पुतोह ु बिन गेलीह। आ हनक
छुअल पािन हमर
टोल की परोप ाक िव ान ् क बीचमे चलए लागल।
.....
आन ाक
अिछ-
हरमे िववाह स
भेल छल। ओतु ा गीतनाद हम सुन
ू
पवत
र् ऊपर भमरा जे सतल,
ू
ु वािर हे
मािलन बेटी सतल
फल
उठ ू मािलन राख ू िगिरमल हार हे
ू
पवत
र् ऊपर भमरा जे सतल,
ू
ु वािर हे
मािलन बेटी सतल
फल
उठ ू मािलन राख ू िगिरमल हार हे
कोन फूल
ओढब लुकेसिर के
कोन फूल पिहरन
कोन फूल बाि के िस ंगार हे
71
रही, उ ासपणू ,र् एख
मोन
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
उठ ू मािलन राख ू िगिरमल हार हे
बेली फूल ओढब ब ी
चमेली फूल पिहरन
अरहलु फूल लुकेसिर के िस ंगार हे
उठ ू मािलन गा ँथ ू िगिरमल हार हे
उठ ू मािलन गा ँथ ू िगिरमल हार हे
....
ीधर मीमा ंसक आन ाकेँ तालप
बाद बेचारे आश ंिकत रहिथ।
दैवीय ह
सभक पिररक्षणक भार दऽ िनि
प, आन ा जेना ओिह तालप
भऽ गेल रहिथ। प ीक म ृ ुक
ु
सभक पिररक्षण लेल आएल रहिथ हनकर
घर। अनचो े..
िमल ू किह देलक हमरा जे कोना ओ ीधर प ंिडतकेँ पिटया ले
रहए।
आ मािटक महादेव बनबैत रहत आ तालप सभमे घनू लािग जाएत..
घनू लागए देिथन तालप
सभमे, आन ा आएत एिह घर।
िमल ू तँ जेना जीवन भिर अपन लेल एिह िनणयक
र्
ीधरक आयु जेन बिढ गेल छलि ।
बारहे बिरस जब बीतल तेरहम चिढ गेल हे
बारहे बिरस जब बीतल तेरह चहिर गेल हे
ललना सासु मोरा कहिथन बिघिनया ँ
बिघिनया ँ घरसे िनकालब हे
ललना सासु मोरा कहिथन बिघिनया ँ
बिघिनया ँ घरसे िनकालब हे
72
ीधर मीमा ंसक िनणयर् कऽ ले
रहिथ।
ित कृतज्ञ छलाह।
ीधर आ आन ाक म
आन ा बिजते रहै छलीह आ गिबते रहै छलीह।
ा णक बेटी सराइ कटोरा
गप होइते रहै छल ओिह घरमे।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं ना जे बाहर तोिह छलिखन िरिनया ँ गे
अग
ललना गे आिन िदयौ आक धथरू फर पीिस हम पीयब रे
ललना रे आनी िदयौ आक धथरू फर पीिस हम पीयब रे
बहर से आओल बालुम पल ंग चिढ बैसल रे
बहर से आओल बालुम पल ंग चिढ बैसल रे
ललना रे किह िदयौ िदल केर बात की तब माहरु पीयब रे
ललना रे किह िदयौ िदल केर बात की तब माहरु पीयब रे
बारह हे बिरस जब बीतल तेरह चहिर गेल रे
ललना रे सासु मोरा कहिथन बिघिनया ँ
बिघिनया घरसे िनकालब रे
ू धय ननदो ठ ु क धय रे
सासु मोरा मारिथन अनप
ू धय ननदो ठ ु क धय रे
सासु मोरा मारिथ अनप
ललना रे गोट
ु घर जाओल सभ धन हमरे हेतै हे
खशी
ु घर जाओल सभ धन हमरे हेतै हे
ललना रे गोटनऽ खशी
ु रहू, चप
ु रहू धनी की तोहीँ महधनी िछअ हे
चप
ु रहू, चप
ु रहू धनी की तोहीँ महधनी िछअ हे
चप
धनी हे करबै हे तुलसी के जाग, की धन सभ लुटा देबऽ हे
ललना हे करबै मे पोखिर के जाग, की सभ धन लुटाएब हे
ीधर मीमा ंसक हँ सी करिथन- आन ा, अहा ँकेँ तँ सासु अिछ निह, तखन ओ बेचारी अहा ँकेँ बिघिनया ँ कोना
कहतीह?
73
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
-तेँ
ू
गबै छी, सभ चीज तँ भरल-परल
मुदा..।
ँ
आिख
रा गेल छलि
आन ाक। हमरा अख
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
मोन अिछ।
ु
-हम अहा ँकेँ दःख
देलहँ ु ई गप किह कऽ।
ु
-कोन दःख?
सासु
ीधरकेँ
स
छिथ तँ ससुर तँ छिथ।
ू ँ आ तोष होइ ।
देिख िमलके
.......
आ
ु त रहै त छलीह।
सभमे जान फकै
ीधर मीमा ंसकक म ृ ुक बादो आन ा तालप
ू ँ दटा
ू बेटी भेलि
फेर िमलके
ु हम देख
आन ाक खशी
व भा आ मेधा।
छी।
हर गेल रहिथ ओ। ओतिह दनु ू जौआ
ँ बेटी भेल छलि -
लाल परी हे गुलाब परी
लाल परी हे गुलाब परी
हे गगनपर नाचत इ
परी
हे गुलाबपर नाचत इ
परी
आ फेर भेलि
बेटा। पैघ भेलापर बेटा मेघकेँ पढबा लेल बनारस पठे
आ िदन िबतैत गेल, बेटी सभ पैघ भेलि
ू
भऽ गेल छलाह िमल।
ू
रहिथ िमल।
आ दनु ू बेटी, मेधा आ व भाक िबयाह दान कऽ िनि
बेटाक परविरश आ िबयाह दान सेहो केलि । मेघ बनारसमे पाठन करए लगलाह। मेघ, मेधा आ
व भा तीन ू गोटे सालमे एक मास आबिथ धिर अव ।
लोक िबसिर गेल मारते रास गप सभ।
II
भामती
74
ानम ्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ू िपताजीक एिह तालप
आन ा िमलक
ू ँ ओिहना मोन छि ।
िमलके
सभक पिररक्षण म
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
योगस ँ
कऽ रहल छिथ। कडगर रौद,
ू जीवनक पिररक्षण
िमल ू स ंग िजनगी बीित गेलि
आन ाक। आ आब जखन ओ निह छिथ तखन िमलक
कोना होएत।.. िमल ू वचनक बीचमे कतह ु भँ िसया जाइ छिथ।
वचन चिल रहल अिछ। िमल ू ग ड पुराण निह सुनताह। िमल ू म ंडनक
िसि
सुनताह, वाच ितक
भामती सुनताह, जे सुनबो करताह तँ । जँ बेटी सभक िज छि ये तँ आ ा िवषयपर कुमािरलक
दशनर् सुनताह। आ स ैह वचन चिल रहल अिछ।
म। श क
म। कहै त रहिथ ीधर मारते रास गप श शास् म ् पर। भामती
श क अथ र् हम गिढ लैत छी। आ फेर
म शु
भऽ जाइत अिछ।
ानम ् पर।
-गु जी। हम प ीक म ृ क
ु बाद घोर िनराशामे छी। की िछऐ ई जीवन। कतए होएत आन ा।
ू
ू
- िमल।
धीरज राख।
िसि क हमर ई पाठ अहा ँक सभ
मक िनवारण करत।
िसि मे चािर
का
छै।
, तकर्, िनयोग आ िसि
का ।
का मे
क
पपर, तकर् का मे माणपर,
िनयोगका मे जीवक मुि पर आ िसि का मे उपिनषदक वा क माणपर िववेचन अिछ।
ू
- िमल।
मुि
ज्ञानस ँ प ृथक् को
बौ ु निह अिछ। मुि
य ं ज्ञान भेल। मानवक क्षु बिु क
ु
कतह ु उपेक्षा म ंडन निह के
छिथ। कमक
र् मह ओ बझैत
छिथ। मुदा तािहटा स ँ मुि
निह
भेटत।
ोटकेँ िन-श क
पमे अथ र् दैत म ंडन देखलि । से श ंकरस ँ ओ एिह अथे र्ँ िभ छिथ
जे एिह
ोटक तादा
ओ बनबैत छिथ मुदा श ंकर
स ँ कम को
तादा
निह मा
छिथ। से
म ंडन श ंकरस ँ बेशी शु
अ ैतवादी भेलाह।
ू
-िमल।
म ंडन क्षमता आ अक्षमताक एक स ंग भेनाइकेँ िवरोधी त निह मा त छिथ। ई कख
अथिर् याकृत भेद होइत अिछ, मुदा ओ भेद मलू त कोना भऽ गेल। से ई
सभ भेदमे
रहलोपर सभ काज कऽ सकैए।
ू
-देख।
वाच ितक भामती
ानक िवचार म ंडन िम क िवचारस ँ मेल खाइत अिछ। म ंडन िम क
िसि पर वाच ित त समीक्षा िलख
छिथ। ओना त समीक्षा आब उपल
छै।
-तखन त
-वाच
समीक्षाक चचा र् कोना आएल।
ितक भामतीमे एकर चचा र् छै।
-मुदा म ंडनक िवचार जानबास ँ पवू र् हमरा मोनमे आिब रहल अिछ जे जखन ओ श ंकराचायसर् ँ हािर गेलाह
ु
तखन हनकर
हारल िस ा क पारायणस ँ हमरा मोनकेँ कोना शाि
भेटत।
-देिखयौ, म ंडन हािर गेल छलाह तकर माण म ंडनक लेखनीमे निह अिछ। म ंडन
ोटवादक समथक
र्
रहिथ, मुदा श ंकराचाय र्
ोटवादक ख न करैत छिथ। म ंडन कुमािरल भ क िवपरीत
ाितक समथक
र्
ु
रहिथ, मुदा श ंकराचायक
र् जािह िश
सुरे राचायके
र् ँ लोक म ंडन िम बझै
छिथ ओ एकर ख न करै
छिथ।
ु
-से तँ ठीके। म ंडन हािर गेल रिहतिथ तँ हनकर
दशनर् श ंकराचायक
र् अ करण किरति ।
75
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
-आब कहू जे जािह सुरे राचायके
र् ँ श ंकराचाय र् ृ ंगेरी मठक मठाधीश ब लि
से अिव ाक द ू तरहक
ू
हेबाक िवरोधी छिथ मुदा म ंडन अपन
िसि मे अ हण आ अ था हण नामस ँ अिव ाक दटा
प
कह
छिथ। म ंडन जीवकेँ अिव ाक आ य आ
केँ अिव ाक िवषय कहै छिथ मुदा सुरे राचाय र् से
ु
मा
छिथ। श ंकराचायक
र् िवचारक म ंडन िवरोधी छिथ मुदा सुरे राचाय र् हनकर
मतक समथनमे
र्
छिथ।
.......
ु
बानर आ बनगदहा खेत सभकेँ धा ंग
अिछ आ पारा बारीकेँ। आब हमरा दआरे
गामक लोक महीस
पोसनाइ तँ निह छोिड देत। बानर आ बनगदहा ब
कसान कऽ रहल अिछ।
“चािरटा बानर कलममे अिछ। धऽ कऽ आम सभकेँ दकिड देलक। हम गेल रही। सा ँझ भऽ गेलै
तँ आब सभटा बानर गाछक िछ ी धऽ ले
अिछ। सा ँझ धिर दनु ू बापुत कलम ओगर
रही, झठहा
ू ँ हम कहै िछयि ।
मािर भगेलहँ ,ु मुदा तखन अहा ँक कलम िदस चिल गेल”।–- हम िमलके
ू
“सभटा नाश कऽ देलकै बचल।
राितमे तँ निञ सुझै छै। भोरे-भोर कलम जा कऽ देखै छी।
बनगदहा सभटा फिसल खा लेलक आब ई बानर आमक पाछा ँ लागल अिछ। करऽ िदयौ जखन...”।
“बनगदहा सभ तँ साफ कऽ उपिट गेल छलै। निह जािन फेर क ऽ स ँ आिब गेल छै। गजपटहा
गाममे जाग भेल छलै, ओ रेस ँ राता-राती धार टपा दै गेल छै”।
“से
छै। ई बनगदहा सभ धारमे भिसया कऽ
पाल िदसनस ँ आएल छै। आबऽ िदयौ
जखन...”।
“हम बानर सभ िदया कह
रही”।
“से हेतै”।
ु
“हेतै भाइज, तखन जाइ छी”। हमरा बझल
अिछ जे आमक मासमे बानर आ बनगदहा ओिह बरख
ू भेँ ट भेल रहै । आ आन ाक गेलाक बाद
ए े स ंग िनप ा भऽ गेल रहै जािह बरख आन ा आ िमलक
बानर आ बनगदहा निह जािन क ऽ स ँ फेर आिब गेल छै, आन ाक म ृ ुक प हो िदन
बीतल छै...
.......
ू कपारपर िच ाक मोट कएकटा रेख ऊपर नीचा ँ होमए लगलि , िहलकोरक तर ंग
बचल ू गेलाह आ िमलक
ं
सन, एक दोसरापर आ ािदत होइत, पुरान तर ंग नव ब त आ बढैत जाइत। अगनामे
सोर करै
ु
छिथ। “ब ु ी, बिचया।
जयकर आ िव नाथ आइ गाछी गेल रहए। आिब गेल अिछ
दनु ू गोड़◌े।
सुनिलऐ
जे बानर सभक उप व भऽ गेल छै। काि स ँ
जाइ जाएत गाछी, से किह िदयौ।
आइ बानर सभ कलम आएल छल, से कहबो
ू
“किह तँ रहल छलहँ ु बाबजी
मुदा अहा ँ तँ अप
ु
केलहँ ।
किहये कऽ की होएत जखन...”।
ु
ु गेल तँ चप
ु रिह
धनमे
रहै छी, बाजैत मुँ ह दखा
गेलहँ ”ु ।
ु
ू
हँ , धिनमे
तँ छिथये िमल।
ई आम सेहो आन ाक म ृ क
ु बाद पकनाइ शु
भऽ गेल अिछ। आ
ु आएल अिछ।
एतेक िद का बाद फेर ई बानर आ बनगदहा कोन गप मोन पारबा लेल फेरस ँ जिम
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
...
जयकरक माए व भा आ िव नाथक माए मेधा। दनु ू बहीन कतेक िदनपर आएल छिथ
हर। कतेक
िदनपर भेँ ट भेल छि
एक दोसरास ँ। आन ाक दनु ू बेटी आ दनु ू जमाए आएल छिथ। व भाक पित
िवशो आ मेधाक पित का । मेघ अपन प ी आ ब ा सभक स ंगे आएल छिथ।
िमल ू प ीकेँ आन ा किह बजा रहल छिथ। फेर मोन पडै छि
जे ओ आब क ऽ भेटतीह। फेर
क ऽ छी व भा, क ऽ छी मेधा, जयकर आ िव नाथ कतए छिथ..सोर करए लागै छिथ।
व भा आ मेधा अबै छिथ आ िमल ू गीत गबए लगै छिथ। आन ाक गीत। आन ा जे गबै छलीह
व भा आ मेधा लेल-
लाल परी हे गुलाब परी
लाल परी हे गुलाब परी
हे गगनपर नाचत इ
परी
हे गुलाबपर नाचत इ
परी
ु
रकतमाला दआरपर
िनरधन खडी
ु
हे रकतमाला दआरपर
िनरधन खडी
मा ँ हे िनरधनकेँ धन यै दे
परी
मा ँ हे िनरधनकेँ धन जे दे
परी
लाल परी हे गुलाब परी
ु
मा ँ हे रकतमाला दआरपर
अ रा खडी
मा ँ हे अ राकेँ नयन िदयौ जलदी
मा ँ हे अ राकेँ नयन िदयौ जलदी
बाप आ दनु ू बेटी भोकार पाडए लगै छिथ।
...
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िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू
-िमल।
आन ाक म ृ ु अहा ँ लेल िवपदा बिन आएल अिछ। अहा ँ ा ण जाितक आ
ु
ु
मुदा दनु ू गोटेक
म अतुलनीय। हनकर
म ृ ु लेल दःखी
निह होउ।
िबना
ु
भाव प आन
िछयि । से आन ा लेल अहा ँक दःखी
होएब अ िचत।
पिरवितर्त होइत रहै ए, ओिहस ँ
ाकेँ कोन सरोकार। ई जगत- प ंच मा
म
ावहािरक स ा तँ छै। मुदा ई
ावहािरक स ा स निह अिछ।
आन ा चमकािरणी।
र्
ु
दखक
छिथ।
क
ा छिथ। द ृ तँ
निह अिछ, एकर
ू
-िमल।
चेतन आ अचेतनक बीच अ र छै मुदा से स
छै। जीवक कएकटा कार छै, आ
अिव ाक सेहो कएकटा कार छै। अिव ा एकटा दोष भेल मुदा तकर आ य
कोना होएत, पणू र्
जीव कोना होएत। ओकर आ य होएत एकटा अपणू र् जीव। अिव ा तखन स निह अिछ मुदा खबू
अस सेहो निह अिछ।
ू
-िमल।
एिह अिव ाकेँ दरू क
के
छिथ।
ू मुखपर जेना शाि
आ िमलक
आ तकरे मोक्ष कहल जाइत अिछ। वैह मोक्ष जे आन ा
ा
पसिर जाइ छि ।
........
िमल ू जेना भेँ ट करबा लेल जा रहल छिथ।
मोन पिड जाइ छि
आन ा स ंग
मालाप।
-आन ा। अहा ँस ँ गप करैत-करैत हमरा कनीटा डर मोनमे आिब गेल अिछ। िपताक सभस ँ धान
ु
ू
कमजोरी छि
हनकर
तालप सभक पिररक्षण। से ई सभ मोन राख।
िपता जे पुछताह जे ताल
प क पिररक्षण कोना होएत तँ कहबि - पु ककेँ जलस ँ तेलस ँ आ ल
ू ब नस ँ बचा कऽ। छाहिरमे
सुखा कऽ। ५००-६०० पातक पोथी सभ। हम को
िदन देखा देब। एक पात एक हाथ नाम आ
ं
चािर आगुर
चाकर होइ छै। ऊपर आ नीचा ँ काठक ग ा लागल रहै छै। वाम भागमे िछ कऽ
सुतरीस ँ बा ल रहै छै।
-िपता मानताह।
मानताह िकएक।
ा णक बेटीस ँ िबयाह कराबैक औकाित छि ? हम एक गोटेकेँ द ू टाका बएना
ु आनलि । एक-एक द-द
ू ू
दे
रिहयै खेितहर जमीन िकनबा लेल। मुदा िपता जा कऽ बएना घरा
टाका जमा कऽ रहल छिथ। ७०० टाका लडकीबलाकेँ देताह तखन बेटाक िववाह हेति
आ पा ँिज
बनति । आ से
ा णी अओति
तँ तालप क रक्षा करति ?
ू माएक म ृ ुक बाद
िमलक
ीधर खटबताह भऽ गेल छलाह। टोलबै ा सभ कहै छिथ।
ू टोल उपिटये गेल, िमसरटोली आ पिछमाटोली। परोप ाक
आ फेर बेमारी अएलै, ग
े । गामक दटा
ु रास गाममे कतेक लोक मुइल से
बहत
जािन।
िमल ू िपताकेँ आन ास ँ भेँ ट करा देलिख ।
जािन की देिख लेलि ।
िमल ू जीित गेल।
ाियक िमल ू मीमा ंसक
परािजत कऽ देलि ।
78
ीधर तालप
पिररक्षणक ज्ञानस ँ पिरपणू र् आन ामे
ीधरस ँ जीित गेल आ मीमा ंसक
ीधर अपन टोलबै ा सभकेँ
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ू िववाह स
आ आन ा आ िमलक
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
भेल।
मोन पिड जाइ छि
आन ा स ंग
मालाप। िमल ू जेना भेँ ट करबा लेल जा रहल छिथ। आन ाक
म ृ ु भऽ गेल अिछ। बलानमे पएर िपछिड गेलि
आन ाक। ओिहना िपछडैक िच ासी देखबामे आिब
रहल अिछ।
ु
ु
िमल ू ओिह िच ासीकेँ देखै छिथ आ हनकर
मोन हलिस
जाइ छि , िपछिड जाइ छिथ भावनाक
िहलकोरमे..
ू एक दोसरास ँ भेँ ट-घा ँट बढए लागल छल, खेत, क म-गाछी, चौरी आ धारक कातक
आन ा आ िमलक
एिह एथलपर। आ दनु ू गोटे िपछडैत छलाह, खेतमे, क म-गाछीमे, चौरीमे आ धारक कातमे
सेहो।
ू
धारमे फा ँगैत
छलाह िमल।
यएह ढलुआ िप ड ल जे आइ-काि क छौड़◌ा सभ ब
अिछ, से
ू बनाओल अिछ। एिहपर पोन रोपैत छलाह आ सुरसर् ँ िमल ू धारमे पािन कटैत आगा ँ बिढ जाइत
िमलक
छलाह।
“हे, क
िपछिड कऽ तँ देखा।”
“से कोन बडका गप भेलै।”
“देखा तखन
ु
बझबै।”
आन ा अि रस ँ आगा ँ बढबाक
यास करिथ मुदा..हे.हे..हे..
रोिक सकलिथ ओ अपनाकेँ, निहये केतमे, निहये क म-गाछीमे, निहये चौरीमे आ निहये एिह
धारक कातमे..
आ की करए आएल होएतीह आन ा एतए..जे िपछिड गेलीह आ डिू म गेलीह..
को
ृितकेँ मोन पडबा लेल आएल होएतीह..
-
ू
ू
हँ आन ा आएल अिछ बचल।
देिखयौ ई गीत सुन-
घर पछुवरबामे अरहलु फूल गिछया हे
ु
फरे-फूले लुबधल
गाछ हे
उतरे राजसए सुगा एक आओल
79
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू अरहलु फूल गाछ हे
बैसल सगा
फरबो
ु हो
खाइ छऽ सुगबा, फल
खाइ छऽ हे
डािढ-पाित केलक कचून हे
ु बो
फल
खाइ छऽ सुगबा, फरह ु
खाइ छऽ हे
डािढ-पाित केलक कचून हे
घर पछुवरबामे बस ै सर निढआ हे
ू िदअ
बैसल सगा
बझाइ हे
एकसर जोडल सोनिरया
ु
दइसर
जोडल हे
ू उिड जाइ हे
तेसर सर सगा
सुगबो
ितितरो
िछऐ भगितया
िछऐ
येहो िछऐ गोरै ा के बाहान हे
-भाइ अहा ँ ई गीत निह सुिन पािब रहल छी की?
-भाइ सुिन रहल छी। देिखयो रहल छी। आन ा भौजी छिथ।
जिहया ओ मुइल छलीह तिहयो सुन
रही- वएह रहिथ- गाबै रहिथ-
ँ ना चानन घन गिछया
लुकेसरी अग
तिह तर कोइली घऽमचान हे
-श
म निह छल ओ।
ू
मा ँछ-मौस आ स नारायण पजाक
बाद अिगले िदनक गप अिछ।
ँ ना बेढ
अग
रहिथ आन ा।
80
चानन गाछ कटे
रहिथ आ
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
दोसर िदन ओिह चानन गाछक नीचा ँ चमकारटोलमे
र्
गौआ ँ सभ दनु ू गोटेक लहाश देखलि । आ ईहो
श गगनमे पसिर गेल, सौसे
ँ गौआ
ँ सुनलक- आन ाक अबाजमे-
जाहे बोन जेबऽ कोइली
नझ ु बालम
रिह जेतऽ रकतमाला के िनशान हे
श
म निह छल ओ।
(ई कथा “श शास् म ्”
ी उमेश म ंडल गाम-बेरमा लेल।)
२.२.
िस
महावीर
१.
बा क कातमे अनमना दीदीक घर।
ँ नामे एकटा िवधवाक घर रहै त छै। मुदा जख
घर निह झोपडी कहू। गामक मोटामोटी सभ अग
ु लैत अिछ तँ
पिरवार पैघ होइत अिछ तँ
ो अपन घरक मुँ ह घमा
ो बेढ बना दैत अिछ। आ
कख
काल ओिह रा ँड-मसोमातक घरक ान पिरवतर्न भऽ जाइत अिछ, आ से तेह
सन ि ित छल
अनमना दीदीक घरक।
ु
मुदा अनमना दीदीक घर बा क कातमे छि । सोझा ँक मजकोिठया टोलक छिथ मुदा घसिक
कऽ हमर
ु
घर लग आिब गेल छिथ।समङगर लोक सभ। आस-पड़◌ोसक धी-बेटी िदनमे, दपहिरयामे
जाइत
छिथ। ढील-लीख िबछबाक लेल। ककर ओ लगक छिथ, से मरलाक बाद पता चलत। ा क समए जे
लगक अिछ से आिग देत आ तकरा घरारी भेटतैक। मुदा सेहो स ावना आब निह। झ ंझारपुरमे
सासुर छलि
अनमना दीदीक। ओतए अपन बिहिनक बेटाकेँ अपन बेटा बना रािख ले
छिथ। मुदा
ू
हरक मोह निह छटल छि ।
खोपडीमे अबैत छिथ। मासमे एक बेर तँ अव ।
े
अप स ँ खेनाइ-िपनाइ, भानस-भात। मुदा
ँ
ु ँ किहयो मुदा एतए निह आनलि ।
झ ंझारपुरमे बेस पैघ घर, आगन।
बेटा-पुतोहके
सौसे
ँ गाम िवधवाकेँ दीदी कहै त अिछ जे ओ
सासुरमे रहै त छिथ।
हरमे रहै त छिथ। आ फलना गाम बाली काकी जे ओ
ु
से सौसे
ँ गाम हनका
अनमना दीदी कहै त छलि ।
81
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
खोपडीक कातमे एकटा भगवानक मि र ब
छिथ। महावीर बजर ंगबलीक। शु हेस ँ ई कोठाक रहै
से निह, मुदा बना देलि
ओकरा कोठाक। अ -पािन बेिच कऽ। पिह
तँ खोपिडये रहै । जिहया
अनमना दीदी झ ंझारपुर जाइत रहिथ, अपन खोपडीक फडकी िभरका कऽ जाइत रहिथ। बादमे ताला
ु
आ िस िडस ँ ब सेहो करए लागल रहिथ। मुदा बजर ंगबलीक मि र ओिहना खजल
रहै त छल। लोक
सभक लेल..चौपहर। धी-बेटी गामक, साफ-सफाई, झाड़◌ू-बहा
करैत रहिथ। प ाक मुदा बादमे
ु
भेल, छात ढलाइ आर बादमे। िपटआ
रहए पिह । जमीनक ा र करबए चाहै त रहिथ, मुदा
ु त रहत? मुदा ढलाई आ ा र लेल पाइ कतएस ँ
ए ीमेट बेशी भऽ गेलि । भगवानक घर चबै
आओत?
आइ हमरा लगैए जे हम सभ खबू मेहनित करैत छी। ककरोस ँ सरोकार निह अिछ। ओह, समैए
निह भेटैत अिछ। मुदा अनमाना दीदीक िदनचया,र् भोरस ँ सा ँझ भगवान लेल समिपत।
र्
मुदा पोसपु
लेल सेहो समए िनकालैत छिथ। बीच-बीचमे झ ंझारपुर बजार लग ि त अपन गाम जाइत छिथ।
ू
ओतु ो
ोँत लगबैत छिथ। फेर गाम अबैत छिथ.. हर। देख..गीता
पिढ ि त ज्ञ बनबाक अहा ँक
ु
ु
यास। मुदा अनमना दीदी। गोर लगै छी दीदी। िनकेना रहू। निहये खशी,
निहये को
दखे।
को
आवभगतक लालसा आ
को
तरहक सहयोग ाि क आका ंक्षा।
ु
ु
जोन ताकै लेल जाइत छिथ ध कटोली, दसधटोली।
ओतु ा लोक इ ितयो दै छि , कोन हनकर
घरारी लेबाक छि
िहनका सभकेँ। ओतए हँ िसतो देखै िछयि । अपन टोलक लोकस ँ ह े को
काज
लेल किहतो निह छिथ। एकटा काज करत आ किनया ँकेँ जा कऽ कहत। आ फेर दस साल धिर
ओकर किनया ँ सुनबैत रहत।
ु कऽ
-दीदी, ह मान जीक काज छै, सडकक कातमे छिथ। हमहूँ सभ तँ जाइत-अबैत माथ झका
पुजबे करबि । से िब बोिन ले
हम ई काज करब।
यौ तीथ-बतर्
र्
आ भगवानक काज म ँगनीमे निह करबाक-करेबाक चाही। हम को
ु
छी जे बेगारी खटा कऽ मि र बनबाएब आ पोखिर खनाएब।
मुदा ढलै ा आ
ा
रानी-महरानी
र!
२
सडकक कातक भगवानक एिह मि रक सटल एक बीघा खेत, सभटा अनमना दीदीक। ढलै ा भऽ
गेलाक बाद भगवानक नामस ँ िलिख देतीह। जे अ -पािन होएतैक ओिहस ँ भगवानक घरक चून-पोचारा
आ सफाई होइत रहत।
कतेक िदनस ँ पड़◌ोसी पछोड धे
छि ।
“दीदी। तोहर सभस ँ लगक भाितज हमहीं िछयौ। ई जमीन हमर घरस ँ सटल अिछ। पिहलुका लोक
बा -सडकक कातमे छोट जाित आ मसोमातकेँ घर बना दैत रहै । मुदा आब जमाना बदिल गेल
छै।आब तँ सडकक कातक घर आ जमीनक मोल बिढ गेल छै। तँ ू आइ
काि
मिर जएमे।
तखन ई जमीन हमरा सभ पटीदार लेल झगड़◌ाक कारण बनत। ”
82
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
तँ ू आइ
काि
मिर जएमे- किह कऽ देिखयौक को
सधवाकेँ। मुदा मसोमातस ँ किह सकै िछऐु
ू
भ
ओकर पोसपु - पुतोहत-नाितन होइ। ठीक छै बाब।
ु
“भगवानक लेल िनहछल
अिछ ई जमीन। अहीस ँ तँ हमर गुजर चलैए। जे िकछु पेट कािट कऽ
बचबैत छी से कोिश ा- भगवानक घरक ढलैया आ ा र लेल। झ ंझारपुरक जमीन-जालक पाइ
ु छि । से हम कोना.. ”
सभ बेटा पुतोहक
ु
“फेर दीदी। तँ ू गप बझबे
निह कएलेँ। जा िजबै छेँ राख
। कर
गुजर। हम तँ कहै
िछयौ जे तोरा मरलाक बाद जे पटीदार सभ आपसमे लडत से तोरा नीक लगतौ। आ हम तोहर
सभस ँ आ
भाितज...।”
देिखयौ, कहै छै जे। भाितज बाहरमे
करी करै छिथ। जे गाममे रहै ए से तँ भेँ ट करएमे
स ंकोच करैए जे िकछु देमए निह पडए। ई मुदा जिहया गाममे अबैए आ हम गाममे रहै छी तँ
भेँ ट करबाक लेल अिबते अिछ। आ एिह बेर तँ हम झ ंझारपुरमे रही तँ ओतह ु आएल रहए। स ैह तँ
ु लै। से आब बझिलऐ।
ु
कहिलयै जे ई कोना कऽ फरे
मुदा ई ढलै ा कोना कऽ होएत। ा र
ु
ु ए लागल अिछ। िपटआ
ु
तँ बादोमे करबा देबै। ततेक चबैए, एिह साल तँ आरो बेशी चब
छत,
ु
दइयो
साल निह चलल। ओकरा ओदािर कऽ ढलै ा करत करीम िमया ँ आ लछमी िमस् ी, तख
ठीक
होएत। देखै छी।
भाितजक आबाजाही बिढ गेल अिछ आइ-काि ।
“ठीक छै दीदी, अदहे जमीन दऽ िदअ। दस क ामे अहा ँक भाितजक बसोबासक स ंग भगवानक लेल
सेहो जमीन बिच जाएत।”
“मुदा बा पर अहा ँक घरारीक लािग तँ निहए होएत। तखन की फएदा होएत अहा ँकेँ।”
“छोड़◌ू
तँ आब
। एख
तँ टोल दऽ कऽ अिबते
छी। चौक-चौबिटया आ बा क कातमे घर ब बाक
चलन भेल अिछ। आ आब चौबिटया आ बा क कातमे तँ भगवा क घर
शोभति ।
दस क ाक दस हजार जिहया कहब हम दऽ देब। रिजस् ी बादेमे ब
होएत।”
ु ँ पिछ
ू लैत छी।”
“ठीक छै। तखन हम सोिच कऽ कहब। एक बेर बेटा पुतोहस
कोन उपाए। भगवानक घरक देबाल सभमे कजरी लािग गेल अिछ। देबाल छोड़◌ू, बजर ंगबलीक
ू मे सेहो कजरी लािग गेल अिछ। अनमना दीदी सोिचते रिह गेलिथ। आ सोिचते-सोिचते
मितर्
भोर भऽ गेलि ।
दऽ दै िछऐ जमीन। आर उपाय की। निञ।
ु
बेटा-पुतोह ु कहलिख
जे माए। ओतु ा जमीन तँ भगवानक छि । आ हम सभ से शु हे स ँ बझै
छी। मुदा देखब। ओ को
चािल तँ निह चिल रहल अिछ।
“कोन चािल। पाइ तँ िकछु बेशीए दऽ रहल अिछ।”
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
ु
ु
भगवानक मि रक लेल, दस क ा कम थोडबेक होइ छै। पाइ जटबैत-ज
टबैत
मिर गेलहँ ।
ई
अधख
मि र ओिह
रिह जाएत ? गप करै छी लछमी िमस् ी आ करीम िमआ ँ स ँ।
दस हजारमे ढलै ा, ा रक स ंग चहरिदवारी सेहो बिन जाएत। ए
अिगले िदनस ँ काज आर । आ भादवक पिह
समापन।
ीमेट बिन गेल। रिजस् ीक
३
चल ू रिजस् ी भऽ गेल। दासजी कागज-प रमे ब
पिकया कागज बनल हएत।
ु
मािहर लोक। पुछबाक काज छै! - धर।
“भगवानक लेल कागज ब बाक पिहल अवसर भेटल अिछ दीदी”- दासजीक गपस ँ अनमना दीदी
दासोदास भऽ गेलीह।
लोक कहै छै झ ु े जे लोकक
ा भगवानपर स ँ कम भेल जाइ छै। ई दासजी। किहयो
भेँ ट
आ
जान पिहचान। द ू टा रिजस् ीक कागत- एकटा दसकिठया भाितजक नाम आ दोसर भगवानक
नाम, मुदा ए े फीसमे बना रहल छिथ। साफे किह देलिख - दीदी भगवानक जमीनक रिजस् ीक पाइ
ू
हम एकद े निह लेब। जे बेर-बखतपर काज आबए स ैह
अ न लोक। ठीके बढ-पुरान
किह
गेल छिथ। यैह सभ देिख कऽ
कह
छिथ।
ु ाइत छि । मि रकेँ अजबा ,
अनमना दीदी बाइमे छिथ। पएरे गाम अएलीह।सोहमे िकछु निह फर
काि स ँ काजक आर
अिछ। लछमी िमस् ी अपन तेगारी, डोरी, करणी सभ रािख गेल अिछ। ड ुक
सभ पािन भरबाक लेल अनमना दीदी जोगा कऽ राखनिहये छिथ। पोखिर बगलेमे अिछ। लीढस ँ
भरल, मुदा कातमे महीस सभकेँ पािन िपएबाक लेल लोक सभ क क साफ कइए दे
अिछ।
ँ ँ काज करबास ँ रोिक देल गेल। के रोकलक?
ु ु ा। करीम िमआके
मुदा भोरेमे घोल-फच
भाितजकेँ खबिर िदयौक। मुदा ओ तँ काि
झ ंझारपुरस ँ सोझे
करीपर चिल गेलाह। रिजस् ीक
कागत ओना तँ अनमाना दीदी लग सेहो छि । भाितजक सार रोक
अिछ काज। चहारिदबारी निह
बनबए देत। मुदा काि
रिजस् ी काल तँ रहए ईहो। तखन? कहै त अिछ जे बा क कातबला
ु
जमीन मेहमानक िछयि , ऐ ँ यौ। तखन तँ ई मि रो ओकरे िह ामे भऽ गेलै। को
बझबामे
गलती तँ निह कऽ रहल अिछ। भाितज मासक शु हेमे जा कऽ तँ अओताह, दरमाहा लैए कऽ
।
मास भिर अनमाना दीदी गाम आ झ ंझारपुर करैत रहलीह। बेटा पुतोह ु कहि
जे ई भाितजेक चािल
ू
तँ निह अिछ। निञ, से निह कहू। दासजी तँ नीक लोक रहए। देख।
४
“दीदी। अहा ँकेँ को
धोखा भऽ रहल अिछ।”
“तखन तँ ई मि रो अहींक भेल
।”
ु
“निञ दीदी। ई मि र तँ भगवानक िछयि । हनके
रहति । आ पाछूक जमीनक मािलक सेहो
भगवा ।”
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
“आ तखन तँ हमर ई खोपडी सेहो अहींक भेल
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
।”
“निञ दीदी। अहा ँ जिहया धिर जीब तिहया धिर रहू। के मना करत? ”
“बौआ ब
उपकार अहा ँक। आ पाछू िदसका जमीनक लािग तँ निञ बा
िदसस ँ अिछ आ निहये टोल
िदसस ँ।”
“दीदी। अहा ँ हमरा जमीन बाटे जाऊ
के मना करत? आ आिरपर बाटे खेतमे सभ जाइते
अिछ। जकर खेत बा क कातमे निह छै से की अपन खेतपर निह जा सकैए। अहा ँ तँ नबका
लोकक िभ -िभनाउज बला गप कऽ रहल छी।”
“मुदा ई सभ अहा ँ पिह
कहा ँ कह
“दीदी, अहा ँकेँ सभटा कह
रही।”
रही। मुदा लगैत अिछ जे अहा ँकेँ धोखा भऽ रहल अिछ। निह िव ास
होइए तँ दासजीकेँ बजा दैत छी। ओ तँ तेह ा अिछ।”
“अ ा तँ ओहो िमलल अिछ।”
“द ू रिजस् ीक कागत बना कऽ बेचारा एक रिजस् ीक पाइ लेलक आ अहा ँ किह रहल छी जे िमलल
अिछ।”- भाितजक
गेलाह।
र ती
भऽ गेलि । हा ँफए लगलाह आ जोर-जोरस ँ बजैत िबदा भऽ
५
अनमाना दीदीक लेल
हरक ई भोर सासुरक ओिह भोर जेका ँ रहि
जािह िदन ओ िवधवा भेल
रहिथ। आइ गामक धी-बेटी ढील-लीख िबछबा लेल निह अएलीह। अनमाना दीदीक राित भिरक
ँ नामे ब ाकेँ
वातालापर्
बजर ंग बलीक स ंग। एख
एिह भोरमे खतम भेल अिछ। लोक सभ अग
ठोिक कऽ सुता रहल रहए। भोरमे िकछु गोटे आिब प ंचैती करेबाक सुझाव दए गेलि । मुदा
अनमाना दीदीक रोष तँ बजर ंगबलीस ँ छलि ।
“भगवानक जमीन अदहा बेिच कऽ भगवानक घर बनिबतहँ ,ु मुदा मि रक सटल जमीन रिजस् ी करा
लेलक आ जे जमीन बचल ओिहस ँ मि रक लािगये निह रहल। लािग तँ छोड़◌ू ओिह पर जएबाक र े
ब कऽ देलक। आ ई बजर ंगबली। महावीर। कोन शि
छैक एकरामे ? चालीस साल पेट कािट
ु
कऽ िहनका खोपडीस ँ प ाक घरमे अनलहँ ।
ढलै ा भऽ जइतए, चहरिदवारी बिन जइतए स ैह टा
म
रथ रहए, आ सेहो िहनके लेल। हा... ”
६
एिह भोरमे भाितजक
ािरपर ठाढ अनमाना दीदी। लोक सभक मो
जे आब आर बाझत
झगड़◌ा। मुदा ई की भऽ रहल अिछ। लछिमया ँक भाए िर ा अनलक अिछ। अनमाना दीदी भाितजक
ु
स ंग झ ंझारपुर जा रहल छिथ। के कहलक? हनकास
ँ तँ ककरो गपो निह भेल रहै । हम कहनिहयो
रिहयि
प ंचैती कराऊ, मुदा मना जेका ँ कऽ दे
रहिथ। अ ा, लछमीक भाए कहलक। हँ , िर ा
बजबै लेल जे गेल रहए, से कह
हएत जे झ ंझारपुर जेबाक अिछ।
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
दासजीकेँ एकटा आर रिजस् ीक कागत बनबए पडलि । अनमाना दीदीकेँ देिख ओ सद र् भऽ गेल रहिथ
ू की सभ सुनओिथ । मुदा अनमाना दीदी ततेक
जे जािन निह बढी
तामसमे छलीह जे िकछु निह
बजलीह। तामस पीिब गेलीह। ओहो पाछू बला जमीन भाितजकेँ रिजस् ी कऽ देलि । आ
ु कऽ झ ंझारपुर बजार िदस बेटा पुतोह ु लग पएरे िबदा भेलीह।
झ ंझारपुर- ेशनस ँ घिर
ु आएल। द ू सवारीकेँ लऽ गेल रहए मुदा मा एक सवारी लऽ कऽ घिर
ु आएल।
लछमीक भाए घिर
स ंगमे स ंदेश ले
गेल। लछमी िमस् ी आ करीम िमआ ँ लेल स ंदेश। काि
भोरेस ँ काज आर ।
फेरस ँ?
७
चहरदेबाली बनल। भगवानक मि र आ अनमाना दीदीक घरकेँ बािर कऽ। किह दे
ु
ु
केँ। हनका
िजबैत
ो छूति
निह हनकर
घर।
िछयि
दीदी
ू ल। दोसर भदबिरयामे ख ु ा सिर कऽ खिस पडल। मुदा
घर आिक खोपडी, एक साल क क टट
अनमाना दीदी निह अएलीह। समाद दे
रहि
हरक एक गोटे। ढलैया निहये भेलि
ु अएलीह। लोक पुछलकि - की मा ँगलहँ ु गंगा माएस ँ।
बजर ंगबलीक। अनमना दीदी हिर ारस ँ घिर
ं
“यएह जे अधिव
ास हमरा मोनस ँ हटा िदअ”।
“आ की देिलयि
गंगा माएकेँ ?”
“अपन तामस दऽ देिलयि ”।
अनमाना दीदी यएह कहिथ- की करबि । को
शि ये निह छि
खोपडी। सो ंगर लागल घर कतेक िदन काज देत।
बजर ंगबलीमे। खसए िदयौक
८
कैक बरख बीतल। कैक बरख निह पा ँचमे साल तँ । भाितज गामपर आएल रहिथ। दरमाहा उठा
कऽ। पोखिर िदसस ँ च ाकलपर। लोटा ले
बैसलाह आिक छातीमे दद र् उठलि । निह बिच
सकलाह। लोक सभ कहए, देख ू अनमाना दीदीक ाप, ब कानल रहिथ दीदी ओिह िदन। ओिहस ँ पिह
ू मे ठीके शि
बजर ंगबलीक मितर्
निह रहए। मुदा दयस ँ देल ाप लागै छै। ओही िदन जाग ृत भऽ
गेल रहिथ बजर ंगबली। आ आइ शि
देखा देलिख ।
मुदा समिदयाकेँ अनमाना दीदी कहलिख
जे पाथरोमे जान होइ छै। हट र् अटैक भेल होएतैक।
ू
परस एतिह एकटा मारवाडीकेँ अटैक भेल रहै । िच ा-िफिकरस ँ होइत छैक एकर अटैक। एतए
डाकडर सभ रहै , मारवाडी बा ँिच गेल। गाममे देरी भे
जान निह बचै छै। तेँ
हमहूँ एिह
ु
बढ़◌ारीमे
बेटे पुतोह ु लग झ ंझारपुरमे रिह रहल छी।
९
गाम अिछ मिहसबार
ा णक गाम। सुखराितक िदन हूड़◌ा-हूडीक खेल जे एिह मिहसबाड
ा ण सभक
देखलहँ ु तँ पोलोक खेलमे को
िच निह रहल। सिमयाक डोमस ँ कीनल सु रकेँ भा ँग िपआए मातल
महीस
86
ारा हूड़◌ा लेब।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
चरबाह जे महीसक पहलाठ
पकिड कलाकारीस ँ बैसल छल सेहो अ ते
ु । डोमक काज पाबिन-ितहारमे
ू
तँ होइते अिछ। पेटार ब बास ँ सप,
बीअिन सभ िकछु ब बामे डोमक काज आ पाहनु परख लेल
ँ
आ बिरयाती लेल जे ख ी काटल जाएत तािह लेल िमआटोलीक
काज। ख
बिलमे किमटी लऽ लैत अिछ।
ू
ु पर् जाक
ू
ीक मड़◌ा
दगा
ु
धरु कतए भा ँिस गेलहँ ।
से िमआ ँ जे ख ी काटैत अिछ से हलाल कऽ कऽ। गरदिन अदहा लटकले रहै त छै, मुदा माउस
बना-सोना कऽ गरदिन लऽ जाइये आ खलरा सेहो। तखन मिहसबार
ा णमे स ँ जे ह मानजी
मि रपर भजन आ अ जाम करैत छिथ से ओही खलरास ँ बनल ढोलक िक त छिथ। आ से कीतर्न
भइयो रहल छल।
ु
िस
महावीरजीक मि रक आगा ँ। रामनवमी िदन गाडल बडका धजा।
टनटनाइत घडीघ
आिक आर
ू
िकछु। ह मानजीक धजा
फहरा रहल अिछ। सा ँझक काल। मिहसबार सभक आगम भऽ गेल अिछ।
ु
को
पाबिन हअए,
हूड़◌ाहूडी आिक रामनवमी िस
ह मानजीक आगा ँ कीतर्न होइते अिछ। से बाब ू
गौआक
ँ
ाक गप िछऐ। से आइयो भऽ रहल अिछ।
ू
ु माल िबठौरीकेँ मालक देहस ँ अलग करबाक यासमे अिछ। एक गोटेक स ंग दोसर गोटे
घरक
ध ँआ
अएल छिथ, स त खएबाक लेल। ह मानजीक मि र गौआ
ँ सभ ा र करबा दे
छिथ। ढलै ा
ू
सेहो भऽ गेल अिछ। मि रक बर ा छिब कऽ ऋण पचेनहारक स ं ा नग , तैयो एकटा अपवाद तँ
अिछये- ओ कहै छिथ- स त तँ तोडबा लेल खाएल जाइ छै। हँ भाइ, एक बेर स त खे
जे
ऋणस ँ िवमुि
भेिट जाए तँ हजेर् कोन। मुदा एकेटा अपवाद। अनमाना दीदीकेँ आब सभ अनमाना
ु
ु कऽ निहये अएलीह। भाितजक
बाबा सेहो कहै त छि । कएक बरख भेल मुइना हनकर।
घिर
ु
घरारीक दोष िनवारणाथ र् को
प ंिडतक कहलापर ख ापर एकटा गाए बाि
देल गेल छै, जकरा
एनहार-गेनहार सिदखन घास खाइत देखैत छिथ, तिहस ँ घरारीकेँ नजिर-गुजिर निह लगतैक।
ु
ह मानजीक धजा
फहरा रहल अिछ। सा ँझक काल। गोनर भाए कीतर्नमे ढोलकक थापपर थाप लगा
रहल छिथ।
ू क आगा ँ भ
ू गोल
अनमाना बाबाक गप आब िकछु लोको सभ मानलक। ठीके। ह मानजीक मितर्
दटा
बिन गेल अिछ। एक गोलक िवचार क क वैज्ञािनक छैक- अनमाना दीदी जे बा ँचल दस क ाक
रिजस् ी कऽ देलिख
सएह
पैसा देलकै िच ा-िफिकर भाितजक छातीमे। निह स ािर सकल
अनमाना दीदीक ई आ मण ओ। ठीके पाथरमे को
शि
थोडबेक होइ छै। मुदा दोसर गोल
महावीर ह मानजीक िस
आ जाग ृत होएबामे िव ास कऽ रहल अिछ- यौ, चु ीकेँ मािट दऽ िदयौ तँ
ओहो मिड जाएत मुदा िबकुिट कऽ जे काटत से छोडत निह। आ ई मािट अनमना दीदी महावीरजी
केँ देलिख
तँ ओ कोना छोिड िदतिथ ।
ु ू िस
गोनर भाए कीतर्नमे ढोलकपर थापपर थाप लगा रहल छिथ, बझ
महाबीरजीकेँ मनाइये कऽ
ँ तँ चढले छि , हाथ सेहो
छोडताह, भा ँगक गोला असिर कऽ रहल छि , आिख
कै कऽ नाम
लऽ
ु
रहल छि , आ हनकर नजिरस ँ देखी तँ िस
महावीरक पाथरक मु त जाग ृत भऽ गेल देखा पडत,
जेना ओिहमे जान आिब गेल हो!
87
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
१.
जगदीश
ु गर
्
साद म ंडलक एकटा दीध र् कथा-मइटग
२.
केर स ंरक्षण केकर उ रदािय
? ३.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िबिपन कुमार झा- िवरासत
बस ंत झा-उगना
१
जगदीश
साद म ंडल
.जगदीश
साद म ंडलक एकटा दीध र् कथा-
ु गर
्
मइटग
जिहना सरयुग नदीमे नहा भक् त म ंिदरमे
वेश किरतिह भगवान रामक दशनर् करैत तिहना तपेसर
ं
ु
काका अगनाक
मेहमे आ◌े◌ंगिठ सािमल भोज समाजकेँ खअबैक
ओिरयान देिख रहल छिथ। पोखिरक
ं
् समतल मन अगनाक
् छिन। तिह बीच बेटी सुभ ा चमकैत
पािन जका ँ शीतल, शानत
सुगंधमे मसत
ू
्
सटीलक
िछपलीमे पनरह-बीसटा सुखल बरी एकटा बर आ िगलासक पािन आगमे
रिख कहलकिन- “कनी
चीख कऽ देिखयौ जे नीक भेिल िक निह?”
्
मुसकुराइत
बेटी आ िछपलीमे सजल बर-बरी देिख तपेसर काका हेरा गेलाह। मन पड़लिन
ँ कब उिचत निह बिझ
ु गर।
ु
्
मइटग
मुदा चिु पर चढ़ल लोिहया छोिड अट
सुभ ा चिु
कमलक फड़ सन एकटा बरी मुँ हमे लइते मन पड़लिन पिरवारमे अपन कएल काज।
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ु गेली।
लग पहँ च
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू र् उठल उठले रिह
साओन मास। भोरहरबामे मेघ फिट बरखो भेल आ अधरितयेस ँ जे पवा
गेल। कख
ू
काल झकिसयो अिबते रहल। जेना-जेना िदन उठैत गेल तेना-तेना परबाक
लपेट
सेहो बढ़ि◌ते गेल।
सवक ददक
र् आगम सुशीलाकेँ कहलिन। पुतोहूक बात सुिन सुनयना बेटा
तपेसरकेँ पलहिन बजबए कहलिखन।
ओसारक ओछाइनपर आ◌े◌ंघराएल सुशीलाक मनमे लड़◌ाइ पसिर गेलिन। एक िदस
सवक
ं
पीड़◌ा अपन दल-बलक स ंग अगक
पोर-पोरपर चढ़◌ाइ करैत तँ दोसर िदस िजनगीक किठन द ु मे
ु
फॅॅसल मन खशीक
लहड़ि◌मे िझलहोिर खेलाइत। नारी िजनगीक
ू कर् लपेट देिख सुनयनाकेँ ठकमड़
ू ◌ी लगल
मुँ हम ंगा मा त्वक उपहार। पवा
भिरगर काज तेह
रहिन। आइ धिर
्
षठतम
काजक भार। जेह
ू ामे होइत रहल अिछ। जिह घरक टाटा हवाक वेगकेँ निह रोकैत।
सव गढल
आ मक घर जका ँ टाटमे लेब निह पड़◌ैत। मुदा बोनक बच्चाकेँ कोन घर रक् छा करैत अिछ!
ु छोिड मालक घरमे ओछाइन ओछा देलिखन। ओछाइन ओछा िहयासए लगलीह जे अिगयासी भइये
गठला
ु
ु
गेल, फाट-पुरान लइये अनलौ।
ं
मालक घरस ँ हलकी
मािर पुतोहू िदस देखलिन तँ चैन बिझ
पड़लिन। मन असिथर भेलिन।
पहलिन ऐठाम जाइत तपेसरक मनमे अपन काजक भार उठलिन। एहेन भारी काजमे
ु
ु हार
पु खक काज की अिछ? डेग भिर हटल पलहिनक घर अिछ तेकर बाद? मचकीपर झलैत
झलिन
ु
ु जनतब देलिखन। अपन उगैत लछमीकेँ देिख मुसकी
् दैत
जका ँ तपेसर झलैत
पलहिन ऐठाम पहँ च
पलहिन कहलकिन- “अहा ँ आग ू बढ़◌ू माइयक थैर खरड़ि◌ पीठेपर दौड़ल अबै छी।”
ु ला निह भेिल िक बेटाक जनम् भेल। धरतीपर बेटाकेँ पदापणर्
पा ँचो िमनट पलहिनकेँ पहँ च
ु पसिर गेल। देह पोछैत पलहिनक मन चालीस तममा
्
किरतिह िबजलोका जका ँ पिरवारमे खशी
िनछौर, तइपरस ँ िनप
न, लाढ़ि◌-पुरिन कटाइक स ंग उपहार, पसारी छी तेँ म ंगवोक अिधकार अिछये
जाइकाल एकटा सजमिनयो मा ंिग लेब। िसदहा तँ देबे करतीह। िहसाबमे मन बौआ गेलिन।
समाजमे भगवान ककरो सनतान दइ छिथन तइमे सिझया कऽ दैत छिथ
हाथमे अिछ, तिहना
अप
। बच्चाक िजनगी हमरा
ु भऽ गेलिन।
िजनगी दोसराक हाथमे अिछ। तरे-तर मन खशी
् दैत सुनयनाकेँ टोनलिन- “काकी, पिहल पोता िछअिन, रेशमी पटोर पहीिरबिन?”
मुसकी
ू ◌ी डोलबैत बजलीह- “एकटाकेँ के कहै सातटा पिहरेबह।”
धारक बेगमे दहलाइत दादीक मन, मड़
पलहिन- “बच्चा मुँ ह, एन-मेन तपेसरे बौआ जका ँ छै।”
पलहिनक बात सुिन ओछाइनपर पड़ल सुशीलाक दद र् भरल देहक मनमे अपन सतीत्वक आभास
ु दाएलु
भेल। मुदा अवसरकेँ हाथस ँ निह जाए िदअए चािह बदब
“केहेन सपरती जका ँ बजै-ए।” मुदा
पलहिन सुनलक निह। जिहस ँ आग ू िकछु निह बाजिल।
् ित तेँ सामानय् मनक िवचार।
पोखिरक पािन जका ँ तपेसरक मन असिथर। सामानय् पिरसिथ
ू डटल रहै त तिहना िजनगी काजपर नजिर
जिहना किठनस ँ किठन, उकड़◌ूस ँ उकड़◌ू काजपर लिर
्
दौड़◌ैत मन डटल। मन कहै त बीस-ए ैस बखक
र् उ ो छेबे करिन, रोगो वयािध
क छुित देहमे निहये
ु
् । बेटापर नजिर पहँ चते
छनिह
पु
ु ा गेलिन। जिहना लगौल गाछमे
्
सन समपि
क आगमनस ँ मन फल
पिहल फूल वा फड़ लगलापर बेिर-बेिर देखैक इच्छा होइत तिहना तपेसरक मनमे उठैत। बिजर्त
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
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ु
जगह बिझ
परहेज के
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु ल कमल हवाक स ंग पोखिरमे
रहिथ। मुदा तइयो जिहना डाट टट
ु
दहलाइत तिहना खशीक
िहलकोरमे तपेसरक मन तड़-ऊपर करैत। मनमे उठलिन, पु ष-नारी बीचक
स ंब ंधमे बच्चो पैघ श र् छी। पिरवारमे (स ंब ंधमे) िवखंडनक स ंभावना बनल रहै त अिछ। लगले मन
अपनास ँ आग ू उड़ि◌ माए-बापपर गेलिन।
ु गेलिन। जिहना मा त्व
दए िवहँ िस
् र् बढ़ि◌ जाइत तिहना
सौनदय
् केलापर पु षोकेँ होइत। लगले िस मा रील जका ँ
ापत
िप त् व
् केलापर नारीक
ापत
ं म समए धिरक िजनगी नािच उठलिन।
् ँ अित
बेटाक जनमस
िकछुए समए बाद सुशीलाकेँ पुन: दद र् शु
छटपटाएव शु
ु
भेलिन। समएक स ंग ददो र् बढ़ए लगलिन। दखक
स ंग
भेलिन। सुशीलाक छटपटाहिट देिख सुनयना पलिनकेँ कहलिखन- “किनया ँ, अहा ँ देिखअ
्
ता बच्चा समहािर
दइ छी।”
ु
पेटपर हाथ दइते पलहिन बिझ
गेली जे दोसर बच्चा हेतिन। बजलीह- “काकी, एकटा बच्चा
आरो हेतिन?”
पलहिनक बात सुि◌न, जिहना मेघ तड़कैत तिहना सुनयनाकेँ भेलिन। जोरस ँ तपेसरकेँ कहलिखन“बौआ, बौआ।”
अकचका कऽ तपेसर बाजल- “हँ , माए।”
ं मे रहह।”
“हँ , अग
ं
ु
करीब बीस िमनट पछाित बेटीक जनम् भेलिन। अखन धिर जिहना खशीक
सुगंध अगनामे
पसरल छल
एकाएक ठमिक गेल। बच्चाक जनम् होइतिह सुशीलाक देह लर-ता ंगर भऽ गेलिन। पलहिन
सुनयनाकेँ कहलिन- “काकी, पुरबा लपटै छै। अिगयासी नीक-नहा ँित जगा देथनु ओना तँ सभ भगवानक
ु बढ़◌ा
हाथमे छिन मुदा जहा ँ तिलक पार लागत से तँ करबे करबिन। जािनये कऽ तँ भगवान दख
देलिखनहेँ । अइ (पिहल) बच्चापर इ निजर राखथ ु अइपर हम रखै छी।” किह बच्चाक पोछ-पाछ
करए लगली। सा ँस मनद् देिख मुँ हमे मुँ ह सटा फूिक सा ँसक गित ठीक केलिन। बच्चाक लक्षण देिख
पलहिनक मन बािज उठल। ज र दनु ू बच्चा ठहबे करत। नजिर पैछला काजपर पड़ल। एहेन िक
पिहल-पिहल बेिर भेिल। कतेकोकेँ भेलिन। िकद ु गोटेक दनु ू ब ँचलिन, िकछु गोटेक एकटा ब ँचलिन
् त अिछ मुदा अपना भिर तँ
आ िकछु गोटेक जच्चा-बच्चाक स ंग चिल गेलीह। ओना काज तँ अिनशिच
ितया-पछा करवे करबिन। सुशीलाकेँ सुनयना पुछलिखन- “किनया ँ मन केहन लगै-ए?”
ू त िजनगी हाथक इशारास ँ कहलकिन। मुँ हक सुरखी कहै त जे
्
अध-चेत
र्
अवसथामे
सुशीला अपन टटै
ु
नइ ब ँचब। सुशीलाक इशारास ँ सुनयना बझलिन
जे तपेसर भारी िवपि मे पड़ि◌ गेल। भगवानपर
ू ◌े भेलौ,ं जएह कएल हएत ततवे
खींझ उठलिन। बेचारा फ ो-फनमे पड़ि◌ जाएत। हम बढ़
्
समहािर
देबइ। मुदा िवपि
तँ ततबेटा नइ
ु -पिरवार
छै। खेती-पथारी, माल-जाल, दसटा कुटम
ू टा
ू िचलका
्
्
छै तइपर स ँ द-द
भेलइ। कना समहािर
पाओत।
स ् ी ब ँचतै आ
ए ोटा बच्चा।
ु
हमहूँ कते िदन जीि◌व। सभ ि◌कछु बेचाराकेँ हरा जेतइ। हे भगवान, तोरा केहन दरमित
या
चढ़लह जे एहेन गनजन बेचाराकेँ केलहक।
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं
आगनमे
बैसल तपेसरक मनमे उठैत जे जतेटा मोटरी माथपर उठत ततबे
उठाएव।
्
नमहर मोटरी कते काल क् यो माथपर समहािर
कऽ रिख सकैए। मुदा तेँ िक? जी ा िजनगी
हािरयो मािन लेब उिचत निह। करैत-करैत-लड़◌ैत-लड़◌ैत जे हेतइ से देखल जेतइ।
ं म दौड़मे अिबतिह दनु ू दलक मन मािन लैत जे
जिहना रणभूिममे द ू दलक बीच लड़◌ाइ अित
के जीतत के हारत। मुदा हरलोहोक बीच र ंग कते र ंगक िवचार उठैत। िकछु गोटे रणभूिमस ँ
भागए चाहै त तँ िकद ु गोटे अढ़ भिजया
काए जाहै त। मुदा िकछु एह
ं म समए धिर हिथयार उठौ
् छास ँ अित
देिख सवेच्
स ंगी, जे कौआ-कुकुड़क पेट भिर अपन म
होइत जे अपन बिल
रहै त अिछ। कोना निह उठाओत? अपन िजनगीक
ू करत, आ हम गुलाम बिन दश
ु मनक
्
रथ परा
जहलमे
सड़ब।
ं म बात सुशीला पलहिनयो, सासुओ आ पितयोकेँ कहलक- “हम नइ ब ँचव। दिन
ु या ँक
अपन अित
सभस ँ पैघ पापी छी जे अप
ँ ब
आिख
रक् छा
कऽ सकलौ।
ं
दनु ू बच्चाकेँ अहा ँ सभ देखबै।” किहतिह
ाण तँ ब ँचल रहिन मुदा चेतन-शुनय् भऽ गेलीह।
भऽ गेलिन।
मश:
२
िबिपन कुमार झा
िवरासत केर स ंरक्षण केकर उ रदािय ?
अह हिन भूतािन ग
अपरे
ातुिम ि
ीह यमालयम ्।
िकमा
यमतः
र्
परम ्॥
यक्ष-युिधि र स ाद मे कहल गेल अिछ जे- ितिदन जीव म ृ ु कॆ◌ं ा करैत अिछ मुदा
ु
ओतिह अ लोक ई बिझतो
एतिह रहबाक इ ा करैत अिछ। एिह स ँऽ आ य र् की भय सकैत
छैक?
एिह भौितक जगत मे को
व ु स ं ा अथवा को
समाज शा त निहं कहल जा सकैत
अिछ। ओ डायनासोर हो अथवा हड ा, मेसोपोटािमया अथवा को
लु ाय सम् दाय सभ एक न
एक िदन कालक गाल मे िवलीन भय जायत ई व
ु स अिछ।
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
हमर स ंकेत िमिथलाक िसरमौर अपन ोि य समाज िदस अिछ।
अिछ ोि य समाज के
सद
होयवा मे गव र् िकयाक अ भूत होइत अिछ? की ई समाज को
अ समाज स ँ िभ निहं ?
यिद िभ तऽ कोन आधार पर? रहन सहन-खानपान आिक बात
वहारक कारण एकरा प ृथक देखल
गेल अथवा को
अ िनिहत
र्
गुण अ समुदाय स ँऽ एकरा प ृथक कयल?
एिह ठाम प ृथकतावादी नीितक अ सरण निहं कयल जा रहल अिछ अिपतु अपन ोि य समाज के
अ ु ान िदस एकटा सामा द ृि पात कयल जारहल अिछ जे एकरा अिभिलिखत करबा मे मदद करत
अ था ई समाज काल केर गाल मे समा गेलाक बाद इितहासो स ँ कोशो दरू भय जायत।
एिह समाजक आर
के कयलिथ? ई समाज िकयाक अि
मे आयल? एकर स ं ृित की
अिछ? एकर िविध
वहार आिद शास् स त अिछ अथवा मा पर रा केर िनवहण
र्
अिभ ाय रिह
गेल? यिद शास् स त अिछ तऽ कोन
मे एकर चचा र् अिछ? ओिह
केर ामािणकता
ू गो की थीक? एकर की औिच छल? यिद
िनिववाद
र्
अिछ अथवा निहं ? जाित, कुल, पा ँिज, मल,
औिच छल तऽ आब एकर अ िच कोना िनधािरत
र्
भेल जा रहल अिछ?
ू ूत
ोि य समाज स ँ स िभर्त उ
चिचत
र् िकछु एहेन मलभ
अिछ जे आव क अिछ एिह
समाजक Document at i on हेतु। ई काय र् एतेक सहज निहं । हम िकछु
देखल मुदा ओ एिह
मे स िकछु
क चचा र् तऽ अव करैत छिथ मुदा मलू स भर् देबा मे असमथ र् छिथ।
’सार त-िनकेतनम ्’ जे िक स ं ृत आ अपन स ं िृ तक अ ु ान हेतु सतत् समिपत
र् अिछ, अपन
ोि य समाज स िभर्त मलू
ोतक आ एकर अक्षु स ं ृित केर िविवध पक्षक Document at i on
ु ु
करय जा रहल अिछ। एिह काय र् मे अप ं सभ स ँऽ िवशेषकर एिह समाजक इितहासक ज्ञाता बज
आ सि य युवा कें सहयोगक सवथा
र् अपेक्षा अिछ।
यिद उ
स भर् मे को
जानकारी उपल करा (kumar vi pi n.j [email protected] l .com) सकी
ू
तऽ एिह िवशाल यज्ञ मे एकटा आहूित सद ृश होयत। एिह स भर् मे सिचत
करब उिचत होयत जे
एिह िदशा मे एकटा साइट बिन कें तैयार अिछ जेकर URL केर औपचािरक घोषणा यथाशी कयल
जायत।
शुभम ु
३.
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
बस ंत झा
उगना
इ कहानी १३४८-१४५२ के िबचक अिछ जाही मे महा कवी िव ापित के ज िब ी गाम मे भेलानी
ु पैघ कवी भेला िजनका कबी कोिकल के उपािध देल गेलनी और ओ महादेव
और ओ मैिथलीक बहत
ु पैघ भ
के बहत
सेहो छला
कवी िव ापितक रचना एतेक भाबी होईत छलनी जे जखन ओ आपण रचना के गबैत छला त
ु
कैलाश पर बईसल भगबान महादेव श भ जाईत छला और हरदम हनक
रचना सुनबाक इ ा राखैत
छला, ई इ ा एतेक बड़◌ी गेलिन जे ओ एक िदन माता पावती
र् के कहलिखन " हे देवी सु , हम
ु नीक लागैत अिछ और हमर मोन भ रहल
म ृ ुलोक जा रहल छी कवी िव ापितक रचना हमरा बहत
ु
ु
अिछ जे हम हनका
स ंगे रही क' हनक
रचना सुनी, त अहा ं अही ठाम कैलाश मे रहू और हम जा
रहल छी म ृ लो
ु " और रचना सुनबाक लेल धरती पर आबी गेला, और िव ापित के ओतै
कर बनी क
ु
उगना के नाम स काज कर लागला ओ िव ापितक चाकरी मे लागी गेला ओ हनकर
सब काज करिथन
ु
ू
हनका
पजक
लेल फूल और बेलप तोरी क आ थ बरद के चरबैथ सब चाकरी करैत और राइत मे
ु
सुत्बा काल मे हनकर
पैर सेहो दबबैथ (ध ओ िव ापित िजनक पैर देवक देव महादेव दबबैथ)
ु दीन बीत गेल, ओ र माता पाबती
ु िचंितत भ गेली हनका
ु
अिह कारे जखन बहत
र् बहत
लगलैन जे
ु
आब महादेब म ृ ु लोक स वापस
एता, और ओ हनका
बापस अनबाक यास मे लैग गेली, ओ
ोध
के आदेश देलिखन जे आहा जाऊ और िव ापितक प ी सुधीरा मे वेश क जाऊ जाही स उगना
ु
ारा को
गलत काज भेला पर सुधीरा हनका
मारी क भगा देती, लेिकन माता पावती
र् के इ याश
सफल
भेलैन तखन ओ दोसर याश केिल ओ
ाश के कबी िव ापितक ऊपर तखन सवार क
देलिखन जखन ओ एकटा जं गल के रा ा स उगना स ंगे राजा िशव िश ंह के ओतै जारहल छला ओ घोर
जं गल छलाई ओत दरू दरू तक ज'लक को
आस
छलाई और ओही िबच मे कवी िव ापित
ाश स
तरपअ लागला "रे उगना ज ी स ँ पाइन ला रउ
ता हम मइर जेबउ बर जोर स
ास लागी
गेलौ" कहै त जमीन पर ओ
लगला, आब उगना की करता ओ परेशान भ गेला ए र उ र पाइन
ु
के तलाश मे भट्क' लगला हनका
पाइन
भेटलैन, तखन ओ एकटा गाछक पाछू मे का गेला और
अपण असली
प धारण क' अपन जटा स ँ गंगाजल िनकालला' और फेर उगनाक
प धारण क िव ापित
ू लागला " रे उगना इ त
के ज'ल देलिखन, िव ापित जल िपबैते देरी चौक गेला ओ उगना स पछ'
गंगाजल छऊ, बता एता गंगाजल कत स अ लाए" आब उगना की करता ओ कतबो बहाना ब ला लेिकन
ु
ु
हनकर
एको
चलल, ओ िक करता हनका
िवबश भ अपन
प देखाब' परलानी और ओ अपन असली
पक दशनर् कवी िव ापित के देलिखन, िव ापित महादेवक अशली
पक दशनर् किरते देरी चिकत
ु
ु
रही गेला और हनक चरण पर खसी क हनका स छमा ँ
मा ँग' लागला " भु हमरा छमा ँ क
हम अहा ं
ु पैघ अपराध भ गेल" तखन हनका
ु
के िच
सकलौ ं हमरा स पहत
उठाबैत महादेव कहलिखन
"हम आहा स ंगे एखन और रहब, लेिकन हमर एकता शतर् अिछ जे आहा इ बात केकरो स
कहबनी
और जख
आहा इ बात केकरो ल ंग बाजब ओही छन हम अहा ँ ल ंग स चली जायब" िव ापित शतर् के
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू करैत और द ु गोटे राजदरबार के तरफ चली गेला, माता पाबती
म ंजर
र् के इहो याश सफल
भेलैन. तखन एक िदन उगन के बेलप लावय मे किनक देरी भ गेलिन
तािह पर सुधीरा एतेक
ु
ोिधत भ गेली िक ओ चु ा मे जरैत एकटा लकड़◌ी िनकली क हनका
मारबाक लेल उठेिल्खन
ु
"सर'धआ
आय तोरा
छोबाऊर् तू बड श ैतान भ गेला हन हमर ब ा सब भूख स िबलाय्प रहल अिछ
ु
और तू एतेक देर स बेलप ल' क' एलै हन" कहै त हनका
िदश बढ़लिखन, तखन िव ापित स देखल
गेलि
और ओ बजला "हे हे इ की करैत िछ इ त सा ात महादेव छैथ" और एतबे किहते
ु
महादेव गायब भ गेलिखन, फेर िव ापित हनका
जं गले जं गले तक' लगला और "उगना रे मोर
ु
कतै गेला" गबैत रहला लेिकन उगना फेर हनका
भेटलिखन, और ओ अपन ाण ितयैग
देलिखन I
ओ ान जािह ठाम देवक देव महादेव कवी-कोिकल िव ापित के अपन अशली
पक दशनर् दे
ं
छलिखन ओही ठाम "बाबा उगना" के म ंिदर छैन और ओिहमे िशविल ंग जे छाई से अकुिरत
छाई, जेकर
ु ु
कहानी िकछु एहन, छाई जे एक बेर गामक एक बज
ि
के महादेव सपना देलिखन की "हम एकता
ु पैघ जं गल छलई तखन गामक लोक सब तैयार भ क ओय
गाछक जैर मे छी" और ओतै बहत
ु क जखन खदाई
ु
ु सु र िशविल ंग छाई, सब
ठाम गेला और पहँ च
केला त देखलिखन की एकटा बहत
ु खश
ु भेला और िवचार भेलय की िहनका ब ी पर ल चल ू ओय ठाम म ंिदर बना क िहनक
गेटे बहत
ु
ापना करब और हनका
उठेबाक लेल जख
हाथ लगेलिखन की ओ फेर स जमीन के भीतर चली
ु
गेला, फेर स कोरल गेल और हनका
िनकलवाक याश कैल गेलई, इ याश द ू तीन बेर कैल गेल
ु
मुदा सब बेर ओ जमीन के भीतर चली जायत छला, तखन सब गोटे के बझबा
मे एलईन जे इ
अिह ठाम रहता और अय ठाम स
जेता, तखन ओही ठाम साफ सफाए कैल गेल और त ाल म ंडप
ब ल गेल और बाद मे म ंिदरक िनमाणर् सु
भेल जे १९३२ मे जा क तैयार भेल और अिह म ंिदरक
पिरसर मे ओ अ ान सेहो अिछ जािह ठाम महादेव अपना जटा स गंगाजल िनकल
छला और आय ओ
इनारक
प मे अिछ जेकरा "च् कुप" के नाम स जानल जैत छाई और एख
ओकर जल शु
गंगाजल छाई, जे लैब टे ेड छाई !
ु
दरभं गा के एकटा बहत
िश
डा र अपना मेिडकल लैब मे एकर टे
के
छलिखन और ओ अय
ू
बात के सुचना ामीण सब के देलिखन जे अय मे परा गंगाजल के त िब मान अिछ, और इ दोसर
पे सेहो टे
छाई
ेड छाई, अय जल के यिद अहा ं बोतल मे रािख देबय ता इ ख़राब
होइत
ु
इ ान मधबनी
िजलाक भवानी पुर गाम मे ि त अिछ
एत' सब गेटे एकबेर ज र आबी, एही ानक कु तरहक जानकािरक लेल अहा ं हमरा स स ंपकर् क
सकैत िछ
"जय बाबा उ नाथ"
हमर इ सोभा
अिछ,
३. प
94
अिछ िक हमर ज
एही गाम मे भेल अिछ और हमर बचपन अय
ान पर बीतल
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
३.१.
३.२.
राजदेव म ंडलक ४ टा किवता
ोित सुनीत चौधरी-िविच
३.४.१.
जगदीश
३.५.१.
ु
म ृदला
३.७.१.
95
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
कालीका ंत झा "बचु "1934-2009-आगा ँ
३.३.
३.६.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
गजे
इ
ा
ू किवता २.
साद म ंडलक दटा
धान- कतय गेल
गणतं
चन ्
शेखर कामित, भात छै नाम-नाम
-िदवस २.
अरिव
ठाकुर- चािरटा गजल
ु
ठाकुर- घ ृणाक तरहिरमे बिढया
डाही स ंग अिछ
भूषण-हम की क ? २.
राजेश मोहन झा-“साओन कुमार”
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
३.८.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िकशन कारीग़र- नबकिनया ँ
ी कालीका
ू
झा "बच"
कालीका ंत झा "बचू " 1934-2009
िहनक ज , महान दाशिनक
र्
उदयनाचायक
र् कमभ
र् ूिम सम ीपुर िजलाक किरयन ाममे
1934 ई. मे भेलिन। िपता . प ंिडत राजिकशोर झा गामक म िव ालयक
ं
थम धाना ापक छलाह।माता . कला देवी ग ृिहणी छलीह। अतर
ातक सम ीपुर कालेज,
सम ीपुरस ँ कयलाक प ात िबहार सरकारक खंड कमचारीक
र्
पमे सेवा ार ंभ
कयलिन। बालिहं कालस ँ किवता लेखनमे िवशेष
िच छल। मैिथली पि का- िमिथला िमिहर, मािटपािन,भाखा तथा मैिथली अकादमी पटना ारा कािशत पि कामे समय-समयपर िहनक
रचना कािशत होइत रहलिन। जीवनक िविवध िवधाकेँ अपन किवता एव ं गीत
ुत कयलिन।
सािह अकादमी िद ी ारा कािशत मैिथली कथाक इितहास (स ंपादक डा. बासुकीनाथ झा) मे
ू
हा
कथाकारक सचीमे
डा. िव ापित झा िहनक रचना ‘ ‘ धम र् शास् ाचाय"क
र्
उ ख
े कयलिन। मैिथली
अकादमी पटना एव ं िमिथला िमिहर ारा समय-समयपर िहनका श ंसा प भेजल जाइत छल। ृ ंगार
ू
ु नाथ
रस एव ं हा
रसक स ंग-स ंग िवचारमलक
किवताक रचना सेहो कयलिन। डा. दगा
र्
झा
" ीश" स ंकिलत मैिथली सािह क इितहासमे किवक
पमे िहनक उ ेख कएल गेल अिछ |
1)
“ आउ हमर हे राम
आउ हमर हे राम
वासी”
वासी
्
वयाकुल
जनक, िव ला जननी,
पड़ल अवधपर अिधक उदासी
आउ हमर हे राम
वासी? ।।1।।
िधक् िधक् जीवन दीन, अहा ँ िब
96
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
बीतल बख र् मुदा जीवै छी
जीण-शीण
र्
र् मोनक गुदड़◌ीकेँ
ू भोँिक सीबै छी
् क
सवाथ
र् सइ
िनषठ् रु िपता पड़ल छिथ घरमे
कोमल पु
िवकल वनवासी
आउ, हमर हे राम,
वासी।।2।।
ु नर् कैकेयी बिन कऽ
दिद
हे तात, अहा ँकेँ िविपन पठौलिन
जािह चार तर ठार छलहँ ु
तकरापर दवु हर् भार खसौलिन
ग ृह िवहीन बनलहँ ु अनाथ हा,
हमर अभाग, म ंथरा-दासी?
आउ, आउ हे राम,
वासी? ।।3।।
सोनक ल ंकापर िवजयी भऽ
सीता स ंग कखन घर अ◌ाएब?
बीतल िविपनक अविध, अपन
अिधकार कहू किहया धिर पएब?
पिरजन सकल भोग भोगिथ आ्
अहा ँ बनल तपसी-सनयासी।।
97
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
आउ, आउ, हे राम,
भरत अहा ँ िव
वासी? ।।4।।
पणकुटीमे
र्
कुश आसनपर कािन रहल छिथ
ु
अहँ क पादकाके
ँ अवधक्
ऐशवयो
सर् ँ अिध मािन रहल छिथ
थाकल चरण चािप रगड़बपदतल, बैसब पौथानक पासी।।
आउ, आउ हे राम,
2)
वासी?।।5।।
“ गौरी रहथ ु कुमारी”
हएत निह ई िवयाह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी?
ू ल बौराह हे,
बर बड़
िधया शुिच सुकुमारी।।१।।
चामक सेज, कुगामक बासी
खन कैलाश, ख खन काशी
लागिथ ब ु
भुताह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी।।२।।
्
्
मुणडक
माल, बयाल
तन म ंिडत
् कपाल, मसानक प ंिडत
हसत
अ खन िबक् खक चाह हे,
98
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
गौरी रहथ ु कुमारी।।३।।
्
यधयिप
भाल सुधाकर, सुरसिरबहिथ बेहाल चरण धिर झिर-झिर
्
तधयिप
धहधह धाह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी।।४।।
कोठी कोठी भाङ भकोसिथ
कामिर-कामिर पािन घटोसिथ
आनक की िनरबाह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी।।५।।
्
भागिल, सिखगण सुन ू कामेशवर,
िगिरजा छिथ
ु ब
जिन
सिल कोबर घर
एहेन बताह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी।।६।।
सासुर धिर िशव भाभट समटू
पिरछए ि◌दयऽ सुन ू हे बङटू
बनलहँ ु वर उमताह हे,
गौरी रहथ ु कुमारी ।।७।।
१.
राजदेव म ंडलक ४टा किवता
राजदेव म ंडलक चािरटा किवता-
99
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
1) िमलन-िबछुड़न
अहा ँस ँ होइत अिछ जखन िमलन
बहए लगैत अिछ मलय पवन- सन-सन
झड़ए लगैत अिछ मेघस ँ छोट-छोट बनू
ु ा जाइत अिछ मनक
फल
गाबए लगैत अिछ
सनू
मर- गुन-गुन
िचड़◌ैक चहक मादक-महक
स ताक- दमक
िमलैत अिछ पणू र् शा ंित आर सुख
ु
पड़◌ा जाइत अिछ दख
् होइत अिछ जखन िबछुड़न
िकनतु
ु ँ भिर जाइत अिछ तन-मन
दखस
ू
सिख
जाइत अिछ मनक फूल
जेना रिह रिह गड़◌ैत अिछ शलू
मनमे भरए लगैत रोष
बेचैनी आओर अस ंतोष
हे सखी- क
को
उपाय
जे दनु सू ँ ऊपर उिठ जाय
िमल जाए
ाण
दनु ू भऽ जाए समान।
100
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
2) पिरवारक गाछ
रौद रहै तीखर
गाछ ल
कपारपर
घामस ँ नहाएल स ् ी
जा रहल छलीह सड़पपर
कथीक गाछ छी ई केहेन फड़त
एतेक रौदमे ई नइ मरत
्
हम गाछक नाम पुछलौ ं बारमबार
ओ कहलक एकर नाम अिछ पिरवार
एिहमे िशक्षाक फल फड़त
खाएत बाल-बच्चा तँ
ज्ञानक इजोत करत
हमरे पिर मस ँ ई हेतै िवशाल
एकरा निह खा सकत को
काल
पािल-पोिस कऽ बनाएब बलवान
्
बढ़तै सबहक मान-सममान
जेना कऽ पटेबै तेह
फड़त
्
जँ कषटमे
रहबै तँ िगर पड़त
हम मुँ ह िदश अकबका कऽ तकलहँ ु
ू ऐ-अहा ँक बात निह बिझ
ु
पछिल
सकलहँ ु
सुिन हमर वाणी
101
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ु
ओ बझलक
हमरा अज्ञानी।
3) ि श ंकु
ँ पर लगल अिछ िन क झँपना
आिख
देिख रहल छी डेराओन सपना
ु कऽ आिब गेल छी गाम
घिर
लाद
सप
समान पत् नी अिछ वाम
मे यादे अिछ ओ िदन
ु कोना कटलो िगन-िगन
एतेक दख
दस मास पवू र् भागल रिह
िमकाक स ंग
सामािजक िनयमकेँ कऽ देिलऐक भं ग
शहरमे िम
करैत छल काम
ु
दनु ू गोटे पहँ चलह
ँ ु ओिहठाम
्
एकानतमे
िम
बैठौलक साथ
समझाबए लागल सभ बात-
“ उपरस ँ जाितक ट ंटा
आर लगतह पुिलसक डंटा
अनकर बेटी रख
स ँग
ं
ं
पकड़ि◌ कऽ तोड़ि◌ देतह अग-अ
ग
गाबले गीतकेँ आब निह गाबह
102
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
् िवयाह कऽ आबह
कोट र् जा जलदी
्
कएलहँ ु अनतजा
तीय
र्
िवयाह
िकछु लोक कहलक वाह-वाह
िकछु कहलक ब
अधलाह
छोटकामे कएलक िवयाह
खािदमे धिस गेलाह
कािट दस मासक
वास
ु
पहँ चल
छी घरक पास
ु
पत् नी स ंगे ठाढ़ छी गोसॉ◌ंइ दआिर
क आगा
पछुआरक गाछपर का ँए-का ँए करैत अिछ कागा
हमरा बापक मुइला भऽ गेल साल द ु साल
ु गेला तोड़◌ैत ताल
फेर ई कतएस ँ पहँ िच
देखैत छी गोसाउिनक अगाड़◌ीमे
नीर भरल अिछ थारीमे
ू िसर नािच रहल अिछ
जािहमे धड़ िवहीन बाबक
ोधमे गलगला कऽ बा ँिच रहल अिछ-
“ ओिहठाम ठाढ़ रहू एमहर आिब निह सकैत छी
कुलदेवतास ँ असीरवाद पािब निह सकैत छी
जखन
ोधस ँ देवता जेतह जािग
धन-जन आ घरमे लगतह आिग
मुँ ह लटकौ
केकर तकैत छहक राह
ु र जाह
उनटे पाएर घि◌
103
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
गोहराबह देवता-िप रकेँ
मा ंगह सभस ँ माफी
एतबेक निह छह काफी
्
जा करऽ सात बेर गंगा सनान
बचाबह कुलक मान
एिह कुलच्छनीक छोिड आपस आउ
यौ बउआ अपन
ाण बचाउ”
एकटा पाएर बाहर एकटा अिछ घर
् मन भारस ँ दवा रहल छी तरेतर
अससी
बाप िदश तकबाक निह अिछ साहस
ँ मे झा ँिक रहल छी
पत् नीक आिख
डरे थर-थर का ँिप रहल छी
हेऔ एिहस ँ नीक छूिट जाइत
ाण
तर धरती निह उपर आसमान
मधय् भागमे अटिक गेल छी
निह कऽ सकैत छी
म
ि श ंकु जका ँ लटिक गेल छी
ु ाइत अिछ की करबै आब
िकछु निह फर
पत् नीकेँ की देबै जवाब
निह एिहपार निह ओिहपार
धऽ ले
104
अिछ जड़◌ैया बोखार
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
एखनहँ ु निह सपना छोिड रहल अिछ
कं ठ पकड़ि◌ कऽ तोड़ि◌ रहल अिछ।
4) अनमोल जीनगी
“ हारल जीनगी जीएब तािहस ँ नीक
रण
यौ िम
मे मिर जाएब से िअछ ठीक”
अहा ँक ई गपप् हमरा निह लगल नीक
जीनगीक स ंगे रहतैक हािर आर जीत
कखनहँ ु का त अिछ लोग कखनहँ ु गाबैत अिछ गीत
िकछुकाल करैत अिछ झगड़◌ा िकछुकाल करैत अिछ
जँ भऽ जाए जीनगीक यु मे हािर
्
फेरस ँ िलअ अपनाकेँ समहािर
छोिड शोक मनकेँ रािख नीरोग
ु
म ृत्युस ँ नीक जीवनक सदपयोग
करबाक चाही समाज आ राष ् क िहत
यएह तँ अिछ जीवनक मलू य् यौ िम
पकड़ि◌ िलअ को
सु र राह
सभ कहत वाह-वाह
बाज ू हरपल मधरु बोल
जीनगी अिछ अनमोल
बढ़◌ाउ स ंसारस ँ मेलजोल
105
ीत
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
बढ़ि◌ जाएत जीवन मोल!
..
ोित सुनीत चौधरी
ज
ितिथ -३० िदस र १९७८; ज
साकची ग र् हाई
ु
ान -बे वार, मधबनी
; िशक्षा-
ामी िववेकान
िमिडल
ूल़ िट ो
ू
ल
ू ़, िमसेज के एम पी एम इ टर कालेज़, इि रा गा ी ओपन यिनविस
टी,
र्
आइ सी
डब ू ए आइ (का
एकाउ े ी); िनवास
ू
ान- ल न, य.के.;
िपता-
ी शुभं कर झा, ज़मशेदपुर;
.
r y .comस ँ स ंपादकक चॉयस अवाडर् (अ ं जी
माता- ीमती सुधा झा, िशवीप ी।
ोितकेँwwwpoet
ु
.
t r ysoup.com केर मु
प क हेतु) भेटल छि । हनकर
अ ं जी प िकछु िदन धिर wwwpoe
प ृ पर सेहो रहल अिछ।
ोित िमिथला िच कलामे सेहो पार ंगत छिथ आ िहनकर िमिथला
ं
िच कलाक दशनी
र् ईिल ंग आट र् ुप केर अत
त ईिल ंग
कािशत।
किवता स ं ह ’ अिचसर् ’्
िविच
ा
ू ल पािनमे
एक िदस देश डब
बाढ़ि◌ सऽ दहाइत घर ार
दोसर ठाम लाखक लाख लागल
ू र् पजन
ू
मती
आ पाबैन
केहेन िविच
ोहार
ा अिछ ई
िकएक िबसिर रहल छी परोपकार
ई र अहा ँ जौ ँ भेिटतौ ँ तँ पुिछतहँ ु
नीक लागैत अिछ की एहेन सत्कार
पाइक जोर अहूँ केँ बदल
िक अख
अिछ
सु त छी पावन पुकार
एक िस ा वादी लेल धनाजर्न
कतेक दलु भ
र् भेल से अिछ देखार
106
ॊडवे, ल ंडनमे
दिशत
र् कएल गेल अिछ।
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू
ाचारक लटल
पाइ सऽ
भऽ रहल अिछ अहा ँक िस ंगार
िद
िदन स ंघष र् कऽ रहल अिछ
मा
जीबै लेल कम र् करिनहार
जौ ँ अहा ँ स े मोन मे बस ै छी
तऽ मोन निह करैत अिछ
ीकार
ू जरा कऽ आड र िकएक
धप
क र्
ू मे अहा ँक जय जयकार
पितर्
सभमे सत्कमक
र् शक् ित भिरतहँ ु
तऽ होइतै वा िवक चमत् कार ।
१.
जगदीश
ू किवता २.
साद म ंडलक दटा
१
जगदीश
ू किवतासाद म ंडलक दटा
्
1) गंग सनान
उिठ भोरे छोिड घर, चललौ ं नहाए गंग
107
चन ्
शेखर कामित, भात छै नाम-नाम
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ं
घर-पिरवार समेिट, देह धरौल अग
ँ
्
अनहरोखक
राह हराएल, झल-फल करै आिख
दनु ू डेन पसािर, लगौल माछक पा ँिख
् िछड़ि◌आएल, देखल तक् खन गाम
िदन जगल रशिम
ु इल फल
ु वारी सुखैत, पहँ चल
ु
लटआ
एक सुरधाम
सभ पापक जननी अहा ँ मैया
ु िबलहू अपन स स
जिन
ु
दधू बिझ
भक् तजन पीबै
ू
सनिक पड़◌ाए दरदेश।
्
2) सरसवती
ब ंदना
साले-साल िकअए अबै छी
झ
-झण अबैत रहू
हर क्षण हर मनकेँ
अम ृतस ँ भरैत रहू।- क्ष
-क्षण...
नव शक् ितक नव उत्साह दऽ
स ृजन शक् ित भरैत रहू
कम-ज्ञानके
र्
ँ घोड़ि◌-घोड़ि◌
िस हस ँ िस ह सटैत रहू।- क्ष
्
जे हूसल से हममर
हूसल
्
तइले िकअए छी कलहनत
108
-क्षन...
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
सभ जागैए सभ सुतैए
ं
एक िदन हेतै सबहक अत
नजिर-उठा देखैत रहू।- क्ष
-क्षण...
देवी अहा ँ, मैया अहा ँ
भेिद कतौ अिछ कहा ँ
ँ उठा-उठा
जोड़ल आिख
पले-पल देखैत रहू
क्ष
-क्षण अबैत रहू।
२.
चन ्
् योगेन ्
शेखर कामित, िशक्षा- एम.ए. (राजनीितशास ् ), िपता- सव.
्
कामित, गाम-पोसट-
्
किरयन, भाया- इलमास नगर, थाना- रोसड़◌ा, िजला- समसतीपुर,
िबहार। सम ितसहकािरता
सार पदािधकारी (बेनीप ी)
भात छै नाम-नाम
(बाल सािहत् य)
भात छै नाम-नाम, दािल छै गोल
तेिहपर चड़हल आलुक झोड़
109
्
खणड
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
क
दही दीयऽ क
बडी दीयऽ-2
छोटकी किनया ँ आबै छिथ,
ओ भानस खबू बनावै छिथ,
ु
हनका
हाथक बनल त आ,
तरकारी सभकेँ भावै छै,
छैक
न-तेल सभ ठीक-ठीक,
् सभकेँ बड़ नीक,
लागै छनिह
क
दही दयऽ, क
बडी दीयऽ-2
भात छै नाम-नाम दािल......
छोटकी केर छोटका कनिटरबा
सभ का ँय-का ँय िकिकयाबय छै
तइयो बेचारी मोन मािर-मािर
्
अपपन
स ंसार चलावय छै,
केतवो केओ लाख सताबै छै
ु
ु न मोट
्
दबु बर
दलहा,
दलिह
तै पर स ँ दे लािठक चोटक
दही दीयऽ क
बडी दीयऽ-2
भात छै नाम-नाम, दािल छै गोल
तेिह पर चड़हल आलुक झोड़
110
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
क
दही दीयऽ, क
ु
म ृदला
१.
१
ु
म ृदला
कतय गेल
गणतं
-िदवस
कतय गेल
गणतं
-िदवस ,
कतय सकुचायल ,
दृ
सोहनगर ,देखवैया
छिथ, कतय
कायल .
लालिकला आर क़◌ुतुब िमनारक
के नापो ऊंचाई ,
िचिडया-घर जं तर -म ंतर क
छूटल आवा-जाही .
ू -भुिजया ,
िपकिनक क परी
िनमकी ,दालमोट ,अचार,
ू िड ा लय,
कलाकं द ,लडक
िम
111
,सकल पिरवार ,
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
बडी दीयऽ-2
धान- कतय गेल
झ ंडा क गीत
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
धान
गणतं
-िदवस २.
अरिव
ठाकुर- चािरटा गजल
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
कागज़ के िछपी-िगलास
थमसर् मे
भिर-भिर चाय,
ु
दई-चािर
ता शतर ंजी
वा चादर िलय,
िबछाय.
इ सबहक िदन
बीित गेल,
आब 'मॉल' आर 'मल्टी े ',
ु ़◌ा छिथ
दही -चड
ु ,
मुं ह िबधऔ
घर -घर बैसल
'कानर् े '.
कम्
ूटर पीठी पर
लद ,
मुठ्ठी मे मोबाइल,
अप
मे छिथ
सब
ो बाझल,
यैह
नवका '
२
112
ाइल'.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
अरिव
ठाकुर
गजल-१
िछिछआइछ उ
ंठा हमर खन आर लग, खन पार लग
हमर िलखल उजास सभक मोल की स ंसार लग
जाल मुँ हमे बोल निञ, छपय बहेिलया के बयान
ु
ू छै अखबार लग
िचडैक बोली बझत
से निञ लिर
र ंगिबरही िजनीसस ँ ठा ँसल रहै सभटा दोकान
िक ु जन-बेचैनी के औषिध निञ रहै बजार लग
एक समझौता स ँ शासन वामनक सरकस बनल
निञ छलै प ा को
बु
दमगर बचल दरबार लग
मे सागर भरल, अ
मे भरल ऊजा र् अपार
िब ु सिरपहँ ु ल वत भए ठाढ होइछ आधार लग
लोक-लादल नाह बािढक पािन मे अब-तब मे छै
ओ िघ ंचाबय छिथ फोटो बा
113
पर पतवार लग
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
नफा के वनतं
अिकल गु
मे पग-पग िबचौिलया र बीज
अिछ, केकर मारफत अजीर् दी सरकार लग
उपरच ी माल के च ा चढल “ अरिबन” एतेक
बनल छी लगुआ िक िभ आ, जायब निञ अिधकार लग
गजल-२
जनिहत के एिह बजट मे एखन िव ीय-क्षित अ मा
हमरा एना िकऐ लगैछ जे स ंकट हमर
ा
पर अिछ
पर अिछ
ू
अयो ा मे रामलला लेल िकऐ पडल बइया
ँ के स ंकट
भू-अजर्न के अिखल भारतीय भार जखन ह मा
पर अिछ
सगर देश के सभ इनार मे बैमानी के भा ंग घोरायल
बनखा ंट मे बैमानी के जा ंच-भार बैमा
पर अिछ
ू
ू िटकए, भीख मा ंिगकए पेट भरैए लोक, तखन
लिट-क
स ंिवधान केँ आ घात स ँ तोडैक दोष िकसा
मा र् आर एंजे
मोनक को
114
पर अिछ
केँ पीयल, घ ंटल लाल-िकताब मुदा
अ तर्म मे बस भरोस भगवा
पर अिछ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
गजल कहै त “ अरिबन” जेना हम परकाया- वेश केलहँ ु
िनज के अिछ बोध,
अपन िचत आ अिकल ठेका
गजल-३
तुरछल हमर
सौभा , हमर छाहिरक छाहिर स ँ भागय
जेना जडकाला मे सेरायल लोक पर स ँ रौद भागय
भाव के लतनदनर् करय, सटका बजारय बेर-बेर
हीत-मीतक चोट सिहतहँ ु मोन स ँ निञ मोह भागय
के कोरा मे रिहतहँ ु िकछु सजग भए कए रही
िन
ु
चोर-दरब ् आजा बहत,
देखब, को
प-रस लोभी
स
सपना
भागय
मर सन छै पु ष के जाित ई
के िस िडस ँ बा ,ू ऊिबकए छिलया
भागय
एना भागैछ कुकुर-मोन, कुितया-िवमुख, भोगक पछाित
मािर डर स ँ भूत आ कं गाल-घर स ँ चोर भागय
इजोतस ँ सकप ंज छिथ काजर के घर मे रहिनहार
शायर सदित चैत
गजल-४
115
“ अरिबन” , कोन िविध अ ार भागय
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
पर अिछ
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ँ पर र ंगीन सन जाली लगाबय
मदन हमर आिख
ु
पात हनकर
देह आ ट ु
ु
ी हनक
कनफूल लागय
ु
नीलहा पिरधान स ँ िछटकैत हनक
देहक
ोँ पणू चर्
भा
शरद मासक
ोम मे
ु
हनक
दय मे ब मलू भेलिछ एहन सन
ितमा
जेँिक अलगाबय छी बल स ँ,
आभा जगाबय
दय के सभ त ु फाटय
ं
ई हँ सी, ई अगभं
गी, ई कटाक्षक तनल वाण
म थ के कारावास मे बा ल को
कैदी की भागय
यक्ष छी “ अरिबन” , धरा पर आयल छी हम शापवश
ं
ु
मोन के पिरताप स ँ अतःकरण
झरकैत बझाबय
गजे
ठाकुर
गजे
ठाकुर, िपता- गीर्य कृपान
ठाकुर, माता- ीमती ल
ू
ु
१९७१ ई., मल-गाम-में
हथ, भाया-झ ंझारपुर,िजला-मधबनी।
लेखन: कु
म ् अ मनक
र्
सात ख - ख -१
ी ठाकुर, ज - ान-भागलपुर ३० माच र्
ब -िनब -समालोचना, ख -२ उप ास-(सह बाढ़िन),
ख -३ प -स ं ह-(सहस् ा ीक चौपड़पर), ख -४ कथा-ग
स ं ह (ग
गु ), ख -५ नाटक(स ंकषण),
र्
ख -६ महाका - (१.
ाह
आ २. अस ाित मन ), ख -७ बालम ंडली िकशोर-जगत
ं नक
कु
म ् अतम
र्
नामस ँ।
मैिथली-अ ं जी आ अ ं जी-मैिथली श कोशक ऑन लाइन आ ि ंट स ं रणक सि िलत
प ी- ब क सि िलत
116
पे ँ लेखन-शोध-स ादन आ िमिथलाक्षरस ँ देवनागरी िल
पे ँ िनमाण।
र्
ंतरण "जी म मैिप ंग
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
(४५० ए.डी. स ँ २००९ ए.डी.)-िमिथलाक प ी
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ब " नामस ँ।
मैिथलीस ँ अ ं जीमे कएक टा कथा-किवताक अ वाद आ क ड, तेलुगु, गुजराती आ ओिडयास ँ अ ं जीक
मा मस ँ कएक टा कथा-किवताक मैिथलीमे अ वाद।
उप ास (सह बाढिन) क अ वाद १.अ ं जी ( द कामेट नामस ँ), २.को ंकणी, ३.क ड आ ४.स ं ृतमे कएल
गेल अिछ; आ एिह उप ासक अ वाद ५.मराठी आ ६.तुलुमे कएल जा रहल अिछ, स ंगिह एिह उप ास
सह बाढिनक मलू मैिथलीक
ल स ं रण (मैिथलीक पिहल
ल पु क) सेहो उपल अिछ।
कथा-स ं ह(ग
-गु ) क अ वाद स ं ृतमे।
ं
ं
ु
ू
अतजा
लर् लेल ितरहता
आ कैथी यनीकोडक
िवकासमे योगदान आ मैिथलीभाषामे अतजा
लर् आ स ंगणकक
श ावलीक िवकास।
का रचना सभ:-१.कु
म ् अ मनक
र्
सात ख क बाद गजे
ठाकुरक कु
म ् अ मनकर्
ठाकुरक दोसर उप ास
२ ख -८ ( ब -िनब -समालोचना-२) क स ंग, २.सह बाढिन क बाद गजे
शी
स॒ह ॑ शीषा॒ र् , ३.सह ा ीक चौपडपर क बाद गजे
ठाकुरक दोसर प -स ं ह स॑ह िजत् ,४.ग
गु
क बाद गजे
ठाकुरक दोसर कथा-ग
स ं ह श शास् म ् ,५.स ंकषणर् क बाद गजे
ठाकुरक दोसर
ाह
आ अस ाित मन क बाद गजे
ठाकुरक तेसर गीत- ब
नाराशं॒सी , ७.
नाटक उ ामुख ,६.
ना-भुटका आ िकशोरक लेल गजे
ठाकुरक तीनटा नाटक- जलोदीप, ८. ना-भुटका आ िकशोरक
लेल गजे
ठाकुरक प स ं ह- बाङक बङौरा , ९. ना-भुटका आ िकशोरक लेल गजे
ठाकुरक
िख ा-िपहानी स ं ह- अक्षरमुि का ।
स ादन: अ जालपर
र्
िवदेह ई-पि का “ िवदेह” ई-पि का ht t p://wwwvi
. deha.co.i n/ क
ु
स ादक जे आब ि ंटमे (देवनागरी आ ितरहतामे)
सेहो मैिथली सािह आ ोलनक ार
कए
ु
अिछ- िवदेह: सदेह:१:२:३:४ (देवनागरी आ ितरहता)।
ई-प
स ंकेत- ggaj endr [email protected] l .com
ु
घ ृणाक तरहिरमे बिढया
डाही स ंग अिछ
१
घ ृणाक तरहिरमे
म, मु
ीस ँ जीतब घ ृणा आ ई ाके
र् ँ
ू
घ ृणाक तरहिर खनऽ
िदयौ
117
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ओिह तरहिरमे घ ृणाकेँ गािर देबै
अपन
मक शि स ँ
हँ स ैत- मुि याइत करबै आ ह
जे पिर म घ ृणाक तरहिर बनबऽमे लगौलक
कहबै
जािहमे
मक पोखिर काटऽ
मक पािन बरखा मासमे भिर जाएत
आ भरले रहत ततेक गहींर कऽ काटल रहत मािट
ओिहमे हेलत
म
हेलैत रहत
आ बिह जाएत, डिू म जाएत घ ृणा आ ई ा र्
डिू म जाएत आ बझा कऽ लऽ जएतै पिनड ु ी ओकरा
जावत हम रहब
छूिब सकत
ो
मक स क पु केँ
कारण शि स ँ, ऊजासर् ँ भरल अिछ स क पु
ओकर चा कात
क
ूल-
मक िगलेबास ँ ठाढ कएल घेराबा रहत
िच ा।
आ जिहया हम
रहब
सीिख जाएब अहा ँ सभ िकछु
हमर िवयोग बना देत स त, ती
स क िवरोधीक लेल
118
आ कठोर
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ओिह घेराबाकेँ तोडबाक
अहा ँक
ूल-
मी िम
से हम रही वा
यास
सभ
हेमऽ देिथ
रही
याण थ त
बतहपना बढत
मािर देब तँ मािर िदअ
मुदा मोन राख ू
ु रास व ु
हमरा स ंगे मरत आर बहत
मुदा रहबे करत
ूल-
आ करत पिहल न ृ
मी साधक सभ
ह
स ंचालनस ँ
चतुरह
आन स ँ भरल मोन
स , झठू आ तकर िनणयक
र्
लेल
ु लए
सनगोिहक चामस ँ छारल डफ-खजरी
डोरीक क नस ँ
िन िनकालत
ु
गुमकी, ओिह खजरीक
िन
आ गुमकी, गुम..गुम..गुमकी...
आ तखन दोसर न ृ
होएत
िशखरह
पवतिशखरसन
र्
यु क आवाहन- दशनक
र्
लेल
ू
घ ृणाक तरहिर खनऽ
िदयौ
119
ार
सफल
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मािर देत तँ मारऽ िदऔ
मोन राख ू मुदा
ु रास व ु
हमरा स ंगे मरत आर बहत
मुदा हमर िवयोग बना देत स त, ती
र बीजी स पु
आ कठोर
सभकेँ
२
ु
बिढया
डाही स ंग अिछ
कमलक म ृणाल, पुरैिन, कमलग ा, िबसा ँढस ँ भरल खेत
ु
ओ निह छिथ बिढया
डाही
खेत जे छलै सनगर यौ
से बनल
घ ृणाक िव
मक कमलदह
ु
अिछ हमर ई बिढया
डाही
फेर वएह गप
आ रक्षाथ र्
स क िवरोधमे
चोरबा बाजल फेर
सजर्नक सुख भेटत चोिरमे?
दोसराक कृित अपना नाम केलास ँ
आिक दोसराक मेहनितकेँ अपन नाम देलास ँ
दोसराक
120
ितभाकेँ दबा कऽ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
कुटीचािल कऽ आर
भा ँग पीिब घरू तर कऽ गोलौसी
ँ
कोनाकेँ आगुर
काटब जे िलखब ब
करत
तोिड िदयौ डा ँर, कािट िदयौ पएर
ँ िनकािल िलअ धऽ िदयौ रॉलरक नीचा ँमे
आिख
िपसीमाल उठा िदयौ
बडका एलाहेँ सजर्नक सुख पएबाले
तँ की हािर जाइ
तँ की छोिड िदऐ
इ ा जीतत आिक जीतत ई ा र्
स ंक
हमर जे एिह धारकेँ मोिड देब
मुदा िकछु ई ा र् अिछ सोझा ँ अबैत
ई ा र् जे हम धारकेँ निह मोिड पाबी
बहै त रहए ओ ओिहना
ओिहना िकए ओहूस ँ भय ंकर बिन
स ंक
जे हम के
छी
इ ा जे अिछ हमर/ से हािर जाए
आ जीित जाए
ेष/ जीित जाए ई ा र्
हा हारबो करी तेना भऽ कऽ जे लोक देखए!/ जमाना देखए!!
तेना कऽ हारए स ंक
हमर/ इ ा हमर
धारकेँ रोिक देबाक/ ठाढ भऽ जएबाक सोझा ँ ओकर
121
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
आ मोिड देबाक स ंक
ओिह भय ंकर उद
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
धारकेँ
मुदा िकछु आर ई ा र् अिछ सोझा ँ अबैत
ओ
ेष चाहै ए जे हमर
मोडलाक
यास/ धारकेँ मोडबाक
यास
यासक बाद भऽ जाए धार आर भय ंकर
पुरान लीखपर चलैत रहए भऽ आर अ ाचारी
आ हम जाए हािर
आ हारी तेना भऽ कऽ जे लोक राखए मोन
मोन राखए जे िकयो द ु ाहसी ठाढ भऽ गेल छल धारक सोझा ँ
तकर भेल ई भय ंकर पिरणाम
जे लोक डरा कऽ निह करए फेर द ु ाहस
द ु ाहस ठाढ हेबाक उद -अ ाचारी धारक सोझा ँमे
लऽ ली हम पत कान/ आ से सुिन थरथरी पैिस जाए लोकक
मुदा हम हँ स ै छी
हािर तँ जाएब हम मुदा हमर साधनास ँ जे र बीज खसत
से एक-एकटा ठोपक बीआ बिन जाएत सह बाढिन झोँटाबला
घ ृणाक िव
ु
थाढ अिछ हमर ई बिढया
डाही।
कमलक म ृणाल, पुरैिन, कमलग ा, िबसा ँढस ँ भरल खेत बनत
खेत जे छलै सनगर यौ, जािहमे घ ृणाक तरहिर ख ु लौ ं यौ
ू
घ ृणाक तरहिर खनल
ओिह खेतमे
कमलक म ृणाल, पुरैिन, कमलग ा, िबसा ँढ अिछ भिर गेल
ु ा गेल।
मक कमल अिछ फल
122
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
दयमे
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ु
सह बाढिन झोँटाबला बिढया
डाही केलक ई।
आ तखन
फैसला हेतै आब
जखन
उनिट जाइए लोक
उनिट जाइ छै बोल
छ -छन बदिल जाइए
िबचकाबैए ठोर
बोलक मधरु वाणी
बोली-वाणी
बदिल जाइ छै
बिन जाइए िबखाह
गोबरझार दऽ चमकाबै छी
घ ृणाक िव
ृितकेँ
ु
ठाढ छिल तिहयो हमर ई बिढया
डाही।
धारकेँ रोकबाक िह
आ ओ सभ तकर िव
क जकरा लािग गेल छै
ठोिक कऽ टाल
भऽ जाएत ठाढ
आ डरा जाएत
ेष
रण कऽ
जे फेर र बीजस ँ िनकलल एिह सह बाढिन सभक र बीज
एकर सभक बीआक स ान फेर आर बिढ जाएत आ मणस ँ
कारण स ंक
अिछ, इ ा अिछ ई सभ
धारकेँ रोकबाक िह
123
क जकरा लािग गेल छै
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
घ ृणाक िव
ु
अिछ जे जकरा बिढया
डाही अहा ँ कहै िछऐ।
१.
इ
भूषण-हम की क ? २.
इ
भूषण
हम की क ?
जँ गाबी सभ कहै ए
क
िकएक िछऐ?
जँ कानी सभ कहै ए
ई की गबै िछऐ?
ु रहू सभ कहै ए
जँ चप
बाजै िकएक निह िछऐ?
जँ बाजी सभ कहै ए
ह ा िकएक करै िछऐ?
ु रहू?
आिखर बाज ू वा चप
हम की क ?
केओ कहै त अिछ
124
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
राजेश मोहन झा-“ साओन कुमार”
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
अहा ँ ई िकएक निह करै िछऐ
केओ कहै त अिछ
अहा ँ ओ िकएक निह करै िछऐ
ई क
ओ
स
ओ क
ई
तँ
होइत अिछ
तँ
िस जाइत अिछ
सबकेँ मनाऊ कोना
हम की क ?
िबना पुछ
क
तँ कहै ए
पुछलौ ँ िकएक निह
जँ पुिछऐ तँ ऽ कहै ए
अप
िकएक निह सोचै िछऐ
अपना समझस ँ क
तँ कहै ए
सिदखन एना मनमरजी िकएक करै िछऐ
ु
अपन पक्ष सभकेँ बझाऊ
कोना
हम की क ?
२.
125
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
राजेश मोहन झा 1981उपनाम- गुंजन, ज
ान- गाम+प ालय- किरयन, िजला- सम ीपुर, हा
िवगिलत दशाक वणन।
र्
बाल सािह मे िवशेष
िच।
“ साओन कुमार”
(वाल सािहत् य)
उछिल-कूद करै छेँ वौआ
एिह ऋृतुक तोरा भान कोना छौ
टरटराइत छेँ कादो सानल जलमे
्
सवर
सरगमक ज्ञान कोना छौ
झर-झर झहरौ ऋृतु ि◌नरझरनी
सभा बजौलें डोबहा कातमे
छोट-छोट जलकुमही पातक
िटकुली सट
छेँ मुॅ◌ंह आ गातमे
भेटथनु एिहठॉ ि यतमा तोहर
एिह सबहक अ मान कोना छौ...
126
किवताक मा मस ँ समाजक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
्
आबे ँ बैसेँ क क सुसतावेँ
...
हेतै जे से देखल जएत
ू
मेघदतक
शान बढ़ल छै
निह पोखिरक पािन सुखएत
औता भुजं ग लपप् दऽ धरता
एिह सभस ँ अनजान कोना छेँ
ज त छी िकछु जन तोरा
ू किह उपहास करै छिथ
कूप म ंडक
निह ज त छिथ तोहर मिहमा
मुदा गलती अनायास करै छिथ
चनहा सोती इनार वा सिरता
सभठॉ जीवन आसान कोना छी....
एकटा अपराध तुहू करै छेँ
जखन-तखन तो ं बाढ़ि◌ अ
जा
छी मा
छेँ
छी मुदा की क
ना िवयोगमे खवू क
छेँ
दलवल आवे गीत सुनावे
मा ा तालक वरदान कोना छौ....।
िकशन कारीग़र
127
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
पिरचय:- ज - 1983ई0 कलकता में ,मलू नाम-कृ
राय ‘ न ’ू
सीतान
, माताक नाम-
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
कुमार राय ‘ िकशन’ । िपताक नाम-
ी
ीमती अ पमा देबी। मलू िनवासी- ाम-म ंगरौना भाया-
ं
ु
अधराठाढी,
िजला-मधबनी
िबहार। िहं दी में िकशन नादान आओर मैिथली में िकशन कारीग़र के नाम सॅ◌ं
िलखैत छी। िहं दी आ मैिथली में िलखल नाटक, आकाशवाणी सॅ◌ं सािरत एव ं लघ ु कथा,किवता,राजनीितक
लेख कािशत भेल अिछ। वतर्मान में आकशवाणी िद ी में स ंवाददाता सह समाचार वाचक पद पर
कायरत
र्
छी।िशक्षाः-एम िफल प कािरता एव ं बी एड कु
नबकिनया ँ
मोन रिखयौ क क हमरो िपया
सोलहो िस ंगार कए बैसल छी हम एसगर
भें ट होएब किहया अहॉ मोन मे आस लगे
अहॉक बाट तकैत छी हम एसगर।
कौआ कूचरल भोरे-भोर
ु चाप हमरा केलक सोर
चपे
कहलक ज ीए औतहनु तोहर ओझा
िलिप
ीक लगा हम र ंगलहॅ ु अपन ठोर।
परदेश जाइत-मातर यौ िपया
िकएक िबस ैर जाइत छी नबकिनयॉ के
निह िबसरब किहयो परदेश मे हमरा
सपत खाउ हमरा पैरक पैजनीयॉ◌ं के।
ू
जिन
128
स ू अहॉ सजनी निह घबराउ यै
़
िव िव ालय कु
सॅ◌ं।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ु
मोन पडैत छी अहॉ तऽ लगैत अिछ बकोर
यै
मुदा िक क
निह भेटल तनखा समय पर
निह िकनलहॅ ु अहॉ◌ंक लेल लहं गा पटोर यै।
सािड पिहर हम गुजर कए लेब
निह चािह हमरा राजा लहं गा पटोर यौ
ु मे रहब सहभागी
अहॉक सुख-दख
ु ं अहॉ के ऑिख सॅ झहरैत अिछ
देिखतहॅ◌
र यौ।
अिहं क िबयोग मे िदन राित जरैत छी
ु ू र-टक
ु ू र अिहं के देखैत छी
इजोिरया मे टक
ू
अिहं क स ंग एिह बेर घमब
चैतीक मेला
मो
मोन हम एतबाक िनयार करैत छी।
केलहँ ु िनयार अहॉ आिब कऽ देख ू
ब
मु ी माइर रहल छी हम चौअिनयॉ◌ं
ज ी चिल आउ गाम यौ िपया
िचª ी िलख रहल अिछ एकटा नबकिनयॉ◌ं।
ं िमिथला कला स ंगीत
ू
िवदेह नतन
अक
129
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
१.
त
े ा झा चौधरी २.
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ोित सुनीत चौधरी
१
त
े ा झा चौधरी
गाम सिरसव-पाही, लिलत कला आ ग ृहिवज्ञानमे ातक। िमिथला िच कलामे सिटिफकेट
र्
कोस।
र्
कला दिशनी:
र् ए .एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सा ं ृितक काय र् म, ाम- ी मेला जमशेदपुर, कला मि र
जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वकर्शॉप)।
कला स
ी काय:र् एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला
ितयोिगतामे िनणायकक
र्
पमे सहभािगता, २००२-०७
ू
ू
धिर बसेरा, जमशेदपुरमे कला-िशक्षक (िमिथला िच कला), वमेन
कालेज पु कालय आ हॉटेल बलेवाडर्
लेल वाल-पे ंिट ंग।
िति त
ॉ र: कारपोरेट क ुिनकेश , िट ो; टी.एस.आर.डी.एस, िट ो; ए.आइ.ए.डी.ए.,
ऑफ इि या, जमशेदपुर; िविभ
ि , हॉटेल, स ंगठन आ
हॉबी: िमिथला िच कला, लिलत कला, स ंगीत आ भानस-भात।
किरया झ ु िर
130
ि गत कला स ं ाहक।
ेट बैक
ं
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िमिथलाक लडकी सभमे किरया-झ ु िर खेलक खबू चलिन अिछ। छोट आ पैघ सभ एिह खेलक आन
लैत छिथ...
२.
131
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ोित सुनीत चौधरी
ज
ितिथ -३० िदस र १९७८; ज
साकची ग र् हाई
डब ू ए आइ (का
ु
ान -बे वार, मधबनी
; िशक्षा-
ामी िववेकान
िमिडल
ूल़ िट ो
ू
ूल़, िमसेज के एम पी एम इ टर कालेज़, इि रा गा ी ओपन यिनविस
टी,
र्
आइ सी
एकाउ े ी); िनवास
ू
ान- ल न, य.के.;
िपता-
ी शुभं कर झा, ज़मशेदपुर;
.
r y .comस ँ स ंपादकक चॉयस अवाडर् (अ ं जी
माता- ीमती सुधा झा, िशवीप ी।
ोितकेँwwwpoet
ु
.
r ysoup.com केर मु
प क हेतु) भेटल छि । हनकर
अ ं जी प िकछु िदन धिर wwwpoet
प ृ पर सेहो रहल अिछ।
ोित िमिथला िच कलामे सेहो पार ंगत छिथ आ िहनकर िमिथला
ं
िच कलाक दशनी
र् ईिल ंग आट र् ुप केर अत
त ईिल ंग
कािशत
किवता स ं ह ’ अिचसर् ’्
132
ॊडवे, ल ंडनमे
दिशत
र् कएल गेल अिछ।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ग -प
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
भारती
ु गोट लघकथा
ु
डा. िमिथलेश कुमारी िम क दइ
ु
-लेिखकाक स ं ृत लघकथा
स ं ह “ ल ी” स ँ मैिथली
पा र:
डा. योगान
झा
१.वीरभो ा वसु रा
ु र् स ँ ग ृह ामी देवद क म ृ ु भऽ गेलिन। लगले हनक
ु
ु
दभा
दनु ू पु हनक
ा ािदक कमक
र् बाद आपसी
बा ँट-बखरा कऽ लेलिन।
े रमेश भावस ँ िकसान छल। ओ अपन काजक
व ा य ं स ंचािलत करऽ
ू
लागल। मुदा छोट पु सुरेश परम आलसी छल। ओकर खेती-बाडी जन-मजरपर
आि त रहऽ
लगलैक। तेँ ओकर उपजा-बाडी अ
भऽ गेलैक।
मशः ओ अ
दिर होइत चल गेल।
एक िदन ओ अपन भाइस ँ पुछलक- भाइजी यौ, हमर खेत सभक उपजा-बाडी िकएक कम होइत चल
गेल? हमरास ँ कोन ुिट भेल अिछ? हमहूँ तँ अहींक स ंगे समयेपर रोपनी-पटौनी आिद करैत
अएलहँ ु अिछ मुदा तैयो हमरा खेतमे पिह
जका ँ उपजा निह भऽ पािब रहल अिछ। आिखर कोन
ढं गक दोष हमरास ँ भऽ रहल अिछ?
ू
रमेश बाजल- सुरेश! तो ँ िकछु करऽ निह चाहै त छेँ। तोहर खेती-बाडी ज -मजरपर
िटकल
छौक। ई जािनले जे जाधिर तो ँ य ं अपन खेतमे पिर म निह करबे ँ ताधिर पया र् अ निह
उपजतौ। सनातनस ँ ई नीितवा
चिलत छैक- “ वीरभो ा वसु रा” ।
२. अित सव र्
वजर्येत्
ु
ु आ दइ
ु गोट छोटको
दघु टनामे
र्
महेशक अकालम ृ ु भऽ गेलिन। तखन हनक
युवती प ी माधरी
ु
छोट
ना अक ात् अनाथ भऽ गेलिन। पर-पिरजन सभ हनका
सभकेँ सा ं ना दऽ अपन-अपन
ु
काजमे लािग गेल। केशव महेशक बालस ंगी छलैक। ओ माधरीक
सहायताक हेतु कृतस ंकि त भेल।
ु
ओ सरकारी कायालयमे
र्
वरीय िलिपक छल। ओ अपन माइक स ंग माधरीयेक
पड़◌ोसमे रहै त छल आ
ु
ु
िनराि ता माधरीक
ान राखैत छल। ओ माधरीक
हेतु बजार जाय खा साम ी कीिन कऽ अ त छल
ू क हेतु किटब
आ ओकर आ
आव कताक पितर्
रहै त छल। ओकर एिह कारक यासक कार
ु किहयो क क अ भव निह कऽ सकल। केशवक माय सेहो माधरीक
ु
माधरी
िधया-पुता सभक ताक-छेम
कएल करिथ। ई सभ देिख कऽ लोकापवाद चिलत होमऽ लगलैक- “ ई सभ को
परोपकारक
ु
भावनास ँ निह कएल जा रहल अिछ। माधरीक
युवाव ा ओ सौ य र् एकर मलू कारण अिछ। केशव
133
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
माधरीपर
आकिषत
र् भऽ गेल अिछ आ ओकरास ँ
म करऽ लागल अिछ” । एिह तरहक स ेहक द ृि
ु
सव र्
ापक होइत चल गेल। से सभ देिख केशवक माय बजलीह- बेटा, आइस ँ माधरीक
घर जाएब
ब क । कहलो गेल अिछ- “ अित सव र् वजर्येत् ” । लोक िनर ंकुश होइत अिछ।
बालाना ं कृते
१.
ु
ुटी कुमारी- राहलजी
एक
नजिरमे २.
डा. शेफािलका
(दादीस ँ सुनल कथाक पुनले र्खन) ३.
अचना
र् कुमर
वमा-र्
१.आस, २.िव ान-१
िृ त-शेष
१.
ुटी कुमारी, सहायक
िव ालय,
134
ालपाड़◌ा, मधेपुरा (िबहार)।
ं
ु
िशिक्षका, स ं ृत मधराम
इटर
रीय
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ु
राहलजी
एक
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
नजिरमे
ु
दिनया
ँमे ितभाक धिनक लोकक कमी
अिछ तखन सवतोमुखी
र्
ितभाक धिनक
ि
तँ ओं गुरीपर
ु सा ंकृ ायन िगनल-चन
ु ल ओहेन ितभाक धिनक लोकमे छिथन िजनकर
िगनल जा सकैत अिछ । राहल
जोड
अिछ । िहनकर तुलना करै लऽ
पकक क ना करनाय द ु ा
लागैत अिछ।
ं
ु
राहलजी
जीवनक सब अगक
सामािजक िवज्ञानक सब शाखाक केँ
िलख
छिथ। बौ
धमावल
र्
ी केँ तँ दावा अिछ िक 20वीं सदी मे भगवान
ु
चार- सार करैवाला लोक मे राहलजी
अ ग
छिथ। औपिनषिदक पर
ु
क ना करैवाला ज्ञानक खोज मे तलवारक धार पर चलैवाला मनीिष राहल
ु
सािह राजनीित आ इितहासक पि तो ीकार करैत छिथ िक राहलजी
सम ृ आ िवकिसत कऽ
ब ु क िवचारकेँ सबसे बेसी
ु
रा स ँ आधिनक
पक
सा ंकृ ायन छिथ। दषनर्
पि त छलाह।
ु
राहलजी
ओं महापि त रहिथ जे अतीतक मािणक आ सा ंिगक अ भव सऽ लाभ लऽ
ु
नवज्ञानक मा
श
कएलिथ। राहलजी
कमठर् कमयोगी
र्
जेका ँ अपन अनमोल समयक उपयोग कए
ु
ु
वा िवक
प केँ देखलिख
आ बझलिख
। ओकर स ंगे-स ंग अपन देषक लोको केँ बझबैक
यास
ु
ु चाप बैसनाए अस ंभव रहै । ओ अपन एक-एक क्षणक उपयोग साथक
कलिथ
। हनका
लए चप
र् काय र्
मे करैत रहै थ। चरैवेित -चरैवेितक िस ा क अक्षरशः पालन करैत रहै थ। िव ेषण आ स ं ष
े ण
ु
ु
कलामे महारत हािसल रहै हनका।
ा आ अ ा व ु केँ पिरखैत रहै थ राहलजी।
ु
राहलजीक
ि
क िनमाणर् कोना भेल एकर अ यन जेतै मजेदार अिछ ओतबैक
रेणादायक। आजमगढ िजलाक मझोला िकसान पिरवारमे िहनकर ज भेल रहै । नाम छलै
केदारनाथ पा ंडे। पा ँच सालक उमरमे िहनकर िशक्षा आर
भेल मुदा पिरवारक वातावरण एहन
रहै िक पढ़◌ाय-िलखाय ठीक -ठाक चिल सकै। इएह बीच मे िहनकर िववाह भऽ गेल पिरवारक
वातावरण सऽ केदारनाथक मन उचैट गेल, तखन घरस ँ भागैक िसलिसला शु
भऽ गेल- कलकता
बनारस म ास अयो ा लाहौरक च र लगाबै ं लगलाह। यही च र म ँ ओ एक मठक मह क िश
हण
ु
कएलिथन जेकर बाद हनकर
नाम रामोदार साध ु भऽ गेल। बाद मे मठक मह ी िमलैत रहै
मुदा
अपना आप केँ बा ंिह केँ
रािख सकलाह। तखनक म दषाक वणनर् आग ू आिब केँ कए
छिथभावी मह
बनाबै लऽ मह
ल णदास हमरा बनारस स ँ लाबलैथ। यिद हम मठ मे ठहै र
केँ
रिह सकलौ ं आ मह
बिन सकल ँ ू तऽ एिह मे हमर अपन घमु डी आ ज्ञानक ती िजज्ञासा
रहै ।
भागैक दौर मे कतौ िकछ समय
िक कऽ केदारनाथ स ं त
ृ
अ ं जी िह ी अरबी सभक अ यन
कैलिथ । लाहौर मे अ यन करैत आयसमाजक
र्
अ यायी भऽ गेलाह। बौ
सािह क स ंग बड लगाव
ु
भऽ गेल रहै
। घमु ड व ृित तऽ रहबै करै आब बौ धमक
र्
ित झकाव
होएबाक कार ँ लुंिबनी
ँ
सारनाथ राजग ृह नाल ा आिद बौ
तीथ र् ानक या ा कएलै । इहा बीच गा ँधीक आधीमे
अथात्र्
ाधीनता
आ ोल मे कुिद गलैथ। छह मासक जेलमे सजा भऽ गेल। स ं ासी रामोदार उफ र् केदारनाथ उफ र्
ु
ु
ू पाबै लऽ दौड़◌ेत रहै थ। ओ
राहलजी
केँ आजादी खातीर लडैत देिख लोक हनकर
चरण धिल
ु
राजनीित मे ाग आ समपणभावक
र्
िवशेष मह दैत रहै थ। हनकर
कहब रहै
ू
ू
ु
राजनीितमे खनक
वएह ान अिछ जे पजा
पाठ मे च नक। राजनीितमे रहै त हनकर
ू
ू
ू
िव ा राग कम
भेल। जेलया ा आ ज्ञानया ा दनक
म
टटल। ज्ञानक खोज मे कतै बेर
135
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं
ील ंका ित त इगलै
स ईरान म ंगोिलया चीन आिद देशक या ा कएलै । ित त जाए केँ एहेनं भऽ गेल ।
एहेन दलु भ
र्
क खोज कैलिख
जेकर अभावमे भारतक इितहासक अिभ अग
ज्ञानक साधना जारी रहल। िकछ िदन बौ क चीवर धारण कए ओकरो सऽ महँू मोिड ललैन। 1937
मे सोिवयत स ंघ गेलैथ ओतिह एक
सी मिहला स ंग िववाह कएलि
िजनका सऽ पु ईगोर क ज
ु सा ंकृ ायन िस
भेल।अखन धिर राहल
भारतीय िव ानक
पमे सभठाम िति त भऽ गेल रहै थ।
ु
हनकर
आ लेख केँ
धमू मचल रहै । आम लोकक मुि
लऽ राजनीितक हिथयार केँ ओ सही
तरीका स ँऽ उपयोग मे लाबै पर जोर देिय रहै थ। अपन अ भवक आधार पर
ाि कारी द ृि कोणक
ु
समथक
र् भऽ गेल रहै थ राहलजी।
1938-39 केँ जमाना रहै । देशपर अ ं जक शासन रहै । िकछैक
ु
रा मे का ँ सक शासन रहै । राहलजीक
इ ा रहै िक िकसानकेँ जमी ारक आ भू- ािमक अ ाय स ँ
छूटकारा िमलवाक चाही-भला इहो को
िनक बात भेल िक िकसान जमीन जोते ब ु फसल उपजाबै
ु
आ िमले भू ामी केँ राहलजी
एहेन अ ायक घोर िवरोधी छलाह। गरीब िकसानक पक्ष मे िबहारक
ु
ु
अमवारी गाम मे राहलजी
स ा हीक दलक स ंग उतैर गलाह स ा ह करवाक लेल । हनका
सब केँ
ु
कुचलेक लेल जमी ारक हाथी गु ा पुिलस िसपाही सब रहै । राहलजी
हाथमे हिसया लए फसल काटै
ु
ु
लागलाह। हनकर
ई
प देिख जमी ारक इशारापर एगो महावत राहलजीक
माथ पर जोरदार लाठीक
ू
ु
हार कएलक माथ फाइट गेल। खनक
धारा बिह गेल। तैइयो राहलजीकँ
अ स ा ही स ंग
ु
िगरफ्तार कए लेल गेल। तखन िबहारमे का ं सक शासन रहै । राहलजी
केँ हथकडी पिहराए पुिलस
ु
जेल लइ गेल। लोकमे एिह धटनास ँ
भ आ रोष रहै । मुदा राहलजीक
मन मे ितषोधक
भावना
रहै । िस ा
पर चलैवाला िनभीर्क यो ा जेना शोषणमु
समाजक ापना खाितर स ंघषरत
र्
ु
ु
रहै थ राहलजी।
मुदा अमवारी मे जे हनका
माथ पर चोट लागल रहै ओ बड गहीर रहै जेकर
ु
पिरणाम भेल िक 1961 मे माथक पक्षाघात स ँ ओ पीिडत भऽ गेलाहा इएह हनकर
मौतक कार
बनल।
ु
दोसर िव यु क जमानामे राहलजी
अमवारी स ा ह वाला केसमे जेलक सजा कािट रहल रहै थ। ओिह
समय मे महा ा गा ँधी,
ह , आ रवी नाथ ठाकुर सनक लोक िहटलरक नाजीवाद आ जापानक
ु
स ै वादक िखलाफ लोक केँ जाग क करै मे लागल रहै थ। राहलजी
सेहो एकरा खाितर लोकभाषा मे
नाटक िलखलैि
जेकर म ंचन किर आमलोक केँ फासीवाद िवरोधी आ ोलन मे भाग लेबाक खाितर
िरत कैलिथ ।
ु
1945 मे राहलजी
लेिनन ाद िव िव ालयक
ा िवभाग मे ा ापकक पदकेँ स ारबाक लेल सेािवयत
स ंघ गेलैथ। ओतए अपन अधां गनी
र्
आ पु स ँ िमलके बड स भेलाह। अखन दोसर िव यु
खतमे
ू ल-फूटल मोटर आ हवाई जहाजक ढ़◌ेर लागल रहै । आधास ँ
भेल रहै ।
ािलन ादमे सहस़ ् टट
अिधक मकान धराशायी भऽ गेल रहै । मुदा लोकके जोश देखैत ब त रहै । सब एकजटु भऽ
िनमाणर् कायमे
र् लागल रहै थ। आमजनक भागीदारी देिख सोिवयत जन सोिवयतक भूिम द ू क ित
ु
ु
हनकर
अ राग आ स ान दगुना
भऽ गेल। एकर चचा र् करैत ओ िलखैत छिथ ं
इितहास मा त अिछ आ म त रहतै िक मानवताक गितमे सबसे बडका बाधक शि
िहटलरक
फािसज्मक
पमे उपजल रहै जेकर नाश करैक
य सोिवयत
स केँ जाइत अिछ।
ु
एिहबेर राहलजी
पचीस मास तक सोिवयत स ंघ मे रहला। ओतए अ ापनक स ंगे म
इितहासक ढ़◌ेर साम ी आ दलु भ
र्
जमा कएलै ा। अनके भाषा िसखलैिख
एिषयाक
आ अ क िकताबक
िह ी अ वादो कएलै । सािवयत स ंघ स ँ िवदा काल पु आ अध र्ंगनी दनू ू मे स ँ िकयो ं छोड़◌े लएँ
तैयार
रहिथ
ओ दनू ू फूिट-फूिट कऽ का त रहिथ
मुदा जीवन कतर्
को
माया- मोह केँ
ु
मा
लए तैयार
रहै त अिछ। िवत दय केँ कठोर कए राहलजी िवदा भेलाह। एिह या ाक
ु
बाद राहलजी
िह ीक चार - सार,
क स ादन, लेखन मे अपन जीवन समिपत
र् कऽ देलिथ ।
ु
राहलजी सामािजक कुरीित, वण र् - व ा, जातीय उ ाद, साम् दाियक वैम क सबिदन िवरोध
136
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
् रहै िक आिथक
कैलिथि । हनकर
समझ◌ा
र् िवषमता सब कुरीितक जैड िथक। भाषाक स
ों मे
ु
हनकर
िवचार साफ रहै िक अ ं जी के ◌ँ भारतक लोक पर
थोपबाक चािह। एकर िवक
खोजे
मे जतैक अबेर भऽ रहल अिछ राष् ीय एकता ओतेक खतरा मे पिड रहल अिछ।
२.
अचना
र् कुमर
१.आस, २.िव ान-१ (दादीस ँ सुनल कथाक पुनले र्खन)
२.१.
आस- अचना
र् कुमर
आइ हम एकटा एहेन
ु युगमे बहत
ु कम भेटैए।
ि क कथा िलिख रहल छी जे आजक
मु ा मा
काश। ओ एकटा एहेन घरक बेटा रहिथन जकर बाप बैकमे
ं
रिज ार रहिन, घरमे
ु
जमीन-ज ा खबू रहिन, पाइक कमी
रहिन। मुदा जखन ओ छोटे रहिथ तख
हनकर
एकटा
ु जगह हनकर
ु
बिहनकेँ सा ँप कािट लेलकिन। बहत
पापा देखेलिखन मुदा िकछु
भऽ सकलै, आर ओ
मिर गेलिखन।
मु ा अपना िमलाकऽ चािर भैयारी आर तीन बिहन रहिथन, एक आर बिहन रहिथन जे मिर गेलिखन।
ु
ू पिरवार शोकमे डिू म गेल।
बेटीक शोकमे हनकर
िपताक िदमागी हालत खराब भऽ गेलिन आर परा
पापाक
करीयो छुिट गेल। घरमे जेना-तेना खेती ग ृह ीस ँ गुजर जाए लागल। ई सभ एखन ब े
रहिथन। िदयाद-बाद सभ चाहे सभ लुिट िलऐ लेिकन िहनकर माताजी कह ु
सभ िकछु बचा कऽ
राखलिथन। फेर ई सभ कनी पैघ भेलाह। जखन मु ा इ टर फाइनल पाटमे
र् गेलिखन तखन गामस ँ
ु
भािग गेलिखन आर िद ी आिब गेलिखन। मुदा एतौ हनका
कम मेहनित
करए पडल। पिह
मालीक काजस ँ ई शु आत केलिखन। घरपर िकछु पता
रहिन जे ई क ऽ छिथन। आ े आ े ई
पाइ एक ा कऽ अपन उप न आ दादीक ा
केलिखन, ओकर बाद फेर कमेलिखन तँ बडकी बिहनक
िबयाह केलिखन। ओकर बाद ओ अपन िबयाह केलिखन। पिरवारक सभकेँ सभ िकछु देलिखन मुदा
ु
ू बिहनक िबयाह करबाक रहै ।
अपनाले एकटा कपड़◌ा तक
िकनलिखन, िकएक तँ फेर हनका
दटा
ु क
बहत
सिहत, एते तक िक अपन प ीक मध ु ावनी ओ अप
लग िद ीमे करेलिखन तािह िकछु
ु
पैसा बिच जाएत। फेर अपन दोसर बिहनक िबयाह केलिखन। हनकर
िबयाहक बाद २ बखक
र् बाद
माताजी कहलिखन घर ब बा लेल। द ू म ढलै ा केलिखन, तकर बाद सोचैत रहिथन तेसर बिहनक
िबयाह करैले तँ बीचबला बह इ खतम भऽ गेलिखन। ओिह ठमा जा कऽ बिहनक सभटा
व ा कऽ
कऽ एलिखन। ता कमाइत रहिथन ५ हजार टका। आइक जमानामे की होइ छै पा ँच हजार
ु
टकास ँ। कतेक दःख
सिह कऽ ओ पैसा राखैत रहिथन। मुदा अपनाले किहयो
सोचलिखन।
ु
ु लिखन। आर माइ-पापाक सभ
किनया ँ हनका
कतबो तानी देिथन िक ु ओ अपन फजर्स ँ किहयो
चक
ू
सपना पणू र् केलिखन। छोटकी बिहनक िबयाह ऐ साल खबू धमधामस
ँ केलिखन। तेँ ई रस ँ कहै छी,
भगवान सभकेँ एहे
बेटा देिथन, जे सभकेँ पार उतािर दै। बिहन सभकेँ ए े
म करै छिथन
जे पुछू
।
137
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
बिहन सभक मुँ हस ँ िकछु खस ैक काज तुर े आिब जाइ छै। मुदा प ी िकछु मा ँिग लैअए तँ बड
भारी।
ु
आइ हम हनकर
प ी ई सभ िलिख रहल छी। िक ु तैयो हमरास ँ ओ ब
ु
ु
ु छी।
हनका
िकछु
रहै मुदा
म तँ छै। हम ओहीमे हनकास
ँ खश
म करै छिथन। हमराले
ु
ु
ु
ू
हनकर
मे हमरा चाहबो करे। हम जा
छी हनकर
हनकर
मजबरी।
एक इ ान क े तक कऽ
ु
ु
सकैए। आर हम
बझबै
तँ के बझतै।
अि ममे जखन छोटकी बिहनक िबयाह दान कऽ लेलिखन तखन जखन बिरयाती िबदा भऽ गेल ओिह
ँ
ु भऽ गेलिखन आ आिखस
राितमे ओ खबू खश
ँ
र खसऽ लगलिन। खबू कानलिखन आ बिहनस ँ कहिथन,
ु
ु
हनकर
नाम लऽ कऽ जे आइ हमर सभ टे ंशन दरू भऽ गेल। आब हम ..अपना गाडी..लऽ..आर खबो
कानिथन आर कहिथन। बिहनकेँ पकिड कऽ कानिथन आ कहिथन, हम तोरा जाइले
देबौ। तँ ू
अही ठामे रहबी। कतौ
जेमी। तोरा हम कतौ जाइले
देबै। ओिह राित घरमे जतेक
ु
लोक रहिथन सभ कानए लागल। कतबो हम सभ बझाबी
मुदा ओ खबू का त रहिथन, अपन कतर्
ू होइपर। लोक खिशयोमे
ु
परा
का ए, से हम ओही राित देखलौ।
ं
ु
ू
तकर बाद हम सभ िद ी आिब गेलौ।
ं
िक ु आइयो हनका
गाडी लैके इ ा परा
भेल।
ब ा सभ, शाइत पिरवारक सोचैबलाकेँ अपन इ ाक अनादर करए पडै छै।
२.२.
अचना
र् कुमर- िव ान-१ (दादीस ँ सुनल कथाक पुनले र्खन)
ु
ु
एक िव ान प ंिडत रहिथन। मुदा ओ ब गरीब रहिथन। तािह कारण हनका
हनकर
पस् ी सिदखन
कहिथन- कतह ु जाउ कमाइले। िकछु क । ब ा सभ भूखे मरैए। कृपा कऽ कऽ िकछु तँ क
ु
द ू व क भोजन नसीब हअए।
तँ ओ प ीकेँ कहिथन जे हम एतेक पैघ िव ान छी जे िव ता लेल पैसा िकयो दैये
तैयो अहा ँ कहै छी तँ हम जाइ छी।
जे
सकत।
आर ओ चािर पा ँती िलिख लेलिखन आर बजार जाए ओिह चािर पा ँितक चािर लाख दाम लगा देलिखन।
ओिह चािर पा ँितक चािर लाख टका दाम देिख सभ अचि त भऽ जाइत रहिथन। आर िकयो
िकनिथन। एकटा
ापारी रहिथन। ओ सोचलिखन जे िकछु तँ बात एिह चािर पा ँतीमे ज र हएत जे
एकर चािर लाख टाका दाम छै, से
ई हम लऽ लै छी। आ ओ चािर लाख टाका दऽ कऽ ओ ि
पा ँती कीिन लेलिखन, आर अपन तलवारपर खोदबा लेलिखन। ओ श सभ रहै ।
आसनम
भु चालन।
पथ क ा िवजर्यते।
पिहल राित िनवारी।
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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पिहल
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ोध िनवारी।
ु
फेर ओ अपना
ापार करैले िनकललिखन। हनका
लग ढेिरक पैसा-कौडी सभ रहिन। एक जगह
ु
राित हअए
लागल तँ सोचलिखन, अपना दो
ओिहठाम रिह जाएब। दो
लग गेलिखन तँ बात-बातमे
दो केँ पता लािग गेल जे िहनका िजमा ढेिरक पैसा छिन। भोर भेल, िहनकर दो
अपना प ीकेँ
ं
ु
बतेलिखन जे दो
लग ढेिरक पैसा छै। फेर दनु ू िमिलकऽ हनका
मारैके सोचलिखन आर अगनामे
ु लेलिखन, आर िबना घोरल खाट, अइपर िबछा, नीकस ँ ओछैन कऽ देलिखन, आर
बडका तरहरा खिन
ं मे भोजन लागल ऐ।
अपना दो केँ बजेलिखन जे चल ू खाइले। आइ अग
ं
ु
ई गेलिखन खाइले अगना,
जिहना खिटयापर बैसऽ लागलिखन तिहना हनकर
नजिर तलवारपर पडलिन।
ओइमे िलखल रहै आसनम
भु चालन।
ं
मा
कतौ बैसी तँ िबछौन कनी झािड ली। ओ िबछौनकेँ जिहना झाडलिखन तिहना अदर
देिख दंग
ू इ जाम भेल रहै । जे आइ ई श
रिह गेलिखन, आर सोचलिखन हमर मौक्षक परा
पढ
ु गेल रिहतौ।
रिहतहँ ु तँ आइ हम ऊपर पहँ िच
ं
से
तँ प ंिडतकेँ एक लाख आर हम देब। आर
ओ ऽ स ँ ई किह कऽ भािग गेलिखन जे हम पैखानास ँ आबै छी।
ू मो
ब ा सभ आ दोसर कथा सुन,ू हम थािक गेल छी आ दोसर कथा परा
ू
तखन देख...
पिड रहल अिछ,
ु सु र नारी जाइत रहए। आर िकछु बदमाश हनका
ु
ओतएस ँ जाइक बाद र ामे एकटा बहत
तं ग
ु
करैत रहए। हनका
देिख कऽ
ापारीक मोन मचिल गेल आर ओ ओिह ठाम गेलिखन, तँ राजाक
िसपाही आिब गेल आर सभकेँ पकिड कऽ लऽ गेल, िहनकोस ँ..िहनकोस ँ..
िलअ िबसिर गेलहँ ु िख
ा। फेर जखन मोन पडत तख ...
३.
डा. शेफािलका
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वमा र्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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िृ त-शेष
आय बटव ृक्ष क मधरु छािहर कत'
ं
द जता क ल ंका मे अगदक
अटल पैर कत' ?
काल प ंथ पर चिल गेलाह जे
ु
िस ह हनक
सरसावैत अिछ
मोन
ानक
बाट वैय्ह
िमत िदशा के
देखाबैत छैथ
िचर म ंगलमय छल ल
महान
जीवन एक ,पग एक समान !
ि
अपन जीवन कय क्षार
करैत रहलाह
ृि
िमटबा
आलोक
सार
क इ अिमट िवधान
मे
ु
सुनी हनक
सय वरदान ...
ु ार
हं क
नव यौवन बल
पावैत छल
माथ पर बा ँधी कफ़न
कम र्
मे आिब अ ाचार
मेटाबैत छल
ु
हनक
सहस देिख देिख
त ण िस ंह लजावैत छल !
140
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
आय
मानवता क धवल आकास कत'
मानव एक
मानवता
बतवै वाला
अय िव
धाम
गुण ,
कत'
!
अहीं बताब ु
भारतवष र्
सन
ब ा लोकिन
गाम
ारा
कत'
रणीय
???
ोक
ू दयक
१. ातः काल
मुहू र् (सयो
र्
एक घ ंटा पिह ) सव र् थम अपन दनु ू हाथ देखबाक चाही, आ’
ोक बजबाक चाही।
करा
वसते ल
ई
ीः करम े सर ती।
ू ि तो
करमले
ा
भाते करदशनम
र् ्॥
ू
करक आगा ँ ल ी बस ैत छिथ, करक म मे सर ती, करक मलमे
करक दशनर् करबाक थीक।
ा ि त छिथ। भोरमे तािह
ारे
२.स ं ा काल दीप लेसबाक कालू ि तो
दीपमले
दीपा
श रः
ा दीपम े जनादनः।
र्
ोक् ः स
ा
ोितनमोऽ
र्
ुते॥
दीपक मलू भागमे
ा, दीपक म भागमे जनादनर् (िव ु) आऽ दीपक अ
हे स ं ा ोित! अहा ँकेँ नम ार।
भागमे श र ि त छिथ।
३.सुतबाक कालराम ं
शय
ं हनमू ं वैनतेय ं व ृकोदरम ्।
यः
रेि
ु
ं दः
न ित॥
ू ्, ग ड आऽ भीमक
जे सभ िदन सुतबास ँ पिह
राम, कुमार ामी, हनमान
ु
दः
न
भऽ जाइत छि ।
४. नहेबाक समय-
141
ु
रण करैत छिथ, हनकर
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ग े च यमु
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
चैव गोदाविर सर ित।
नमदे
र् िस ु कावेिर जलेऽि न ् सि िध ं कु ॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सर ती, नमदा,
र्
िस ु आऽ कावेरी
५.उ र ं य मु
िहमा े
धार। एिह जलमे अपन साि
िदअ।
ैव दिक्षणम ्।
वष र्ं तत् भारतं नाम भारती य
स ितः॥
समु क उ रमे आऽ िहमालयक दिक्षणमे भारत अिछ आऽ ओतुका स ित भारती कहबैत छिथ।
६.अह ा
प कं ना
ौपदी सीता तारा म ोदरी तथा।
रेि
ं महापातकनाशकम ्॥
जे सभ िदन अह ा, ौपदी, सीता, तारा आऽ म दोदरी, एिह पा ँच सा ी-स् ीक
ु
छिथ, हनकर
सभ पाप न
भऽ जाइत छि ।
७.अ
ू ं
ामा बिल ासो
र्
हनमा
रण करैत
िवभीषणः।
कृपः परशुराम
स ैते िचर ीिवनः॥
अ
ू ्, िवभीषण, कृपाचाय र् आऽ परशुराम- ई सात टा िचर ीवी कहबैत छिथ।
ास, हनमान
ामा, बिल,
८.साते भवतु सु ीता देवी िशखर वािसनी
उ
न तपसा ल ो यया पशुपितः पितः।
िसि ः सा े सताम ु
सादा
ू टेः
धजर्
जा वीफेनलेखेव य ूिध शिशनः कला॥
९. बालोऽहं जगदान
अप ू
न मे बाला सर ती।
र् प ंचमे वषे र् वणयािम
र्
जगत् यम ् ॥
ू क्षत
१०. दवा
र्
म ं (शु
आ
ि
आ
॑न ्
ु र्द अ ाय २२, म ं
यजवे
२२)
जापितर ्ॠिषः। िल ंभोक् ा देवताः।
ा ॒
॑ वच॒सर् ी जा॑यता॒मा रा॒ष्
राड ु
ृित
िन॑कामे नः प॒जर् ों वषतु॒
र् फल॑व ो न॒ऽओष॑धयः प
ू ःर् स ु म
ाथाःर् िस यः स ु पणा
यज॑मान
ा ं योगेक्ष॒मो नः॑ क
वी॒रो जा॒यता ं िनका॒मे-
ताम ्॥२२॥
रथाः। श ूणा ं बिु नाशोऽ ु िम ाणामुदय व।
ॐ दीघायुभर्
र् व। ॐ सौभा वती भव।
142
रः॥
रा॑ज॒ ः शुरे॑ऽइष ो॒ऽित ा॒धी म॑हार॒थो जा॑यता ं॒ दोग् ीं
धे॒ वोढा॑
र् न॒ड्वाना॒शुः सि ः॒ पुर॑ि ॒योवा॑
र् िज॒ ू र॑थे॒ ाः स॒भेयो॒ युवा
म
ः। षड्जः
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
हे भगवान ्। अपन देशमे सुयो
आ’
सवज्ञ
र् िव ाथीर् उ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
होिथ, आ’
शु के
ु ँ नाश कएिनहार स ैिनक
उ
होिथ। अपन देशक गाय खबू दधू दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होिथ आ’ घोड़◌ा
िरत
पे ँ दौगय बला होए। स् ीगण नगरक
करबामे सक्षम होिथ आ’ युवक सभामे ओजपणू र्
भाषण देबयबला आ’
देबामे सक्षम होिथ। अपन देशमे जखन आव क होय वषा र् होए आ’
ू सवदा
औषिधक-बटी
र् पिरप होइत रहए। एव ं मे सभ तरहेँ हमरा सभक क ाण होए। श क
ु
बिु क नाश होए आ’ िम क उदय होए॥
म
कें कोन व ुक इ ा करबाक चाही तकर वणनर् एिह म ं मे कएल गेल अिछ।
एिहमे वाचकलु ोपमालड़◌्कार अिछ।
अ य॑न ् - िव ा आिद गुणस ँ पिरपणू र्
रा॒ष्
- देशमे
॑ वच॒सर् ी-
िव ाक तेजस ँ युक्
आ जा॑यतां॒ उ
होए
रा॑ज॒ ः-राजा
शुरे॑ऽ– िबना डर बला
इष ो॒- बाण चलेबामे िनपुण
ऽित ा॒धी-श के
ु ँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग् ीं -कामना(दधू पणू र् करए बाली)
धे॒ वोढा॑
र् न॒ड्वाना॒शुः धे॒ -गौ वा वाणी वोढा॑
र् न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः- िरत
सि ः॒-घोड़◌ा
पुर॑ि ॒योवा॑
र् - पुर॑ि ॒िज॒ ू-श के
ु ँ जीतए बला
र॑थे॒ ाः-रथ पर ि र
स॒भेयो॒-उ म सभामे
युवा -युवा जेहन
143
वहारकेँ धारण करए बाली योवा॑
र् -स् ी
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
यज॑मान -राजाक रा
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
मे
वी॒रो-श के
ु ँ परािजत करएबला
िनका॒मे-िन॑कामे-िन
ययुक्
कायमे
र्
नः-हमर सभक
प॒जर् ों-मेघ
वषतु॒
र् -वषा र् होए
फल॑व ो-उ म फल बला
ओष॑धयः-औषिधः
प
ा ं- पाकए
योगेक्ष॒मो-अल
ल
करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
क
ताम ्-समथ र् होए
ि िफथक अ वाद- हे
ण, हमर रा मे
ा ण नीक धािमक
र् िव ा बला, राज -वीर,तीर ंदाज, दधू दए
बाली गाय, दौगय बला ज ,ु उ मी नारी होिथ। पाजर् आव कता पडला पर वषा र् देिथ, फल देय
बला गाछ पाकए, हम सभ स ंपि अिजर्त/स ंरिक्षत करी।
I nput : (को कमे देवनागरी, िमिथलाक्षर िकं वा फो िटक-रोमनमे टाइप क । I nput i n
Devanagar i , Mi t hi l akshar a or Phonet i c -Roman.)
Out put : (पिरणाम देवनागरी, िमिथलाक्षर आ फो िटक-रोमन/ रोमनमे। Resul t i n
Devanagar i , Mi t hi l akshar a and Phonet i c -Roman/ Roman.)
इिं श-मैिथली-कोष / मैिथली-इिं श-कोष ोजे
ारा ggaj endr [email protected] deha.com पर पठाऊ।
केँ आग ू बढ़◌ाऊ, अपन सुझाव आ योगदानई-मेल
ं
िवदेहक मैिथली-अ ं जी आ अ ं जी मैिथली कोष (इटर
टपर पिहल बेर सच-िड
र्
नरी) एम.एस.
एस. .ू एल. सवरर् आधािरत -Based on ms -sql ser ver Mai t hi l i -Engl i sh and
Engl i sh-Mai t hi l i Di ct i onar y .
मैिथलीमे भाषा स ादन पा
ू
नीचा ँक सचीमे
देल िवक
मेस ँ लैगुएज
ं
एडीटर
वडर् फाइलमे बोल्ड कएल
144
म
प:
ारा कोन
ु ल जएबाक चाही:
प चन
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
2. आ’/आऽ आ
3. क’ ले /कऽ ले /कए ले /कय ले /ल’/लऽ/लय/लए
4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. िलअ/िदअ िलय’,िदय’,िलअ’,िदय’/
7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला / करए बला
8. बला वला
9. आङ्ल आ ं
10.
ायः
ायह
ु
ु
11. दःख
दख
12. चिल गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलिख
देलिक , देलिखन
14. देखलि
देखलिन/ देखलै
15. छिथ / छलि
छिथन/ छलैन/ छलिन
16. चलैत/दैत चलित/दैित
17. एख
अख
18. बढ़ि
बढि
19. ओ’/ओऽ(सवनाम)
र्
ओ
20. ओ (स ंयोजक) ओ’/ओऽ
21. फा ँिग/फाि
ं
फाइग/फाइङ
22. जे जे’/जेऽ
23. ना- कुर ना- कर
24. केलि /कएलि /कयलि
25. तखन तँ / तखन तँ
26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. िनकलय/िनकलए लागल बहराय/ बहराए लागल िनकल’/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत’/ओत’/ जतए/ ओतए
29. की फूरल जे िक फूरल जे
30. जे जे’/जेऽ
31. कूिद/यािद(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यािद (मोन)
32. इहो/ ओहो
33. हँ सए/ हँ सय हँ सऽ
34.
आिक दस/
िकं वा दस/
वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/ सात छ/छः/सात
37. की की’/कीऽ (दीघीर्कारा मे ऽ विजर्त)
38. जबाब जवाब
145
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
39. करएताह/ करयताह करेताह
40. दलान िदिश दलान िदश/दलान िदस
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. िकछु आर/ िकछु और
43. जाइत छल जाित छल/जैत छल
ु
ु
44. पहँ िच/
भेिट जाइत छल पहँ च/भेट
जाइत छल
45. जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
46. लय/लए क’/कऽ/लए कए/ लऽ कऽ/ लऽ कए
47. ल’/लऽ कय/ कए
48. एखन/अख
अखन/एख
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेका ँ जेँका ँ/ जका ँ
53. तिहना तेिहना
54. एकर अकर
55. बिहनउ बह
इ
56. बिहन बिहिन
57. बिहन-बिह
इ बिहन-बहनउ
58. निह/
59. करबा / करबाय/ करबाए
60. तँ / त ऽ तय/तए
61. भाय भै/भाए
62. भा ँय
63. यावत जावत
64. माय मै / माए
65. देि /दएि / दयि
दि / दैि
66. द’/ दऽ/ दए
67. ओ (स ंयोजक) ओऽ (सवनाम)
र्
68. तका कए तकाय तकाए
69. पैरे (on f oot ) पएरे
ु
70. ताहमे
ताहूमे
71. पु ीक
72. बजा कय/ कए
73. बननाय/बननाइ
146
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
74. कोला
75. िद का िदनका
76. ततिहस ँ
77. गरबओलि
गरबेलि
78. बालु बाल ू
79. चे
िच (अशु )
80. जे जे’
81. से/ के से’/के’
ु
82. एखनका
अख का
83. भुिमहार भूिमहार
ू
84. सुगर सगर
85. झठहाक झटहाक
86. छूिब
87. करइयो/ओ करैयो/किरऔ-करइयौ
88. पुबािर पुबाइ
89. झगड़◌ा-झा ँटी झगड़◌ा-झा ँिट
90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
91. खेलएबाक
92. खेलेबाक
93. लगा
94. होए- हो
ु
ू
95. बझल
बझल
ू
96. बझल
(स ंबोधन अथमे)
र्
97. यैह यएह / इएह
98. ताितल
99. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ
100. िन - िन
101. िब
िबन
102. जाए जाइ
103. जाइ (i n di f f er ent
104. छत पर आिब जाइ
105.
106. खेलाए (pl ay ) – खेलाइ
107. िशकाइत- िशकायत
108. ढप- ढ़प
109. पढ़- पढ
110. किनए/ किनये किन
111. राकस- राकश
147
sense)-l ast wor d of sent ence
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
112. होए/ होय होइ
113. अउरदा- औरदा
ु
114. बझेलि
(di f f er ent
ु
ु
115. बझएलि
/ बझयलि
meani ng- got under st and)
(under st ood hi msel f )
116. चिल- चल
117. खधाइ- खधाय
118. मोन पाड़लिख
मोन पारलिख
119. कैक- कएक- कइएक
120. लग ल’ग
121. जरेनाइ
122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
123. होइत
124. गरबेलि / गरबओलि
125. िचखैत- (t o t est )िचखइत
126. करइयो (wi l l i ng t o do) करैयो
127. जेकरा- जकरा
128. तकरा- तेकरा
129. िबदेसर
ा मे/ िबदेसरे
ानमे
130. करबयलहँ /ु करबएलहँ /ु करबेलहँ ु
131. हािरक (उ ारण हाइरक)
132. ओजन वजन
133. आधे भाग/ आध-भागे
134. िपचा / िपचाय/िपचाए
135. नञ/
136. ब ा नञ ( ) िपचा जाय
137. तखन
(नञ) कहै त अिछ।
138. कतेक गोटे/ कताक गोटे
139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
140. लग ल’ग
141. खेलाइ (f or pl ayi ng)
142. छिथ
छिथन
143. होइत होइ
144.
ो िकयो / केओ
145. केश (hai r )
146. केस (cour t -case)
147. बननाइ/ बननाय/ बननाए
148. जरेनाइ
149. कुरसी कुसीर्
148
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
150. चरचा चचा र्
151. कम र् करम
ु
ु
ु
152. डबाबए/
डमाबय/
डमाबए
ु
ु
153. एखनका/
अखनका
154. लय (वा
क अितम श )- लऽ
155. कएलक केलक
156. गरमी गमीर्
157. बरदी वदीर्
158. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
159. एनाइ-गेनाइ
160. तेना
घेरलि
161. निञ
162. डरो ड’रो
ु कहीं
163. कतह-
164. उमिरगर- उमरगर
165. भिरगर
166. धोल/धोअल धोएल
167. गप/ग
168. के के’
169. दरब
ा/ दरबजा
170. ठाम
171. धिर तक
ू लौिट
172. घिर
173. थोरबेक
174. ब
175. तो ँ/ तू◌ँ
176. तो ँिह( प मे
ा )
177. तो ँही / तो ँिह
178. करबाइए करबाइये
179. एकेटा
180. किरतिथ करतिथ
ु पहँ च
ु
181. पहँ िच
182. राखलि
183. लगलि
रखलि
लागलि
184. सुिन (उ ारण सुइन)
185. अिछ (उ ारण अइछ)
186. एलिथ गेलिथ
149
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
187. िबतओ
िबते
188. करबओलि / करेलिख
189. करएलि
190. आिक िक
ु पहँ च
ु
191. पहँ िच
192. जराय/ जराए जरा (आिग लगा)
193. से से’
194. हा ँ मे हा ँ (हा ँमे हा ँ िवभिक् मे हटा कए)
195. फेल फैल
196. फइल(spaci ous ) फैल
197. होयति / होएति
हेति
198. हाथ मिटआयब/ हाथ मिटयाबय/हाथ मिटआएब
199. फेका फें का
200. देखाए देखा
201. देखाबए
202. स िर स र
203. साहेब साहब
204.गेलै / गेलि
205.हेबाक/ होएबाक
206.केलो/ कएलहँ ु
207. िकछु न िकछु/ िकछु
िकछु
ु
ु
208.घमेलह
ँ /ु घमओलह
ँु
209. एलाक/ अएलाक
210. अः/ अह
211.लय/ लए (अथ-पिरव
र्
र्न)
212.कनीक/ क क
213.सबहक/ सभक
214.िमलाऽ/ िमला
215.कऽ/ क
216.जाऽ/ जा
217.आऽ/ आ
218.भऽ/भ’ (’
फॉ टक कमीक
ोतक)
219.िनअम/ िनयम
220.हे
अ
े र/ हे
ेयर
221.पिहल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़
222.तिहं /तिहँ / तिञ/ तै ं
223.किहं / कहीं
150
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
224.तँ इ/ तइ ँ
225.नँइ/ नइ/ँ
निञ/ निह
226.है / हए
227.छिञ/ छै/ छैक/छइ
228.द ृि एँ/ द ृि येँ
229.आ (come)/ आऽ(conj unct i on)
230. आ (conj unct i on)/ आऽ(come)
231.कु
/ को
२३२.गेलै -गेलि
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौ-ँ कएलौ-ँ कएलहँ ु
२३५.िकछु न िकछ- िकछु
िकछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)-आ (conj unct i on-and)/आ
२३८. हएत-है त
ु
ु घमएलह
ु
२३९.घमेलह
ँँु
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होिन- होइन/होि
२४२.ओ-राम ओ
ामक बीच(conj unct i on), ओऽ कहलक (he sai d)/ओ
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है । की हइ
२४४.द ृि एँ/ द ृि येँ
२४५.शािमल/ सामेल
२४६.तै ँ / तँ ए/ तिञ/ तिहं
२४७.जौ/ँ
ोँ
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
151
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
२५०.किहं / कहीं
२५१.कु
/ को
२५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल
२५३.कु
/ को
२५४.अः/ अह
२५५.ज / जनञ
२५६.गेलि / गेलाह (अथ र् पिरवतर्न)
२५७.केलि / कएलि
२५८.लय/ लए (अथ र् पिरवतर्न)
२५९.कनीक/ क क
२६०.पठेलि / पठओलि
२६१.िनअम/ िनयम
२६२.हे
अ
े र/ हे
ेयर
२६३.पिहल अक्षर रह
ढ/ बीचमे रह
ढ
२६४.आकारा मे िबकारीक योग उिचत निह/ अपोस् ोफीक
ओकर बदला अव ह (िबकारी) क योग उिचत
२६५.केर/-क/ कऽ/ के
२६६.छैि - छि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१.खाएत/ खएत/ खैत
152
योग फा टक तकनीकी
न
ू ताक पिरचायक
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
२७२.िपअएबाक/ िपएबाक
२७३.शु / शु ह
२७४.शु हे/ शु ए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह
२७६.जािह/ जाइ/ जै
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जै/ जए
२८२.
कएल/
काएल
ु
ु
२८३. कठआएल/
कठअएल
२८४. तािह/ तै
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकै/ सकए/ सकय
२८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सेरा गेल)
ु एिहना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अथ र् कख
२८८.कहै त रही/देखैत रही/ कहै त छलहँ /ु कहै छलहँ ु
ु
ु
ु
ु
ु
काल पिरवितर्त)-आर बझै/
बझैत
(बझै/
बझैत
छी, मुदा बझैत-ब
झैत)/
सकैत/ सकै। करैत/
करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । िब / िबन। राितक/ रातुक
ु
२८९. दआरे/
ारे
२९०.भेिट/ भेट
ु (भोर खन/ भोर खना)
ु
२९१. खन/ खना
२९२.तक/ धिर
२९३.गऽ/गै (meani ng di f f er ent -जनबै गऽ)
153
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
२९४.सऽ/ स ँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त् ,(तीन अक्षरक मेल बदला पुन ि क एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आिदक बदला
आिद। महत् / मह / कता/र् क ा र् आिदमे
स ंयु क को
आव कता मैिथलीमे निह अिछ। व
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहै बला)
२९८.वाली/ (बदलएवाली)
२९९.वा ा/र् वाता र्
300. अ रािष्र् य/ अ राष्र् ीय
३०१. लेमए/ लेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागै/ लगै (भेटैत/ भेटै)
३०३.लागल/ लगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलक/ रखलक
३०६.आ (come)/ आ (and)
३०७. प
ाताप/ प
३०८. ऽ केर
ा ाप
वहार श क अ मे मा , यथास ंभव बीचमे निह।
३०९.कहै त/ कहै
३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meani ng di f f er ent )
३११.तागित/ ताकित
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोिन/ बोइिन
३१४.जािठ/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच
३१६.िगरै (meani ng di f f er ent - swal l ow)/ िगरए (खसए)
३१७.रािष् य/ राष् ीय
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िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
उ ारण िनदेर्श:
ू मे
द
न क उ ारणमे दा ँतमे जीह सटत- जेना बाज ू नाम , मुदा ण क उ ारणमे जीह मधा
र् सटत
ू सर् ँ आ
(निह सटैए तँ उ ारण दोष अिछ)- जेना बाज ू ग श। ताल
शमे जीह तालुस ँ , षमे मधा
ू
द
समे दा ँतस ँ सटत। िनशा ँ, सभ आ शोषण बािज कऽ देख।
मैिथलीमे ष केँ वैिदक स ं त
ृ
जेका ँ ख सेहो उ िरत कएल जाइत अिछ, जेना वषा,र् दोष। य अ को ानपर ज जेका ँ उ िरत
होइत अिछ आ ण ड जेका ँ (यथा स ंयोग आ ग श स ंजोग आ गड़◌ेस उ िरत होइत अिछ)।
मैिथलीमे व क उ ारण ब, श क उ ारण स आ य क उ ारण ज सेहो होइत अिछ।
ओिहना
इ बेशीकाल मैिथलीमे पिह
बाजल जाइत अिछ कारण देवनागरीमे आ िमिथलाक्षरमे
इ अक्षरक पिह
िलखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे िह ीमे एकर दोषपणू र् उ ारण
होइत अिछ (िलखल तँ पिह
जाइत अिछ मुदा बाजल बादमे जाइत अिछ), से िशक्षा प ितक
दोषक कारण हम सभ ओकर उ ारण दोषपणू र् ढं गस ँ कऽ रहल छी।
अिछ- अ इ छ
ऐछ
छिथ- छ इ थ
– छैथ
ु
पहँ िचप हँ ु इ च
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अ ं अः ऋ एिह सभ लेल मा ा सेहो अिछ, मुदा एिहमे ई ऐ ओ औ अ ं
अः ऋ केँ स ंयु ाक्षर
पमे गलत
पमे यु
आ उ िरत कएल जाइत अिछ। जेना ऋ केँ री
पमे उ िरत करब। आ देिखयौ- एिह लेल देिखऔ क योग अ िचत। मुदा देिखऐ लेल
देिखयै अ िचत। क् स ँ ह् धिर अ सि िलत भेलास ँ क स ँ ह ब त अिछ, मुदा उ ारण काल हल
यु
श क अ क उ ारणक व ृि बढल अिछ, मुदा हम जखन म जमे ज ् अ मे बजैत छी, तख
पुरनका लोककेँ बजैत सुनबि - म जऽ, वा वमे ओ अ यु
ज ् = ज बजै छिथ।
फेर ज्ञ अिछ ज ् आ ञ क स ंयु
मुदा गलत उ ारण होइत अिछ। ओिहना क्ष अिछ क् आ ष
क स ंयु
मुदा उ ारण होइत अिछ छ। फेर श ् आ र क स ंयु
अिछ
( जेना िमक) आ स ् आ
र क स ंयु
अिछ
(जेना िम )।
भेल त+र ।
उ ारणक ऑिडयो फाइल िवदेह आकाइव
र्
ht t p://wwwvi
. deha.co.i n/ पर उपल अिछ। फेर
केँ / स ँ / पर पवू र् अक्षरस ँ सटा कऽ िलख ू मुदा तँ / के/ कऽ हटा कऽ। एिहमे स ँ मे पिहल सटा कऽ
ं
िलख ू आ बादबला हटा कऽ। अकक
बाद टा िलख ू सटा कऽ मुदा अ ठाम टा िलख ू हटा कऽ– जेना
ू छठम सातम निह। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे
छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम िलखवाली यु
क ।
रहए- रहै मुदा सकैए (उ ारण सकै-ए)।
मुदा कख
काल रहए आ रहै मे अथ र् िभ ता सेहो, जेना से क ो जगहमे पािकर्ं ग करबाक अ ास
ु ढन
ु ना ा ई ाइवर कनाट ेसक पािकर्ं गमे काज करैत
रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढन
रहए।
छलै, छलए मे सेहो एिह तरहक भेल। छलए क उ ारण छल-ए सेहो।
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
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स ंयोग - (उ ारण स ंजोग )
केँ/ के / कऽ
केर- क (केर क
योग निह क
)
क (जेना रामक) – रामक आ स ंगे (उ ारण राम के /
राम कऽ सेहो)
स ँ- सऽ
च िब ु आ अ ार- अ ारमे कं ठ धिरक योग होइत अिछ मुदा च िब ुमे निह। च िब मे
ु
क क एकारक सेहो उ ारण होइत अिछ- जेना रामस ँ- (उ ारण राम सऽ) रामकेँ- (उ ारण राम
कऽ/ राम के सेहो)।
केँ जेना रामकेँ भेल िह ीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल िह ीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल िह ीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
स ँ भेल िह ीक से (राम से) राम से= रामस ँ
सऽ तऽ त केर एिह सभक
के दोसर अथे र्ँ
निञ, निह,
यु
योग अवा ंिछत।
भऽ सकैए- जेना के कहलक?
, नइ, नँइ, नइ ँ एिह सभक उ ारण-
त् क बदलामे
जेना मह पणू र् (महत् पणू र् निह) जतए अथ र् बदिल जाए ओतिह मा तीन अक्षरक
स ंयु ाक्षरक योग उिचत। स ित- उ ारण स
इ त (स ि निह- कारण सही उ ारण आसानीस ँ
स व निह)। मुदा सवो र् म (सवोतम
र्
निह)।
रािष् य (राष् ीय निह)
सकैए/ सकै (अथ र् पिरवतर्न)
पोछैले/
पोछैए/ पोछए/ (अथ र् पिरवतर्न)
पोछए/ पोछै
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ओ लोकिन ( हटा कऽ, ओ मे िबकारी निह)
ओइ/ ओिह
ओिहले/ ओिह लेल
जएबे/ँ बैसबे ँ
प ँचभइया ँ
देिखयौक (देिखऔक बिह- तिहना अ मे
जका ँ/ जेका ँ
तँ इ/ तै ँ
होएत/ हएत
निञ/ निह/ नँइ/ नइ ँ
सौसे
ँ
बड/ बडी (झोराओल)
गाए (गाइ निह)
रहलेँ/ पिहरतै ँ
हमहीं/ अहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धिर - तक
गप- बात
ू
बझब
- समझब
ु
बझलह
ँ ु - समझलहँ ु
हमरा आर - हम सभ
आिक- आ िक
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आ दीघक
र् मा ाक
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योग अ िचत)
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
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सकैछ/ करैछ (ग मे
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योगक आव कता निह)
ू वा बेशी िवभि
मे केँ स ँ पर (श स ँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (श स ँ हटा कऽ) मुदा दटा
रहलापर पिहल िवभि
टाकेँ सटाऊ।
स ंग
ू (मुदा कैक टा)
एकटा दटा
िबकारीक योग श क अ मे, बीचमे अनाव क
योग निह (जेना िदअ, आ )
पे ँ निह। आकारा
आ अ मे अ क बाद िबकारीक
अपोस् ोफीक योग िबकारीक बदलामे करब अ िचत आ मा फॉ टक तकनीकी ूनताक पिरचायक)ओना िबकारीक स ं ृत
प ऽ अव ह कहल जाइत अिछ आ वतर्नी आ उ ारण दनु ू ठाम एकर लोप रहै त
अिछ/ रिह सकैत अिछ (उ ारणमे लोप रिहते अिछ)। मुदा अपोस् ोफी सेहो अ ं जीमे पसेिसव
केसमे होइत अिछ आ
ं चमे श मे जतए एकर योग होइत अिछ जेना r ai son d’ et r e
एतए सेहो एकर उ ारण रैजौन डेटर होइत अिछ, मा
अपोस् ॉफी अवकाश निह दैत अिछ वरन
जोडैत अिछ, से एकर योग िबकारीक बदला देनाइ तकनीकी
पे ँ सेहो अ िचत)।
अइमे, एिहमे
जइमे, जािहमे
एखन/ अखन/ अइखन
केँ (के निह) मे (अ
ार रिहत)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ त निह)
स ँ ( सऽ स निह)
गाछ तर
गाछ लग
सा ँझ खन
जो (जो go, करै जो do)
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
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३. पाल आ भारतक मैिथली भाषा-वैज्ञािनक लोकिन
1. पालक मैिथली भाषा वैज्ञािनक लोकिन
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ारा बनाओल मानक श ैली
ारा बनाओल मानक
(भाषाशास् ी डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पणू र्
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
पस ँ स
उ ारण आ लेखन श ैली
लऽ िनधािरत)
र्
मैिथलीमे उ ारण तथा लेखन
१.प माक्षर आ अ ार: प माक्षरा
त ङ, ञ, ण, न एव ं म अबैत अिछ। स ं ृत भाषाक अ सार
श क अ मे जािह व क अक्षर रहै त अिछ ओही व क प माक्षर अबैत अिछ। जेनाअ
(क व क रहबाक कार
अ मे ङ् आएल अिछ।)
प
(च व क रहबाक कार
अ मे ञ् आएल अिछ।)
ख
(ट व क रहबाक कार
अ मे ण ् आएल अिछ।)
सि
(त व क रहबाक कार
अ मे न ् आएल अिछ।)
ख
(प व क रहबाक कार
अ मे म ् आएल अिछ।)
उपयु र् बात मैिथलीमे कम देखल जाइत अिछ। प माक्षरक बदलामे अिधका ंश जगहपर अ ारक
ं
योग देखल जाइछ। जेना- अक,
प ंच, खंड, स ंिध, खंभ आिद।
ाकरणिवद पि त गोिव
झाक
कहब छिन जे कव , चव
आ टव स ँ पवू र् अ ार िलखल जाए तथा तव
आ पव स ँ पवू र् प माक्षरे
ं
ं
ु
िलखल जाए। जेना- अक,
चंचल, अडा,
अ
तथा क न। मुदा िह ीक िनकट रहल आधिनक
लेखक
ं आ कं पन िलखैत
एिह बातकेँ निह मा त छिथ। ओ लोकिन अ
आ क नक जगहपर सेहो अत
देखल जाइत छिथ।
नवीन प ित िकछु सुिवधाजनक अव छैक। िकएक तँ एिहमे समय आ ानक बचत होइत छैक।
मुदा कतोक बेर ह लेखन वा मु णमे अ ारक छोट सन िब ु
निह भेलास ँ अथक
र् अनथ र् होइत
सेहो देखल जाइत अिछ। अ ारक योगमे उ ारण-दोषक स ावना सेहो ततबए देखल जाइत
अिछ। एतदथ र् कस ँ लऽ कऽ पव
धिर प माक्षरेक योग करब उिचत अिछ। यस ँ लऽ कऽ ज्ञ
धिरक अक्षरक स
अ ारक योग करबामे कतह ु को
िववाद निह देखल जाइछ।
२.ढ आ ढ : ढक उ ारण “र ् ह”जका ँ होइत अिछ। अतः जतऽ “र ् ह”क उ ारण हो ओतऽ मा
ढ िलखल जाए। आन ठाम खाली ढ िलखल जएबाक चाही। जेनाढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढ , ढेरी, ढाकिन, ढाठ आिद।
ु
ढ = पढ़◌ाइ, बढब, गढब, मढब, बढबा,
सा ँढ, गाढ, रीढ, चा ँढ, सीढी, पीढी आिद।
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
उपयु र् श सभकेँ देखलास ँ ई
होइत अिछ जे साधारणतया श क शु मे ढ आ म
अ मे ढ अबैत अिछ। इएह िनयम ड आ डक स भर् सेहो लाग ू होइत अिछ।
३.व आ
चाही।
मशः
योग
तथा
ब : मैिथलीमे “व”क उ ारण ब कएल जाइत अिछ, मुदा ओकरा ब पमे निह िलखल जएबाक
जेना- उ ारण : बै नाथ, िब ा, नब, देबता, िब ,ु ब ंश, ब ना आिद। एिह सभक ानपर
वै नाथ, िव ा, नव, देवता, िव ु, व ंश, व ना िलखबाक चाही। सामा तया व उ ारणक लेल ओ
कएल जाइत अिछ। जेना- ओकील, ओजह आिद।
ु
ु “य”क उ ारण “ज”जका ँ करैत देखल जाइत अिछ, मुदा ओकरा ज निह
४.य आ ज : कतह-कतह
ु
िलखबाक चाही। उ ारणमे यज्ञ, जिद, जमुना, जग,
जाबत, जोगी, जद,ु जम आिद कहल जाएबला श
सभकेँ
मशः यज्ञ, यिद, यमुना, युग, यावत, योगी, यद,ु यम िलखबाक चाही।
५.ए आ य : मैिथलीक वतर्नीमे ए आ य दनु ू िलखल जाइत अिछ।
ाचीन वतर्नी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आिद।
नवीन वतर्नी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आिद।
सामा तया श क शु मे ए मा अबैत अिछ। जेना एिह, एना, एकर, एहन आिद। एिह श सभक
ानपर यिह, यना, यकर, यहन आिदक योग निह करबाक चाही। य िप मैिथलीभाषी था
सिहत िकछु
जाितमे श क आर ोमे “ए”केँ य किह उ ारण कएल जाइत अिछ।
ए आ “य”क योगक स भर्मे ाची
प ितक अ
ू लेखनमे
योग कएल गेल अिछ। िकएक तँ दनु क
मैिथलीक सवसाधारणक
र्
उ ारण-श ैली यक अपेक्षा एस ँ
ु
ु
कितपय श केँ कैल, है ब आिद
पमे कतह-कतह
मािणत करैत अिछ।
सरण करब उपयु
मािन एिह पु कमे ओकरे
को
सहजता आ द ु हताक बात निह अिछ। आ
बेसी िनकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आिद
िलखल जाएब सेहो “ए”क योगकेँ बेसी समीचीन
६.िह, ह ु तथा एकार, ओकार : मैिथलीक ाचीन लेखन-पर रामे को
बातपर बल दैत काल श क
ु
पाछा ँ िह, ह ु लगाओल जाइत छैक। जेना- हनकिह,
अपनह,ु ओकरह,ु त ालिह, चो िह, आनह ु आिद।
ु
ु
मुदा आधिनक
लेखनमे िहक ानपर एकार एव ं हक
ानपर ओकारक योग करैत देखल जाइत
ु
अिछ। जेना- हनके,
अप , त ाले, चो ,े आ
आिद।
७.ष तथा ख : मैिथली भाषामे अिधका ंशतः षक उ ारण ख होइत अिछ। जेना- ष
षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), व ृषेश (व ृखेश), स ोष (स ोख) आिद।
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(खडय
),
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
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८. िन-लोप : िन िलिखत अव ामे श स ँ
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िन-लोप भऽ जाइत अिछ:
(क) ि या यी
य अयमे य वा ए लु भऽ जाइत अिछ। ओिहमे स ँ पिह
अक उ ारण दीघ र् भऽ
ू
जाइत अिछ। ओकर आगा ँ लोप-सचक
िच वा िवकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेनापणू र्
अपणू र्
प : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक।
प : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक।
पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक।
(ख) पवू कािलक
र्
कृत आय (आए)
जाइछ। जेनापणू र्
अपणू र्
अपणू र्
प : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
ू
य इक उ ारण ि यापद, स ंज्ञा, ओ िवशेषण तीनमे
लु
अपणू र्
प : दोसर मािलन चिल गेल।
भऽ जाइत अिछ। जेना-
प : पढैत अिछ, बजैत अिछ, गबैत अिछ।
प : पढै अिछ, बजै अिछ, गबै अिछ।
(ङ) ि यापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लु
पणू र्
अपणू र्
अपणू र्
161
भऽ जाइत अिछ। जेना-
प: िछयौक, िछयैक, छहीक, छौक, छैक, अिबतैक, होइक।
प : िछयौ, िछयै, छही, छौ, छै, अिबतै, होइ।
(च) ि यापदीय
पणू र्
भऽ जाइत अिछ। जेना-
प : दोसिर मािलिन चिल गेिल।
(घ) वतर्मान कृद क अि म त लु
पणू र्
ू
भऽ जाइछ, मुदा लोप-सचक
िवकारी निह लगाओल
प : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
(ग) स् ी
पणू र्
यमे य (ए) लु
य
, ह ु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
प : छि , कहलि , कहलहँ ,ु गेलह, निह।
प : छिन, कहलिन, कहलौ,ँ गेलऽ, नइ, निञ,
।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
९. िन ाना रण : को -को
र- िन अपना जगहस ँ हिट कऽ दोसर ठाम चिल जाइत अिछ। खास
कऽ
इ आ उक स
मे ई बात लाग ू होइत अिछ। मैिथलीकरण भऽ गेल श क म
वा अ मे
जँ
इ वा उ आबए तँ ओकर िन ाना िरत भऽ एक अक्षर आगा ँ आिब जाइत अिछ। जेनाशिन (शइन), पािन (पाइन), दािल ( दाइल), मािट (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आिद। मुदा
त म श सभमे ई िनअम लाग ू निह होइत अिछ। जेना- रि केँ रइ
आ सुधा ंशुकेँ सुधाउंस निह
कहल जा सकैत अिछ।
१०.हल (◌्)क योग : मैिथली भाषामे सामा तया हल
(◌्)क आव कता निह होइत अिछ। कारण
जे श क अ मे अ उ ारण निह होइत अिछ। मुदा स ं ृत भाषास ँ जिहनाक तिहना मैिथलीमे आएल
(त म) श सभमे हल
योग कएल जाइत अिछ। एिह पोथीमे सामा तया स ूण र् श केँ मैिथली
भाषा स
ी िनअम अ सार हल िवहीन राखल गेल अिछ। मुदा
ाकरण स
ी योजनक लेल
ु
ु हल
अ ाव क ानपर कतह-कतह
देल गेल अिछ।
ुत पोथीमे मिथली लेखनक ाचीन आ नवीन
दनु ू श ैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेिट कऽ वण-िव
र्
ास कएल गेल अिछ। ान आ समयमे
बचतक स िह ह -लेखन तथा तकनीकी द ृि स ँ सेहो सरल होबऽबला िहसाबस ँ वण-िव
र्
ास िमलाओल गेल
अिछ। वतर्मान समयमे मैिथली मा भाषी पय र् केँ आन भाषाक मा मस ँ मैिथलीक ज्ञान लेबऽ पिड रहल
पिर
मे लेखनमे सहजता तथा एक पतापर
ान देल गेल अिछ। तखन मैिथली भाषाक मलू
िवशेषता सभ कुि त निह होइक, ताहू िदस लेखक-म ल सचेत अिछ। िस
भाषाशास् ी डा.
रामावतार यादवक कहब छिन जे सरलताक अ स ानमे एहन अव ा िक ह ु
आबऽ देबाक चाही जे
भाषाक िवशेषता छा ँहमे पिड जाए।
-(भाषाशास् ी डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पणू र्
2. मैिथली अकादमी, पटना
1. जे श
मैिथली-सािह क
ाचीन कालस ँ आइ धिर जािह व र्नीमे
ा
एखन
ठाम
जकर, तकर
तिनकर
अिछ
162
लऽ िनधािरत)
र्
ारा िनधािरत
र्
मैिथली लेखन-श ैली
व र्नीमे िलखल जाय- उदाहरणाथर्
अ ा
अखन, अखिन, एखेन, अखनी
िठमा, िठना, ठमा
जेकर, तेकर
ितनकर। (वैकि क
पे ँ
ऐछ, अिह, ए।
पस ँ स
ा )
चिलत अिछ, से सामा तः तािह
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
2. िन िलिखत तीन
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
कारक
प वैकि
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
कतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा
रहल अिछ, जाय रहल अिछ, जाए रहल अिछ। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3.
ाचीन मैिथलीक ‘ ’
िनक
ानमे ‘न’ िलखल जाय सकैत अिछ यथा कहलिन वा कहलि ।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय िलखल जाय जत’
तः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सद ृश उ ारण इ
हो। यथा-
देखैत, छलैक, बौआ, छौक इ ािद।
5. मैिथलीक िन िलिखत श
6. ह्र्
पे
इकारा ंत श मे ‘इ’ के लु
गेिल (म
7.
एिह
यु
होयत: जैह, स ैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
करब सामा तः अ ा
िथक। यथा-
ा
देिख आबह, मािलिन
मा मे)।
तं
‘ए’ वा ‘य’
योगमे वैकि क
वा जाए इ ािद।
8. उ ारणमे द ू
ु
ाचीन मैिथलीक उ रण आिदमे तँ यथावत राखल जाय, िकं तु आधिनक
पे ँ ‘ए’ वा ‘य’ िलखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय
रक बीच जे ‘य’
िन
तः आिब जाइत अिछ तकरा लेखमे
ान वैकि
क
पे ँ
देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, िवआह, वा धीया, अढैया, िबयाह।
9. सा नािसक
तं
रक
ान यथास ंभव ‘ञ’ िलखल जाय वा सा नािसक
र। यथा:- मैञा, किनञा,
ँ
िकरतिनञा वा मैआ,ँ किनआ,ँ िकरतिनआ।
10. कारकक िवभिक् क िन िलिखत
सवथा
र्
ा
िथक। ‘क’ क वैकि
प
क
ा :- हाथकेँ, हाथस ँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अ
ार
प ‘केर’ राखल जा सकैत अिछ।
11. पवू कािलक
र्
ि यापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अ य वैकि
क
पे ँ लगाओल जा सकैत अिछ। यथा:-
देिख कय वा देिख कए।
12. मा ँग, भा ँग आिदक
ानमे माङ, भाङ इ ािद िलखल जाय।
13. अ र् ‘न’ ओ अ र् ‘म’ क बदला अ सार निह िलखल जाय, िकं तु छापाक सुिवधाथ र् अ र् ‘ङ’ , ‘ञ’,
ं
ं
ारो िलखल जा सकैत अिछ। यथा:- अ , वा अक,
अ ल वा अचल,
क
तथा ‘ण’ क बदला अ
कं ठ।
14. हल ंत िच
ीमान ्, िकं तु
िनअमतः लगाओल जाय, िकं तु िवभि क स ंग अकारा ंत
वा
योग कएल जाय। यथा:-
ीमानक।
15. सभ एकल कारक िच
श मे सटा क’ िलखल जाय, हटा क’ निह, स ंयु
िवभि क हेतु फराक
िलखल जाय, यथा घर परक।
16. अ नािसककेँ च
िब ु
अ
िब ुक बदला कयल जा सकैत अिछ। यथा- िहँ केर बदला िहं ।
163
ारक
योग च
ारा
कयल जाय। पर ंतु मु णक सुिवधाथ र् िह समान जिटल मा ापर
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ू
17. पणू र् िवराम पासीस ँ ( । ) सिचत
कयल जाय।
18. सम
पद सटा क’ िलखल जाय, वा हाइफेनस ँ जोिड क’ ,
हटा क’ निह।
19. िलअ तथा िदअ श मे िबकारी (ऽ) निह लगाओल जाय।
ं देवनागरी
20. अक
21.िकछु
पमे राखल जाय।
िनक लेल नवीन िच
बनबाओल जाय। जा' ई निह बनल अिछ ताबत एिह दनु ू
पवू वत्
र्
अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ िलखल जाय। आिक ऎ वा ऒ स ँ
ह./- गोिव
झा ११/८/७६
ीका
ठाकुर ११/८/७६ सुरे
िनक बदला
कएल जाय।
झा "सुमन" ११/०८/७६
8.VI DEHA FOR NON RESI DENTS
8.1.NAAGPHAANS-PART_XV-Mai t hi l i novel wr i t t en by
Ver ma-Tr ansl at ed by
Dr .Raj i v Kumar Ver ma and
Associ at e Pr of essor s , Del hi Uni ver si t y , Del hi
8 .2 . 1 .
Swe t a J h a - Hi s t o r y o f
164
Dr .Jaya Ver ma,
Mi t h i l a Pa i n t i n g : An
I n t r o d u c t i o n 2. Or i gi nal Poem i n Mai t hi l i by
Tr ansl at ed i nt o Engl i sh by
Dr .Shef al i ka
Jyot i Jha Chaudhar y
Gaj endr a Thakur
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
DATE-LI ST (year - 2010-11)
(१४१८ साल)
Mar r i age Days :
Nov .2010- 19
Dec .2010- 3,8
Januar y 2011- 17, 21, 23, 24, 26, 27, 28 31
Feb.2011- 3, 4, 7, 9, 18, 20, 24, 25, 27, 28
Mar ch 2011- 2, 7
May 2011- 11, 12, 13, 18, 19, 20, 22, 23, 29, 30
June 2011- 1, 2, 3, 8, 9, 10, 12, 13, 19, 20, 26, 29
Upanayana Days :
Febr uar y 2011- 8
Mar ch 2011- 7
May 2011- 12, 13
June 2011- 6, 12
Dvi r agaman Di n:
November 2010- 19, 22, 25, 26
December 2010- 6, 8, 9, 10, 12
Febr uar y 2011- 20, 21
Mar ch 2011- 6, 7, 9, 13
Apr i l 2011- 17, 18, 22
165
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
May 2011- 5, 6, 8, 13
Mundan Di n:
November 2010- 24, 26
December 2010- 10, 17
Febr uar y 2011- 4, 16, 21
Mar ch 2011- 7, 9
Apr i l 2011- 22
May 2011- 6, 9, 19
June 2011- 3, 6, 10, 20
FESTI VALS OF MI THI LA
Mauna Panchami -31 Jul y
Somavat i Amav asya Vr at - 1 August
Madhushr avani -12 August
Nag Panchami - 14 August
Raksha Bandhan- 24 Aug
Kr i shnast ami - 01 Sept ember
Kushi Amavasya- 08 Sept ember
Har t al i ka Teej - 11 Sept ember
Chaut hChandr a-11 Sept ember
Vi shwakar ma Pooj a- 17 Sept ember
Kar ma Dhar ma Ekadas hi -19 Sept ember
I ndr a Pooj a Aar ambh- 20 Sept ember
166
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
Anant Cat ur dashi - 22 Sep
Agast yar ghadaan- 23 Sep
Pi t r i Paksha begi ns - 24 Sep
Ji moot avahan Vr at a/ Ji t i a-30 Sep
Mat r i Navami - 02 Oct ober
Kal ashst hapan- 08 Oct ober
Bel naut i - 13 Oct ober
Pat r i ka Pr avesh- 14 Oct ober
Mahast ami - 15 Oct ober
Maha Navami - 16-17 Oct ober
Vi j aya Dashami - 18 Oct ober
Koj agar a- 22 Oct
Dhant er as - 3 November
Di yabat i , shyama pooj a- 5 November
Annakoot a/ Govar dhana Pooj a-07 November
Bhr at r i dwi t i ya/ Chi t r agupt a Pooj a-08 November
Chhat hi - -12 November
Akshyay Navami - 15 November
Devot t han Ekadashi - 17 November
Kar t i k Poor ni ma/ Sama Bi sar j an- 21 Nov
Shaa. r avi vr at ar ambh- 21 November
Navanna par van- 24 -26 November
Vi vaha Panchmi - 10 December
167
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मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
Nar akni var an chat ur dashi - 01 Febr uar y
Makar a/ Teel a Sank r ant i -15 Jan
Basant Panchami / Sar aswat i Pooj a- 08 Febr uaqr y
Achl a Sapt mi - 10 Febr uar y
Mahashi var at r i -03 Mar ch
Hol i kadahan-Fagua-19 Mar ch
Hol i -20 Mar
Var uni Yoga- 31 Mar ch
va.navar at r ar ambh- 4 Apr i l
vaa. Chhat hi vr at a- 9 Apr i l
Ram Navami - 12 Apr i l
Mesha Sankr ant i -Sat uani -14 Apr i l
Jur i shi t al -15 Apr i l
Somavat i Amavasya Vr at a- 02 May
Ravi Br at Ant - 08 May
Akshaya Tr i t i ya-06 May
Janaki Navami - 12 May
Vat Savi t r i -bar asai t - 01 June
Ganga Dashhar a-11 June
Jagannat h Rat h Yat r a- 3 Jul y
Har i Sayan Ekadashi - 11 Jul
Aashadhi Gur u Poor ni ma-15 Jul
168
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
NAAGPHAANS- Mai t hi l i novel wr i t t en by
Dr . Shef al i ka Ver ma i n
2004- Ar ushi Adi t i Sanskr i t i Publ i cat i on, Pat na- Tr ansl at ed by
Dr . Raj i v Kumar Ver ma and
Associ at e Pr of essor s , Del hi Uni ver si t y , Del hi .
NAAGPHAANS
Dr . Jaya Ver ma-
XV
Ma, I kept my f i nger s cr ossed wai t i ng f or di vi ne j ust i ce. I kept mum
but at t he same t i me kept mysel f post ed of t he devel opment s i n
Vi kal p’s life.
I was conf i dent about l ady ’s janus- faced nature. She certainly resembled Jekyll-andHide, certainly a hydra- headed monst er . I knew t hat f or Vi kal p, l i f e seemed
l i ke i vor y t ower but i n r eal i t y i t was f ool ’s paradise – flash in the pan.
However, in the twinkling of an eye, situation changed.
One ni ght a f ul l y dr unk Vi kal p was t hr own at t he door of our home by
t he cunni ng woman who had abandoned hi m af t er maki ng hi m a pauper .
I t was t he r eal aci d t est f or me. I f ound mysel f al l at sea. I was
abl e t o f ace t hi s hour of cr i si s t hr ough pat i ence and t ol er at i on
whi ch you al ways t r i ed t o i mpar t t o me. I t was t he r esul t of my
changed behavi or , as i t has been r i ght l y sai d a sof t answer t ur ns
away anger .
And Vi kal p r epent ed – Manjul, I am a sinner – I have humiliated you – the goddess of
my home, my life. I have distrusted you – how can I forgive myself?
I nst ant l y I hugged hi m. I knew t hat i n a t i me of cr i si s , mor e t han
anyt hi ng, we need t o be f eel l oved. Hi s sense of sel f -wor t hi ness was
r eki ndl ed by t he f act t hat I st i l l l oved hi m.
169
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Ma, I had r ead somewher e, “For love, we will climb mountains, cross sea, traverse desert
sands , and endur e unt ol d har dshi ps . Wi t hout l ove, mount ai ns become
uncl i mbabl e,
Sea uncr oss abl e, deser t s unbear abl e, and har dshi ps our pl i ght i n
l i f e.”
Vi kal p r epeat edl y asked f or f or gi veness and assur ed me he woul d t r y
t o act di f f er ent l y i n f ut ur e.
2
Ma, I f or gave hi m – I was convinced of the fact that forgiveness is the way of love and
life.
Ot her wi se, you know your daught er ver y wel l as an obst i nat e,
i nt ol er ant , adamant egoi st – a staunch believer in women emancipation movement – I
can not believe t hat I f or gave hi m – my reaction as a champion of gender equality
should have been – Vikalp, you ought to be crawling on your knees, begging me for forgiveness.
I do not know if I can ever forgive you.
Ma, I j ust di d t he opposi t e as I r eal i zed t hat t hese wer e not t he
wor ds of l ove but of bi t t er ness and r evenge. And f or me now l ove was
t he most pr eci ous t r easur e and I must pr eser ve i t .
Vi kal p t ol d me – I pray to god for our perennial love and we must share together hope and
despair, joy and sorrow ………
Ma, we r ecei ve what we gi ve --- I gave l ove and was r eci pr ocat ed i n
t he same way . What t o t al k of Vi kal p, Ma- Babuj i –everybody accepted me with
open mind and heart. They understood that the past can not be erased, but one can move ahead
free from the prejudi ces .
Ma, t oday I am over j oyed – it seemed some divine love music has dawned over our
family – everyone is imbued with the feeling of love.
Ma, t her e i s a happy pi ece of news f or you – we are planning to visit London on
the occasion of Rakshabandhan to seek your bl essi ngs f or our l ong and happy
mar r i ed l i f e.
Ma, we al so want bl essi ngs f r om Papa – we must find out Papa – I am indebted to
you for my existence and to Papa for my ignited and enlightened mind. Ma, I must meet my
Papa – my Papa.
3
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Dhar a was over whel med wi t h emot i ons – tears continuously kept on rolling over her
cheeks, all wet with tears.
Tear s of happi ness – at last Manjul got the love and her family back– the ultimate bliss
– moreover, she is also coming to meet her – to meet brother and to meet her f at her –
and she was confident to meet her Papa.
Kadamba was si l ent l y l ooki ng at her mot her ’s face. His face was also shining
with happiness. He also recollected the fun, laughter, joys, fights; every single moment he had
shared with Manjul while gr owi ng up.
Dhar a never made any compar i sons bet ween t hem. She al ways encour aged
t hei r di f f er ences , t hei r per sonal i t i es , t hei r r espect i ve t ast es , i n
shor t t hei r i ndi vi dual i t y . She al ways made t hem f eel t hat bot h of
t hem wer e uni que and each had i t s qual i t i es and abi l i t i es of t hei r
own.
Kadamba speci al l y r emember ed t he t wo f est i val s whi ch al ways
st r engt hened t he beaut i f ul r el at i onshi p and bondi ng whi ch he had
shar ed wi t h Manj ul si nce t hei r chi l dhood.
On Rakshabandhan, Manj ul used t o t i e a r akhi on hi s wr i st and i n t ur n
he pr omi sed t o hel p and pr ot ect her . Rakhi cer t ai nl y st ood f or t he
l ove bet ween t hem. But al as , f or t he l ast so many year s Manj ul was
not abl e t o t i e t he f r ai l t hr ead of r akhi whi ch i s consi der ed
st r onger t han i r on chai ns as i t per manent l y bi nds t hi s beaut i f ul
r el at i onshi p. Now, Kadamba was over j oyed t o know t hat Manj ul was
expect ed i n London on t he occasi on of Rakshabandhan.
Kadamba t hought – if Manjul comes over to London and ties rakhi on my wrist , then I
must promise her my visit to Mumbai on t he occasi on of Bhat r i dut i ya [
Bhar dut i a or Bhai dooj ].
He r ecol l ect ed t he happi ness whi ch t hey had shar ed. On Bhar dut i a she
al ways decor at ed t he house wi t h Al pana [ Rangol i ] wi t h mat er i al s such
as col or ed r i ce, f l our , ver mi l i on, f l ower , pet al s et c .
4
She per f or med ar t i on hi m and put r ed t i ka on hi s f or ehead. She al so
appl i ed r i ce l aced wi t h cur d as t i ka .She t hen put 5 bet el l eaves and
bet el nut s i n hi s pal m and whi l e washi ng hi s hands she kept on
ut t er i ng, “ Jamuna [ Yamuna] naute Jaum [Yama] ke, hum naut e chhi apan bhai
ke, j aun – jaun Jamuna ke payan badhal jaye, taun – taun hamar bhaik orda badhal jaye.”
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
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I n r et ur n, he not onl y gave her memor abl e gi f t s but al so pr omi sed t o
st and by her si de i n al l har dshi ps of l i f e. But due t o const r ai nt s of
t i me, space, di st ance and Manj ul ’s marital conditions, he was not able to keep up his
promise. But from now onwards, Kadamba was determined not only to renew the tie but also to
stand by his loving sister.
Dhar a l ooked at Kadamba – she thought whether Kadamba wi l l be abl e t o have
same l ovi ng r el at i onshi p wi t h hi s si st er Manj ul once he get s mar r i ed.
Oh, what and why I am t hi nki ng – why this pessimism? Dhara came back from
future to the present – why I am always worried for future? Who can be sure about future?
Ever y f ut ur e passes as pr esent .
Ent i r e house was ener gi zed --- Andr ew, Reshmi t ol d Dhar a t o have
f ai t h i n god – now the entire universe was desperate to meet Simant ------- yes
Dhar a’s Simant.
Whet her Dar a met Si mant ----------? I s i t possi bl e f or Dhar a and
Si mant t o come t oget her – Is it possible for earth and sky to join hands together?
TO BE
1.
CONTI NUED
Swe t a J h a - Hi s t o r y o f
Mi t h i l a Pa i n t i n g : An
I n t r o d u c t i o n 2. Or i gi nal Poem i n Mai t hi l i by
Tr ansl at ed i nt o Engl i sh by
Swe t a J h a –
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Jyot i Jha Chaudhar y
Gaj endr a Thakur
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Swet a l oves l i f e and ever yt hi ng t hat i t has t o of f er . She pur sues her
passi on usi ng br ush-st r okes and t he myr i ad col our s t hat get
exhi bi t ed on her canvass . She i s an avi d nat ur e l over who appr eci at es
el ement s t hat sensi t i ze cont our s of human emot i ons . She bel i eves t hat
her t al ent has t he pot ent i al t o t ouch numer ous l i ves t hr ough her
uni que ar t . She dr eams of communi cat i ng and connect i ng wi t h human
sensi t i vi t i es ar ound t he gl obe.
Swet a’s vivacious nature and youthfulness are seen in every piece of her work that brims with
bright colours and sharp strokes. In her own words – “I represent the glorious ancient culture of
Mithila, the land of Goddess Sita and Lord Buddha. My lif e mi ssi on i s t o t ake my
l egendar y l egacy and r i ch her i t age t o t he wor l d and enr i ch peopl e's
l i ves wi t h i t s t i mel ess wi sdom by depi ct i ng t hem i n t he f or m of ar t .”
Swet a hol ds Mast er s Degr ee i n Geogr aphy f r om Ranchi Uni ver si t y ,
I ndi a. She l i ves and wor ks i n Si ngapor e si nce 2007.
Hi s t o r y o f
Mi t h i l a Pa i n t i n g : An I n t r o d u c t i o n
The or i gi ns of Madhubani pai nt i ng or Mi t hi l a Pai nt i ng ar e shr ouded
i n ant i qui t y . Tr adi t i on st at es t hat t hi s st yl e of pai nt i ng or i gi nat ed
at t he t i me of t he Ramayana, when Ki ng Janak c ommi ssi oned ar t i st s t o
do pai nt i ngs at t he t i me of mar r i age of hi s daught er Si t a t o Lor d
Rama.
Madhubani pai nt i ng has been done t r adi t i onal l y by t he women of
vi l l ages ar ound t he pr esent t own of Madhubani (t he l i t er al meani ng
of whi ch i s f or est s of honey ) and ot her ar eas of Mi t hi l a. Locat ed
bet ween t he Hi mal ayan f oot hi l l s and t he Ganges pl ai ns , t he Mi t hi l a
was t he f i r st Ar yan Ki ngdom, 1500 B.C. I t was t her e t hat t he f ounder
of t he Jai ni sm was bor n, and al so wher e Lor d Buddha f ound t he
enl i ght enment . The r egi on si t uat ed bet ween Nepal and Bi har /UP st at e
i n I ndi a t oday i s col l ect i vel y known as Mi t hi l a.
The pai nt i ng was t r adi t i onal l y done on f r eshl y pl ast er ed mud wal l of
hut s , but now i t i s al so done on cl ot h, hand-made paper and canvas .
Thi s ar t i s one of t he t r adi t i onal ski l l s t hat ar e passed down f r om
gener at i on t o gener at i on. Or i gi nal l y t hey pai nt f i gur es f r om nat ur e
and myt h on househol d wal l s t o mar k t he seasonal f est i val s and l i f e
cycl e event s l i ke mar r i age and bi r t h.
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Mi t hi l a Pai nt i ng’s iconography is dr awn f r om a r i ch cosmol ogy , as wel l as
a huge st or e of l egends and f ol kl or e r epl et e wi t h symbol s of
f er t i l i t y , good l uck , and pr osper i t y . I t i s obser ved t hat communi t i es
i n t he ar ea have di st i nct pai nt i ngs st yl es . Or i gi nal l y al l t hese
f or ms wer e ephemer al and done dur i ng speci al r i t ual s , di r ect l y on t he
house wal l s and f l oor s . I n t he 60's , wi t h t he hel p of t he I ndi an
gover nment , t he womenf ol k f r om t hi s r egi on st ar t ed t o expr ess
t hemsel ves on paper or on canvas . These new medi a hel ped t hem t o
pr omot e t hei r ar t i n I ndi a and many ot her count r i es .
Today Madhubani
cul t ur al si gni f i
The copi ous use
depi ct i on makes
I ndi a.
Pai nt i ng commands i mmense gl obal
cance due t o many myt hs and f ol kl
of br i ght and vi br ant nat ur al col
i t bot h eni gmat i c and di vi ne ar t
Th e Ri c h Cu l t u r a l
He r i t a g e o f
r espect and
or e at t ached t o i t .
our s f or r ust i c
f or m f r om anci ent
Mi t h i l a Ar t
Far away f r om I ndi an bi g ci t i es and t he moder n wor l d l i es t hi s
beaut i f ul r egi on once known as Mi t hi l a. I t was one of t he f i r st
ki ngdoms t o be est abl i shed i n east er n I ndi a. The r egi on i s a vast
pl ai n st r et chi ng nor t h t owar ds Nepal , sout h t owar ds t he Ganges and
west t owar ds Bengal . The women of Mi t hi l a f r om t i me i mmemor i al have
been i nvol vi ng t hemsel ves i n t he var i ous f or ms of cr eat i vi t y . The
best one can f i nd i n t hei r cr eat i vi t y i s t he r el at i onshi p bet ween
nat ur e, cul t ur e and human psyche. Al so t hey use onl y t hose r aw
mat er i al s , whi ch ar e avai l abl e easi l y i n abundance i n t he l ocal i t y
t hey ar e sur r ounded wi t h.
Thr ough f ol k pai nt i ngs and ot her f or ms , t hese womenf ol k expr ess t hei r
desi r e, dr eams and expect at i ons . I t i s a par al l el l i t er acy by whi ch
t hey communi cat e t hei r aest het i c expr essi on. Thei r ar t of cr eat i vi t y
i t sel f can be t r eat ed as a st yl e of wr i t i ng by whi ch t hei r emot i ons ,
expect at i ons , f r eedom of t hought s et c ar e expr essed. Thei r backgr ound,
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िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
gender , aspi r at i ons , hope, aest het i c sensi bi l i t y and cul t ur al
knowl edge – all of these find expression in all possible forms of this world renowned art.
२.
Or i gi nal Poem i n Mai t hi l i by
Engl i sh by
Gaj endr a Thakur Tr ansl at ed i nt o
Jyot i Jha Chaudhar y
Jyot i Jha Chaudhar y , Dat e of Bi r t h: December 30 1978,Pl ace of Bi r t hBel hvar (Madhubani Di st r i ct ), Educat i on: Swami Vi vekananda Mi ddl e
School , Ti sco Sakchi Gi r l s Hi gh School , Mr s KMPM I nt er Col l ege, I GNOU,
I CWAI (COST ACCOUNTANCY); Resi dence- LONDON, UK; Fat her - Sh. Shubhankar
Jha, Jamshedpur ; Mot her - Smt . Sudha Jha- Shi vi pat t i . Jyot i r ecei ved
edi t or 's choi ce awar d f r om wwwpoet
.
r y .comand her poems wer e f eat ur ed
i n f r ont page of wwwpoet
.
r ysoup.com f or some per i od.She l ear nt Mi t hi l a
Pai nt i ng under Ms . Shvet a Jha, Baser a I nst i t ut e, Jamshedpur and Fi ne
Ar t s f r om Tool i ka, Sakchi , Jamshedpur (I ndi a). Her Mi t hi l a Pai nt i ngs
have been di spl ayed by Eal i ng Ar t Gr oup at Eal i ng Br oadway , London.
Gaj endr a Thakur (b. 1971) i s t he edi t or of Mai t hi l i ej our nal “Videha” that
can be viewed at http://www.videha.co.in/ . Hi s poem, st or y , novel , r esear ch
ar t i cl es , epi c – all in Maithili language are lying scattered and is in print in single volume
by the title “KurukShetram.” He can be reached at his email: [email protected]
Recal l i ng The Fl ood Of 1987
The Kamal a had been cr ossed by wal ki ng
Though t he Bal an r i ver by boat
But what a di sast er was t hat day
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
The wat er over f l owi ng bet ween boundar i es
Woul d submer ge al l sur r oundi ng f or sur e
St ar t l ed wi t h t hei r t r eacher ous char act er s
Mocki ng t he new t heor y of Sci ence
How coul d t he nat ur e l evee t he st r eam?
I t was t ur ned super ar duous
Gener at i ng f ear i n hear t
Had wi t nessed i n vi l l age
Thr ough t he gr oves and or char ds
A st r eam used t o f l ow
Dr ai ni ng wat er was not knot t y
The new sci ent i st s cl osed
Al l dr ai ni ng st r eams
The gat e t o dr ai n t he over f l ow i n dam
Was bl ocked wi t h sand
Used t o r oam on one f oot
Seeki ng dr y nar r ow pat hs
Onl y t he pat hs used t o be dr y
Now dr i ed out al l ar ound
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
The Si l l i , Neel gai – all disappeared
The spi nes of hedgehogs
Not avai l abl e f or r i t ual s
The f ood kept i n Judi Shi t al
Lef t l yi ng under t he t r ee,
A week passed
No wi l d ani mal came t o gr ab
The ant s ’ queue was thou’ inevitable
The i nt er est i ng t al ks of t he engi neer s
Hear d st andi ng on t he wal l
How coul d t he st r eam t ur n so gi gant i c ?
That used t o be cr ossed on f eet
The pr act i cabi l i t y of t he new sci ence
Woul d be so much i n vai n, I never r eal i sed
I t was di sgr aced by t he sugar canes
St andi ng l onel y i n t he f l ood
The wat er became t awny and t r ees pur e gr een
Downpour over t he r oof s
Roof s bei ng washed away
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
Rugged i n sever al pl aces
Wat er dr i ppi ng i nsi de
Reser voi r of r i ce and paddy
The f l ow car r i ed away al l
Hel i copt er s dr opped chuda and j i gger y
Wher e l and was not submer ged
Dr oppi ng f ood i n f l ood was a wast e
Cr owd f ol l owi ng hel i copt er s
Ol d and young wi t h empt y st omach
That ol d man i s eat i ng chuda and j i gger y
Cr yi ng over deat h of son and daught er i n l aw
Woul d not f ul f i l t he hunger
Son of a BDO was my f r i end
Cal l ed t he gover nment gr eedy
Hi s f at her was post ed i n Shunt i ng
A sl yl y demot i on t o Jhanj har pur f r om Gi r i di h
But t hei r good l uck t ur ned t he t i de
Post i ng was r eset t l ed because of f l ood
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
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िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
I t hought onl y my f at e was bad
Sat ur n was down and Sar aswat i was about t o beg
Reached vi l l age, Pappu Bhai was upset
Pl anni ng devel opment , di ver t i ng f l ow, dr ai ni ng
The r el i ef announced by t he gover nment
Ever y now and t hen
One bag of cr op f or vi ct i ms of f l ood
The bl ock empl oyees st ol e 15 ki l o f r om each bag
Pappu Bhai , you ar e a r eal f ool
Why t o count t eet h of a f r ee bul l ock ?
(Why t o mi nd qual i t y of
a f r ee t hi ng)
You di dn’t get even that last time
Scene af t er a week or mor e
Some went t o Mumbai some t o Del hi
Women and chi l dr en wer e l ef t i n vi l l age
Al l t ook pl edge t o wor k
Whet her sel l i ng veget abl es or l i f t i ng l oads
Mot her wi shes t o have concr et e r oof
Cot t ages of hays and t i l es af t er f i r e
Bakhar i was made agai n when di vi ded
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Thank God, i n f l ood, houses di sappear ed
Now I woul d make a f i r m house, oh dear
The concr et e houses wer e f i l l ed al l over
One coul d see ever ywher e, st ack of br i cks
Al l ol d cor ner s wer e l ost
Wher e we br ot her s used t o pl ay hi de and seek
And now see t he gover nment ’s action
I i mpr oved my f i nanci al condi t i on i n t he Mehat h onl y
The gover nment cal l ed t he vi l l age
A r ol e model i n t he ent i r e bl ock
You say t hat I ear ned i n Del hi and Mumbai !
Now l i st en t o me
I f t he gover nment woul d be changi ng
Nei t her Mumbai nor Del hi woul d exi st
The condi t i on of Vi j aynagar am
I s wel l known t o t he hi st or i ans
Your good f at e l i es i n maki ng me wi n al ways
Put t i ng ef f or t t o pr ogr ess i s your wor k
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थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Just keep pr obl ems by me away
Fl ood came i n 1987
Saw t he dest r uct i on but I say
Just see t he conveyi ng peopl e
Lucky t o get ent er t ai ned by you
The f ai r i s not seen anywher e
Hukkal ol i i s Di wal i
The mud of Judi sheet al i s Hol i
Then how can f ol l owi ng you be f aul t y
I am al so i n Del hi - Mumbai f or ear ni ng
You ar e good at l east i n
Not l eavi ng t he vi l l age
You ent er t ai n, ear n and eat
And al so vi si t Del hi and Mumbai .
ं
१.िवदेह ई-पि काक सभटा पुरान अक
ु
ल, ितरहता
आ देवनागरी
पमे Vi deha e
j our nal 's al l ol d i ssues i n Br ai l l e Ti r hut a and Devanagar i ver si ons
२.मैिथली पोथी डाउनलोड Mai t hi l i
३.मैिथली ऑिडयो स ंकलन
Mai t hi l i Audi o Downl oads ,
४.मैिथली वीिडयोक स ंकलन Mai t hi l i
181
Books Downl oad,
Vi deos
िव
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ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ु
५.िमिथला िच कला/ आधिनक
िच कला आ िच
"िवदेह"क एिह सभ सहयोगी िल ंकपर सेहो एक बेर जाऊ।
६.िवदेह मैिथली ि ज :
ht t p://vi dehaqui z .bl ogspot .com/
ए ीगेटर :
ht t p://vi deha-aggr egat or .bl ogspot .com/
८.िवदेह मैिथली सािह
ू
अ ं जीमे अनिदत
:
ht t p://madhubani -ar t .bl ogspot .com/
९.िवदेहक पवू -र् प "भालसिरक गाछ"
:
ht t p://gaj endr at hakur .bl ogspot .com/
ं
१०.िवदेह इडे
:
ht t p://vi deha123.bl ogspot .com/
११.िवदेह फाइल :
ht t p://vi deha123.wor dpr ess .com/
182
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
Mi t hi l a Pai nt i ng/ Moder n Ar t and
Phot os
७.िवदेह मैिथली जालव ृ
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ु
१२. िवदेह: सदेह : पिहल ितरहता
(िमिथला◌़क्षर) जालव ृ
(ब्ल◌ॉग)
ht t p://vi deha-sadeha.bl ogspot .com/
१३. िवदेह:
ल: मैिथली
लमे: पिहल बेर िवदेह
ारा
ht t p://vi deha-br ai l l e.bl ogspot .com/
१४.V I D E H A " I S T
E J OURNA L
MA I T H I L I
A RCHI V E
F ORT NI GHT L Y
ht t p://vi deha-ar chi ve.bl ogspot .com/
१५. ' िव दे ह '
आ का र् इ व
थ म
मै िथ ली
पा िक्ष क
ई
प ि
का
मै िथ ली
ht t p://vi deha-pot hi .bl ogspot .com/
१६. ' िव दे ह '
थ म
ई
प ि
का
ऑ िड यो
ई
प ि
का
वी िड यो
मै िथ ली
पा िक्ष क
ई
क ला
आ
िच
क ला
प ि
का
िम िथ ला
मै िथ ली
पा िक्ष क
आ का र् इ व
ht t p://vi deha-audi o.bl ogspot .com/
१७. ' िव दे ह '
आ का र् इ व
थ म
मै िथ ली
पा िक्ष क
ht t p://vi deha-vi deo.bl ogspot .com/
१८. ' िव दे ह '
थ म
ु
िच
क ला ,
आ ध िन क
ht t p://vi deha-pai nt i ngs -phot os .bl ogspot .com/
१९. मैिथल आर िमिथला (मैिथलीक सभस ँ लोकि य जालव ृ )
ht t p://mai t hi l aur mi t hi l a.bl ogspot .com/
२०. ुित
183
काशन
पो थी क
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ht t p://wwwshr
.
ut i -publ i cat i on.com/
२१.ht t p://gr oups .googl e.com/gr oup/vi deha
२२.ht t p://gr oups .yahoo.com/gr oup/VI DEHA/
२३.गजे
ठाकुर इडे
ht t p://gaj endr at hakur 123.bl ogspot .com
२४.िवदेह रेिडयो:मैिथली कथा-किवता आिदक पिहल पोडका
साइटht t p://vi deha123r adi o.wor dpr ess .com/
२५.
ना भुटका
ht t p://mangan-khabas .bl ogspot .com/
ू
महत् पणू र् सचना:(१)
'िवदेह' ारा धारावािहक
ब -समीक्षा, उप ास (सह बाढिन) , प -स ं
नाटक(स ंकषण),
र्
महाका
(
ाह
आ अस ाित
काशनक बाद ि ंट फ◌ॉममे।
र्
कु
म ्–अ
907729-7-6 िववरण एिह प ृ पर नीचा ँमे आ
publ i cat i on.com/ पर ।
पे ईह (सह
मन) आ
मनक
र्
ख
कािशत कएल गेल गजे
ठाकुरक िनब ा ीक चौपडपर), कथा-ग
(ग -गु ),
बाल-िकशोर सािह िवदेहमे स ंपणू र् ई-१ स ँ ७ Combi ned I SBN No.978-81-
काशकक साइट ht t p://wwwshr
.
ut i -
ं
ू
ू
महत् पणू र् सचना
(२):सचना:
िवदेहक मैिथली-अ ं जी आ अ ं जी मैिथली कोष (इटर
टपर पिहल बेर
सच-िड
र्
नरी) एम.एस. एस. .ू एल. सवरर् आधािरत -Based on ms -sql ser ver Mai t hi l i Engl i sh and Engl i sh-Mai t hi l i Di ct i onar y . िवदेहक भाषापाक- रचनालेखन भ
ं मे।
कु
म ् अ मनकर्
गजे
ठाकुर
गजे
ठाकुरक िनब - ब -समीक्षा, उप ास (सह बाढिन) , प -स ं ह (सह ा ीक चौपडपर), कथाग
(ग
गु ), नाटक(स ंकषण),
र्
महाका
(
ाह
आ अस ाित मन) आ बालम ंडली-िकशोरजगत
िवदेहमे स ंपणू र् ई- काशनक बाद ि ंट फ◌ॉममे।
र्
कु
म ्–अ मनक,
र्
ख -१ स ँ ७
I st edi t i on 2009 of Gaj endr a Thakur ’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to
VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-gr own-ups
l i t er at ur e i n si ngl e bi ndi ng:
Language:Mai t hi l i
६९२ प ृ : म ू भा.
. 100/-(f or i ndi vi dual buyer s i nsi de i ndi a)
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
(add cour i er char ges Rs .50/-per copy f or Del hi /NCR and Rs .100/- per
copy f or out si de Del hi )
For Li br ar i es and over seas buyer s $40 US (i ncl udi ng post age)
The book i s AVAI LABLE FOR PDF DOWNLOAD AT
ht t ps ://si t es .googl e.com/a/vi deha.com/vi deha/
ht t p://vi deha123.wor dpr es s .com/
Det ai l s f or pur chase avai l abl e at pr i nt -ver si on publ i sher s 's si t e
websi t e: ht t p://wwwshr
.
ut i -publ i cat i on.com/
or you may wr i t e t o
e-mai l :shr ut i .publ i cat i [email protected] ut i -publ i cat i on.com
ु
िवदेह: सदेह : १: २: ३: ४ ितरहता
: देवनागरी "िवदेह" क, ि ंट स ं रण :िवदेह-ई-पि का
ु ल रचना सि िलत।
(ht t p://wwwvi
. deha.co.i n/) क चन
िवदेह:सदेह:१: २: ३: ४
स ादक: गजे
ठाकुर, सह-स ादक: उमेश म ंडल, सहायक-स ादक: िशव कुमार झा आ रि
रेखा
िस ा, भाषा-स ादन: नागे
कुमार झा आ प ीकार िव ान
झा, कला-स ादन:
ोित सुनीत
चौधरी।
Det ai l s f or pur chase avai l abl e at pr i nt -ver si on publ i sher s 's si t e
ht t p://wwwshr
.
ut i -publ i cat i on.com or you may wr i t e t o
shr ut i .publ i cat i [email protected] ut i -publ i cat i on.com
२. स ंदेश-
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िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
[ िवदेह ई-पि का, िवदेह:सदेह िमिथलाक्षर आ देवनागरी आ गजे
ठाकुरक सात ख क- िनब - ब समीक्षा,उप ास (सह बाढिन) , प -स ं ह (सह ा ीक चौपडपर), कथा-ग
(ग
गु ), नाटक (स ंकषण),
र् महाका
ं मनक
( ाह आ अस ाित मन) आ बाल-म ंडली-िकशोर जगत- स ं ह कु
म ् अत
र् मादेँ । ]
१. ी गोिव
झा- िवदेहकेँ तर ंगजालपर उतािर िव भिरमे मा भाषा मैिथलीक लहिर जगाओल, खेद
ु
जे अप क एिह महािभयानमे हम एखन धिर स ंग निह दए सकलहँ ।
सु त छी अप केँ सुझाओ आ
रचना क आलोचना ि य लगैत अिछ तेँ िकछु िलखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अप केँ
सदा उपल रहत।
२. ी रमान
रे - मैिथलीमे ई-पि का पािक्षक
पे ँ चला कऽ जे अपन मा भाषाक चार कऽ रहल
छी, से ध वाद । आगा ँ अप क सम
मैिथलीक कायक
र् हेतु हम दयस ँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३. ी िव ानाथ झा "िविदत"- स ंचार आ ौ ोिगकीक एिह ित धीर् ोबल युगमे अपन मिहमामय
"िवदेह"केँ अपना देहमे कट देिख जतबा स ता आ स ंतोष भेल, तकरा को
उपल "मीटर"स ँ
ं धिर
निह नापल जा सकैछ? ..एकर ऐितहािसक म ू ा ंकन आ सा ं ृितक ितफलन एिह शता ीक अत
लोकक नजिरमे आ यजनक
र्
पस ँ कट है त।
४. ो. उदय नारायण िस ंह "निचकेता"- जे काज अहा ँ कए रहल छी तकर चरचा एक िदन मैिथली
भाषाक इितहासमे होएत। आन
भए रहल अिछ, ई जािन कए जे एतेक गोट मैिथल "िवदेह" ई
ं पुरबाक लेल अिभन न।
जनलके
र् ँ पिढ रहल छिथ।...िवदेहक चालीसम अक
५. डा. गंगेश गुंजन- एिह िवदेह-कममे
र् लािग रहल अहा ँक स द
े नशील मन, मैिथलीक ित समिपत
र्
मेहनितक अम ृत र ंग, इितहास मे एक टा िविश
फराक अ ाय आर ंभ करत, हमरा िव ास अिछ।
ं मनक
ु भ
अशेष शुभकामना आ बधाइक स , स ेह...अहा ँक पोथी कु
म ् अत
र्
थम द ृ या बहत
ु
तथा उपयोगी बझाइछ।
मैिथलीमे तँ अपना
पक ायः ई पिहले एहन भ
अवतारक पोथी
िथक। हषपर् णू र् हमर हािदक
र् बधाई ीकार करी।
६. ी रामा य झा "रामर ंग"(आब गीर्य)- "अपना" िमिथलास ँ स ंब ंिधत...िवषय व ुस ँ अवगत
ु
भेलहँ ।...शेष
सभ कुशल अिछ।
ं
७. ी
जे
ि पाठी- सािह अकादमी- इटर
ट पर
लेल बधाई आ शुभकामना ीकार क ।
थम मैिथली पािक्षक पि का "िवदेह" केर
८. ी फु कुमार िस ंह "मौन"- थम मैिथली पािक्षक पि का "िवदेह" क काशनक समाचार जािन
ु
ू ृि क पिरचय देलहँ ,ु ओिह लेल
क क चिकत मुदा बेसी आ ािदत भेलहँ ।
कालच केँ पकिड जािह दरद
हमर म ंगलकामना।
ू
९.डा. िशव साद यादव- ई जािन अपार हष र् भए रहल अिछ, जे नव सचनााि क
मे मैिथली
प कािरताकेँ
वेश िदअएबाक साहिसक कदम उठाओल अिछ। प कािरतामे एिह कारक नव योगक
हम ागत करैत छी, स ंगिह "िवदेह"क सफलताक शुभकामना।
१०. ी आ ाचरण झा- को
प -पि काक काशन- ताहूमे मैिथली पि काक काशनमे के कतेक
सहयोग करताह- ई तऽ भिव
कहत। ई हमर ८८ वषमे
र् ७५ वषक
र् अ भव रहल। एतेक पैघ
ु
महान यज्ञमे हमर
ापणू र् आहित
ा होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
186
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं देखलहँ ,ु स ूण र् टीम बधाईक पा
११. ी िवजय ठाकुर- िमिशगन िव िव ालय- "िवदेह" पि काक अक
अिछ। पि काक म ंगल भिव
हेतु हमर शुभकामना ीकार कएल जाओ।
१२. ी सुभाषच
यादव- ई-पि का "िवदेह" क बारेमे जािन स ता भेल। ’िवदेह’ िनर र
प िवत-पुि त हो आ चतुिदक
र् अपन सुगंध पसारय से कामना अिछ।
१३. ी मैिथलीपु
रहत।
दीप- ई-पि का "िवदेह" केर सफलताक भगवतीस ँ कामना। हमर पणू र् सहयोग
१४. डा. ी भीमनाथ झा- "िवदेह" इ टर ट पर अिछ तेँ "िवदेह" नाम उिचत आर कतेक
िववरण भए सकैत अिछ। आइ-काि
मोनमे उ ेग रहै त अिछ, मुदा शी पणू र् सहयोग
देब।कु
म ् अ मनक
र्
देिख अित स ता भेल। मैिथलीक लेल ई घटना छी।
१५.
पे ँ एकर
ी रामभरोस कापिड " मर"- जनकपुरधाम- "िवदेह" ऑनलाइन देिख रहल छी। मैिथलीकेँ
ु लहँ ु तकरा लेल हािदक
अ राष्र् ीय जगतमे पहँ चे
र् बधाई। िमिथला र
सहयोग भेटत, से िव ास करी।
सभक स ंकलन अपवू ।
र्
पालोक
१६. ी राजन न लालदास- "िवदेह" ई-पि काक मा मस ँ बड नीक काज कए रहल छी, नाितक अिहठाम
ु
ु गोटेकेँ हम
देखलहँ ।
एकर वािषक
र् अंक जखन ि ट
ं िनकालब तँ हमरा पठायब। कलक ामे बहत
साइटक पता िलखाए दे
िछयि । मोन तँ होइत अिछ जे िद ी आिब कए आशीवादर् दैतहँ ,ु मुदा
उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-िवदेशक मैिथलकेँ जोडबाक लेल।.. उ ृ
काशन
ं नक
कु
म ् अतम
र्
लेल बधाइ। अ त
ु
काज कएल अिछ, नीक
ुित अिछ सात ख मे। मुदा
ू
अहा ँक सेवा आ से िनः ाथ र् तखन बझल
जाइत जँ अहा ँ ारा कािशत पोथी सभपर दाम िलखल निह
ू
रिहतैक। ओिहना सभकेँ िवलिह देल जइतैक। (
ीकरणीमान ्, अहा ँक सचनाथ
र् िवदेह ारा
ई- कािशत कएल सभटा साम ी आकाइवमे
र्
ht t ps ://si t es .googl e.com/a/vi deha.com/vi deha-pot hi / पर िबना म ू क डाउनलोड लेल
उपल छै आ भिव मे सेहो रहतैक। एिह आकाइवके
र्
ँ जे िकयो काशक अ मित लऽ कऽ ि ंट
पमे कािशत कए
छिथ आ तकर ओ दाम रख
छिथ तािहपर हमर को
िनय ं ण निह अिछ।गजे
ठाकुर)...
अहा ँक ित अशेष शुभकामनाक स ंग।
ं
१७. डा.
मश ंकर िस ंह- अहा ँ मैिथलीमे इटर
टपर पिहल पि का "िवदेह" कािशत कए अपन अ त
ु
मा भाषा रागक पिरचय देल अिछ, अहा ँक िनः ाथ र् मा भाषा रागस ँ
िरत छी, एकर िनिम जे हमर
ं
ू
सेवाक योजन हो, तँ सिचत
करी। इटर
टपर आ ोपा ंत पि का देखल, मन फिु त भऽ गेल।
१८. ीमती शेफािलका वमा-र् िवदेह ई-पि का देिख मोन उ ासस ँ भिर गेल। िवज्ञान कतेक गित
कऽ रहल अिछ...अहा ँ सभ अन
आकाशकेँ भेिद िदयौ, सम
िव ारक रह केँ तार-तार कऽ
ं नक
िदयौक...। अप क अ त
ु
पु क कु
म ् अतम
र्
िवषयव ुक द ृि स ँ गागरमे सागर अिछ।
बधाई।
१९. ी हेतुकर झा, पटना-जािह समपणर् भावस ँ अप
िमिथला-मैिथलीक सेवामे त र छी से
ु
अिछ। देशक राजधानीस ँ भय रहल मैिथलीक श ंखनाद िमिथलाक गाम-गाममे मैिथली चेतनाक िवकास
अव करत।
ं मनक
२०. ी योगान
झा, किबलपुर, लहेिरयासराय- कु
म ् अत
र्
पोथीकेँ िनकटस ँ देखबाक अवसर
भेटल अिछ आ मैिथली जगतक एकटा उ ट ओ समसामियक द ृि स
ह ाक्षरक कलमब
पिरचयस ँ
187
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
. 80/- मे उपल
आ ािदत छी। "िवदेह"क देवनागरी स ँ रण पटनामे
लेखक लोकिनक छायािच , पिरचय प क ओ रचनावलीक स क
२१.
सिच
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
भऽ सकल जे िविभ
काशनस ँ ऐितहािसक कहल जा सकैछ।
ु रास किवता, कथा, िरपोट र् आिदक
ी िकशोरीका
िम - कोलकाता- जय मैिथली, िवदेहमे बहत
स ं ह देिख आ आर अिधक स ता िमिथलाक्षर देिख- बधाई ीकार कएल जाओ।
ं पढल- अ त
२२. ी जीवका - िवदेहक मुि त अक
ु
मेहनित। चाबस-चाबस। िकछु समालोचना
मरखाह..मुदा स ।
ं मनक
ु
२३. ी भालच
झा- अप क कु
म ् अत
र्
देिख बझाएल
जेना हम अप
छपलहँ ु अिछ।
एकर िवशालकाय आकृित अप क सवसमावेशताक
र्
पिरचायक अिछ। अप क रचना साम मे
र्
उ रो र
व ृि
हो, एिह शुभकामनाक स ंग हािदक
र् बधाई।
ं मनक
ु
२४. ीमती डा नीता झा- अहा ँक कु
म ् अत
र्
पढलहँ ।
ोितरी र श ावली, कृिष मत्
श ावली आ सीत बस
आ सभ कथा, किवता, उप ास, बाल-िकशोर सािह सभ उ म छल। मैिथलीक
उ रो र िवकासक ल
द ृि गोचर होइत अिछ।
ं मनक
२५. ी मायान
िम - कु
म ् अत
र्
मे हमर उप ास स् ीधनक जे िवरोध कएल गेल अिछ
ं मनक
तकर हम िवरोध करैत छी।... कु
म ् अत
र्
पोथीक लेल शुभकामना।( ीमान ् समालोचनाकेँ
िवरोधक
पमे निह लेल जाए।-गजे
ठाकुर)
ं मनक
ू
२६. ी महे
हजारी- स ादक ीिमिथला- कु
म ् अत
र्
पिढ मोन हिषत
र् भऽ गेल..एखन परा
ु समय लागत, मुदा जतेक पढलहँ ु से आ ािदत कएलक।
पढयमे बहत
२७. ी केदारनाथ चौधरी- कु
ितमान बनत।
ं मनक
म ् अत
र्
अ त
ु
लागल, मैिथली सािह
लेल ई पोथी एकटा
ु
पाठक- िवदेहक हम िनयिमत पाठक छी। ओकर
पक श ंसक छलहँ ।
ए र अहा ँक
ं मनक
ु
म ् अत
र्
देखलहँ ।
मोन आ ािदत भऽ उठल। को
रचना तरा-उपरी।
२८. ी स ान
िलखल - कु
कु
२९. ीमती रमा झा-स ादक िमिथला दपण।
र्
ं मनक
म ् अत
र्
ि ंट फ◌ॉम र् पिढ आ एकर गुणव ा
देिख मोन स
शुभकामना।
यु
३०. ी नरे
छी।
भऽ गेल, अ त
ु
श
एकरा लेल
कऽ रहल छी। िवदेहक उ रो र
झा, पटना- िवदेह िनयिमत देखैत रहै त छी। मैिथली लेल अ त
ु
काज कऽ रहल
३१. ी रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- िमिथलाक्षर िवदेह देिख मोन
पिरद ृ आ
कारी अिछ।
३२. ी तारान
िवयोगी- िवदेह आ कु
शुभकामना आ बधाई।
३३. ीमती
बधाई।
188
गितक
मलता िम
“
म”- कु
ं
स तास ँ भिर उठल, अकक
िवशाल
ं नक
म ् अतम
र्
देिख चकिबदोर लािग गेल। आ य।
र्
ं मनक
ु
म ् अत
र्
पढलहँ ।
सभ रचना उ कोिटक लागल।
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
ू
३४. ी कीितर्नारायण िम - बेगसरायकु
बधाई।
३५. ी महा काश-सहरसा- कु
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
ं मनक
म ् अत
र्
ब
नीक लागल, आगा ंक सभ काज लेल
ं मनक
म ् अत
र्
नीक लागल, िवशालकाय स ंगिह उ मकोिटक।
३६. ी अि पु - िमिथलाक्षर आ देवाक्षर िवदेह पढल..ई थम तँ अिछ एकरा श ंसामे मुदा हम एकरा
ं
द ु ाहिसक कहब। िमिथला िच कलाक
केँ मुदा अिगला अकमे
आर िव त
ृ
बनाऊ।
३७. ी म ंजर सुलेमान-दरभं गा- िवदेहक जतेक
३८. ीमती
पोथी ा
श ंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उ म।
ं मनक
ोफेसर वीणा ठाकुर- कु
म ् अत
र्
उ म, पठनीय, िवचारनीय। जे
करबाक उपाय पुछैत छिथ। शुभकामना।
३९. ी छ ान
िस ंह झा- कु
ं मनक
म ् अत
र्
पढलहँ ,ु ब
नीक सभ तरहेँ ।
४०. ी ताराका
झा- स ादक मैिथली दैिनक िमिथला समाद- िवदेह तँ क टे ट
ं नक
रहल अिछ। कु
म ् अतम
र्
अ त
ु
लागल।
४१.डा रवी
कुमार चौधरी- कु
४२. ी अमरनाथ- कु
ोवाइडरक काज कऽ
ं नक
ु नीक, बहत
ु मेहनितक पिरणाम। बधाई।
म ् अतम
र्
बहत
ं नक
म ् अतम
र्
आ िवदेह दनु ू
४३. ी प ंचानन िम - िवदेहक वैिव
ो देखैत छिथ
आ िनर रता
रणीय घटना अिछ, मैिथली सािह
म ।
भािवत करैत अिछ, शुभकामना।
४४. ी केदार कानन- कु
म ् अ मनक
र्
लेल अ क ध वाद, शुभकामना आ बधाइ ीकार करी। आ
ु
निचकेताक भूिमका पढलहँ ।
शु मे तँ लागल जेना को
उप ास अहा ँ ारा स ृिजत भेल अिछ मुदा
पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एिहमे तँ सभ िवधा समािहत अिछ।
४५. ी धनाकर ठाकुर- अहा ँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे िच
अ सार रहै त तऽ नीक।
एिह शता ीक ज ितिथक
४६. ी आशीष झा- अहा ँक पु कक स ंब ंधमे एतबा िलखबा स ँ अपना कए निह रोिक सकलहँ ु जे ई िकताब
मा िकताब निह थीक, ई एकटा उ ीद छी जे मैिथली अहा ँ सन पु क सेवा स ँ िनर ंतर सम ृ होइत
िचरजीवन कए ा करत।
४७. ी श ु कुमार िस ंह- िवदेहक त रता आ ि याशीलता देिख आ ािदत भऽ रहल छी।
िनि त पेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैिथली पि काक इितहासमे िवदेहक नाम णाक्षरमे
र्
िलखल
जाएत। ओिह कु
क घटना सभ तँ अठारहे िदनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहा ँक कु
म्
तँ अशेष अिछ।
४८.डा. अजीत िम - अप क यासक कतबो शंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैिथली सािह मे अहा ँ
ू
ारा कएल गेल काज युग-युगा र धिर पजनीय
रहत।
४९. ी बीरे
मि क- अहा ँक कु
म ् अ मनक
र्
आ िवदेह:सदेह पिढ अित
ा
ठीक रहए आ उ ाह बनल रहए से कामना।
189
स ता भेल। अहा ँक
िव
ह िवदे ह Videha িবেদহ
दे
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
५०. ी कुमार राधारमण- अहा ँक िदशा-िनदेर्शमे िवदेह पिहल मैिथली ई-जनलर् देिख अित
भेल। हमर शुभकामना।
५१. ी फूलच
बा
झा
वीण-िवदेह:सदेह पढ
रही मुदा कु
स ता
म ् अ मनक
र्
देिख बढ़◌ाई देबा लेल
ु
भऽ गेलहँ ।
आब िव ास भऽ गेल जे मैिथली निह मरत। अशेष शुभकामना।
५२. ी िवभूित आन - िवदेह:सदेह देिख, ओकर िव ार देिख अित
स ता भेल।
५३. ी मा
र म ज-कु
म ् अ मनक
र्
एकर भ ता देिख अित स ता भेल, एतेक िवशाल
मैिथलीमे आइ धिर निह देख
रही। एिहना भिव मे काज करैत रही, शुभकामना।
५४. ी िव ान
झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कु
अित स ता भेल।
म ् अ मनक
र्
मैिथली सािह मे कएल गेल एिह तरहक पिहल
५५. ी अरिव
ठाकुर-कु
अिछ, शुभकामना।
५६. ी कुमार पवन-कु
छल।
५७.
ी
दीप िबहारी-कु
म ् अ मनक
र्
िव ार, छपाईक स ंग गुणव ा देिख
योग
ु
ु मािमक
म ् अ मनक
र्
पिढ रहल छी। िकछु लघकथा
पढल अिछ, बहत
र्
म ् अ मनक
र्
देखल, बधाई।
५८.डा मिणका
ठाकुर-कैिलफोिनयार्
अपन िवलक्षण िनयिमत सेवास ँ हमरा लोकिनक
सदेह भऽ गेल अिछ।
दयमे िवदेह
ु होइत अिछ जखन अहा ँक
५९. ी धीरे
मिष-र् अहा ँक सम
यास सराहनीय। दख
अपेिक्षत सहयोग निह कऽ पबैत छी।
६०. ी देवश ंकर नवीन- िवदेहक िनर रता आ िवशाल
बनबैत अिछ।
यासमे
प- िवशाल पाठक व , एकरा ऐितहािसक
६१. ी मोहन भार ाज- अहा ँक सम
सहयोग देब।
ु नीक। एखन िकछु परेशानीमे छी, मुदा शी
काय र् देखल, बहत
६२. ी फजलुर रहमान हाशमी-कु
छी।
ु
म ् अ मनक
र्
मे एतेक मेहनतक लेल अहा ँ साधवादक
अिधकारी
६३. ी ल ण झा "सागर"- मैिथलीमे चम
ू
ु दरधिर
ू
आर..दर..बह
त
जेबाक अिछ।
ािरक
पे ँ अहा ँक
आ स रही।
वेश आ ादकारी अिछ।..अहा ँकेँ एखन
६४. ी जगदीश साद म ंडल-कु
म ् अ मनक
र्
पढलहँ ु । कथा सभ आ उप ास सह बाढिन पणू र् पे ँ
पिढ गेल छी। गाम-घरक भौगोिलक िववरणक जे स ू
वणनर् सह बाढिनमे अिछ, से चिकत कएलक,
एिह स ं हक कथा-उप ास मैिथली लेखनमे िविवधता अनलक अिछ। समालोचना शास् मे अहा ँक द ृि
वैयि क निह वरन ् सामािजक आ क ाणकारी अिछ, से श ंसनीय।
190
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
६५. ी अशोक झा-अ क्ष िमिथला िवकास पिरषद- कु
शुभकामना।
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
म ् अ मनक
र्
लेल बधाई आ आगा ँ लेल
६६. ी ठाकुर साद मुमुर्- अ त
ु
यास। ध वादक स ंग ाथना
र् जे अपन मािट-पािनकेँ
ानमे रािख
ं
ं धिर यास सराहनीय। िवदेहकेँ बहत-बह
ु
ु ध वाद जे
अकक
समायोजन कएल जाए। नव अक
त
एहेन सु र-सु र सचार (आलेख) लगा रहल छिथ। सभटा हणीय- पठनीय।
६७.बिु नाथ िम - ि य गजे
जी,अहा ँक स ादन मे कािशत ‘िवदेह’आ ‘कु
िवलक्षण पि का आ िवलक्षण पोथी! की निह अिछ अहा ँक स ादनमे? एिह य
िवकास होयत,िन ंदेह।
६८. ी ब ृखेश च
लाल- गजे जी, अप क पु क कु
, दयस ँ अ ग ृिहत छी । हािदक
र् शुभकामना ।
६९. ी परमे र कापिड -
ी गजे
जी । कु
ं नक’
म ् अतम
र्
स ँ मैिथली क
ं मनक
म ् अत
र्
पिढ मोन गदगद भय गेल
ं नक
म ् अतम
र्
पिढ गदगद आ
ु
हाल भेलहँ ।
ु
७०. ी रवी नाथ ठाकुर- िवदेह पढैत रहै त छी। धीरे
मिषक
र् मैिथली गजलपर आलेख पढलहँ ।
मैिथली गजल क ऽ स ँ क ऽ चिल गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मा अपन जानल-पिहचानल लोकक
चच र् कए
छिथ। जेना मैिथलीमे मठक पर रा रहल अिछ। (
ीकरण- ीमान ्,
मिष र् जी ओिह
आलेखमे ई
िलख
छिथ जे िकनको नाम जे छुिट गेल छि
तँ से मा आलेखक लेखकक
जानकारी निह रहबाक ारे, एिहमे आन को
कारण निह देखल जाय। अहा ँस ँ एिह िवषयपर िव ृत
आलेख सादर आम ंि त अिछ।-स ादक)
ं मनक
७१. ी म ं
र झा- िवदेह पढल आ स ंगिह अहा ँक मैगनम ओपस कु
म ् अत
र्
सेहो, अित
उ म। मैिथलीक लेल कएल जा रहल अहा ँक सम
काय र् अतुलनीय अिछ।
७२.
सम
ं मनक
ी हरेकृ
झा- कु
म ् अत
र्
मैिथलीमे अपन तरहक एकमा
अिछ, एिहमे लेखकक
ु
द ृि
आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवकर् स ँ जडल
रहबाक कारणस ँ अिछ।
७३. ी सुका
सोम- कु
लागल, अहा ँ एिह
ं मनक
म ् अत
र्
मे
ु
समाजक इितहास आ वतर्मानस ँ अहा ँक जड़◌ाव
ब
नीक
मे आर आगा ँ काज करब से आशा अिछ।
ं मनक
म ् अत
र्
सन िकताब मैिथलीमे पिहले अिछ आ एतेक िवशाल
७४. ोफेसर मदन िम - कु
स ं हपर शोध कएल जा सकैत अिछ। भिव क लेल शुभकामना।
ं नक
ू
७५. ोफेसर कमला चौधरी- मैिथलीमे कु
म ् अतम
र्
सन पोथी आबए जे गुण आ
प दनु मे
ु िदनस ँ आका ंक्षा छल, ओ आब जा कऽ पणू र् भेल। पोथी एक हाथस ँ दोसर हाथ
िन न होअए, से बहत
ु रहल अिछ, एिहना आगा ँ सेहो अहा ँस ँ आशा अिछ।
घिम
७६. ी उदय च
िकयो निह कए
झा "िव द": गजे जी, अहा ँ जतेक काज कएलहँ ु अिछ से मैिथलीमे आइ धिर
ु काज आर करबाक अिछ।
छल। शुभकामना। अहा ँकेँ एखन बहत
७७. ी कृ
कुमार क प: गजे
ठाकुरजी, अहा ँस ँ भेँ ट एकटा
रणीय क्षण बिन गेल। अहा ँ जतेक
काज एिह बएसमे कऽ गेल छी तािहस ँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अिछ।
191
िव
दे
ह िवदे ह Videha িবেদহ
िवदेह थम मैिथली पािक्षक ई पि का Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine िवदेह
'िवदे ह' ६६ म अंक १५ िसतम्बर २०१० (वषर् ३ मास ३३ अंक ६६)http://www.videha.co.in/
७८. ी मिणका
दास: अहा ँक मैिथलीक कायक
र्
ु
अ मनक
र्
स ण
ू र् पे ँ पिढ गेलहँ ।
ाह
थम मैिथली पािक्षक 'िवदे ह'
मानुषीिमह संस्कृ ताम्
श ंसा लेल श निह भेटैत अिछ। अहा ँक कु
ब नीक लागल।
म्
िवदेह
मैिथली सािह
आ ोलन
(c )२००४-१०. सवािधकार
र्
लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम निह अिछ ततय स ंपादकाधीन। स ादक:
गजे
ठाकुर। सह-स ादक: उमेश म ंडल। सहायक स ादक: िशव कुमार झा आ रि
रेखा िस ा।
भाषा-स ादन: नागे
कुमार झा आ प ीकार िव ान
झा। कला-स ादन:
ोित सुनीत चौधरी।
रचनाकार अपन मौिलक आ अ कािशत रचना (जकर मौिलकताक स ंपणू र् उ रदािय लेखक गणक म
छि ) ggaj endr [email protected] deha.com केँ मेल अटैचमे क
पमेँ .doc , .docx , .r t f वा .t xt
फ◌ॉमे र्टमे पठा सकैत छिथ। रचनाक स ंग रचनाकार अपन स ंिक्ष पिरचय आ अपन
ैन कएल गेल
ं
फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अतमे
टाइप रहय, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ
पिहल काशनक हेतु िवदेह (पािक्षक) ई पि काकेँ देल जा रहल अिछ। मेल ा होयबाक बाद
ं
ू
यथास ंभव शी ( सात िदनक भीतर) एकर काशनक अकक
सचना
देल जायत। ’िवदेह' थम मैिथली
पािक्षक ई पि का अिछ आ एिहमे मैिथली, स ं ृत आ अ ं जीमे िमिथला आ मैिथलीस ँ स ंब ंिधत रचना
कािशत कएल जाइत अिछ। एिह ई पि काकेँ
ीमित ल ी ठाकुर ारा मासक ०१ आ १५ ितिथकेँ ई
कािशत कएल जाइत अिछ।
(c ) 2004-10 सवािधकार
र्
सुरिक्षत। िवदेहमे कािशत सभटा रचना आ आकाइवक
र्
सवािधकार
र्
रचनाकार आ स ं हक ाकर् लगमे छि । रचनाक अ वाद आ पुनः काशन िकं वा आकाइवक
र्
उपयोगक
अिधकार िकनबाक हेतु ggaj endr [email protected] deha.co.i n पर स ंपकर् क । एिह साइटकेँ
ीित झा
ू
ठाकुर, मधिलका
चौधरी आ रि
िसि र ु
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ि या
ारा िडजाइन कएल गेल।